त्योहार और अनुष्ठान · 5 अक्टूबर 2026 · 6 मिनट में पढ़ें
वास्तु के अनुसार दिवाली की सफ़ाई: क्या हटाएँ और किस क्रम में
दिवाली 8 नवंबर 2026 को है। यहाँ पढ़िए कि एक-एक कमरे की सफ़ाई किस क्रम में करें, परंपरा से कौन-सी चीज़ें इधर-उधर खिसकाने के बजाय घर से निकाल दी जाती हैं, और कौन-से कुछ कोने बाकी घर से ज़्यादा मायने रखते हैं।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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2026 में दिवाली कब है, और सफ़ाई कब तक पूरी हो जानी चाहिए?
दिवाली रविवार 8 नवंबर 2026 को है। पाँच दिन 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू होते हैं, 7 को छोटी दिवाली और 8 को लक्ष्मी पूजा से होते हुए, 9 को गोवर्धन पूजा और 10 को भाई दूज तक चलते हैं।
असल में सफ़ाई दिवाली तक नहीं, धनतेरस तक पूरी होनी चाहिए। धनतेरस पर घर के लिए कुछ खरीदने की परंपरा के पीछे यह मानकर चला जाता है कि घर पहले से साफ़ है और नई चीज़ रखने की जगह है। 6 नवंबर से उलटा गिनें तो आपके पास एक महीना है, और सफ़ाई एक थका देने वाले वीकेंड में निपटाने के बजाय ढंग से करनी हो तो एक फ़्लैट को लगभग इतना ही समय लगता है।
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सफ़ाई किस क्रम में करनी चाहिए?
उत्तर-पूर्व से शुरू करें और घर में घड़ी की दिशा में चलते हुए दक्षिण-पश्चिम पर खत्म करें। इसके पीछे की सोच वही है जिस तरह वास्तु ज़ोन को देखता है: उत्तर-पूर्व को घर का सबसे हल्का और खुला हिस्सा होना चाहिए, और दक्षिण-पश्चिम को सबसे भारी और स्थिर। इस दिशा में सफ़ाई करने पर जमा हुआ सामान हर बार उधर ही खिसकता है जहाँ भार को होना चाहिए, और फिर घर से बाहर।
छोटे फ़्लैट में हर तरफ़ के लिए एक दोपहर लगती है। क्रम से ज़्यादा ज़रूरी यह है कि एक ज़ोन पूरा करके ही अगला शुरू करें, क्योंकि अक्सर होता यही है कि छह कमरे आधे-अधूरे साफ़ रह जाते हैं और हॉल में सामान का ढेर लग जाता है।
- पहले उत्तर-पूर्व: पूजा की जगह, और हर वह कोना जो धीरे-धीरे सामान रखने की जगह बन गया है।
- पूर्व और दक्षिण-पूर्व: रसोई, जिसमें सबसे ज़्यादा समय लगता है, इसलिए उसे आखिर के लिए न छोड़ें।
- दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम: वार्डरोब, लॉफ़्ट, भारी अलमारियाँ।
- पश्चिम और उत्तर-पश्चिम: बाथरूम, यूटिलिटी, बालकनी।
- घर का केंद्र सबसे आखिर में, और एक बार खाली हो जाए तो उसे खाली ही रखें।
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परंपरा से कौन-सी चीज़ें इधर-उधर खिसकाने के बजाय घर से निकाल दी जाती हैं?
दिवाली की सफ़ाई में असली फ़र्क सामान जमाने और सामान निकालने का है। टूटी चीज़ को एक शेल्फ़ से उठाकर दूसरी पर रख देना वह काम नहीं है जो परंपरा चाहती है।
दिवाली से पहले परंपरा के अनुसार घर से वह सब निकाला जाता है जो टूटा है, जो सूख या मर चुका है, और जो बंद पड़ा है।
- चटके और टूटे बर्तन, उस सेट समेत जो मेहमानों के लिए रखा है और जिसे कोई इस्तेमाल नहीं करता।
- टूटे आईने; लगभग हर परंपरा इस एक चीज़ पर सहमत है कि इसे घर में नहीं रहना चाहिए।
- बंद पड़ी दीवार घड़ियाँ और कलाई घड़ियाँ, अगर उन्हें इसी महीने ठीक नहीं करवाया जाना है।
- सूखे पौधे, मुरझाए फूल और वह गमला जो पिछले साल से खाली पड़ा है।
- फटी चटाइयाँ, रिसती बाल्टियाँ, न लिखने वाले पेन, और वह दराज़ भी जिसमें ये सब पड़े रहते हैं।
- एक्सपायर्ड दवाइयाँ और खाना, ख़ासकर वह सब जो रसोई के उत्तर-पूर्व में रखा है।
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प्रवेश द्वार, और उस पर बाकी घर से इतना ज़्यादा ध्यान क्यों
वास्तु में मुख्य द्वार को वह जगह माना जाता है जहाँ से घर में सब कुछ आता है। इसीलिए दिवाली की इतनी मेहनत उसी पर लगती है: रंगोली, तोरण, रोशनी।
पर यह सब लगाने से पहले वे काम ज़्यादा ज़रूरी हैं जिनमें कोई चमक-दमक नहीं है। देहरी पर सिर्फ़ झाड़ू न लगाएँ, उसे धोएँ। दरवाज़े के बाहर का फ्यूज़ बल्ब बदलें। घंटी ठीक करवाएँ। चरमराते कब्ज़े में तेल डालें। शू रैक में सिर्फ़ वही रखें जो सच में पहना जाता है, और उसे ऐसी जगह रखें कि आने वाले को सबसे पहले वही न दिखे।
जो दरवाज़ा आसानी से खुलता हो और खुलते ही रोशन, साफ़-सुथरी जगह दिखे, वह अटकने वाले दरवाज़े पर टँगी किसी भी सजावट से ज़्यादा काम करता है।
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घर का केंद्र
ब्रह्मस्थान, यानी घर का बीच का हिस्सा, परंपरा से खुला और हल्का रखा जाता है। मुंबई के फ़्लैट में आमतौर पर वहीं डाइनिंग टेबल, कपड़े सुखाने का स्टैंड और वह सब कुछ पहुँच जाता है जिसकी कोई और जगह नहीं होती।
डाइनिंग टेबल को आप हमेशा के लिए कहीं और नहीं ले जाएँगे, और कोई आपसे यह कह भी नहीं रहा। जो सच में हो सकता है वह यह है: केंद्र से हर वह चीज़ हटा दें जिसकी जगह वहाँ नहीं है, फ़र्श दिखता रहने दें, और ध्यान रखें कि दिसंबर आते-आते कपड़े सुखाने का स्टैंड फिर से लिविंग रूम के बीच न आ जाए।
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रंग-रोगन और नई खरीदारी के बारे में क्या?
दिवाली से पहले रंग-रोगन करवाना पुरानी रीति है और इस पर वास्तु में कोई आपत्ति नहीं। रंग चुन रहे हों तो उत्तर और पूर्व की दीवारों पर हल्के शेड आमतौर पर पसंद किए जाते हैं, और गहरे रंग दक्षिण और पश्चिम के लिए।
रही बात खरीदारी की: धनतेरस परंपरा से घर में कुछ लाने का दिन है, और यह एक अच्छी रीति है। पर इसका मतलब यह नहीं कि जो चीज़ ठीक चल रही है उसे बदल डालें। परंपरा असल में जो चाहती है, उसके ज़्यादा करीब कम सामान वाला साफ़ घर है, सेल में खरीदे सामान से भरा घर नहीं।
सवाल
आम सवाल
2026 में दिवाली कब है?
दिवाली रविवार 8 नवंबर 2026 को है। धनतेरस 6 नवंबर को, छोटी दिवाली 7 नवंबर को, गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को और भाई दूज 10 नवंबर को है।
दिवाली की सफ़ाई किस दिशा से शुरू करनी चाहिए?
उत्तर-पूर्व से शुरू करें और घर में घड़ी की दिशा में चलते हुए दक्षिण-पश्चिम पर खत्म करें।
क्या टूटी चीज़ों को सच में दिवाली से पहले फेंक देना चाहिए?
परंपरा यह है कि टूटी, चटकी और बंद पड़ी चीज़ों को रख छोड़ने के बजाय घर से निकाल दिया जाए। अगर किसी चीज़ को सच में ठीक करवाना है, तो मरम्मत की तारीख तय कर लें; अगर वह तारीख टलती ही जाए, तो उसे टूटा ही मान लें।
क्या दिवाली से पहले घर में रंग करवाना ज़रूरी है?
नहीं। यह आम चलन है, कोई अनिवार्यता नहीं। साफ़ दीवारों से भी वही मकसद पूरा हो जाता है, और वास्तु का कोई सिद्धांत नहीं कहता कि घर हर साल रंगवाना ही चाहिए।
सफ़ाई कितने दिन पहले कर लेनी चाहिए?
कोशिश करें कि 6 नवंबर को धनतेरस से पहले सफ़ाई पूरी हो जाए, ताकि पाँच दिन शुरू होने से पहले घर तैयार हो। फ़्लैट के लिए चार-पाँच हफ़्ते पहले शुरू कर दें तो काम आराम से हो जाता है।
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