कमर्शियल वास्तु · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
स्कूल और कोचिंग क्लास का वास्तु: विद्यार्थियों के लिए
स्कूल, कोचिंग क्लास और ट्यूशन सेंटर के लिए व्यावहारिक वास्तु: प्रवेश द्वार, बैठने की दिशा, लाइब्रेरी, रंग और पढ़ाई में मन लगाने वाली जगह के लिए आसान उपाय।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

01
स्कूल और कोचिंग क्लास के लिए वास्तु क्यों मायने रखता है?
स्कूल और कोचिंग क्लास के लिए वास्तु इसलिए मायने रखता है क्योंकि पढ़ाई की जगह कैसी बनी है, इसका असर इस पर पड़ता है कि विद्यार्थी वहाँ कितने शांत, चौकस और एकाग्र रहते हैं। सोच-समझकर बनाए गए संस्थान में विद्यार्थियों और शिक्षकों को शांत और आगे बढ़ाने वाला माहौल मिलता है, जो समय के साथ पढ़ाई, नतीजों और साख, तीनों में सहायक होता है।
वास्तु में विद्या की जगह को खास आदर से देखा जाता है। विद्या की देवी सरस्वती को परंपरागत रूप से ज्ञान के लिए याद किया जाता है, और कक्षाओं की योजना में स्पष्टता और उन्नति से जुड़ी दिशाओं, यानी उत्तर-पूर्व, पूर्व और उत्तर, को महत्व दिया जाता है।
ये सिद्धांत बड़े स्कूल कैंपस पर भी उतने ही लागू होते हैं जितने मुंबई के किसी व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में दो कमरों की कोचिंग क्लास पर। ज़्यादातर सुधारों के लिए कोई निर्माण कार्य नहीं करना पड़ता।
02
स्कूल का प्रवेश द्वार किस दिशा में होना चाहिए?
स्कूल या संस्थान का मुख्य प्रवेश द्वार आदर्श रूप से पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर होता है, जिन्हें पढ़ाई और नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। उत्तर का प्रवेश द्वार भी अच्छा रहता है।
पहले से बनी इमारतों में चलने वाली कोचिंग क्लास में प्रवेश द्वार आमतौर पर पहले से तय होता है। उसे उजला, साफ़ और स्वागत भरा रखें, संस्थान का नाम साफ़ दिखे और दरवाज़े के आसपास जूते, बैग या डिब्बों का ढेर न हो। जहाँ प्रवेश द्वार कम अनुकूल पद में पड़ता हो, वहाँ धातु की पट्टी या पिरामिड जैसे बिना तोड़-फोड़ वाले उपाय किए जाते हैं।
प्रवेश द्वार के ठीक अंदर का रिसेप्शन या वेटिंग एरिया माता-पिता और विद्यार्थियों पर पहली छाप छोड़ता है। उसे उजला रखें, आरामदायक बैठने की जगह हो, उपलब्धियों और आने वाले कार्यक्रमों का नोटिस बोर्ड हो, और कक्षाओं तक जाने का रास्ता साफ़ हो। तंग और बिखरा रिसेप्शन हो तो अच्छे से चल रहे संस्थान में भी तनाव-सा महसूस हो सकता है, जबकि सलीके से रखा रिसेप्शन बिना कुछ कहे बता देता है कि यहाँ ध्यान भी रखा जाता है और अनुशासन भी है।
03
पढ़ते समय विद्यार्थियों का मुँह किस दिशा में होना चाहिए?
पढ़ते समय विद्यार्थियों का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए, और शिक्षक की मेज़ कक्षा के आगे रखी जाती है ताकि शिक्षक का मुँह भी पूर्व या उत्तर की ओर रहे। पूर्व को उगते सूरज और ताज़ा ऊर्जा से जोड़ा जाता है, और उत्तर को स्पष्टता और अवसर से।
यानी बोर्ड आमतौर पर पूर्व या उत्तर की दीवार पर होता है। जहाँ कमरे की बनावट से यह मुश्किल हो, वहाँ जगह के हिसाब से जितना हो सके, विद्यार्थियों का मुँह उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तर की ओर रखें, और बोर्ड वाली दीवार को साफ़-सुथरा और रोशन रखें।
01
बराबर और सलीके से बैठने की व्यवस्था
डेस्क सीधी कतारों में रखें और बीच में रास्ते छोड़ें, ताकि किसी विद्यार्थी को तंगी न लगे और कोई पीछे छिपा न रह जाए।
02
बीम के नीचे न बैठाएँ
डेस्क को भारी बीम के ठीक नीचे न रखें; जहाँ टाला न जा सके, वहाँ फ़ॉल्स सीलिंग या हल्के रंग का पेंट उसका असर हल्का कर देता है।
03
शिक्षक के पीछे ठोस दीवार
शिक्षक के पीछे ठोस दीवार हो, खिड़की या दरवाज़ा नहीं।
04
नुकीले कोनों का असर हल्का करें
कक्षाओं के भीतर खंभों और नुकीले कोनों का असर गोल किनारी, पौधों या सॉफ़्ट बोर्ड से हल्का किया जा सकता है।
04
लाइब्रेरी, लैब और स्टाफ़ रूम कहाँ हों?
लाइब्रेरी उत्तर-पूर्व या उत्तर में ठीक रहती है, प्रयोगशालाएँ उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में, और प्रशासनिक व शिक्षकों के हिस्से दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण में।
01
लाइब्रेरी
उत्तर-पूर्व या उत्तर में; सलीके से रखी और रोशन हो, बैठने की आरामदायक जगह हो और विद्यार्थियों का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे।
02
साइंस और कंप्यूटर लैब
उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में, जहाँ हवा की अच्छी आवाजाही हो और सुरक्षा के सही इंतज़ाम हों।
03
प्रिंसिपल या डायरेक्टर का केबिन
दक्षिण-पश्चिम में, और बैठते समय मुँह उत्तर या पूर्व की ओर रहे; यह स्थिरता और अधिकार के लिए है।
04
अकाउंट्स और फ़ीस काउंटर
दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में, और कैश लॉकर उत्तर की ओर खुले।
05
खेल का मैदान
कैंपस के पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व में खुली जगह।
06
टॉयलेट
इमारत के उत्तर-पूर्व और केंद्र में न रखें; उत्तर-पश्चिम या पश्चिम आमतौर पर ज़्यादा ठीक है।
05
कक्षाओं और पढ़ने की जगहों के लिए कौन-से रंग ठीक हैं?
क्रीम, हल्का पीला, नरम हरा और फीका नीला जैसे हल्के, शांत रंग कक्षाओं और पढ़ने की जगहों के लिए ठीक रहते हैं। इनसे कमरे उजले रहते हैं, आँखें कम थकती हैं और घंटों तक ध्यान लगाए रखने में मदद मिलती है।
हल्के पीले को परंपरागत रूप से विद्या और प्रसन्नता से जोड़ा जाता है, हरे को विकास और संतुलन से, और फीके नीले को शांति से। बहुत गहरे रंग, तीखे लाल और भड़कीले डिज़ाइन आमतौर पर कक्षाओं में नहीं रखे जाते। एक्सेंट रंग, चार्ट और विद्यार्थियों की बनाई कलाकृतियाँ कमरे में रौनक ला सकती हैं, और कमरा भरा-भरा भी नहीं लगता।
दीवारों का रंग जितना अहम है, उतनी ही अहम प्राकृतिक रोशनी भी है। खिड़कियाँ साफ़ रखें, पर्दे हल्के हों और ट्यूब लाइटें ठीक चलती हों, खासकर उन कोचिंग क्लास में जो शाम तक चलती हैं।
06
पहले से चल रही कोचिंग क्लास के लिए आसान वास्तु उपाय
पहले से चल रही कोचिंग क्लास को आसान और बिना तोड़-फोड़ वाले उपायों से बेहतर बनाया जा सकता है, जिनसे पढ़ाई में रुकावट नहीं आती।
01
उत्तर-पूर्व से फ़ालतू सामान हटाएँ
जमा करके रखी किताबें, पुराना फ़र्नीचर और डिब्बे उत्तर-पूर्व कोने से हटाएँ; उसे खुला और रोशन रखें।
02
पढ़ाई का एक कोना बनाएँ
उत्तर-पूर्व या पूर्व में देवी सरस्वती की छोटी तस्वीर या कोई प्रेरक वाक्य ध्यान लगाने वाला माहौल बनाता है।
03
ध्यान के लिए क्रिस्टल
शिक्षक की मेज़ या लाइब्रेरी के कोने में क्लियर क्वार्ट्ज़ या एमेथिस्ट रखना स्पष्टता और शांति में सहायक माना जाता है।
04
ताज़ी हवा और ध्वनि
बैचों के बीच कमरों में हवा आने दें, और क्लास की शुरुआत में घंटी बजाकर या पल भर मौन रखकर विद्यार्थियों का मन शांत करें।
05
पिरामिड
किराए की जगह में कटे हुए कोनों या संवेदनशील ज़ोन के टॉयलेट को संतुलित करने के लिए एक्टिवेटेड पिरामिड इस्तेमाल हो सकते हैं।
07
वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें
जब आप नए स्कूल या कोचिंग क्लास के लिए जगह चुन रहे हों, इंटीरियर की योजना बना रहे हों, या लगे कि अच्छी पढ़ाई के बावजूद सेंटर में विद्यार्थी नहीं आ रहे या टिक नहीं रहे, तब वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लें। विशेषज्ञ की जाँच से पता चलता है कि आपके लेआउट में कौन-से कमरे क्लास, ऑफ़िस और लाइब्रेरी के लिए ठीक हैं।
डॉ. किमया पारिख-आंबेकर हर संस्थान के हिसाब से सुझाव देती हैं, एक कमरे की ट्यूशन क्लास से लेकर बड़े कैंपस तक। परामर्श अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर, या फ़्लोर प्लान और फ़ोटो के आधार पर दूर से होते हैं।
वास्तु पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल बनाने में सहायक है। यह अच्छी पढ़ाई, प्यार भरे अनुशासन और हर विद्यार्थी की भलाई के ख़याल के साथ मिलकर काम करता है; इनकी जगह कभी नहीं ले सकता।
सवाल
आम सवाल
कक्षा का बोर्ड किस दिशा में होना चाहिए?
बोर्ड आदर्श रूप से पूर्व या उत्तर की दीवार पर होता है, ताकि पढ़ते समय विद्यार्थियों का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे। जहाँ कमरे में यह संभव न हो, वहाँ उन्हें ऐसे बैठाएँ कि मुँह जितना हो सके इन्हीं दिशाओं की ओर रहे।
वास्तु के अनुसार प्रिंसिपल का ऑफ़िस कहाँ होना चाहिए?
प्रिंसिपल या डायरेक्टर का ऑफ़िस इमारत के दक्षिण-पश्चिम में ठीक रहता है, जहाँ प्रिंसिपल का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर हो और पीछे ठोस दीवार हो।
कोचिंग क्लास के लिए कौन-सा रंग अच्छा है?
कोचिंग क्लास के लिए हल्का पीला, क्रीम, नरम हरा और फीका नीला अच्छे रंग हैं। ये कमरे को उजला और शांत रखते हैं और लंबे समय तक ध्यान लगाने में सहायक हैं।
क्या किराए की कोचिंग क्लास में वास्तु लागू हो सकता है?
हाँ, किराए की कोचिंग क्लास में भी वास्तु अपनाया जा सकता है। इसके लिए बैठने की दिशा, फ़ालतू सामान हटाना, रंग, क्रिस्टल और पिरामिड जैसे बिना तोड़-फोड़ वाले उपाय किए जाते हैं, कोई निर्माण नहीं करना पड़ता।
स्कूल की इमारत में टॉयलेट कहाँ होने चाहिए?
टॉयलेट इमारत के उत्तर-पूर्व और केंद्र से दूर रखना बेहतर है। उत्तर-पश्चिम या पश्चिम वाले हिस्से आमतौर पर ज़्यादा ठीक रहते हैं।
यही सब अपने घर या ऑफ़िस में करवाना चाहते हैं?
मुफ़्त परामर्श बुक करें