
गृहरेज़िडेंशियल वास्तु
घर, फ़्लैट और बंगलो के लिए वास्तु
आपका घर आपकी नींद, सेहत, पैसे और रिश्तों पर असर डालता है। घर के वास्तु की जाँच में देखा जाता है कि कहाँ संतुलन बिगड़ा है, और उसे आपके मौजूदा नक्शे के अंदर ही ठीक किया जाता है।
- 1किनके लिए
- फ़्लैट या बंगलो में रहने वाले परिवार, किराएदार, नए घर के मालिक और हाउसिंग सोसाइटी।
- 2क्या देखा जाता है
- मुख्य द्वार, कमरों की दिशाएँ, टॉयलेट, रसोई, घर का आकार और आसपास की बिल्डिंग।
- 3आपको क्या मिलता है
- हर कमरे के हिसाब से लिखित योजना, जिसमें आपके नक्शे के अनुसार आसानी से रखे-हटाए जाने वाले उपाय होते हैं।
- 4कैसे होता है
- मुंबई में कहीं भी कम्पास के साथ विज़िट, या आपके फ़्लोर प्लान की ऑनलाइन समीक्षा।
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घर की वास्तु जाँच में क्या-क्या देखा जाता है?
कोई भी घर पूरी तरह संतुलित नहीं होता। हर घर में पाँच तत्वों का थोड़ा-बहुत असंतुलन रहता है, और वह अक्सर ऐसी परेशानी बनकर दिखता है जो कोशिश करने पर भी दूर नहीं होती: नींद ठीक से न आना, पैसा न टिकना, घर में झगड़े, सेहत की चिंता या बच्चों का पढ़ाई में पिछड़ना। ऐसे समय घर की जाँच करवाना ठीक रहता है।
डॉ. किमया पहले पूरे घर को आठ दिशाओं और केंद्र के हिसाब से नापती हैं, फिर हर कमरे को देखती हैं कि वह किस दिशा में है। हर कमरे की सही दिशा और आसान उपाय हमारे कमरे वाले पेजों पर हैं: मुख्य द्वार, रसोई, बेडरूम, टॉयलेट और बाथरूम, मंदिर, लिविंग रूम, स्टडी रूम और बच्चों का कमरा। अगर पैसा या शादी जैसी कोई एक परेशानी आपके लिए सबसे अहम है, तो समस्या के हिसाब से वास्तु देखें।

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मुख्य द्वार
दरवाज़े की दिशा और उसकी ठीक-ठीक जगह, जो पूरे घर का माहौल तय करती है।
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रसोई
चूल्हा, सिंक और फ्रिज कहाँ रखे हैं, और खाना बनाने वाले का मुँह किस तरफ रहता है।
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बेडरूम
मुख्य बेडरूम, बच्चों का कमरा और बुज़ुर्गों का कमरा, तथा सोते समय पलंग और सिर की दिशा।
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टॉयलेट और बाथरूम
कोई टॉयलेट संवेदनशील ज़ोन में तो नहीं है, जैसे उत्तर-पूर्व या घर का केंद्र।
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पूजा और बैठने की जगहें
मंदिर, हॉल और स्टडी, जहाँ रोशनी, शांति और खुली जगह हो तो अच्छा रहता है।
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आकार, केंद्र और सामान का ढेर
कटे कोने, बढ़ाए गए हिस्से, खुला केंद्र, भारी सामान, पानी की टंकी, शीशे और रोशनी।
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फ़्लैट और अपार्टमेंट का वास्तु
फ़्लैट एक बड़ी बिल्डिंग की एक यूनिट होता है, इसलिए उसकी ऊर्जा सिर्फ़ उसकी अपनी दीवारों से तय नहीं होती। डॉ. किमया यह भी देखती हैं कि बिल्डिंग का मुख्य गेट कहाँ है, फ़्लोर पर आपका फ़्लैट किस जगह है, वह कौन-सी मंज़िल पर है और उसके चारों तरफ़ क्या है। जिस फ़्लैट का अपना नक्शा ठीक दिखता हो, उस पर भी बगल में गलत जगह बनी लिफ़्ट, सीढ़ी या पानी की टंकी का असर पड़ सकता है।
ज़्यादातर फ़्लैटों का नक्शा तय होता है और दीवारें साझा होती हैं, इसलिए रसोई या टॉयलेट की जगह बदलना शायद ही कभी हो पाता है। इसी वजह से फ़्लैट के उपाय ऐसे रखे जाते हैं जिन्हें आसानी से रखा, बदला और घर बदलने पर साथ ले जाया जा सके। बेढंगा आकार, ज़रूरी कमरों में कुदरती रोशनी की कमी और उत्तर-पूर्व में मुख्य बेडरूम, ये आम तौर पर मिलने वाली बातें हैं।
फ़्लैट कौन-सी मंज़िल पर है, यह भी देखा जाता है। निचली मंज़िलें ज़मीन यानी पृथ्वी तत्व के ज़्यादा पास होती हैं, जबकि ऊपरी मंज़िलों में हवा और आकाश तत्व ज़्यादा रहता है। इनमें से कोई गलत नहीं है; हर मंज़िल को फ़्लैट की दिशाओं के साथ मिलाकर देखा जाता है।

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मुंबई के फ़्लैटों में आम वास्तु दोष और उन्हें कैसे ठीक किया जाता है
मुंबई में फ़्लैट तंग प्लॉट में बैठाकर बनाए जाते हैं, इसलिए वही गिने-चुने दोष बार-बार दिखते हैं। इन सभी को बिना दीवार तोड़े ठीक किया जा सकता है, चीज़ों की जगह बदलकर, रंग, रोशनी, क्रिस्टल, पिरामिड, मेटल स्ट्रिप, शीशे, पौधे और सामान की छँटाई से।
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कमज़ोर जगह पर एंट्रेंस
हर दिशा में दरवाज़े की अच्छी और कमज़ोर जगहें होती हैं। कमज़ोर जगह को चौखट पर मेटल स्ट्रिप, सही रंग, अच्छी रोशनी और साफ़, खाली एंट्री से संतुलित किया जाता है।
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कटे या गायब कोने
L आकार के फ़्लैटों में अक्सर एक पूरा ज़ोन गायब होता है। उस हिस्से को अंदर से, उसके सबसे पास वाली दीवार पर पिरामिड, क्रिस्टल या मेटल स्ट्रिप लगाकर संतुलित किया जाता है।
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उत्तर-पूर्व में टॉयलेट
नई बिल्डिंगों में बहुत आम है और ग्राहक सबसे ज़्यादा इसी दोष के बारे में पूछते हैं। इसे नमक, दरवाज़े पर मेटल स्ट्रिप और हल्के रंग से, और दरवाज़ा बंद रखकर काबू में रखा जाता है।
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उत्तर या उत्तर-पूर्व में रसोई
यानी अग्नि जल या धन वाले ज़ोन में आ गई है। उपाय में रंग का इस्तेमाल होता है, खाना बनाने वाले के मुँह की दिशा बदली जाती है, और जहाँ हो सके चूल्हे को काउंटर पर ही दूसरी जगह रखा जाता है।
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उत्तर-पूर्व में भारी सामान
यहाँ अक्सर लॉफ़्ट और अलमारियाँ बना दी जाती हैं। भारी चीज़ों को दक्षिण या पश्चिम में रखने और इस कोने को हल्का रखने से मदद मिलती है।
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ज़रूरी कमरों में रोशनी न होना
अँधेरे हॉल और बेडरूम को रोशनी, सही दिशा में लगे शीशों और दीवारों के हल्के रंगों से उजला किया जाता है।
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बंगलो और अलग घरों का वास्तु
बंगलो में पूरी इमारत आपके हाथ में होती है, इसलिए वास्तु का सबसे ज़्यादा फ़ायदा डिज़ाइन के समय मिलता है, नक्शा पक्का होने से पहले। डॉ. किमया आपके आर्किटेक्ट के साथ मिलकर मुख्य गेट और दरवाज़ा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में, रसोई दक्षिण-पूर्व में, मुख्य बेडरूम दक्षिण-पश्चिम में रखवा सकती हैं, और घर का केंद्र खुला रखने की सलाह देती हैं। ज़मीन चुनने के बारे में फ़्लैट या प्लॉट खरीदना पेज पर बताया गया है।
घर के बाहर पानी की सजावट, लॉन और स्विमिंग पूल उत्तर या पूर्व में अच्छे माने जाते हैं, जबकि ऊँचे पेड़ दक्षिण या पश्चिम में लगाए जाते हैं ताकि सुबह की धूप न रुके। कंपाउंड की दीवार दक्षिण और पश्चिम की तरफ़ ज़्यादा ऊँची और मोटी रखी जाती है। गैराज दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में बनता है।
घर के अंदर सीढ़ियाँ दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में बनती हैं, उत्तर-पूर्व में कभी नहीं। छत की पानी की टंकी दक्षिण-पश्चिम में और सेप्टिक टैंक उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में अच्छा माना जाता है, उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम में कभी नहीं। जो बंगलो पहले से बना है, उसमें भी यही जाँच होती है और कमियों को उपायों से ठीक किया जाता है।

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रेज़िडेंशियल टावर और हाउसिंग सोसाइटी का वास्तु
टावर में हर फ़्लैट का प्लॉट, मुख्य गेट, पानी के स्रोत और खुली जगहें साझा होती हैं। ये साझा हिस्से ठीक से प्लान हों, तो हर फ़्लैट को शुरू से ही अच्छा आधार मिलता है और बाद में एक-एक फ़्लैट में कम सुधार करने पड़ते हैं।
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डेवलपर और आर्किटेक्ट
मास्टर लेआउट पर सलाह: रोशनी और हवा के साथ ज़्यादा से ज़्यादा चौकोर या आयताकार फ़्लैट बैठाना, और टंकियाँ, बोरवेल, पूल, गेट और कंपाउंड की दीवारें सही जगह रखना।
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हाउसिंग सोसाइटी
एंट्रेंस लॉबी, मुख्य गेट, पानी के भंडारण, खेलने की जगह, पूजा की जगह और दूसरे साझा हिस्सों की समीक्षा, और बिना तोड़-फोड़ वाले उपायों से सुधार।
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घर खरीदने वाले
फ़्लैट के साथ-साथ उस टावर का भी आकलन, क्योंकि बिल्डिंग के वास्तु का असर उसके हर फ़्लैट तक पहुँचता है।
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क्या किराए के घर में भी वास्तु काम आता है?
जी हाँ। किराएदार अक्सर सोचते हैं कि वास्तु के लिए ऐसे बदलाव चाहिए जो वे कर नहीं सकते, लेकिन सुझाए गए लगभग सभी उपाय आसानी से रखे-हटाए जा सकते हैं। क्रिस्टल, पिरामिड, नमक के कटोरे, पौधे, लैंप, गलीचे और फ़र्नीचर लगाने का तरीका, इनके लिए मकान मालिक से इजाज़त नहीं चाहिए, और घर बदलें तो ये आपके साथ चले जाते हैं।
जहाँ दीवार का रंग मायने रखता है, वहाँ सही रंग का पेंट किया हुआ पैनल, कपड़ा या गलीचा भी आम तौर पर उतना ही काम करता है। रेंट एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले वास्तु जाँच करवाना भी फ़ायदेमंद है: दो-तीन फ़्लैटों की तुलना करने में ज़्यादा समय नहीं लगता, और इससे बाद में घर बदलने की नौबत टल सकती है।
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नए या रीडेवलपमेंट वाले फ़्लैट में जाना
मुंबई में रीडेवलपमेंट आम बात है, और नए फ़्लैट का मुख पुराने से अलग दिशा में हो सकता है, जिसमें एंट्रेंस और रसोई भी नई जगह पर आ जाते हैं। पुराने घर में बनी आदतें, जैसे पलंग या मंदिर कहाँ था, नई दिशाओं में शायद ठीक न बैठें।
जाँच का आदर्श समय पज़ेशन से पहले होता है, जब फ़्लोर प्लान पक्का हो चुका हो पर इंटीरियर बाकी हो। तब डॉ. किमया आपके कारपेंटर के काम शुरू करने से पहले अलमारियों, पलंग, चूल्हे, मंदिर और लाइटों की जगह के बारे में सलाह दे सकती हैं, ताकि कुछ दोबारा न बनवाना पड़े। अगर आप पहले ही रहने आ चुके हैं, तो जो जैसा बना और लगा है, उसी को देखकर यही जाँच हो जाती है। देखें परामर्श कैसे होता है।
सवाल
आम सवाल
मुंबई के फ़्लैटों में सबसे आम वास्तु दोष कौन-सा है?
ग्राहक सबसे ज़्यादा उत्तर-पूर्व के टॉयलेट वाले दोष के बारे में पूछते हैं, क्योंकि तंग बिल्डिंग प्लान में बाथरूम अक्सर उसी कोने में आ जाते हैं। दूसरे आम दोष हैं उत्तर में रसोई, कमज़ोर जगह पर एंट्रेंस, L आकार के नक्शे में कटे कोने और उत्तर-पूर्व में भारी लॉफ़्ट। इन सबके उपाय ऐसे हैं जिनमें दीवारें नहीं तोड़नी पड़तीं।
फ़्लैट के वास्तु में मंज़िल की ऊँचाई मायने रखती है क्या?
हाँ, पर कोई मंज़िल सीधे-सीधे अच्छी या बुरी नहीं होती। निचली मंज़िलें ज़मीन यानी पृथ्वी तत्व के ज़्यादा पास होती हैं, जबकि ऊँची मंज़िलों में हवा और आकाश की ऊर्जा ज़्यादा रहती है। डॉ. किमया मंज़िल को अकेले नहीं परखतीं, बल्कि फ़्लैट की दिशा, बिल्डिंग में उसकी जगह और कमरों के नक्शे के साथ मिलाकर देखती हैं।
क्या कॉर्नर फ़्लैट वास्तु के हिसाब से अच्छा होता है?
कॉर्नर फ़्लैट में आम तौर पर दो तरफ़ से ज़्यादा रोशनी और हवा आती है, जो वास्तु में अच्छी बात मानी जाती है। फिर भी एंट्रेंस, रसोई, टॉयलेट और मुख्य बेडरूम की दिशाएँ ही तय करती हैं कि फ़्लैट कितना संतुलित है। जैसे, उत्तर-पूर्व में टॉयलेट वाले कॉर्नर फ़्लैट पर भी ध्यान देना पड़ता है।
क्या मेरी बिल्डिंग का वास्तु मेरे फ़्लैट पर असर डालता है?
हाँ। टावर के हर फ़्लैट का प्लॉट, मुख्य गेट, पानी के स्रोत और खुली जगहें साझा होती हैं, इसलिए बिल्डिंग के वास्तु का असर हर यूनिट तक पहुँचता है। इसीलिए घर के आकलन में आपके अपने घर के कमरों के साथ-साथ बिल्डिंग का गेट, आपके दरवाज़े के पास की लिफ़्ट और सीढ़ियाँ, और फ़्लोर पर फ़्लैट की जगह भी देखी जाती है।
क्या हाउसिंग सोसाइटी पहले से बनी बिल्डिंग का वास्तु सुधार सकती है?
हाँ। सोसाइटी बिना किसी निर्माण के साझा हिस्सों को ठीक कर सकती है। एंट्रेंस लॉबी, मुख्य गेट, पानी का भंडारण, पूजा की जगह और खेलने की जगहें रोशनी, रंग, मेटल स्ट्रिप, पौधों जैसे उपायों से बेहतर की जा सकती हैं। इनका फ़ायदा हर निवासी को मिलता है, और अलग-अलग फ़्लैटों के अंदर बदलाव करवाने के मुकाबले इन पर सहमति बनाना अक्सर आसान होता है।
ब्रह्मस्थान क्या है और उसे खुला क्यों रखना चाहिए?
ब्रह्मस्थान घर या प्लॉट का केंद्र है। वास्तु इसे ऐसी धुरी मानता है जहाँ से ऊर्जा बाकी सभी ज़ोन तक फैलती है, इसलिए इसे खुला, साफ़ और हल्का रखना चाहिए। बीच में खंभा, सीढ़ी, टॉयलेट या भारी फ़र्नीचर हो तो माना जाता है कि वह उस प्रवाह को रोकता है। फ़्लैटों में बीच के हिस्से से सामान का ढेर हटा देना ही अक्सर काफ़ी मदद करता है।
बंगलो में सीढ़ियाँ और पानी की टंकी कहाँ होनी चाहिए?
सीढ़ियाँ दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में अच्छी मानी जाती हैं, उत्तर-पूर्व में कभी नहीं। छत की पानी की टंकी दक्षिण-पश्चिम में होनी चाहिए, उत्तर-पूर्व में नहीं। सेप्टिक टैंक उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में बनता है, उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम में कभी नहीं। डिज़ाइन के समय ही अपने आर्किटेक्ट के साथ इन बातों का ध्यान रखना सबसे आसान रहता है।
घर की वास्तु विज़िट में कितना समय लगता है?
मुंबई के आम फ़्लैट की विज़िट में आम तौर पर दो से तीन घंटे लगते हैं। इसमें हर कमरे और एंट्रेंस की कम्पास से नाप, हर ज़ोन का मुआयना और आपके परिवार की परेशानियों पर बातचीत शामिल है। बंगलो और बड़े घरों में ज़्यादा समय लगता है। उपायों वाली लिखित रिपोर्ट विज़िट के बाद दी जाती है।
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डॉ. किमया से पूछें
अपना नंबर दीजिए, डॉ. किमया की टीम आपको वापस कॉल करेगी। पहली कॉल मुफ़्त है।
कॉल अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी या गुजराती में हो सकती है।
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