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गाइड · · 8 मिनट में पढ़ें

वास्तु विशेषज्ञ से किसे सलाह लेनी चाहिए? घर की जाँच के संकेत

पक्का नहीं कि घर को वास्तु विशेषज्ञ की ज़रूरत है या बस अच्छी साफ़-सफ़ाई की? जानिए किन संकेतों पर ध्यान दें, परामर्श किस समय सबसे ज़्यादा काम आता है, और कब पहले किसी दूसरे विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए।

लेखिका: , वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

वास्तु विशेषज्ञ से किसे सलाह लेनी चाहिए? घर की जाँच के संकेत

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क्या घर में कुछ है जो चुपचाप आपको खटक रहा है?

अगर घर में कुछ समय से कुछ खटक रहा है और आप ठीक-ठीक बता नहीं पा रहे कि क्या, तो यह ग़ौर से देखने की अच्छी वजह है, हालाँकि हर बार तुरंत विशेषज्ञ बुलाने की वजह नहीं। ज़्यादातर लोग धीरे-धीरे इस मोड़ तक पहुँचते हैं। नींद पहले जैसी गहरी नहीं रही, एक कमरा कभी आरामदायक नहीं लगता, छोटी-मोटी मरम्मत ख़त्म ही नहीं होती, या घर बदलने के बाद से परिवार ज़्यादा चिड़चिड़ा रहने लगा है। कुछ भी बहुत बड़ा ग़लत नहीं है, फिर भी लगता है कि घर अब आपका साथ नहीं दे रहा।

ऐसे में यह सोचना बिलकुल स्वाभाविक है कि कहीं इसमें वास्तु की कोई भूमिका तो नहीं, और यह सोचना भी उतना ही स्वाभाविक है कि कहीं आप ज़रूरत से ज़्यादा तो नहीं सोच रहे। यह गाइड इन दोनों बातों को अलग करने में आपकी मदद के लिए है: क्या आप ख़ुद जाँचकर बदल सकते हैं, क्या वास्तु सलाहकार को दिखाना ठीक रहेगा, और क्या बात सबसे पहले डॉक्टर, काउंसलर, सीए या वकील के पास ले जानी चाहिए।

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किन संकेतों से पता चलता है कि घर की वास्तु जाँच ज़रूरी है?

सबसे साफ़ संकेत है ऐसी परेशानी जो सफ़ाई, फ़ालतू सामान हटाने और मरम्मत के बाद भी बार-बार लौटती रहे। एक बुरा हफ़्ता तो ज़िंदगी का हिस्सा है; पर जब एक ही तरह की परेशानी महीने-दर-महीने लौटे, और अक्सर घर के एक ही हिस्से में, तो उसे ग़ौर से देखना चाहिए। वास्तु घर को वास्तु पुरुष मंडल के ज़रिए पढ़ता है, यानी वह ग्रिड जिसमें हर ज़ोन एक दिशा और एक तत्व से जुड़ा होता है। इसलिए सलाहकार सिर्फ़ यह नहीं देखते कि परेशानी क्या है, बल्कि यह भी कि वह घर के किस हिस्से में है।

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    एक कमरा जिसमें कोई जाना नहीं चाहता

    अगर किसी बेडरूम में किसी को ठीक से नींद नहीं आती, या पढ़ाई का कमरा ख़ाली पड़ा रहता है और सब डाइनिंग टेबल पर बैठकर काम करते हैं, तो अक्सर उस ज़ोन की रोशनी, बनावट या चीज़ों की जगह देखने की ज़रूरत होती है।

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    घर बदलने के बाद शुरू हुई परेशानियाँ

    अगर नए घर में आने के कुछ ही समय बाद नींद, मूड या काम में बदलाव आया है, तो नए घर की बनावट को पुराने घर से मिलाकर देखना ठीक रहता है। पढ़ें: नए घर में शिफ़्ट होने के बाद शुरू हुई परेशानियाँ।

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    मरम्मत जो बार-बार करानी पड़े

    अगर एक ही जगह लीकेज, सीलन या फ़िटिंग बार-बार ख़राब हो, तो पहले उसकी ठीक से मरम्मत कराएँ, फिर उस ज़ोन को भी देखें।

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    घर जो कभी हल्का नहीं लगता

    खिड़कियाँ खुली होने पर भी कमरे अँधेरे और घुटन भरे रहते हैं, या घर का केंद्र, यानी ब्रह्मस्थान, फ़ालतू सामान से भरा और बंद-बंद-सा है।

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    मेहनत का फल जो मिलता नहीं दिखता

    लगातार मेहनत के बाद भी काम, बचत या बिज़नेस अटके हुए लगें, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। वास्तु यह देखता है कि आपकी जगह उस मेहनत का साथ दे रही है या नहीं।

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    बहसें जो एक ही जगह होती हों

    अगर तनाव ज़्यादातर डाइनिंग टेबल पर या किसी एक बेडरूम में भड़कता है, तो उस कमरे की व्यवस्था जाँचना ठीक रहेगा।

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वास्तु परामर्श का सबसे ज़्यादा फ़ायदा कब होता है?

वास्तु परामर्श का सबसे ज़्यादा फ़ायदा किसी जगह के बारे में बड़ा फ़ैसला लेने से पहले होता है, क्योंकि उस समय सलाह मानने में सबसे कम मेहनत लगती है। काग़ज़ पर कोई फ़ैसला बदलना, सालों तक उसके साथ जीने से कहीं आसान है।

अगर कोई फ़ैसला सामने नहीं है और आपकी चिंता छोटी है, तो किसी को बुलाने से पहले छोटी परेशानी या बड़ी परेशानी वाली आसान जाँचों से शुरुआत करें।

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    फ़्लैट ख़रीदते या बुक करते समय

    टोकन अमाउंट देने से पहले, ताकि नक्शे पर मुख्य द्वार, रसोई, टॉयलेट और मुख्य बेडरूम की जगह जाँची जा सके। शुरुआत के लिए मुंबई में फ़्लैट ख़रीदने से पहले की चेकलिस्ट पढ़ना अच्छा रहेगा।

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    घर या ऑफ़िस किराए पर लेते समय

    किराए की जगह के उपाय आप साथ ले जा सकते हैं, और इनके लिए मकान-मालिक की इजाज़त की ज़रूरत नहीं पड़ती।

  • 03

    निर्माण, रीडेवलपमेंट या रेनोवेशन के समय

    उसी समय, जब दीवारें, प्लंबिंग और रसोई का प्लेटफ़ॉर्म अभी सही जगह बनाए जा सकते हैं, ताकि बाद में सुधारना न पड़े।

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    दुकान, क्लिनिक या ऑफ़िस खोलते समय

    मालिक के बैठने की जगह, कैश काउंटर और प्रवेश द्वार पूरे कामकाजी दिन पर असर डालते हैं।

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    परिवार में कोई बदलाव आने पर

    घर में नन्हा मेहमान आने वाला हो, बुज़ुर्ग माता-पिता साथ रहने आ रहे हों, बच्चों के बोर्ड एग्ज़ाम शुरू हो रहे हों, या बच्चों के बाहर जाने के बाद घर शांत हो गया हो।

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इस स्थिति में कौन-सी सेवा ठीक रहेगी?

वास्तु तब ठीक बैठता है जब चिंता ख़ुद जगह से जुड़ी हो: उसकी दिशाएँ, बनावट, रोशनी, हवा और कौन-सी चीज़ कहाँ रखी है। वास्तु घर पर काम करता है, और घर के ज़रिए उसमें रहने वालों का सहारा बनता है। यह बीमारी की पहचान नहीं करता, झगड़े नहीं सुलझाता और पैसों की हालत नहीं सुधारता।

अगर भारीपन कमरे से ज़्यादा आपके भीतर महसूस होता है, तो शुरुआत के लिए रेकी, जो आराम देने वाला एक सौम्य अभ्यास है, शायद आपके लिए ज़्यादा ठीक रहे। अगर असल में आपको किसी फ़ैसले से पहले मन की स्पष्टता चाहिए, तो टैरो रीडिंग बात को सोच-समझकर देखने में मदद कर सकती है। क्रिस्टल रोज़ याद दिलाने वाले छोटे सहारे की तरह काम करते हैं और दोनों में से किसी के भी साथ चल सकते हैं। वास्तु, रेकी, टैरो या क्रिस्टल: आपको किसकी ज़रूरत है? वाली गाइड में इन चारों की तुलना साथ-साथ की गई है।

कुछ परेशानियों में पहले किसी और की ज़रूरत होती है। दरारें, सीलन और बिजली की ख़राबी के लिए बिल्डिंग इंजीनियर, प्लंबर या इलेक्ट्रीशियन चाहिए। सेहत से जुड़े लक्षणों के लिए डॉक्टर चाहिए, और लंबे समय तक मन उदास रहे तो काउंसलर। कर्ज़ या टैक्स की परेशानी के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट चाहिए, और प्रॉपर्टी या परिवार के विवाद के लिए वकील। वास्तु इन सबके साथ चल सकता है, पर इसकी वजह से इनमें कभी देर नहीं होनी चाहिए।

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वास्तु परामर्श में क्या होता है?

परामर्श आपकी चिंता समझने से शुरू होकर उपायों की एक लिखित सूची तक पहुँचता है, जिन्हें आप ख़ुद अपना सकें। डॉ. किमया पारिख-आंबेकर के साथ आम तौर पर ये कदम होते हैं:

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    दूर से विश्लेषण

    सबसे पहले आपका फ़्लोर प्लान, फ़ोटो और आपकी चिंताएँ ध्यान से देखी जाती हैं।

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    साइट पर माप

    मुंबई में हर ज़ोन को सही-सही पहचानने के लिए घर को कम्पास से नापा जाता है। मुंबई के बाहर नक्शा और फ़ोटो ऑनलाइन देखे जाते हैं।

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    विस्तार से बातचीत

    जाँच में क्या मिला, वह क्यों मायने रखता है, और आपके घर और बजट के हिसाब से कौन-से बदलाव सच में किए जा सकते हैं।

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    आपके घर के लिए लिखित रिपोर्ट

    हर कमरे के लिए साफ़-साफ़ उपाय, जिनमें तोड़-फोड़ की जगह पिरामिड, क्रिस्टल, रंग, धातु, नमक और रेकी का इस्तेमाल होता है। पढ़ें: बिना तोड़-फोड़ वास्तु उपाय।

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    फ़ॉलो-अप

    बदलावों के बाद घर कैसा लग रहा है, इसकी जाँच, और जहाँ ज़रूरत हो वहाँ थोड़ा फेरबदल।

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कॉल करने से पहले क्या तैयारी करें?

तैयारी आसान है: अपना फ़्लोर प्लान, कुछ फ़ोटो और एक छोटा-सा नोट रख लें कि क्या परेशान कर रहा है और कब से। वास्तु के कोई नियम पहले से जानने की ज़रूरत नहीं है।

लिख लें कि कौन-से कमरे असहज लगते हैं, हाल में क्या बदला है, और घर अपना है या किराए का। जो कुछ आप पहले से आज़मा चुके हैं, वह भी लिख लें। अगर नक्शा नहीं है, तो हाथ से बना स्केच, जिसमें मुख्य द्वार दिखाया गया हो, शुरुआत के लिए काफ़ी है। बाक़ी बातें ऑनलाइन परामर्श की चेकलिस्ट में हैं।

सबसे ज़रूरी बात, अपनी असली चिंता लेकर आएँ, चाहे वह छोटी लगे या आपको लगे कि उसका वास्तु से कोई लेना-देना नहीं। शांत और खुली बातचीत ही इस पूरी प्रक्रिया का सबसे काम का हिस्सा है। घर का प्राण (जीवन-ऊर्जा) और उसकी शांति सबसे साफ़ तौर पर वहीं से समझ आती है: उस घर में रहने वालों से।

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डॉ. किमया से कब बात करें

डॉ. किमया से तब बात करें जब घर या काम की जगह को लेकर कोई फ़ैसला आने वाला हो, या जब आसान उपाय कर लेने के बाद भी कोई चिंता बार-बार लौट आए। आपको यह पक्का होने की ज़रूरत नहीं कि यह वास्तु की ही समस्या है; मिलकर यह समझना पहली बातचीत का ही हिस्सा है।

जो हो रहा है उसे बताने के लिए मुफ़्त पहली कॉल से शुरुआत करें। अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर परामर्श होता है, और आपके फ़्लोर प्लान और फ़ोटो के आधार पर ऑनलाइन परामर्श भारत में कहीं भी और विदेश में भी उपलब्ध है। अगर वास्तु सही कदम नहीं है, तो आपको यह भी ईमानदारी से बता दिया जाएगा। साइट विज़िट के लिए वे भारत के दूसरे शहरों और विदेश भी जाती हैं; यह मुफ़्त पहली कॉल पर तय होता है।

सवाल

आम सवाल

कैसे पता करें कि घर में वास्तु की समस्या है?

सबसे साफ़ संकेत है बार-बार लौटने वाली परेशानी: सफ़ाई, मरम्मत और फ़ालतू सामान हटाने के बाद भी घर के एक ही हिस्से में एक ही तरह की परेशानी लौटती रहे। एक मुश्किल हफ़्ता तो आम ज़िंदगी है; पर ऐसा कमरा जिसका कोई इस्तेमाल नहीं करता, या घर बदलने के बाद शुरू हुई परेशानियाँ, ग़ौर से देखने लायक हैं।

क्या फ़्लैट ख़रीदने से पहले वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए?

हाँ, ख़रीदने से पहले का समय सलाह लेने के लिए सबसे काम के समयों में से एक है, और आदर्श यह है कि टोकन अमाउंट देने से पहले सलाह ली जाए। नक्शे पर मुख्य द्वार, रसोई, टॉयलेट और मुख्य बेडरूम की जगह जाँची जा सकती है, और आप चुने हुए फ़्लैटों की शांति से तुलना कर सकते हैं।

क्या बिना विशेषज्ञ के ख़ुद वास्तु ठीक किया जा सकता है?

बहुत कुछ आप ख़ुद कर सकते हैं: फ़ालतू सामान हटाना, टूटी चीज़ें ठीक कराना, अँधेरे कोनों में रोशनी करना और बिस्तर या डेस्क की दिशा बदलना। बनावट से जुड़ी बातों में विशेषज्ञ मदद करते हैं, जैसे टॉयलेट या रसोई की जगह, कटे हुए कोने और मुख्य द्वार की स्थिति, जिन्हें अकेले परखना मुश्किल होता है।

क्या वास्तु परामर्श का मतलब दीवारें तोड़ना है?

नहीं। डॉ. किमया के उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं, जिनमें पिरामिड, क्रिस्टल, रंग, धातु, नमक और रेकी का इस्तेमाल होता है। कुछ भी गिराना नहीं पड़ता, और ये उपाय अपने घर के साथ-साथ किराए के घर में भी अपनाए जा सकते हैं।

क्या वास्तु परामर्श ऑनलाइन हो सकता है?

हाँ। ऑनलाइन परामर्श आपके फ़्लोर प्लान, फ़ोटो और वीडियो कॉल पर बातचीत के आधार पर होता है, और मुंबई के बाहर या विदेश में रहने वाले किसी के लिए भी ठीक है। मुंबई में कम्पास से माप के साथ साइट विज़िट भी उपलब्ध है।

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डॉ. किमया से पूछें

अपना नंबर दीजिए, डॉ. किमया की टीम आपको वापस कॉल करेगी। पहली कॉल मुफ़्त है।

कॉल अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी या गुजराती में हो सकती है।

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