घर का वास्तु · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
वॉल क्लॉक वास्तु: घड़ी की सही दिशा
घड़ी किस दीवार पर लगाएँ? लिविंग रूम, बेडरूम, ऑफ़िस और बच्चों के कमरे के लिए दीवार घड़ी की दिशा का वास्तु, साथ में आकार, रंग और किन बातों से बचें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

01
वास्तु में दीवार घड़ी क्यों मायने रखती है?
वास्तु में दीवार घड़ी इसलिए मायने रखती है कि वह समय के चलने का प्रतीक है, और समय का गहरा नाता तरक्की, अवसर और रोज़ की लय से है। माना जाता है कि घड़ी कहाँ लगी है और चल रही है या नहीं, इसका असर इस पर पड़ता है कि ज़िंदगी कितनी सहजता से आगे बढ़ती है।
घर में जिन चीज़ों को बदलना सबसे आसान है, घड़ी भी उनमें से एक है। उसकी जगह बदलने में बस कुछ मिनट और एक कील लगती है, इसलिए मुंबई के किसी भी फ़्लैट या ऑफ़िस में यह बदलाव आसानी से किया जा सकता है।
02
दीवार घड़ी के लिए कौन-सी दिशा अच्छी है?
दीवार घड़ी के लिए उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व की दीवारें आमतौर पर अच्छी मानी जाती हैं। इन दिशाओं को नए अवसरों, तरक्की और स्पष्टता से जोड़ा जाता है।
01
उत्तर की दीवार
कुबेर की दिशा, जिसे धन और अवसरों से जोड़ा जाता है। यहाँ लगी घड़ी करियर और पैसों में स्थिर तरक्की से जुड़ी मानी जाती है।
02
पूर्व की दीवार
इंद्र और सूर्य की दिशा, जो उगते सूरज और नई शुरुआत से जुड़ी है। लिविंग रूम और स्टडी रूम के लिए ठीक रहती है।
03
उत्तर-पूर्व (ईशान्य) की दीवार
उत्तर-पूर्व (ईशान्य) को स्पष्टता से जोड़ा जाता है; इस ज़ोन में हल्की और सादी घड़ी ठीक रहती है।
04
पश्चिम की दीवार
जब उत्तर और पूर्व की दीवारों पर घड़ी लगाना संभव न हो, तब यह भी चल सकती है।
03
घड़ी कहाँ नहीं लगानी चाहिए?
आमतौर पर घड़ी को दक्षिण की दीवार पर, मुख्य द्वार के ऊपर या सीधे बिस्तर के ऊपर नहीं लगाना चाहिए। परंपरा से इन जगहों को धीमी पड़ती तरक्की या बिगड़ी नींद से जोड़ा जाता है।
01
दक्षिण की दीवार
यम की दिशा, जिसे समाप्ति से जोड़ा जाता है; परंपरा से घड़ियाँ कहीं और लगाई जाती हैं।
02
मुख्य द्वार के ऊपर
प्रवेश द्वार के ऊपर लगी घड़ी के बारे में माना जाता है कि वह आते-जाते लोगों में दबाव का एहसास पैदा करती है।
03
बिस्तर के ऊपर या सामने
सिरहाने की ओर टिक-टिक करती घड़ी नींद में खलल डाल सकती है; उसे बगल की दीवार पर लगाएँ।
04
आपके बैठने की जगह के पीछे
ऑफ़िस में कुर्सी के पीछे लगी घड़ी से जल्दबाज़ी का एहसास हो सकता है; उसे ऐसी जगह लगाएँ जहाँ आपको सामने से दिखे।
04
बंद या टूटी घड़ियों का क्या करें?
बंद या टूटी घड़ियों को जल्दी ठीक करवाएँ या हटा दें, क्योंकि वास्तु में उन्हें ठहराव से जोड़ा जाता है। गलत समय बताने वाली घड़ी का समय भी सही कर दें।
बैटरी समय पर बदलें, और घड़ी को जानबूझकर आगे या पीछे न चलाएँ, उसे लगभग सही समय पर ही रखें। जो पुरानी पुश्तैनी घड़ियाँ अब नहीं चलतीं, उन्हें ठीक करवाया जा सकता है, या फिर सजाकर रखने की जगह आदर से संभालकर रख दिया जा सकता है।
05
हर दिशा के लिए घड़ी का कौन-सा आकार और रंग ठीक है?
गोल, चौकोर और आयताकार, सभी घड़ियाँ ठीक रहती हैं। रंग या सामग्री दीवार की दिशा के हिसाब से चुन लें, तो यह और भी अच्छा लगता है। नुकीले, चुभते-से आकार या गहरे, भारी डिज़ाइन वाली घड़ियों से बचें।
01
उत्तर
नीला, हरा या सफ़ेद रंग, और जल तत्व से जुड़े गोल या लहरदार आकार।
02
पूर्व
लकड़ी के फ़्रेम, हरे या हल्के भूरे रंग, और काष्ठ तत्व से जुड़े आयताकार आकार।
03
पश्चिम
मेटैलिक सिल्वर, सुनहरा या सफ़ेद रंग, और धातु तत्व से जुड़े गोल आकार।
04
पेंडुलम वाली घड़ियाँ
हल्के से झूलते पेंडुलम अक्सर उत्तर या पूर्व के लिविंग एरिया में लगाए जाते हैं।
06
कमरे-दर-कमरे घड़ी कैसे लगाएँ?
हर कमरे में दिशा का वही सिद्धांत लागू होता है, बस कमरे के इस्तेमाल के हिसाब से थोड़ा बदलाव करना होता है।
01
लिविंग रूम
उत्तर या पूर्व की दीवार, जहाँ परिवार को आसानी से दिखे।
02
बेडरूम
पूर्व या उत्तर की दीवार पर शांत, बिना टिक-टिक वाली घड़ी, सिरहाने से दूर।
03
स्टडी रूम
विद्यार्थी के सामने पूर्व या उत्तर की दीवार, ताकि वह पढ़ाई का समय तय कर सके।
04
रसोई
पूर्व या उत्तर की दीवार, जहाँ से खाना पकाने की जगह से दिखे, पर गर्मी और भाप से दूर।
05
ऑफ़िस या केबिन
आपके सामने उत्तर या पूर्व की दीवार, ताकि मुड़े बिना समय दिख जाए।
07
किन आसान आदतों से घड़ियाँ सहायक बनी रहती हैं?
कुछ आसान आदतों से घड़ियाँ सहायक बनी रहती हैं: उनकी धूल नियमित रूप से झाड़ें, उन्हें आरामदायक ऊँचाई पर लगाएँ और एक कमरे में बहुत सारी घड़ियाँ न रखें। ज़्यादातर जगहों के लिए एक साफ़ दिखने वाली, ठीक जगह लगी घड़ी काफ़ी है।
अगर आपके घर में कोई पुरानी घड़ी है जो पीढ़ियों से परिवार में चली आ रही है, तो उसे लिविंग रूम की उत्तर या पूर्व की दीवार पर सम्मान की जगह दें। उसमें चाबी भरते रहें, उसे चमकाकर रखें और लगातार चलने दें — इस तरह वास्तु की एक सलाह परिवार की प्यारी परंपरा बन जाती है।
घड़ी भेंट में देना परिवार की रीति पर निर्भर है; कुछ घरों में इससे परहेज़ किया जाता है, तो कुछ इसे आने वाले अच्छे समय की शुभकामना मानते हैं। जो आपके परिवार को ठीक लगे, वही करें।
08
वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें
जब आप घर या ऑफ़िस को नए सिरे से जमा रहे हों और चाहते हों कि घड़ियों से लेकर लॉकर तक हर चीज़ सही तालमेल में रखी जाए, तब वास्तु विशेषज्ञ से मिलें। छोटे बदलाव अक्सर तब सबसे ज़्यादा काम आते हैं जब वे पूरी जाँच का हिस्सा हों।
VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अपने अंधेरी ईस्ट के ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर जाकर कमरे-दर-कमरे परामर्श देती हैं, और फ़्लोर प्लान व तस्वीरों के आधार पर दूर बैठे भी परामर्श देती हैं।
सवाल
आम सवाल
वास्तु के अनुसार घड़ी के लिए कौन-सी दीवार अच्छी है?
वास्तु के अनुसार घड़ी के लिए आमतौर पर उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की दीवार अच्छी मानी जाती है। इन दिशाओं को अवसर, तरक्की और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है।
क्या घड़ी दक्षिण की दीवार पर लगाई जा सकती है?
वास्तु में परंपरा से घड़ी को दक्षिण की दीवार पर लगाने से बचा जाता है। अगर कोई और दीवार उपलब्ध न हो, तो शांत और सादी घड़ी चुनें और उसे चालू तथा सही समय पर रखें।
क्या बेडरूम में घड़ी लगानी चाहिए?
बेडरूम में घड़ी पूर्व या उत्तर की दीवार पर, सिरहाने से दूर, लगाई जा सकती है। ऐसी घड़ी चुनें जो बिल्कुल बिना आवाज़ की या हल्की टिक-टिक वाली हो, ताकि नींद में खलल न पड़े।
क्या वास्तु में बंद घड़ी अच्छी नहीं मानी जाती?
वास्तु में बंद घड़ी को ठहराव से जोड़ा जाता है। उसे दीवार पर बंद पड़ी न रहने दें — ठीक करवाएँ, बैटरी बदलें या दीवार से उतार दें।
ऑफ़िस में घड़ी कहाँ लगानी चाहिए?
ऑफ़िस में घड़ी को अपने सामने उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाएँ। उसे सीधे अपनी कुर्सी के पीछे या केबिन के दरवाज़े के ऊपर लगाने से बचें।
यही सब अपने घर या ऑफ़िस में करवाना चाहते हैं?
मुफ़्त परामर्श बुक करें
