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ऑफ़िस, दुकान और बिज़नेस के लिए वास्तु

व्यापारकमर्शियल वास्तु

ऑफ़िस, दुकान और बिज़नेस के लिए वास्तु

आपका ऑफ़िस, दुकान, रेस्टोरेंट, क्लिनिक या क्लासरूम रोज़ आपके लिए मेहनत करता है। वास्तु में उसे इस तरह जमाया जाता है कि जगह की बनावट वहाँ काम करने वालों, पैसे और आते-जाते ग्राहकों, तीनों का साथ दे।

1किनके लिए
ऑफ़िस, दुकान, रेस्टोरेंट, होटल, क्लिनिक, कोचिंग क्लास और स्कूल के मालिकों के लिए, अपनी हो या किराये की जगह।
2हम क्या देखते हैं
प्रवेश द्वार, मालिक की सीट, कैश, रिसेप्शन, पैंट्री या रसोई, स्टॉक, स्टाफ़ की डेस्क और टॉयलेट।
3आपको क्या मिलता है
लिखित रिपोर्ट, जिसमें बताया जाता है कि कौन सा विभाग किस ज़ोन में आता है, और उपाय इस क्रम में दिए जाते हैं कि पहले क्या करना ज़रूरी है।
4यह कैसे होता है
मुफ़्त पहली कॉल, फ़्लोर प्लान की जाँच, कम्पास से साइट विज़िट, चर्चा, लिखित रिपोर्ट, और फिर फ़ॉलो-अप।

01

बिज़नेस वास्तु विज़िट में क्या-क्या देखा जाता है?

बिज़नेस की विज़िट भी उन्हीं चरणों में होती है जिनमें कोई भी परामर्श होता है, देखिए परामर्श कैसे होता है। फ़र्क इतना है कि ध्यान किस बात पर रहता है: हम सिर्फ़ कमरे नहीं देखते, यह भी देखते हैं कि आपकी जगह में पैसा, ग्राहक, स्टाफ़ और माल कैसे आता-जाता है।

विज़िट से पहले ये चीज़ें भेज दें तो काम आसान हो जाता है: फ़्लोर प्लान, कौन कहाँ बैठता है इसका एक नोट, और यह कि आप क्या सुधारना चाहते हैं, जैसे बिक्री, स्टाफ़ का बार-बार नौकरी छोड़ना, कैश फ़्लो या ग्राहकों का भरोसा।

बिज़नेस वास्तु विज़िट में क्या-क्या देखा जाता है?
  • 01

    कम्पास से नाप

    दिशाएँ मौके पर नापी जाती हैं, लिफ़्ट लॉबी या इमारत के नाम से अंदाज़ा नहीं लगाया जाता।

  • 02

    बैठने का नक्शा

    मालिक, पार्टनर, अकाउंट्स टीम और सेल्स स्टाफ़ कहाँ बैठते हैं, और हर किसी का मुँह किस तरफ़ है।

  • 03

    पैसे वाली जगहें

    कैश काउंटर, लॉकर, बिलिंग डेस्क, और वह जगह जहाँ चेक और ज़रूरी फ़ाइलें रखी जाती हैं।

  • 04

    सर्विस वाली जगहें

    पैंट्री, रसोई, सर्वर रूम, जनरेटर, स्टोर और टॉयलेट। यही वे जगहें हैं जो सबसे ज़्यादा गलत ज़ोन में पड़ती हैं।

  • 05

    दरवाज़े के बाहर

    आपके प्रवेश द्वार के ठीक सामने खंभे, पिलर, फ़्लाईओवर की छाया या बंद गलियारा।

02

ऑफ़िस वास्तु: सबसे ज़्यादा क्या मायने रखता है?

ऑफ़िस में सबसे ज़्यादा फ़र्क गिनी-चुनी बातों से पड़ता है। पहले इन्हें ठीक कीजिए, सजावट बाद की बात है।

  • 01

    मालिक की सीट

    मालिक या डायरेक्टर दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) ज़ोन में बैठे, मुँह पूर्व या उत्तर की ओर हो, कुर्सी के पीछे ठोस दीवार हो और ऊपर बीम न हो। यह ज़ोन स्थिरता और पकड़ का प्रतीक है।

  • 02

    कैश और अकाउंट्स

    उत्तर दिशा को पैसे के आने-जाने से जोड़ा जाता है। उसे सामान और ख़राब उपकरणों से खाली रखें, और लॉकर व कैश दराज़ उत्तर या पूर्व की ओर खुलें।

  • 03

    रिसेप्शन

    उत्तर-पूर्व या पूर्व में साफ़ और रोशन रिसेप्शन हो, तो आने वालों को पहली नज़र में ही सुकून मिलता है।

  • 04

    स्टाफ़ की डेस्क

    टीम के लोग पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके काम करें। ऑफ़िस का बीच का हिस्सा वर्कस्टेशन या अलमारियों से भरने की जगह खुला रखें।

  • 05

    कॉन्फ़्रेंस रूम

    मीटिंग, बातचीत और क्लाइंट चर्चा के लिए उत्तर-पश्चिम या पश्चिम ठीक रहता है।

  • 06

    पैंट्री और टॉयलेट

    माइक्रोवेव या कॉफ़ी मशीन वाली पैंट्री दक्षिण-पूर्व में ठीक रहती है, जो अग्नि का ज़ोन है। टॉयलेट और भारी स्टोरेज को उत्तर-पूर्व से बाहर रखें।

03

दुकान और शोरूम का वास्तु: सबसे ज़्यादा क्या मायने रखता है?

दुकान की कमाई ग्राहकों के आने-जाने से होती है, इसलिए प्रवेश द्वार और ग्राहक के चलने का रास्ता उतने ही मायने रखते हैं जितना कैश काउंटर।

  • 01

    प्रवेश द्वार और नेम बोर्ड

    प्रवेश द्वार रोशन रखें, वहाँ डिब्बों के ढेर, डस्टबिन और टूटे साइन न हों। नेम बोर्ड साफ़ हो, उस पर रोशनी हो और सड़क से आसानी से पढ़ा जा सके।

  • 02

    कैश काउंटर

    मालिक या कैशियर दक्षिण-पश्चिम कोने में पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठे, और कैश दराज़ उत्तर या पूर्व की ओर खुले।

  • 03

    बीच का हिस्सा खुला

    दुकान का बीच का हिस्सा खाली छोड़ें। रास्ता खुला हो तो ग्राहक आराम से घूम पाते हैं और आपका ज़्यादा माल देख पाते हैं।

  • 04

    स्टॉक और रैक

    बिकने के लिए तैयार माल उत्तर-पश्चिम में रखें, जो हलचल का ज़ोन है। भारी रैक दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम की दीवारों के साथ लग सकते हैं।

  • 05

    खिड़कियाँ और डिस्प्ले

    जहाँ हो सके उत्तर और पूर्व को खुला या काँच वाला रखें, और अपना सबसे दमदार माल ऐसी जगह रखें जहाँ वह दरवाज़े से दिखे।

  • 06

    सीढ़ियाँ और मेज़ानाइन

    अगर दुकान में अंदर की सीढ़ियाँ हैं, तो उनके लिए दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण या दक्षिण-पूर्व ठीक रहता है।

04

होटल और रेस्टोरेंट का वास्तु: सबसे ज़्यादा क्या मायने रखता है?

होटल और रेस्टोरेंट का काम अच्छी साख और बार-बार आने वाले मेहमानों पर चलता है। यहाँ वास्तु का ध्यान इन बातों पर रहता है: सामने का हिस्सा ऐसा हो जो मेहमान का स्वागत करे, अग्नि का ज़ोन सही जगह पर हो, और कमरे ऐसे हों कि मेहमान दोबारा आना चाहें।

होटल और रेस्टोरेंट का वास्तु: सबसे ज़्यादा क्या मायने रखता है?
  • 01

    रसोई और गर्मी

    रसोई, तंदूर, जनरेटर, इन्वर्टर और गर्मी पैदा करने वाले बाकी उपकरण दक्षिण-पूर्व में होने चाहिए। अगर यह संभव न हो, तो रसोई के लिए उत्तर-पश्चिम दूसरा विकल्प है।

  • 02

    रिसेप्शन और लॉबी

    रिसेप्शन उत्तर-पूर्व में रखें और उसे साफ़, रोशन और सामान से खाली रखें।

  • 03

    कैश रजिस्टर

    बिलिंग काउंटर के लिए पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम ठीक रहता है, और दराज़ उत्तर या पूर्व की ओर खुले।

  • 04

    गेस्ट रूम

    जहाँ भी बनावट में गुंजाइश हो, कमरों के दरवाज़े पूर्व या उत्तर की ओर खुलने वाले रखें।

  • 05

    टॉयलेट

    उन्हें दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम के बीच, या पूर्व और दक्षिण-पूर्व के बीच रखें, उत्तर-पूर्व में कभी नहीं।

  • 06

    रोशनी और रंग

    सुखद रंग और अच्छी रोशनी माहौल को ज़िंदादिल रखते हैं। बहुत गहरे रंग और मद्धम रोशनी वाला डाइनिंग रूम जगह की रौनक बिगाड़ देता है।

  • 07

    जगह चुनना

    बड़े नालों के ऊपर या श्मशान-कब्रिस्तान के पास वाले प्लॉट से बचें।

05

क्लिनिक और अस्पताल का वास्तु: सबसे ज़्यादा क्या मायने रखता है?

वास्तु चिकित्सा का साथ देता है, निदान, इलाज या अस्पताल के सुरक्षा नियमों की जगह कभी नहीं लेता। क्लिनिक में इसका मक़सद ऐसी शांत और व्यवस्थित जगह बनाना है जहाँ मरीज़ों को तसल्ली मिले और स्टाफ़ आराम से काम कर सके।

  • 01

    प्रवेश द्वार

    प्रवेश द्वार पूर्व या उत्तर की ओर हो, चौड़ा हो, वहाँ अच्छी रोशनी हो और वह आसानी से मिल जाए, ताकि बुज़ुर्ग मरीज़ों और स्ट्रेचर को भी दिक्कत न हो।

  • 02

    रिसेप्शन और वेटिंग

    रिसेप्शन प्रवेश द्वार के पास उत्तर-पूर्व या पूर्व में हो, और स्टाफ़ का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर हो। वेटिंग एरिया हवादार हो और उसमें आरामदायक बैठने की जगह हो।

  • 03

    परामर्श के कमरे

    इन्हें जगह के पूर्व या उत्तर हिस्से में रखें। डॉक्टर की कुर्सी कमरे के दक्षिण-पश्चिम कोने में हो और मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे।

  • 04

    ऑपरेशन थिएटर

    OT के लिए पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम का हिस्सा ठीक रहता है, जिसे अच्छी रोशनी वाला, हवादार और कीटाणुरहित रखा जाए।

  • 05

    वार्ड और बिस्तर

    वार्ड उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में हों, और जहाँ संभव हो बिस्तर का सिरहाना दक्षिण या पश्चिम की ओर रहे।

  • 06

    स्टाफ़ की जगहें और टॉयलेट

    नर्सों के स्टेशन और स्टाफ़ रूम उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में ठीक रहते हैं। टॉयलेट उत्तर-पश्चिम या पश्चिम में ठीक रहते हैं।

  • 07

    रंग और प्रकृति

    हल्के पेस्टल रंग की दीवारें, दिन की रोशनी, इनडोर पौधे और कुछ क्रिस्टल मन को सुकून देने वाला माहौल बनाते हैं। गहरे और तीखे रंगों से बचें।

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स्कूल, कॉलेज और कोचिंग क्लास के लिए वास्तु

सीखने की जगह ऐसी हो जो विद्यार्थियों को शांत होकर ध्यान लगाने में मदद करे। आम तौर पर सबसे ज़्यादा फ़ायदा दो बातों से होता है: विद्यार्थी किस दिशा में मुँह करके बैठते हैं, और पढ़ाई की जगह शांत और रोशन है या नहीं।

स्कूल, कॉलेज और कोचिंग क्लास के लिए वास्तु
  • 01

    साइट और प्रवेश द्वार

    बिना कटाव या बढ़ाव वाला चौकोर या आयताकार प्लॉट बेहतर माना जाता है। मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व या उत्तर-पूर्व में ठीक रहता है।

  • 02

    क्लासरूम

    क्लासरूम उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तर में रखें। विद्यार्थी पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठें, और आगे रखी टीचर की डेस्क का मुँह भी इन्हीं दिशाओं में हो। कमरे के अंदर खंभों और नुकीले कोनों से बचें।

  • 03

    लाइब्रेरी

    लाइब्रेरी उत्तर-पूर्व या उत्तर में हो, व्यवस्थित और रोशन रहे, और उसमें बैठने की आरामदायक जगह हो।

  • 04

    लैब

    साइंस और कंप्यूटर लैब उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में ठीक रहती हैं, जहाँ अच्छी हवा और सुरक्षा के उपकरण हों।

  • 05

    प्रिंसिपल और एडमिन

    प्रिंसिपल का केबिन और प्रशासन के ऑफ़िस दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण में ठीक रहते हैं।

  • 06

    खेल का मैदान और कैंटीन

    खेल के मैदान पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व की खुली जगह में हों, और कैंटीन उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में।

  • 07

    रंग

    क्लासरूम की दीवारों पर हल्के और नरम रंग रखें। गहरे या तीखे रंगों से बचें।

07

किराये का ऑफ़िस, दुकान या को-वर्किंग डेस्क? तब भी वास्तु अपना सकते हैं

मुंबई में ज़्यादातर बिज़नेस किराये की जगह में चलते हैं, और कई एक ही फ़्लोर बाँटते हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि VastuKimaya के उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं। कुछ तोड़ा या दोबारा बनाया नहीं जाता, इसलिए आपके लीज़ पर भी कोई आँच नहीं आती।

कमरा चुनना आपके हाथ में न हो, तब भी उसके अंदर क्या कैसे रहेगा, यह आप तय कर सकते हैं।

  • बैठने की दिशा बदलें। अक्सर सिर्फ़ डेस्क घुमा देना ही सबसे काम का कदम साबित होता है।
  • कैश बॉक्स, लॉकर या बिलिंग मशीन को अपनी जगह के अंदर ही सही ज़ोन में ले जाएँ।
  • जिस ज़ोन को बदला नहीं जा सकता, उसे संतुलित करने के लिए रंग, रोशनी, शीशे, मेटल स्ट्रिप, पौधे, क्रिस्टल या पिरामिड इस्तेमाल करें।
  • को-वर्किंग स्पेस में ऐसी डेस्क या केबिन चुनें जहाँ आपके पीछे दीवार हो और मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे।
  • अपनी जगह के उत्तर और उत्तर-पूर्व को फ़ाइलों, कार्टनों और पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान से खाली कर दें।
  • ज़्यादातर उपाय उठाकर ले जाए जा सकते हैं, इसलिए वे आपके साथ अगली जगह पर भी चले जाते हैं।

08

यह कब करवाना चाहिए: नया ऑफ़िस, शिफ़्टिंग या रेनोवेशन?

  • 01

    साइन करने से पहले

    वास्तु करवाना सबसे सस्ता तब पड़ता है जब जगह अभी ली न हो। दो-तीन विकल्पों की तुलना उनके फ़्लोर प्लान से हो सकती है, देखिए प्रॉपर्टी का चुनाव।

  • 02

    इंटीरियर शुरू होने से पहले

    डिज़ाइनर का लेआउट जँचवा लें। कागज़ पर केबिन या पैंट्री खिसकाने में कुछ खर्च नहीं होता, पर कारपेंटरी के बाद खिसकाने में होता है।

  • 03

    शिफ़्ट होते समय

    शिफ़्ट होने के दिन से पहले बैठने की योजना बना लें, ताकि स्टाफ़ पहले दिन से सही जगह बैठे और किसी को दोबारा जगह न बदलनी पड़े।

  • 04

    रेनोवेशन या विस्तार

    नया फ़्लोर, काउंटर या ब्रांच जुड़ने से ज़ोन बदल जाते हैं। एक छोटी-सी जाँच करवा लें, तो नया लेआउट भी आपकी पिछली रिपोर्ट के मुताबिक रहता है।

सवाल

आम सवाल

वास्तु के अनुसार ऑफ़िस का प्रवेश द्वार किस दिशा में होना चाहिए?

उत्तर और पूर्व की ओर के प्रवेश द्वार परंपरा से पसंद किए जाते हैं, पर ऑफ़िस का दक्षिण या पश्चिम की ओर होना अपने आप में कोई समस्या नहीं है। ज़्यादा मायने यह रखता है कि उस दीवार पर दरवाज़ा ठीक किस जगह है और अंदर के ज़ोन कैसे इस्तेमाल हो रहे हैं। साइट पर कम्पास रीडिंग से पता चलता है कि प्रवेश द्वार को संतुलित करना है या नहीं, जो आम तौर पर रंग, मेटल स्ट्रिप या सामान की जगह बदलकर किया जाता है।

क्या वास्तु से मेरी दुकान की बिक्री बढ़ सकती है?

वास्तु बिक्री के किसी आँकड़े का वादा नहीं कर सकता। वह उन चीज़ों को हटाता है जो चुपचाप दुकान को नुकसान पहुँचाती रहती हैं: रुकावट वाला प्रवेश द्वार, गलत दिशा में मुँह करके बैठा कैशियर, गलत ज़ोन में फँसा स्टॉक, सामान से भरा बीच का हिस्सा। कई मालिकों को लगता है कि इसके बाद वहाँ काम करना आसान हो गया है और ग्राहक भी आराम से घूम पाते हैं, जिससे बिज़नेस को सहारा मिलता है।

वास्तु के अनुसार ऑफ़िस के लिए कौन से रंग ठीक रहते हैं?

सफ़ेद, क्रीम, हल्का पीला और हल्का हरा जैसे हल्के, शांत रंग ज़्यादातर ऑफ़िसों के लिए ठीक रहते हैं, क्योंकि ये जगह को रोशन रखते हैं और आँखों को सुकून देते हैं। कुछ खास ज़ोन में थोड़ी जगह पर गहरे रंग लगाए जा सकते हैं, जैसे दक्षिण-पूर्व में गर्म रंग। काम की जगहों में बहुत गहरी दीवारों से आम तौर पर बचा जाता है। सही रंग आपकी बनावट पर निर्भर करते हैं और आपकी रिपोर्ट में लिखे होते हैं।

क्या साइट विज़िट के बिना सिर्फ़ फ़्लोर प्लान से कमर्शियल वास्तु हो सकता है?

हाँ। मुंबई के बाहर के बिज़नेस, या जिनके पास समय कम है, ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं। इसके लिए ऐसा फ़्लोर प्लान भेजना होता है जिस पर उत्तर दिशा लिखी हो, और साथ में हर हिस्से की फ़ोटो। साइट विज़िट में कम्पास की नाप भी मिल जाती है, और डॉ. किमया वे चीज़ें देख पाती हैं जो प्लान में नहीं दिखतीं, जैसे छाया, रुकावटें और लोग जगह को असल में कैसे इस्तेमाल करते हैं।

क्या एक वास्तु परामर्श में मेरी सारी ब्रांच आ जाती हैं?

नहीं। हर ब्रांच अलग प्लॉट पर होती है, अलग दिशा में होती है और उसकी अपनी बनावट होती है, इसलिए हर एक की अलग जाँच चाहिए। सिद्धांत वही रहते हैं, इसलिए बाद की ब्रांचों का आकलन जल्दी हो जाता है। अगर आप नई ब्रांच खोल रहे हैं, तो लीज़ साइन करने से पहले उसका फ़्लोर प्लान भेज देना अच्छा रहता है।

क्या क्लिनिक का वास्तु चिकित्सा इलाज की जगह ले सकता है?

नहीं। क्लिनिक या अस्पताल का वास्तु माहौल के बारे में है, यानी बनावट, रोशनी, रंग और आने-जाने का रास्ता, और उसका मक़सद जगह को मरीज़ों और स्टाफ़ के लिए शांत बनाना है। यह सही इलाज, योग्य डॉक्टरों और सुरक्षा नियमों के साथ चलता है, उनकी जगह कभी नहीं लेता। जो भी बीमार हो, उसे हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।

ऑफ़िस वास्तु परामर्श की फ़ीस कितनी होती है?

फ़ीस जगह के आकार, बिज़नेस के प्रकार और इस पर निर्भर करती है कि साइट विज़िट चाहिए या नहीं। पहली परामर्श कॉल मुफ़्त है, और जब डॉ. किमया आपकी जगह समझ लेती हैं, तब आपको साफ़-साफ़ कोटेशन दिया जाता है। शुरू करने के लिए +91 70391 07512 पर कॉल करें या "मुफ़्त परामर्श बुक करें" का इस्तेमाल करें।

क्या अंधेरी ईस्ट में कोई कमर्शियल वास्तु सलाहकार हैं?

हाँ। VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर A-1304, नमन प्रीमियर, मरोल मिलिट्री रोड, अंधेरी ईस्ट, मुंबई से काम करती हैं और ऑफ़िस, दुकान, रेस्टोरेंट, होटल, क्लिनिक और शिक्षा संस्थानों को सलाह देती हैं। वे मुंबई भर में जगहों पर जाती हैं और फ़्लोर प्लान के आधार पर ऑनलाइन परामर्श भी देती हैं, इसलिए शहर के बाहर के बिज़नेस भी सलाह ले सकते हैं।

डॉ. किमया से पूछें

अपना नंबर दीजिए, डॉ. किमया की टीम आपको वापस कॉल करेगी। पहली कॉल मुफ़्त है।

कॉल अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी या गुजराती में हो सकती है।

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