घर का वास्तु · 17 सितंबर 2026 · 6 मिनट में पढ़ें
मुंबई में फ़्लैट ख़रीदने से पहले वास्तु चेकलिस्ट
मुंबई में नया या रीसेल फ़्लैट पक्का करने से पहले यह वास्तु चेकलिस्ट एक-एक करके देख लें: इमारत, प्रवेश, रसोई, बेडरूम, टॉयलेट, केंद्र और आकार, और यह भी कि किन बातों का उपाय हो सकता है और किनका नहीं।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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फ़्लैट ख़रीदने से पहले वास्तु क्यों जाँचें?
ख़रीदने से पहले वास्तु जाँच लें, तो आप ऐसा फ़्लैट चुन सकते हैं जिसका लेआउट पहले से ही आपके परिवार के अनुकूल हो, और रहने आने के बाद उसे सुधारना न पड़े। फ़्लैट ख़रीदना आम तौर पर किसी परिवार के सबसे बड़े फ़ैसलों में से एक होता है, और मुंबई में अक्सर एक ही टावर के कई मिलते-जुलते फ़्लैटों में से एक चुनना होता है। थोड़ी-सी वास्तु जाँच से यह चुनने में मदद मिल सकती है कि उनमें से आपके लिए कौन-सा ठीक बैठता है।
यह चेकलिस्ट साइट विज़िट के लिए है, चाहे आप नया प्रोजेक्ट देखने जाएँ, बन रहा टावर या रीसेल फ़्लैट। साथ में कम्पास रखें (फ़ोन का कम्पास भी चलेगा, बस उसे धातु से दूर, दो-तीन जगह खड़े होकर जाँच लें), फ़्लोर प्लान की एक कॉपी और यह सूची। कोई फ़्लैट परफ़ेक्ट नहीं होता, और इसमें कोई हर्ज नहीं: मक़सद यह समझना है कि आप क्या ख़रीद रहे हैं और कौन-सी बातें बाद में संतुलित की जा सकती हैं।
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इमारत और आसपास की जगह में क्या जाँचें?
शुरुआत इमारत से करें, क्योंकि पूरी इमारत और उसके प्लॉट की ऊर्जा में आपके फ़्लैट का भी हिस्सा होता है। देखें कि इमारत तक आने वाली सड़क कैसी है, सोसाइटी का गेट कहाँ है, और टावर के ठीक आसपास क्या-क्या है।
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प्लॉट और इमारत का आकार
चौकोर और आयताकार आकार संतुलित माने जाते हैं; जिस प्लॉट या इमारत का आकार जगह-जगह से कटा हो या बेढंगा हो, उसे ज़्यादा बारीकी से देखना पड़ सकता है।
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ठीक आसपास की जगह
पास में कोई बड़ा नाला, श्मशान या हाई-टेंशन टावर हो, या कोई सड़क सीधी इमारत के गेट पर आकर लगती हो, तो नोट कर लें।
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खुली जगह
परंपरा से यह अच्छा माना जाता है कि इमारत के उत्तर और पूर्व की ओर ज़्यादा खुली जगह हो।
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रोशनी और हवा
देखें कि आपके फ़्लैट में सुबह की रोशनी आएगी या पास का कोई ऊँचा टावर उसे रोक देगा।
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साझा हिस्से
लॉबी और लिफ़्ट के पास की जगह साफ़ और रोशन हो, तो यह अच्छा संकेत है कि सोसाइटी सबकी साझा ऊर्जा का ध्यान रखती है।
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फ़्लैट का मुख्य द्वार कैसे जाँचें?
कम्पास से देखें कि मुख्य द्वार किस दिशा में है, और फिर नोट करें कि वह उस दिशा के किस पद (उप-ज़ोन) में आता है, क्योंकि वास्तु में प्रवेश को सिर्फ़ मोटी-मोटी दिशा से नहीं, उसके पद से भी परखा जाता है। उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व के प्रवेश आम तौर पर अनुकूल माने जाते हैं, और बाक़ी दिशाओं के दरवाज़ों के लिए अपने-अपने उपाय हैं।
यह भी देखें कि दरवाज़ा खोलते ही सामने क्या पड़ता है। मुंबई में दरवाज़े के ठीक सामने लिफ़्ट, सीढ़ियाँ, किसी और फ़्लैट का दरवाज़ा या कचरे का शूट होना आम बात है। इसे संतुलित किया जा सकता है, पर पहले से पता होना अच्छा है। दरवाज़ा पूरा खुलना चाहिए, भीतर की ओर और घड़ी की सुई की दिशा में, और खुलते समय किसी फ़र्नीचर या दीवार से नहीं टकराना चाहिए।
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कौन-सा कमरा किस ज़ोन में होना चाहिए?
फ़्लोर प्लान के केंद्र से आठों दिशाएँ निकालें और देखें कि फ़्लैट का कौन-सा कमरा किस दिशा में पड़ता है, फिर उसे नीचे दी गई सलाह से मिलाएँ।
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रसोई
दक्षिण-पूर्व आदर्श है और उत्तर-पश्चिम भी चल जाता है; देखें कि किचन प्लेटफ़ॉर्म ऐसा हो कि खाना बनाने वाले का मुख पूर्व की ओर रहे।
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मुख्य बेडरूम
घर के मुखिया के लिए दक्षिण-पश्चिम आदर्श है; यह स्थिरता में सहायक है।
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पूजा या मंदिर की जगह
उत्तर-पूर्व, यानी ईशान्य ज़ोन में कोई कोना या आला, छोटे फ़्लैट में भी।
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बच्चों का कमरा
पश्चिम या उत्तर-पश्चिम ठीक रहता है, और उसमें स्टडी टेबल ऐसे रखने की जगह हो कि बैठने पर मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे।
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लिविंग रूम
उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व आदर्श है; जिन परिवारों में मेहमान अक्सर आते हैं, उनके लिए उत्तर-पश्चिम ठीक रहता है।
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टॉयलेट
ऐसा फ़्लैट न लें तो बेहतर, जिसमें टॉयलेट उत्तर-पूर्व में या फ़्लैट के केंद्र में हो; बाक़ी ज़ोन में हो तो उसे सँभालना आसान होता है।
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मुंबई के फ़्लैटों में आम वास्तु दोष क्या हैं?
शहर के फ़्लैटों में सबसे आम दिक़्क़तें ये हैं: उत्तर-पूर्व में टॉयलेट, उत्तर या उत्तर-पूर्व में रसोई, बालकनी या डक्ट की वजह से कटे हुए कोने, और तंग केंद्र। बिल्डर टावर का डिज़ाइन एक साथ बहुत-से फ़्लैटों को ध्यान में रखकर बनाते हैं, इसलिए लगभग हर फ़्लैट में कुछ न कुछ ठीक करना पड़ता है।
यह भी देखें कि दक्षिण-पश्चिम का कोना कटा हुआ तो नहीं, मुख्य बेडरूम उत्तर-पूर्व में तो नहीं, बिस्तर की जगह के ऊपर से बीम तो नहीं गुज़र रहीं, और मुख्य द्वार किसी कम अनुकूल पद में तो नहीं आता। ऐसी कोई बात दिखते ही फ़्लैट को मना न कर दें; उसे अपने फ़्लोर प्लान पर नोट कर लें।
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किन वास्तु दोषों का उपाय हो सकता है और किनमें मुश्किल आती है?
कौन-सा कमरा कहाँ है, इससे जुड़ी ज़्यादातर दिक़्क़तें बिना तोड़-फोड़ के उपायों से संतुलित की जा सकती हैं, जैसे रंग, धातु की पट्टियाँ, क्रिस्टल, पिरामिड, रेकी, और कमरे को किस काम में लिया जाए इसमें बदलाव। फ़्लैट के लिए ये उपाय ठीक बैठते हैं, क्योंकि टावर में आप न दीवारें खिसका सकते हैं, न प्लंबिंग।
जो बातें आपके बस में नहीं हैं, उनमें ज़्यादा मुश्किल आती है: आसपास का माहौल अनुकूल न होना, इमारत का आकार बहुत बेढंगा होना, या कुदरती रोशनी बिल्कुल न आना। अगर दो फ़्लैट बाक़ी हर तरह से एक जैसे हों, तो समझदारी इसी में है कि वह फ़्लैट लें जिसमें ऐसी बाहरी दिक़्क़तें कम हों। और याद रखें कि वास्तु देखने वाली बातों में से एक है; बजट, आने-जाने की दूरी, क़ानूनी जाँच, कारपेट एरिया और इमारत की हालत भी उतने ही देखने होते हैं।
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फ़्लैट ख़रीदने के बाद क्या करें?
फ़्लैट आपका हो जाए, तो एक साफ़-सुथरी शुरुआत की तैयारी करें: पूरे घर की अच्छी तरह सफ़ाई, जगह को शुद्ध करने की कोई सरल विधि, और जो दिन आपके परिवार को ठीक लगे उस दिन गृह प्रवेश। फिर फ़र्नीचर आने से पहले ही मुख्य ज़ोन तैयार कर लें।
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फ़र्नीचर काग़ज़ पर तय करें
फ़र्नीचर ख़रीदने से पहले दिशा के हिसाब से निशान लगा लें कि बिस्तर, सोफ़ा, स्टडी टेबल और लॉकर कहाँ रहेंगे।
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केंद्र खुला रखें
ब्रह्मस्थान, यानी घर के केंद्र को, हल्का रखें और वहाँ फ़ालतू सामान न रखें।
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पहले पूजा का कोना तैयार करें
उत्तर-पूर्व का साफ़ कोना नए घर की एक कोमल, सकारात्मक शुरुआत है।
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रहने आने से पहले उपाय करें
ख़ाली घर में क्रिस्टल, पिरामिड या रंग की पट्टियाँ लगाना आसान होता है।
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ख़रीदने से पहले वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें
वास्तु विशेषज्ञ से मिलना तब काम आता है जब आपने दो-तीन फ़्लैट छाँट लिए हों और उनकी साफ़ तुलना चाहते हों, या जब जो फ़्लैट आपको बहुत पसंद है उसमें कोई ऐसा दोष हो जिसे लेकर आप उलझन में हों। प्रवेश का पद और ज़ोन की ठीक-ठीक सीमाएँ, जिन्हें विशेषज्ञ पढ़ता है, खुद सही-सही निकाल पाना मुश्किल होता है।
VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर साइट और फ़्लैट चुनने में मार्गदर्शन देती हैं। आपके फ़्लैट देखने जाने से पहले वे दूर से ही फ़्लोर प्लान और फ़ोटो देख सकती हैं, और अंधेरी ईस्ट के अपने ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर आकर कम्पास से नाप ले सकती हैं। इसके बाद व्यावहारिक उपायों वाली लिखित रिपोर्ट मिलती है।
सवाल
आम सवाल
क्या वास्तु के अनुसार उत्तर-मुखी फ़्लैट अच्छा है?
उत्तर-मुखी प्रवेश आम तौर पर अनुकूल माना जाता है, क्योंकि उत्तर कुबेर की दिशा है, यानी अवसरों की दिशा। फिर भी यह देखना ज़रूरी है कि दरवाज़ा ठीक किस पद में है, इसलिए फ़ैसला करने से पहले कम्पास से दिशा नाप लेने की सलाह दी जाती है।
क्या उत्तर-पूर्व में टॉयलेट वाला फ़्लैट लेने से बचना चाहिए?
ज़रूरी नहीं। उत्तर-पूर्व में टॉयलेट मुंबई के फ़्लैटों में आम दोष है और उसे बिना तोड़-फोड़ के उपायों से संतुलित किया जा सकता है, हालाँकि अगर आपके सामने वैसा ही कोई दूसरा फ़्लैट हो जिसमें यह दोष न हो, तो उसे लेना ज़्यादा आसान रह सकता है।
क्या वास्तु में मंज़िल का नंबर मायने रखता है?
वास्तु में मंज़िल के नंबर से ज़्यादा इस पर ध्यान दिया जाता है कि प्रवेश किस दिशा में है, कमरे कहाँ हैं और रोशनी कैसी आती है।
क्या बिल्डर के फ़्लोर प्लान से वास्तु जाँचा जा सकता है?
हाँ, अगर फ़्लोर प्लान पर उत्तर दिशा सही दिखाई गई हो, तो उससे शुरुआती वास्तु जाँच हो सकती है। उसके बाद साइट पर कम्पास से नाप लेकर दिशाएँ और प्रवेश का पद पक्का किया जाता है।
क्या रीसेल फ़्लैट के लिए वास्तु मायने रखता है?
हाँ। रीसेल फ़्लैट में यह भी नोट करें कि पिछले मालिकों ने ढाँचे में क्या बदलाव कराए हैं, जैसे दो कमरों को मिलाकर एक करना या रसोई को दूसरी जगह ले जाना, क्योंकि इनसे मूल ज़ोन बदल जाते हैं।
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