
दिशाहर कमरे के लिए
कमरे-दर-कमरे वास्तु: मुख्य द्वार, रसोई, बेडरूम और बहुत कुछ
आपके घर के हर कमरे के लिए साफ़ और व्यावहारिक वास्तु सलाह: कौन सी दिशा उसके लिए ठीक है, क्या करें, किससे बचें, और जब कुछ भी खिसकाना मुमकिन न हो तब क्या आज़माएँ।
- 1किनके लिए
- वे परिवार जो कोई एक कमरा सही ढंग से जमाना चाहते हैं, या जिन्हें किसी एक कमरे को लेकर चिंता है।
- 2हम क्या देखते हैं
- हर कमरा किस दिशा में है, और फ़र्नीचर, बिस्तर, चूल्हा और दरवाज़े कहाँ रखे हैं।
- 3आपको क्या मिलता है
- कमरे के हिसाब से क्या करें और क्या न करें, और जिन कमरों की जगह बदली नहीं जा सकती उनके लिए व्यावहारिक उपाय।
- 4यह कैसे होता है
- अपना फ़्लोर प्लान भेजें या घर पर विज़िट बुक करें। जिन कमरों की आपको चिंता है, डॉ. किमया उन्हें देखती हैं।
01
अपने घर की दिशाएँ कैसे पता करें?
नीचे की हर सलाह इस पर निर्भर है कि आपके घर का कौन सा हिस्सा किस दिशा में है। यह आप दस मिनट में खुद जाँच सकते हैं। सही नाप के लिए डॉ. किमया घर की विज़िट में कम्पास से दिशाएँ नापती हैं।

01
बीच में खड़े हों
अपने फ़्लैट या घर का बीच का हिस्सा ढूँढिए, फ़्रिज, लोहे की अलमारी और बिजली की वायरिंग से दूर।
02
फ़ोन का कम्पास इस्तेमाल करें
फ़ोन को हथेली पर सपाट (ज़मीन के समानांतर) रखिए और देखिए कि उत्तर किधर है। दो-तीन बार देख लीजिए।
03
8 ज़ोन बनाएँ
फ़्लोर प्लान पर चारों दिशाएँ और चारों कोने लिखिए, जैसे पिज़्ज़ा के टुकड़े हों।
04
हर कमरा नोट करें
हर कमरे, दरवाज़े, चूल्हे, बिस्तर और टॉयलेट का ज़ोन लिख लीजिए।
02
मुख्य द्वार का वास्तु: प्रवेश द्वार किस दिशा में होना चाहिए?
वास्तु में मुख्य द्वार को घर का मुँह कहा जाता है, क्योंकि लोग, रोशनी और ऊर्जा इसी से अंदर आते हैं। उत्तर, उत्तर-पूर्व और पूर्व के प्रवेश द्वार शुभ माने जाते हैं। बाकी दिशाएँ अपने आप बुरी नहीं होतीं। हर दीवार छोटे-छोटे हिस्सों (पदों) में बँटी होती है, और सबसे ज़्यादा मायने यह रखता है कि दरवाज़ा किस हिस्से में है।
01
अंदर की ओर खुले
दरवाज़ा घर के अंदर की तरफ़ खुलना चाहिए। यह अच्छी चीज़ों के स्वागत का प्रतीक है।
02
रोशन और साफ़
प्रवेश द्वार पर खासकर रात में अच्छी रोशनी रखें, साफ़ दिखने वाली नेमप्लेट लगाएँ, और आसपास डस्टबिन या टूटा सामान न रखें।
03
रास्ता खुला रहे
ऐसा दरवाज़ा न हो जो सीधे किसी दूसरे दरवाज़े, सीढ़ी या टॉयलेट के दरवाज़े के सामने खुलता हो।
04
जूते एक तरफ़
शू रैक अंदर रखें या एक तरफ़, ठीक दरवाज़े पर नहीं।
05
मज़बूत और बिना आवाज़ वाला
लकड़ी का मज़बूत दरवाज़ा बेहतर माना जाता है। चरचराने वाले कब्ज़ों में तेल डालें, और दरवाज़े के ठीक ऊपर बीम न हो।
06
अगर बदल नहीं सकते
अगर आपके दरवाज़े के ठीक सामने दीवार है या दरवाज़ा कम शुभ दिशा में है, तो सही जगह लगा शीशा, पौधा, तोरण या पिरामिड प्रवेश द्वार का संतुलन सुधारने में मदद कर सकता है।
03
मंदिर या पूजा घर कहाँ होना चाहिए?
उत्तर-पूर्व का कोना (ईशान्य) घर का सबसे शांत और पवित्र ज़ोन है, इसलिए मंदिर के लिए यही आदर्श जगह है। उत्तर या पूर्व भी ठीक रहते हैं। पूजा करने वाले का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर हो तो अच्छा है।

01
बेडरूम में कभी नहीं
मंदिर को बेडरूम के अंदर न रखें, न ही ऐसी दीवार पर जो टॉयलेट से सटी हो, या जिसके ऊपर या नीचे टॉयलेट हो।
02
ऊँचाई पर रखें
मंदिर कमर से आँखों की ऊँचाई के बीच रखें, फ़र्श पर नहीं।
03
छोटी मूर्तियाँ
घर के मंदिर में मूर्तियाँ परंपरा से 9 इंच से छोटी रखी जाती हैं, और दक्षिण या पश्चिम की दीवार से सटाकर नहीं।
04
सिर्फ़ पूजा का सामान
वहाँ पैसे, दवाइयाँ या रोज़मर्रा की चीज़ें न रखें। टूटी मूर्तियाँ और फीकी पड़ी तस्वीरें हटा दें।
05
हल्के रंग
सफ़ेद, क्रीम, हल्का पीला या हल्का नीला रंग इस जगह के लिए ठीक रहता है। लकड़ी, मार्बल या पत्थर का इस्तेमाल करें।
06
अगर बदल नहीं सकते
मुंबई के छोटे फ़्लैट में अलग पूजा घर न बन सके, तो लिविंग रूम की उत्तर-पूर्व या पूर्व की दीवार पर टँगा लकड़ी का मंदिर अच्छा विकल्प है।
04
रसोई के लिए कौन सी दिशा आदर्श है?
रसोई में अग्नि तत्व होता है, इसलिए वास्तु में उसकी जगह दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोने में बताई गई है, जो अग्नि से जुड़ा ज़ोन है। उत्तर-पश्चिम दूसरा अच्छा विकल्प है। कोशिश करें कि रसोई उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम या घर के केंद्र में न हो।
01
चूल्हा दक्षिण-पूर्व में
गैस का चूल्हा रसोई के दक्षिण-पूर्व हिस्से में रखें, ताकि खाना बनाने वाले का मुँह पूर्व की ओर रहे।
02
आग और पानी अलग रखें
सिंक रसोई के उत्तर या उत्तर-पूर्व हिस्से में होना चाहिए, चूल्हे के बिल्कुल बगल में या ठीक सामने नहीं।
03
फ़्रिज की जगह
रेफ़्रिजरेटर रसोई के दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम हिस्से में ठीक रहता है।
04
साफ़ और चालू हालत में
प्लेटफ़ॉर्म खाली रखें, गैस और पानी का रिसाव जल्दी ठीक करवाएँ, और रसोई में दवाइयाँ न रखें।
05
अगर बदल नहीं सकते
अगर आपकी रसोई गलत ज़ोन में है, तो कमरे के अंदर चूल्हा इस तरह खिसकाइए कि आपका मुँह पूर्व की ओर रहे, दीवारों पर गर्म पीला या क्रीम रंग करवाइए, और जगह को रोशन रखिए।
05
बेडरूम का वास्तु: बिस्तर और सिरहाना कहाँ रखें?
मुख्य बेडरूम के लिए दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) कोना आदर्श है। यह स्थिरता का ज़ोन है और घर के मुखिया के लिए ठीक रहता है। सोते समय सिर दक्षिण की ओर रखना बेहतर माना जाता है। पूर्व विद्यार्थियों के लिए अच्छा है, पश्चिम चल सकता है, और उत्तर की ओर सिर करके सोना वास्तु में टाला जाता है।
01
सिरहाना ठोस दीवार से
बिस्तर इस तरह रखें कि उसका सिरहाना दक्षिण या पश्चिम की दीवार से लगा हो।
02
ऊपर बीम न हो
छत की बीम के ठीक नीचे सोने से बचें।
03
शीशा बिस्तर से दूर
शीशा ऐसी जगह न हो कि सोते समय आप उसमें दिखें। शीशा हटा न सकें तो रात में उसे ढक दें।
04
दरवाज़ा बिस्तर के सामने नहीं
बेडरूम का दरवाज़ा सीधे बिस्तर की ओर नहीं खुलना चाहिए।
05
शांत रंग, कम स्क्रीन
क्रीम, हल्का हरा, हल्का नीला या पीच रंग चुनें, और टीवी व लैपटॉप को बेडरूम से बाहर रखें।
06
अगर बदल नहीं सकते
अगर आपका बेडरूम उत्तर-पूर्व में है, तो भारी फ़र्नीचर उसके दक्षिण-पश्चिम कोने में रखें, मिट्टी जैसे रंग इस्तेमाल करें, और कमरे को सामान से भरा न रखें, बिस्तर के नीचे भी नहीं।
06
वास्तु के हिसाब से लिविंग रूम कैसे सजाएँ?
लिविंग रूम घर के उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में अच्छा रहता है, जहाँ रोशनी आती है और खुलापन महसूस होता है। जिन परिवारों में मेहमान अक्सर आते हैं, उनके लिए उत्तर-पश्चिम ठीक रहता है। दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व के कोनों को मुख्य बैठक के लिए इस्तेमाल करने से बचें।

01
भारी सोफ़े दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर
सोफ़े और बुकशेल्फ़ दक्षिण या पश्चिम की दीवारों के साथ रखें, ताकि मेज़बान का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे।
02
बीच का हिस्सा खुला
कमरे के बीच में भारी फ़र्नीचर न रखें।
03
टीवी दक्षिण-पूर्व की दीवार पर
इससे उत्तर और पूर्व की दीवारें हल्की और खुली रहती हैं।
04
मन को अच्छी लगने वाली तस्वीरें
प्रकृति, बहते पानी या सूर्योदय की तस्वीरें चुनें। युद्ध के दृश्य, उदास चेहरे या गहरे रंग की तस्वीरों से बचें।
05
उत्तर-पूर्व में पानी
छोटा फ़ाउंटेन, फ़िश टैंक या ताज़े फूल उत्तर या उत्तर-पूर्व के कोने में अच्छे लगते हैं।
06
अगर बदल नहीं सकते
अगर बैठने की जगह बीम के नीचे या अँधेरे कोने में ही रखनी पड़े, तो वहाँ वॉर्म रोशनी वाला लैंप लगाएँ, दीवारों पर क्रीम या हल्के हरे जैसा हल्का रंग करवाएँ, और एक हरा-भरा पौधा रखें।
07
बच्चों के कमरे के लिए वास्तु क्या सुझाता है?
बच्चे के बेडरूम के लिए पश्चिम अच्छा ज़ोन है, क्योंकि इसे नियमित दिनचर्या और गहरी नींद से जोड़ा जाता है। मिलनसार और सबसे घुलने-मिलने वाले बच्चों के लिए उत्तर-पश्चिम ठीक रहता है, और पढ़ाई में ध्यान लगाने वाले बच्चों के लिए पूर्व। दक्षिण-पश्चिम माता-पिता के लिए रखें। ये बातें अच्छी परवरिश और आपके डॉक्टर की सलाह का साथ देती हैं, उनकी जगह कभी नहीं लेतीं।
01
पढ़ते समय मुँह पूर्व या उत्तर की ओर
डेस्क ऐसे रखें कि बच्चे का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे, और सामने सीधी खाली दीवार न होकर थोड़ी खुली जगह हो।
02
सिर पूर्व या दक्षिण की ओर
छोटे बच्चे सिर पूर्व या दक्षिण की ओर रखकर बेहतर सोते हैं।
03
खुशनुमा, हल्के रंग
हल्का हरा, आसमानी नीला, हल्का पीला या क्रीम रंग अच्छे रहते हैं।
04
पढ़ाई की जगह से स्क्रीन दूर
गेमिंग स्क्रीन को डेस्क से दूर रखें, और बिस्तर के सामने शीशा न हो।
05
अगर बदल नहीं सकते
अगर बच्चा गलत ज़ोन वाले कमरे में किसी के साथ रहता है, तो बस डेस्क को इस तरह घुमा दें कि उसका मुँह पूर्व की ओर हो, पूर्व की दीवार पर दुनिया का नक्शा लगाएँ, और रोज़ दस मिनट कमरा समेटने की आदत डालें।
08
स्टडी रूम या होम ऑफ़िस के लिए कौन सी दिशा अच्छी है?
अलग स्टडी रूम पश्चिम में टिककर पढ़ने के लिए, उत्तर-पूर्व में सीखने के लिए, पूर्व में नए विचारों के लिए, या उत्तर में करियर वाले काम के लिए अच्छा रहता है। यह बात परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर भी उतनी ही लागू होती है जितनी घर से काम करने वाले बड़ों पर।

01
मुँह पूर्व या उत्तर की ओर
पढ़ते या काम करते समय ऐसे बैठें कि आपका मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे।
02
दीवार से थोड़ी दूरी
डेस्क और सामने की दीवार के बीच थोड़ी जगह छोड़ें।
03
डेस्क के ऊपर बीम न हो
अगर छत की बीम आपके सिर के ऊपर से गुज़रती है, तो डेस्क खिसका लें।
04
साफ़ डेस्क
मेज़ पर सिर्फ़ आज की किताबें और कागज़ रखें। सामान फैला हो तो ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है।
05
रोशनी और शांति
दीवारों पर हल्का पीला, क्रीम या हल्का हरा रंग रखें, पूर्व या उत्तर से आती प्राकृतिक रोशनी लें, और स्टडी में टीवी न रखें।
06
अगर बदल नहीं सकते
अगर स्टडी की दीवार टॉयलेट से सटी है, तो टॉयलेट का दरवाज़ा बंद रखें और डेस्क पर क्लियर क्वार्ट्ज़ या ग्रीन एवेंचुरीन क्रिस्टल रखें।
09
वास्तु के अनुसार बाथरूम और टॉयलेट कहाँ होने चाहिए?
नहाने का बाथरूम पूर्व में अच्छा रहता है, और दक्षिण, पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में भी चल जाता है। टॉयलेट दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में ज़्यादा ठीक माना जाता है, जिसमें सीट का मुँह उत्तर या दक्षिण की ओर हो। टॉयलेट के लिए उत्तर-पूर्व, उत्तर और घर के केंद्र से बचना चाहिए, क्योंकि इन ज़ोन को सोच की स्पष्टता, पैसे और घर के संतुलन से जोड़ा जाता है।
01
दरवाज़ा और ढक्कन बंद
इस्तेमाल न होने पर टॉयलेट का ढक्कन नीचे और बाथरूम का दरवाज़ा बंद रखें।
02
रिसाव जल्दी ठीक करें
वास्तु में टपकते नल को पैसे के हाथ से निकलते जाने से जोड़ा जाता है।
03
हल्की टाइलें
सफ़ेद, क्रीम या हल्के स्लेटी रंग की टाइलें और एक खिड़की या एग्ज़ॉस्ट फ़ैन जगह को ताज़ा और रोशन रखते हैं।
04
अंदर कोई कीमती चीज़ नहीं
बाथरूम में दवाइयाँ, गहने या पैसे न रखें।
05
अगर बदल नहीं सकते
अगर टॉयलेट उत्तर-पूर्व या उत्तर में है, जो मुंबई के फ़्लैटों में आम बात है, तो उसे बिल्कुल साफ़ रखें, समुद्री नमक का एक कटोरा रखें जिसे हर हफ़्ते बदलें, और क्रिस्टल या पिरामिड के उपायों के बारे में पूछें।
सवाल
आम सवाल
वास्तु के अनुसार रसोई के लिए कौन सी दिशा आदर्श है?
रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व आदर्श दिशा है, क्योंकि वास्तु इसे अग्नि तत्व से जोड़ता है। उत्तर-पश्चिम दूसरा विकल्प है, जो चल जाता है। उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और घर के केंद्र से बचें। रसोई के अंदर खाना बनाने वाले का मुँह पूर्व की ओर रहे, और सिंक चूल्हे से काफ़ी दूर हो।
वास्तु के अनुसार सोते समय सिर किस दिशा में होना चाहिए?
वास्तु गहरी और आरामदायक नींद के लिए सिर दक्षिण की ओर रखने की सलाह देता है। पूर्व विद्यार्थियों के लिए अच्छा है और पश्चिम चल जाता है, जबकि सिर उत्तर की ओर रखने से बचा जाता है। इसे सही रखने का सबसे आसान तरीका है कि सिरहाना दक्षिण या पश्चिम की दीवार से लगाएँ।
घर में मंदिर के लिए कौन सी दिशा आदर्श है?
घर के मंदिर के लिए उत्तर-पूर्व का कोना आदर्श जगह है, क्योंकि इसे सबसे पवित्र और शांत ज़ोन माना जाता है। घर का उत्तर या पूर्व अच्छे विकल्प हैं। मंदिर को कमर से आँखों की ऊँचाई के बीच रखें, और उसे कभी बेडरूम के अंदर या टॉयलेट से सटी दीवार पर न रखें।
मेरा टॉयलेट उत्तर-पूर्व में है। अब क्या किया जा सकता है?
उत्तर-पूर्व में टॉयलेट होना वास्तु की एक आम चिंता है, खासकर अपार्टमेंट में। सबसे पहले उसे बहुत साफ़ और हवादार रखें, ढक्कन नीचे और दरवाज़ा बंद रखें। समुद्री नमक का कटोरा, जिसे हर हफ़्ते बदला जाए, एक आसान कदम है। आपके फ़्लोर प्लान में टॉयलेट की जगह देखने के बाद डॉ. किमया क्रिस्टल और पिरामिड के खास उपाय बता सकती हैं।
मेरा मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है। क्या वास्तु में यह बुरा है?
ज़रूरी नहीं। वास्तु हर दीवार को छोटे हिस्सों में बाँटता है, और दक्षिण की दीवार के कुछ हिस्से प्रवेश द्वार के लिए ठीक माने जाते हैं। असल बात यह है कि दरवाज़ा ठीक किस जगह पर है। डॉ. किमया इसे कम्पास से जाँचती हैं और ज़रूरत हो तो पिरामिड, तोरण या खास रंगों जैसे उपाय सुझाती हैं।
क्या मंदिर रसोई या बेडरूम में हो सकता है?
मंदिर बेडरूम के अंदर नहीं रखना चाहिए। रसोई में वह तभी ठीक है जब रसोई के उत्तर-पूर्व कोने में हो और चूल्हे से दूर हो, हालाँकि अलग से बनी खास जगह बेहतर मानी जाती है। छोटे फ़्लैटों में लिविंग रूम के उत्तर-पूर्व या पूर्व में दीवार पर टँगा मंदिर आम तौर पर इन दोनों कमरों से बेहतर विकल्प है।
पढ़ते समय बच्चे का मुँह किस दिशा में होना चाहिए?
पढ़ते समय बच्चे का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। वास्तु पूर्व को नई चीज़ें सीखने से और उत्तर को ध्यान और याददाश्त से जोड़ता है। डेस्क के ठीक सामने खाली दीवार न हो, थोड़ी खुली जगह छोड़ें, डेस्क को बीम के नीचे न रखें, और गेमिंग स्क्रीन को पढ़ाई की जगह से दूर रखें।
क्या वास्तु के अनुसार शीशा बिस्तर के सामने हो सकता है?
वास्तु की सलाह है कि ऐसा शीशा न रखें जिसमें सोते समय आप दिखें। इसमें अलमारी के शीशे और ड्रेसिंग टेबल भी आते हैं। अगर उसे हटा न सकें, तो रात में उस पर कपड़ा या पर्दा डाल दें, या स्लाइडिंग पैनल लगवा लें। शीशा अलमारी के दरवाज़े के अंदर की तरफ़ लगा हो, या ऐसी दीवार पर हो जो बिस्तर के सामने नहीं पड़ती, तो यह दिक्कत आती ही नहीं।
संबंधित सेवाएँ

घर का वास्तु
आपके फ़्लैट, बंगलो या बिल्डिंग की पूरी वास्तु जाँच, बिना तोड़-फोड़ के सुधार।

जीवन की समस्याओं के लिए वास्तु
बार-बार लौटती सेहत, पैसे या रिश्तों की चिंता को घर के एक ज़ोन से जोड़कर देखें।

फ़्लैट या प्लॉट खरीदना
पैसे देने से पहले अपने शॉर्टलिस्ट किए फ़्लैटों या प्लॉटों को वास्तु के हिसाब से परखें।

क्रिस्टल थेरेपी
वास्तु में क्रिस्टल कैसे चुने जाते हैं, दिशा के हिसाब से कैसे रखे जाते हैं और कैसे संभाले जाते हैं।
डॉ. किमया से पूछें
अपना नंबर दीजिए, डॉ. किमया की टीम आपको वापस कॉल करेगी। पहली कॉल मुफ़्त है।
कॉल अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी या गुजराती में हो सकती है।
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