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जेन ज़ी और बच्चे · 19 सितंबर 2026 · 6 मिनट में पढ़ें

छोटे बच्चों के नर्सरी रूम और प्ले एरिया के लिए वास्तु

अपने नन्हे बच्चे के लिए नर्सरी या खेलने का कोना बना रहे हैं? मुंबई के छोटे घरों के लिए दिशा, पालने की जगह, रंग, खिलौनों और सुरक्षा पर नर्सरी रूम वास्तु के आसान सुझाव।

लेखिका: , वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

छोटे बच्चों के नर्सरी रूम और प्ले एरिया के लिए वास्तु

01

वास्तु के अनुसार नर्सरी के लिए कौन-सी दिशा ठीक है?

नर्सरी के लिए घर का पश्चिम या उत्तर-पश्चिम हिस्सा ठीक रहता है, और पूर्व भी शुभ माना जाता है। पश्चिम को ठहराव और आरामदायक नींद से जोड़ा जाता है, उत्तर-पश्चिम को गति और खुशमिज़ाजी से, और पूर्व को सुबह के सूरज की ताज़ा ऊर्जा से।

दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) आम तौर पर माता-पिता या घर के मुखिया के लिए रखा जाता है। मुंबई के छोटे फ़्लैट में शुरुआती सालों में बच्चा अक्सर माता-पिता के कमरे में ही सोता है, और इसमें कोई हर्ज नहीं है। बस नीचे दिए सुझावों से उसी कमरे में बच्चे के लिए एक कोमल-सा कोना बना लें।

02

बच्चे का पालना कहाँ रखना चाहिए?

पालना ऐसे रखें कि बच्चे का सिर पूर्व या दक्षिण की ओर रहे और उसकी कम से कम एक तरफ़ ठोस दीवार हो। यह वही सोने की दिशा है जो वास्तु घर के बाकी सदस्यों के लिए भी बताता है।

  • 01

    बीम के नीचे नहीं

    पालना सीधे बीम या भारी ऊपरी स्टोरेज के नीचे न रखें।

  • 02

    दरवाज़े की सीध से दूर

    पालना दरवाज़े की सीधी रेखा में न हो, ताकि आने-जाने से बच्चे की नींद न टूटे।

  • 03

    पालने के सामने शीशा नहीं

    बिस्तर के सामने रखे शीशे को बेचैन नींद से जोड़ा जाता है। उसे हटा दें या ढक दें।

  • 04

    खिड़की से सुरक्षित दूरी

    सुरक्षा के लिए पालना खिड़कियों, ब्लाइंड की डोरियों और ग्रिल से दूर रखें।

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छोटे बच्चे की नर्सरी के लिए कौन-से रंग ठीक रहते हैं?

नर्सरी में कोमल, हल्के और खिले-खिले रंग अच्छे लगते हैं, जैसे क्रीम, हल्का पीला, हल्का हरा, आसमानी नीला या हल्का पीच। ऐसे रंग नींद के लिए सुकून देते हैं और खेलने के लिए काफ़ी उजले भी रहते हैं।

पूरी दीवारों पर बहुत गहरे या तेज़ रंग न करवाएँ। अगर आपको चटक रंग पसंद हैं, तो उन्हें थोड़ा-थोड़ा ही इस्तेमाल करें, जैसे किसी रग में, कुशन में या पूर्व या उत्तर की दीवार पर लगी तस्वीर में। जानवरों, पेड़ों या सूरज के वॉल स्टिकर भी लगा सकते हैं, बच्चा बड़ा होता जाए तो इन्हें बदलना आसान रहता है।

04

घर में प्ले एरिया कहाँ होना चाहिए?

प्ले एरिया के लिए उत्तर, पूर्व या उत्तर-पश्चिम ठीक रहते हैं, जहाँ रोशनी हो, फ़र्श खुला हो और चलने-फिरने की जगह हो। इन ज़ोन को बढ़त, ताज़गी और हलचल से जोड़ा जाता है, और छोटे बच्चे भी तो इसी तरह हर चीज़ को छूकर, टटोलकर दुनिया को समझते हैं।

  • 01

    नरम फ़र्श

    प्ले मैट या रग बिछा दें, तो बच्चे को घुटनों के बल चलने और ब्लॉक जोड़ने के लिए एक तय, सुरक्षित जगह मिल जाती है।

  • 02

    खुला केंद्र

    घर का ब्रह्मस्थान (केंद्र) खुला रखें। वहाँ खिलौनों के बड़े-बड़े बॉक्स का ढेर न लगाएँ।

  • 03

    प्राकृतिक रोशनी

    पूर्व या उत्तर से दिन की रोशनी आती हो, तो खेलने के कोने में रौनक रहती है।

  • 04

    नज़र रखना आसान हो

    ऐसी जगह चुनें जो रसोई या लिविंग रूम से दिखाई दे।

05

खिलौने और बच्चे का सामान कैसे रखें?

खिलौने और बच्चे का सामान कमरे के पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में, नीची बंद टोकरियों या शेल्फ़ में रखें। इससे उत्तर-पूर्व हल्का रहता है और रोज़ समेटना भी आसान हो जाता है।

सारे खिलौने एक साथ बाहर न फैलाएँ, उन्हें बदल-बदलकर दें। एक बार में कम खिलौने हों तो कमरा शांत रहता है और अक्सर बच्चा ज़्यादा देर उनमें लगा रहता है। टूटे खिलौनों को ठीक करवा लें या हटा दें, क्योंकि वास्तु में टूटी चीज़ों को रुकी हुई ऊर्जा से जोड़ा जाता है।

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नर्सरी ऐसी कैसे बनाएँ जो बच्चे के बड़े होने पर भी काम आए?

नर्सरी को ऐसे सोचकर बनाएँ कि आगे चलकर वह बच्चे का कमरा बन सके। फ़र्नीचर ऐसा लें जो हर साल बदलना न पड़े, बल्कि साथ-साथ ढल जाए। छोटे बच्चे जल्दी ही स्कूल जाने लगते हैं, और अभी थोड़ी योजना बना लेने से बाद में कमरा ठसाठस नहीं लगेगा।

कमरे के पूर्व या उत्तर की तरफ़ थोड़ी जगह छोड़ दें, जहाँ आगे चलकर छोटी स्टडी टेबल आ सके, ताकि पढ़ते समय बच्चे का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे। ऐसा पालना लें जो बाद में बिस्तर बन जाए, और नीची शेल्फ़ें लें जिनमें आगे चलकर किताबें रखी जा सकें। भारी अलमारियाँ शुरू से ही दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर रखें, इससे उत्तर और पूर्व हल्के और खुले रहते हैं।

  • 01

    ज़रूरत के हिसाब से बदलती लाइटिंग

    डिमर वाली सीलिंग लाइट और अलग से रीडिंग लैम्प, दोनों काम आते हैं, सोते समय की कहानियों में भी और आगे चलकर होमवर्क में भी।

  • 02

    सादा बेस रंग

    दीवारों का रंग हल्का रखें और रंगीन चीज़ें ऐसी लें जो बदली जा सकें। इस तरह दोबारा पेंट कराए बिना कमरे का रूप बदलता रहता है।

  • 03

    दिखाने की जगह

    पूर्व या उत्तर की एक दीवार बच्चे की ड्रॉइंग और चार्ट के लिए रखें। बड़े होते बच्चे को अपना काम दीवार पर देखकर लगता है कि उसने कुछ कर दिखाया है।

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क्या छोटे बच्चे के कमरे में क्रिस्टल और सजावटी चीज़ें सुरक्षित हैं?

क्रिस्टल और छोटी सजावटी चीज़ें छोटे बच्चे की पहुँच से पूरी तरह दूर रखें, क्योंकि छोटे टुकड़े गले में अटक सकते हैं। वास्तु के हिसाब से कौन-सी चीज़ कहाँ रखी जाए, इससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी बच्चे की सुरक्षा है।

अगर कमरे में कोई कोमल क्रिस्टल रखना चाहें, तो बड़ा और चिकना रोज़ क्वार्ट्ज़ या एमेथिस्ट चुनें और उसे किसी मज़बूत शेल्फ़ पर ऊँचाई पर रखें। नुकीले सिरे वाले पिरामिड, काँच की चीज़ें और लटकने वाली सजावट बच्चे की पहुँच में न रखें। जगह की शुद्धि के लिए इस्तेमाल होने वाले नमक के कटोरे भी ऊँचाई पर या किसी दूसरे कमरे में रखें।

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कौन-सी आसान आदतें नर्सरी को शांत बनाती हैं?

नर्सरी में शांति जितनी चीज़ों को सही जगह रखने से आती है, उतनी ही रोज़ की सहज आदतों से भी। सोने का समय तय हो और कमरा शांत हो, तो दोनों एक-दूसरे का साथ देते हैं।

  • 01

    हर सुबह ताज़ी हवा

    कुछ मिनट खिड़कियाँ खोलें, ताकि प्राण (जीवन ऊर्जा) और दिन की रोशनी अंदर आ सकें।

  • 02

    सोने के समय हल्की रोशनी

    शाम को हल्की, वॉर्म रोशनी रखें। इससे संकेत मिलता है कि अब आराम का समय है।

  • 03

    धीमी आवाज़

    लोरी, हल्का संगीत या सोते समय की शांत प्रार्थना एक सुकून देने वाली आदत बन सकती है।

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    साफ़-सुथरा रखें

    सोने से पहले खिलौने टोकरियों में वापस रख दें, ताकि कमरा सिमटा हुआ और शांत लगे।

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नर्सरी के लिए वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें

परामर्श तब काम आता है जब आप बच्चे के आने से पहले कमरा तैयार कर रहे हों, नए फ़्लैट में जा रहे हों, या घर की बनावट ऐसी हो कि कमरे में सामान जमाना मुश्किल लग रहा हो। डॉ. किमया पारिख-आंबेकर पूरे घर को देखती हैं, माता-पिता का बेडरूम भी और वह जगह भी जहाँ बच्चा आगे चलकर पढ़ेगा, और फिर ऐसे उपाय सुझाती हैं जो बच्चों के लिए सुरक्षित हों और बिना तोड़-फोड़ के हो जाएँ।

VastuKimaya अंधेरी ईस्ट में है। डॉ. किमया पूरे मुंबई में घरों पर साइट विज़िट करती हैं और फ़्लोर प्लान और फ़ोटो के ज़रिए दूर से भी परामर्श देती हैं। बच्चे की नींद, दूध पीने या विकास को लेकर कोई भी चिंता हो तो अपने बच्चों के डॉक्टर से ज़रूर बात करें। वास्तु उस देखभाल का विकल्प नहीं, उसके साथ सहायक है।

सवाल

आम सवाल

वास्तु के अनुसार बच्चे को किस दिशा में सिर करके सुलाना चाहिए?

सोते समय बच्चे का सिर पूर्व या दक्षिण की ओर होना चाहिए। पालना ठोस दीवार के सहारे रखें और बीम व शीशों से दूर रखें।

क्या बच्चा माता-पिता के दक्षिण-पश्चिम वाले बेडरूम में सो सकता है?

हाँ, बच्चा माता-पिता के दक्षिण-पश्चिम वाले बेडरूम में सो सकता है। पालने के लिए एक छोटा, कोमल कोना बना लें, जिसमें बच्चे का सिर पूर्व या दक्षिण की ओर रहे।

वास्तु में नर्सरी के लिए सही रंग कौन-सा है?

नर्सरी के लिए क्रीम, हल्का पीला, हल्का हरा या आसमानी नीला जैसे कोमल, हल्के रंग ठीक रहते हैं। चटक रंग बस थोड़ा-थोड़ा, छोटी-छोटी चीज़ों में ही इस्तेमाल करें।

वास्तु के अनुसार खिलौने कहाँ रखने चाहिए?

खिलौने कमरे के पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में, नीची बंद टोकरियों में रखें। उत्तर-पूर्व को हल्का और खुला रखें।

क्या बच्चे के कमरे में क्रिस्टल रखना सुरक्षित है?

क्रिस्टल तभी रखें जब वे बड़े और चिकने हों और पहुँच से काफ़ी दूर रखे जाएँ। छोटे क्रिस्टल और नुकीले पिरामिड कभी भी बच्चे की पहुँच में न हों।

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