त्योहार और अनुष्ठान · 5 अक्टूबर 2026 · 6 मिनट में पढ़ें
दिवाली से पहले घर से निकाले सामान का क्या करें
सामान निकालना तो आसान है। असली सवाल है उस ढेर का क्या करें: क्या किसी को दिया जा सकता है, क्या सच में फेंकना पड़ेगा, मुंबई में इलेक्ट्रॉनिक सामान और दवाइयाँ कहाँ दें, और यह ढेर दोबारा न लगे इसके लिए क्या करें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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ज़्यादातर सफ़ाई इसी ढेर पर आकर अटक जाती है
पहला आधा काम तो लगभग हर कोई कर लेता है। अलमारियाँ खाली हो जाती हैं, टूटा-फूटा सामान बाहर आ जाता है, और शाम तक हॉल या बालकनी में एक ढेर लग जाता है।
फिर वह ढेर वहीं पड़ा रहता है। हफ़्ते भर में कुछ चीज़ें वापस अलमारियों में चली जाती हैं, कुछ लॉफ़्ट में पहुँच जाती हैं, और बाकी एक थैले में दरवाज़े के पीछे अगली दिवाली तक पड़ी रहती हैं। वास्तु की नज़र से देखें तो घर साफ़ हुआ ही नहीं। बोझ बस इधर से उधर हो गया, और अक्सर वह उत्तर-पूर्व या ब्रह्मस्थान (घर का केंद्र) में जा पहुँचता है, यानी उन्हीं दो ज़ोन में जहाँ बोझ सबसे कम होना चाहिए।
शुरू करने से पहले तय कर लें कि सामान कहाँ जाएगा, और छँटाई बाद के लिए न छोड़ें, साथ-साथ करते चलें।
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एक नहीं, चार ढेर
किसी भी अलमारी को खोलने से पहले चार अलग थैले या डिब्बे रख लें। छँटाई उसी पल करनी होती है जब आप चीज़ हाथ में उठाते हैं, क्योंकि सिर्फ़ उसी पल आप उसके बारे में खुद से सच बोल पाते हैं।
- दे दें: पहनने लायक कपड़े, बर्तन, खिलौने, किताबें और अच्छी हालत का बिस्तर।
- रीसायकल करें: कागज़, गत्ता, काँच, धातु और हर तरह का इलेक्ट्रॉनिक सामान।
- लौटाएँ: दवाइयाँ, बैटरी और वह सब जिसे खास तरीके से ही निपटाना होता है।
- फेंकें: जो सच में टूटा, फटा, चटका या एक्सपायर हो चुका है, इसके अलावा कुछ नहीं।
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क्या दें, और किसे दें
पहनने लायक कपड़े, बर्तन, स्कूल की किताबें, खिलौने और बिस्तर मुंबई में जल्दी ही कोई ले लेता है। जो चीज़ आप खुद इस्तेमाल नहीं करेंगे, उसे देना किसी के काम नहीं आता। फटे कपड़े और टूटे खिलौने देने का मतलब है उन्हें फेंकने का झंझट किसी और के सिर डाल देना।
आम तौर पर ये रास्ते काम आते हैं: बिल्डिंग का अपना स्टाफ और उनके परिवार, कोई स्थानीय NGO या अनाथालय, गुरुद्वारे या मंदिर का कलेक्शन, और मुंबई की कई संस्थाएँ जो बुलाने पर कपड़े और घरेलू सामान ले जाती हैं। कई सोसाइटी दिवाली से पहले कलेक्शन पॉइंट लगाती हैं। आपकी सोसाइटी में न हो, तो सोसाइटी ग्रुप में एक संदेश डालने से अक्सर शुरू हो जाता है।
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इलेक्ट्रॉनिक सामान, बैटरी और दवाइयाँ
यह वह सामान है जो सालों तक किसी दराज़ में पड़ा रहता है, और इसे घर के आम कचरे में सच में नहीं डालना चाहिए।
बंद पड़े फ़ोन, चार्जर, केबल, पुराने राउटर और छोटे उपकरण ई-वेस्ट हैं। मुंबई में रजिस्टर्ड ई-वेस्ट कलेक्टर हैं, कई ब्रांड पुराना सामान वापस लेने की योजनाएँ चलाते हैं, और ज़्यादातर कबाड़ी धातु और उपकरण ले लेते हैं। बैटरी को आम कूड़ेदान में नहीं, ई-वेस्ट के साथ दें।
एक्सपायर दवाइयों को न फ्लश करें, न खुली फेंकें। कुछ फ़ार्मेसी और अस्पताल उन्हें वापस लेते हैं। जहाँ यह सुविधा न हो, वहाँ आम सलाह यह है कि दवाइयाँ पैकिंग से निकालें, उनमें इस्तेमाल की हुई चायपत्ती जैसी कोई ऐसी चीज़ मिलाएँ जिसे कोई खाना न चाहे, थैले में सील करें और सूखे कचरे के साथ दें। इन्हें कभी बच्चों या जानवरों की पहुँच में न छोड़ें।
- फ़ोन, चार्जर, केबल, उपकरण: रजिस्टर्ड ई-वेस्ट कलेक्टर या कबाड़ी को दें।
- बैटरी: ई-वेस्ट के साथ दें, आम कूड़ेदान में कभी नहीं।
- दवाइयाँ: जहाँ फ़ार्मेसी वापस ले, वहाँ लौटाएँ; नहीं तो सील करके सूखे कचरे के साथ दें।
- पेंट, सॉल्वेंट, CFL बल्ब: ये खतरनाक कचरा हैं, जिन्हें BMC अलग से संभालती है।
- काँच और चीनी-मिट्टी: फेंकने से पहले लपेट दें, ताकि उठाने वाले को चोट न लगे।
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क्या सच में निकालना ही चाहिए
सूची छोटी है, और वास्तु में बार-बार इन्हीं चीज़ों का नाम आता है: टूटे शीशे, चटके और दरार वाले बर्तन, बंद पड़ी घड़ियाँ, फटी चटाइयाँ, मर चुके पौधे और सूखे फूल, न लिखने वाले पेन, और वह हर चीज़ जो ऐसी मरम्मत के इंतज़ार में पड़ी है जो कभी होने वाली नहीं।
यहाँ परखने का सही तरीका इरादा नहीं, तारीख़ है। कोई चीज़ मरम्मत के इंतज़ार में है, तो उसे इसी महीने की एक तारीख़ दें। तारीख़ निकल जाए तो मान लें कि वह टूटी हुई है, और परंपरा यही तो कहती है कि ऐसी चीज़ें रखे रहना छोड़ें।
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ढेर को वापस लगने से कैसे रोकें
ज़्यादातर घर तीन महीने में फिर भर जाते हैं, और अक्सर उन्हीं दो जगहों पर: उत्तर-पूर्व का कोना और फ़्लैट का केंद्र।
दो आदतें काम करती हैं। पहली, घर में जो भी नई चीज़ आए, वह किसी पुरानी चीज़ की जगह ले, उसके साथ एक और चीज़ बनकर न जुड़ जाए। दूसरी, उत्तर-पूर्व और फ़्लोर प्लान का बीच का हिस्सा सामान रखने की जगह नहीं हैं। वहाँ जो भी आकर पड़े, उसे उसी हफ़्ते हटा दें।
बस इतना ही है। दिवाली आपको साल में एक बार साफ़ घर देती है, और ये दो आदतें उसे फ़रवरी में भी वैसा ही रखती हैं।
सवाल
आम सवाल
दिवाली से पहले क्या-क्या फेंक देना चाहिए?
टूटे शीशे, चटके बर्तन, बंद घड़ियाँ, फटी चटाइयाँ, मर चुके पौधे, सूखे फूल और वह हर चीज़ जो ऐसी मरम्मत के इंतज़ार में है जो होने वाली नहीं। मरम्मत वाली चीज़ों को एक तारीख़ दें; तारीख़ निकल जाए तो उसे टूटा हुआ मानें।
मुंबई में पुराना इलेक्ट्रॉनिक सामान कहाँ दें?
रजिस्टर्ड ई-वेस्ट कलेक्टर, किसी ब्रांड की पुराना सामान वापस लेने की योजना या कबाड़ी के पास। बैटरी आम कूड़ेदान में नहीं, ई-वेस्ट के साथ जाती है, और कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान घर के कचरे में नहीं डालना चाहिए।
एक्सपायर दवाइयाँ कैसे फेंकें?
जहाँ फ़ार्मेसी या अस्पताल वापस लेता हो, वहाँ दें। नहीं तो उन्हें पैकिंग से निकालें, इस्तेमाल की हुई चायपत्ती जैसी किसी ऐसी चीज़ में मिलाएँ जिसे कोई खाना न चाहे, थैले में सील करें और सूखे कचरे के साथ दें। इन्हें कभी खुला न फेंकें और कभी बच्चों या जानवरों की पहुँच में न छोड़ें।
क्या पुरानी चीज़ें किसी को देना अशुभ होता है?
नहीं। काम की चीज़ें किसी को देना परंपरा में फेंकने से बेहतर माना जाता है। जो चीज़ आप खुद इस्तेमाल नहीं करेंगे, उसे आगे देना किसी के काम नहीं आता, उससे बस फेंकने का झंझट किसी और के सिर चला जाता है।
हर साल सामान का ढेर वापस क्यों लग जाता है?
क्योंकि छँटाई अक्सर सामान निकालते समय नहीं, उसके बाद होती है। इसलिए ढेर घर से जाता नहीं, बस एक जगह से दूसरी जगह खिसक जाता है। फ़र्क तब पड़ता है जब आप सामान निकालते-निकालते ही उसे देने, रीसायकल करने, लौटाने और फेंकने वाले ढेरों में छाँटते चलें।
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