घर का वास्तु · · 7 मिनट में पढ़ें
घर का रेनोवेशन करवा रहे हैं? कोई भी दीवार तोड़ने से पहले ये वास्तु जाँच लें
फ़्लैट या घर का रेनोवेशन करवाने वाले हैं? काम शुरू होने से पहले नक्शे पर वास्तु के हिसाब से क्या देखें, और कौन-से काम बिना तोड़-फोड़ के हो जाते हैं।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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रेनोवेशन के बाद नहीं, पहले वास्तु क्यों देखें?
वास्तु रेनोवेशन से पहले इसलिए देखें, क्योंकि यही वह समय है जब दीवारों, फ़र्श, प्लंबिंग और वायरिंग, सब पर काम चल रहा होता है। तब कुछ बदलना हो तो बस नक्शा दोबारा बनता है, दोबारा तोड़-फोड़ नहीं करनी पड़ती। टाइलें लग जाने और मॉड्यूलर किचन फ़िट हो जाने के बाद वही सुधार करने का मतलब अक्सर बना-बनाया काम उखाड़ना होता है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर नियम को लेकर परेशान हों। ज़्यादातर घरों में गिने-चुने बदलाव ही चाहिए होते हैं, और उनमें से कई बहुत आसान होते हैं: चूल्हा कहाँ रहेगा, बिस्तर किस ओर होगा, घर के बीच में क्या रखा जाएगा। मक़सद बस इतना है कि जिन चीज़ों पर आप वैसे भी पैसा ख़र्च कर रहे हैं, वे नक्शे के स्तर पर ही वास्तु के हिसाब से तय हो जाएँ।
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क्या वास्तु के लिए दीवार तोड़ना सुरक्षित है?
दीवार तभी तोड़ें जब स्ट्रक्चरल इंजीनियर ने पक्का कर दिया हो कि यह सुरक्षित है, और आपकी सोसाइटी ने, और ज़रूरत हो तो नगर निगम ने भी, लिखित इजाज़त दे दी हो। वास्तु की सलाह कभी भी इमारत की सुरक्षा से ऊपर नहीं होती।
लोड-बेयरिंग दीवारें, बीम, कॉलम और स्लैब आपके घर को, और अक्सर ऊपर वाले घरों को भी, थामे रखते हैं। इंजीनियर के डिज़ाइन के बिना इन्हें काटने से लोगों की जान ख़तरे में पड़ सकती है, और कई इमारतों में इसकी इजाज़त ही नहीं होती। पानी वाले हिस्सों का भी ध्यान रखें: लीकेज के डर से कई सोसाइटी टॉयलेट या रसोई को नीचे वाले पड़ोसी के बेडरूम के ऊपर ले जाने नहीं देतीं। अगर वास्तु के हिसाब से आदर्श लेआउट ढाँचे या नियमों की वजह से मुमकिन नहीं है, तो उसका हल उपाय है, जोखिम उठाना नहीं।
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रेनोवेशन में वास्तु के लिए कौन-से बदलाव सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं?
सबसे ज़्यादा मायने वे बदलाव रखते हैं जिन्हें बाद में पलटना सबसे मुश्किल होता है: मुख्य द्वार, रसोई, टॉयलेट और पानी की लाइनें, भारी स्टोरेज, घर का केंद्र और सीढ़ियाँ।
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मुख्य द्वार
नया दरवाज़ा या चौखट ऑर्डर करने से पहले कम्पास से प्रवेश की दिशा और उसका पद, यानी दीवार का वह हिस्सा जिसमें दरवाज़ा आता है, जाँच लें। फ़्लैट में दरवाज़े की जगह आम तौर पर तय होती है, लेकिन चौखट, दहलीज़, रंग और रोशनी उसकी दिशा के हिसाब से चुने जा सकते हैं।
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रसोई और अग्नि
रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व (आग्नेय), यानी अग्नि का ज़ोन, आदर्श है, और उत्तर-पश्चिम भी ठीक रहता है। चूल्हा उत्तर-पूर्व में या घर के केंद्र में न रखें।
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टॉयलेट और पानी
कोई भी नया टॉयलेट उत्तर-पूर्व या केंद्र में न बनवाएँ। उत्तर-पूर्व (ईशान्य) साफ़ पानी, रोशनी और पूजा के कोने की जगह है, नालियों की नहीं।
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भारी स्टोरेज
बिल्ट-इन अलमारियाँ, लॉफ़्ट और मुख्य बेडरूम दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य), दक्षिण या पश्चिम में ठीक रहते हैं, क्योंकि इन दिशाओं में स्थिर पृथ्वी तत्व होता है। भारी बिल्ट-इन सामान उत्तर-पूर्व से दूर रखें।
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घर का केंद्र
ब्रह्मस्थान, यानी घर का केंद्र, खुला और हल्का रखें। वहाँ कोई नया खंभा, टॉयलेट, स्टोर या भारी यूनिट न बनवाएँ।
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सीढ़ियाँ
डुप्लेक्स, रो हाउस या बंगले में सीढ़ियाँ दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में ठीक रहती हैं। इन्हें उत्तर-पूर्व या केंद्र में न बनवाएँ।
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क्या वास्तु के हिसाब से रसोई की जगह बदली जा सकती है?
हाँ, रेनोवेशन के दौरान रसोई की जगह बदली जा सकती है, बशर्ते ढाँचा, ड्रेनेज, गैस लाइन और सोसाइटी के नियम इसकी इजाज़त दें। दक्षिण-पूर्व आदर्श है और उत्तर-पश्चिम भी ठीक रहता है; उत्तर-पूर्व और केंद्र से बचना चाहिए।
रसोई की जगह बदलने का मतलब है गैस लाइन, नाली और एग्ज़ॉस्ट, तीनों को नई जगह ले जाना। इसलिए पहले अपने कॉन्ट्रैक्टर और गैस सप्लायर से पूछ लें कि क्या-क्या हो सकता है। पाइप वाली गैस की लाइन सिर्फ़ अधिकृत गैस कंपनी से ही शिफ़्ट करवाएँ।
अगर रसोई को वहीं रहना है, तब भी रेनोवेशन में उसके अंदर काफ़ी कुछ किया जा सकता है: हॉब (चूल्हा) रसोई के दक्षिण-पूर्व वाले हिस्से में लगाएँ ताकि खाना बनाने वाले का मुँह पूर्व की ओर रहे, हॉब और सिंक को अलग रखें, और हवा आने-जाने का अच्छा इंतज़ाम करें। ओपन लेआउट के बारे में विस्तार से जानने के लिए मॉडर्न ओपन किचन के वास्तु पर हमारी गाइड पढ़ें।
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टॉयलेट या बाथरूम दोबारा बनवाते समय क्या देखें?
बाथरूम दोबारा बनवाते समय तीन बातें देखें: टॉयलेट किस ज़ोन में है, सीट का मुँह किस ओर है, और कमरे में हवा कैसे आती-जाती है। आख़िरी दो बातें ठीक करने का सबसे आसान मौक़ा यही होता है। टॉयलेट सीट का मुँह उत्तर या दक्षिण की ओर हो तो बेहतर माना जाता है, और अच्छा एग्ज़ॉस्ट या खिड़की कमरे को सूखा रखती है।
टॉयलेट को उत्तर-पूर्व या केंद्र से हटाना प्लंबिंग का बड़ा काम है। इसके लिए सोसाइटी की मंज़ूरी चाहिए, और यह पक्का करना होता है कि नीचे वाले फ़्लैट में लीकेज न हो। जहाँ टॉयलेट हट नहीं सकता, वहाँ बंद दरवाज़ा, सूखा फ़र्श, हल्के रंग और जाँच के बाद चुने गए उपाय उसे संतुलित करने में मदद करते हैं; पूरी जानकारी के लिए बाथरूम और टॉयलेट का वास्तु देखें। टॉयलेट से सटी दीवार पर नया मंदिर भी न लगवाएँ।
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कमरे मिलाने या हॉल खुला करने पर क्या बदलता है?
कमरे मिलाने से घर का आकार बदलता है और उसका केंद्र भी खिसक जाता है, इसलिए कोई भी दीवार गिराने से पहले नक्शे पर देख लें कि नया केंद्र कहाँ आएगा। खुला हॉल और डाइनिंग अक्सर रोशनी और हवा के लिए अच्छा रहता है, लेकिन बीच में कोई खंभा, किचन आइलैंड, भारी स्टोरेज यूनिट या सीढ़ी नहीं आनी चाहिए।
ऊपर भी नज़र डालें। फ़ॉल्स सीलिंग के पीछे बीम छिप सकती है, और वास्तु में बिस्तर या डेस्क को ठीक बीम के नीचे रखने से बचा जाता है, इसलिए इनकी जगह सीलिंग की ड्रॉइंग सामने रखकर तय करें। अगर सोसाइटी बालकनी को बंद करके घर में मिलाने की इजाज़त देती है, तो याद रखें कि इससे घर का आकार बदल जाता है; उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम में बढ़ा हुआ या कटा हुआ हिस्सा बाक़ी दिशाओं के मुक़ाबले ज़्यादा मायने रखता है।
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बिना तोड़-फोड़ के क्या-क्या ठीक हो सकता है?
वास्तु के ज़्यादातर सुधारों में तोड़-फोड़ की ज़रूरत ही नहीं पड़ती: फ़र्नीचर की जगह बदलना, कमरों का इस्तेमाल बदलना, रंग, रोशनी, धातु की पट्टियाँ, पिरामिड और क्रिस्टल। ये इंटीरियर के काम में आसानी से जुड़ जाते हैं, क्योंकि इन्हें पहले दिन से डिज़ाइन में शामिल किया जा सकता है।
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कमरों का इस्तेमाल बदलें
दक्षिण-पश्चिम वाला कमरा माता-पिता को और पश्चिम या उत्तर-पश्चिम वाला कमरा बच्चों को दे दें। इसका असर किसी दीवार को खिसकाने से भी ज़्यादा हो सकता है।
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फ़र्नीचर दिशा देखकर लगाएँ
बिस्तर ऐसे लगाएँ कि सिर दक्षिण या पूर्व की ओर रहे, डेस्क ऐसे कि बैठने वाले का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर हो, और लॉकर उत्तर की ओर खुले।
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ज़ोन के हिसाब से रंग चुनें
पेंट तो वैसे भी होना है, तो हर ज़ोन के तत्व से मेल खाते शेड चुनें।
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उपाय काम के साथ ही करवा लें
दहलीज़ पर या ज़ोन की सीमा पर धातु की पट्टियाँ लगाना तब सबसे आसान होता है, जब फ़र्श का काम चल रहा हो।
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रेनोवेशन के लिए वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें
जैसे ही डिज़ाइनर का पहला लेआउट तैयार हो, और कॉन्ट्रैक्टर के तोड़-फोड़ शुरू करने या किचन और टाइलें ऑर्डर करने से पहले, अपना फ़्लोर प्लान वास्तु के हिसाब से जँचवा लें। उस समय कोई भी बदलाव बस नक्शे पर एक लकीर भर होता है। अगर सिर्फ़ हल्का-फुल्का बदलाव करवा रहे हैं, तो शायद बिना तोड़-फोड़ के वास्तु उपाय वाली हमारी गाइड ही काफ़ी हो।
जाँच के लिए ये चीज़ें तैयार रखें: घर का मौजूदा फ़्लोर प्लान, नया प्रस्तावित लेआउट, और उत्तर दिशा किस ओर है इसका नोट, जो स्टील और बिजली के पॉइंट से दूर खड़े होकर कम्पास ऐप से लिया गया हो। हर कमरे की फ़ोटो भी काम आती हैं।
अंधेरी ईस्ट, मुंबई में VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर रेनोवेशन के नक्शे इस क्रम से देखती हैं: पहले दूर से विश्लेषण, फिर साइट पर कम्पास से नाप, उसके बाद विस्तार से चर्चा, और आख़िर में लिखित रिपोर्ट, जिसमें लिखा होता है कि क्या बदलना है, क्या जैसा है वैसा रहने देना है, और इंटीरियर में कौन-से उपाय शामिल करने हैं। वे पूरे मुंबई में साइट विज़िट करती हैं, साइट विज़िट के लिए भारत के दूसरे शहरों और विदेश भी जाती हैं (यह मुफ़्त पहली कॉल पर तय होता है), और फ़्लोर प्लान से ऑनलाइन परामर्श भी देती हैं। शुरुआत के लिए मुफ़्त पहली कॉल बुक करें या अपना फ़्लोर प्लान और प्रस्तावित लेआउट WhatsApp पर +91 70391 07512 पर भेज दें।
सवाल
आम सवाल
रेनोवेशन से पहले वास्तु देखें या बाद में?
रेनोवेशन से पहले देखें। काम शुरू होने से पहले नक्शा जँचवाने से लेआउट काग़ज़ पर ही बदला जा सकता है, जबकि बाद में देखने पर आम तौर पर या तो सिर्फ़ बिना तोड़-फोड़ वाले उपाय बचते हैं, या बना-बनाया काम दोबारा करना पड़ता है।
क्या फ़्लैट में वास्तु के हिसाब से रसोई की जगह बदली जा सकती है?
अक्सर हाँ, अगर सोसाइटी इजाज़त दे, नाली और गैस लाइन सुरक्षित तरीक़े से नई जगह ले जाई जा सकें, और नई जगह दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में हो। ऐसा न हो सके तो मौजूदा रसोई के अंदर ही हॉब की जगह ठीक कर लें।
क्या रेनोवेशन में वास्तु ठीक करने के लिए दीवारें तोड़नी पड़ती हैं?
नहीं, दीवारें तोड़ने की ज़रूरत बहुत कम पड़ती है। ज़्यादातर सुधार लेआउट, फ़र्नीचर, रंग और बिना तोड़-फोड़ वाले उपायों से हो जाते हैं, और कोई भी दीवार हटाने से पहले स्ट्रक्चरल इंजीनियर और सोसाइटी की इजाज़त ज़रूरी है।
क्या उत्तर-पूर्व में बने टॉयलेट का रेनोवेशन करवाया जा सकता है?
हाँ। रेनोवेशन उसमें हवा का इंतज़ाम सुधारने, उसे सूखा रखने और हल्के रंग करवाने का अच्छा मौक़ा है। उसे दूसरी जगह ले जाना बड़ा फ़ैसला है, जो प्लंबिंग और सोसाइटी की मंज़ूरी पर निर्भर करता है।
रेनोवेशन के नक्शे की वास्तु जाँच के लिए क्या-क्या चाहिए?
पहली जाँच के लिए घर का मौजूदा फ़्लोर प्लान, प्रस्तावित लेआउट, उत्तर दिशा की जानकारी और हर कमरे की फ़ोटो काफ़ी हैं। उसके बाद साइट पर कम्पास से नाप लेकर बारीकियाँ पक्की की जाती हैं।
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