घर का वास्तु · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
वास्तु के अनुसार बगीचे और पौधों की जगह
ऊँचे पेड़ दक्षिण-पश्चिम में, लॉन और तुलसी उत्तर-पूर्व में, फूलों के गमले पूर्व की बालकनी में। बंगले, टेरेस और मुंबई की बालकनी के लिए बगीचे का आसान वास्तु गाइड।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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वास्तु में बगीचे की जगह क्यों मायने रखती है?
वास्तु में बगीचे की जगह इसलिए मायने रखती है कि पौधों में जीवन, बढ़त और ताज़ा प्राण (जीवन ऊर्जा) होता है, और उनका आकार व वज़न तय करता है कि घर में रोशनी और हवा कैसे पहुँचेगी। सोच-समझकर बनाया गया बगीचा पंचतत्व का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, उसमें रुकावट नहीं बनता।
मूल बात सीधी है: उत्तर और पूर्व को खुला और हल्का रखें ताकि सुबह की धूप और हवा अंदर आ सके, और ऊँची, भारी हरियाली दक्षिण और पश्चिम की तरफ़ आड़ का काम करे।
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ऊँचे पेड़ कहाँ लगाने चाहिए?
ऊँचे पेड़ों के लिए प्लॉट का दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम हिस्सा आदर्श है। ये ज़ोन पृथ्वी तत्व और स्थिरता से जुड़े हैं। यहाँ लगे पेड़ दोपहर की तेज़ धूप से घर को बचाते हैं, और पूर्व से आने वाली सुबह की नरम रोशनी भी नहीं रोकते।
बड़े पेड़ इमारत से कुछ दूरी पर रखें, ताकि जड़ें नींव को नुकसान न पहुँचाएँ और पेड़ की घनी छतरी से कमरों में अँधेरा न हो। परंपरा के अनुसार मुख्य गेट या द्वार के ठीक सामने पेड़ नहीं लगाया जाता, क्योंकि वह प्रवेश में रुकावट बनता है।
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दक्षिण-पश्चिम
आम, नीम या दूसरे बड़े छायादार पेड़, दीवारों से काफ़ी दूर लगाएँ।
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दक्षिण और पश्चिम
मध्यम आकार के पेड़, ऊँची बाड़ और बाउंड्री वॉल पर चढ़ने वाली बेलें।
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उत्तर-पूर्व में न लगाएँ
ऐसे बड़े पेड़ जो उत्तर-पूर्व के कोने पर गहरी छाया डालें।
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बगीचे के उत्तर और पूर्व में क्या रखें?
बगीचे के उत्तर और पूर्व में लॉन, फूलों की क्यारियाँ, छोटी झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और पानी वाली चीज़ें अच्छी लगती हैं। ये ज़ोन खुले रहें तो ताज़गी बनी रहती है, मन साफ़ रहता है और तरक़्क़ी में मदद मिलती है।
उत्तर-पूर्व (ईशान्य) जल तत्व से जुड़ा है, इसलिए यहाँ छोटा फ़व्वारा, पक्षियों का पानी का बर्तन या कमल का गमला अच्छा रहता है; बस पानी साफ़ रहे और बहता रहे।
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लॉन
उत्तर या पूर्व में खुला लॉन हो तो जगह खुली-खुली और रोशन लगती है।
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फूलों के पौधे
चमेली, गेंदा, गुड़हल और गुलाब, पूर्व और उत्तर की तरफ़ गमलों या क्यारियों में।
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जड़ी-बूटियाँ
पुदीना, कढ़ी पत्ता और लेमनग्रास, किचन गार्डन के पूर्वी हिस्से के पास छोटे गमलों में।
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पानी वाली सजावट
फ़व्वारा या छोटा तालाब उत्तर-पूर्व या उत्तर में रखें, दक्षिण-पश्चिम में कभी नहीं।
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तुलसी का पौधा कहाँ रखना चाहिए?
तुलसी का पौधा घर या बगीचे के उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व में रखना आदर्श माना जाता है। कई भारतीय घरों में तुलसी की पूजा होती है, और आँगन या बालकनी में ऊँचा तुलसी वृंदावन बहुत सुंदर लगता है।
गमला साफ़ रखें, नियमित पानी दें और उसे सुबह की धूप मिलने दें। कई परिवार शाम को तुलसी के पास दीया जलाते हैं, जो दिन की एक शांत रस्म बन जाती है।
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घर के पास आमतौर पर कौन से पौधे नहीं लगाए जाते?
काँटेदार, सूखे और मुरझाते पौधे आमतौर पर मुख्य प्रवेश और बैठने-रहने की जगहों के पास नहीं रखे जाते। वास्तु में तीखे काँटों को टकराव से और मरे हुए पौधों को ठहरी हुई ऊर्जा से जोड़ा जाता है।
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दरवाज़े पर काँटेदार पौधे
कैक्टस और काँटेदार झाड़ियाँ प्रवेश से दूर रखना बेहतर है; गुलाब को आमतौर पर अपवाद माना जाता है।
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सूखे या बीमार पौधे
उन्हें जल्दी हटाएँ और उनकी जगह स्वस्थ पौधे लगाएँ।
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दूधिया रस निकलने वाले पौधे
परंपरा के अनुसार इन्हें घर के बहुत पास नहीं लगाया जाता।
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इमारत पर चढ़ती बेलें
बेलों को घर पर चढ़ाने के बजाय बाउंड्री वॉल या जाली पर चढ़ाना बेहतर है।
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बोन्साई
कुछ परंपराओं में घर के अंदर बौने पौधे नहीं रखे जाते; अगर आपको बोन्साई पसंद हैं, तो उन्हें स्वस्थ रखें और बाहर रखें।
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मुंबई के फ़्लैट की बालकनी में गार्डन वास्तु कैसे अपनाएँ?
मुंबई के फ़्लैट में भी गार्डन वास्तु अपनाया जा सकता है। बस हर बालकनी या खिड़की के छज्जे को एक छोटा बगीचा मान लीजिए, जिसकी अपनी दिशा है। संकरा छज्जा भी घर में हरियाली ला सकता है।
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उत्तर या पूर्व की बालकनी
गमले छोटे और हल्के रखें: तुलसी, मनी प्लांट, जड़ी-बूटियाँ और फूलों वाले पौधे।
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दक्षिण या पश्चिम की बालकनी
यहाँ बड़े, भारी गमले और एरेका पाम जैसे ऊँचे पौधे रखे जा सकते हैं।
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घर के अंदर के पौधे
मनी प्लांट, स्नेक प्लांट और पीस लिली ख़ूब पसंद किए जाते हैं; उन्हें स्वस्थ रखें और पत्तों पर धूल न जमने दें।
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पानी की निकासी
ट्रे का इस्तेमाल करें ताकि बालकनी के फ़र्श पर पानी जमा न हो और दीवारों में न रिसे।
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सोसाइटी की टेरेस
साझा टेरेस गार्डन में भी यही नियम चल सकता है: उत्तर-पूर्व हल्का और दक्षिण-पश्चिम भारी।
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बगीचे की ऊर्जा को ताज़ा कैसे रखें?
बगीचे की ऊर्जा नियमित देखभाल से ताज़ा रहती है: छँटाई, पानी देना, निराई और गिरे हुए पत्तों की सफ़ाई। जिस बगीचे की देखभाल न हो, वह कितनी भी सही जगह पर बना हो, भारी-भारी लगता है।
बागवानी के औज़ार सलीके से दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में रखें, रुका हुआ पानी तुरंत निकाल दें, और रास्तों पर हल्की रोशनी लगाएँ ताकि सूरज ढलने के बाद भी बगीचा अपना-सा लगे।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें
वास्तु विशेषज्ञ से तब सलाह लें जब आप नए बंगले का बगीचा बना रहे हों, प्लॉट की लैंडस्केपिंग कर रहे हों, या सोच रहे हों कि कोई बड़ा पुराना पेड़ आपके घर पर असर डालता है या नहीं। दिशा, दूरी और आकार, तीनों को साथ में नापना ज़रूरी है।
VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर आवासीय वास्तु परामर्श में ही बगीचों, टेरेस और बालकनी पर भी सलाह देती हैं। वे अपने अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर आकर परामर्श देती हैं, या साइट प्लान और तस्वीरों के ज़रिए दूर से भी।
सवाल
आम सवाल
वास्तु के अनुसार बगीचे के लिए कौन सी दिशा अच्छी है?
लॉन और छोटे पौधों वाले बगीचे के लिए उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व आमतौर पर अच्छी दिशाएँ हैं। ऊँचे पेड़ दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में ठीक रहते हैं।
क्या घर के सामने पेड़ लगाया जा सकता है?
मुख्य द्वार या गेट के ठीक सामने बड़ा पेड़ परंपरा के अनुसार नहीं लगाया जाता। उसकी जगह प्रवेश के दोनों तरफ़ छोटे पौधे और फूलों की झाड़ियाँ लगाएँ, इनसे स्वागत भरा माहौल बनता है।
क्या वास्तु के अनुसार कैक्टस बुरा है?
कैक्टस अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन वास्तु में काँटेदार पौधों को प्रवेश और मुख्य रहने की जगहों से दूर रखने की सलाह दी जाती है। उनके लिए दक्षिण या पश्चिम की बालकनी या बाहर का कोई कोना ज़्यादा ठीक रहता है।
मनी प्लांट कहाँ रखना चाहिए?
मनी प्लांट आमतौर पर घर के दक्षिण-पूर्व या उत्तर में रखा जाता है, और उसे स्वस्थ हालत में रखना चाहिए। उसकी बेल को ऊपर की तरफ़ चढ़ाएँ, फ़र्श पर लटकने न दें।
क्या बगीचे में पानी का फ़व्वारा अच्छा है?
हाँ, बगीचे के उत्तर-पूर्व या उत्तर में पानी का फ़व्वारा अच्छा माना जाता है। पानी साफ़ और बहता हुआ रखें, और उसे दक्षिण-पश्चिम में न लगाएँ।
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