घर का वास्तु · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
डाइनिंग टेबल वास्तु: आकार, दिशा और जगह
डाइनिंग टेबल कहाँ रखें, कौन-सा आकार और मटीरियल चुनें, खाते समय किस ओर मुँह रखें, और मुंबई के छोटे फ़्लैट में खाने के समय को शांत कैसे रखें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

01
डाइनिंग टेबल वास्तु क्यों मायने रखता है?
डाइनिंग टेबल वास्तु इसलिए मायने रखता है क्योंकि खाने के समय ही पूरा परिवार साथ बैठता है, दिन भर की बातें बताता है और तरोताज़ा होता है। यही टेबल घर में रोज़ सबके साथ बैठने की जगह है। खाने की जगह शांत हो और सही जगह पर हो, तो आराम से बातचीत करने और घर में बरकत का एहसास बनाए रखने में मदद मिलती है।
मुंबई के कई घरों में जगह कम होने की वजह से डाइनिंग टेबल लिविंग रूम या गलियारे में होती है। वास्तु कुछ आसान तरीके बताता है जिनसे छोटा-सा डाइनिंग कोना भी सुकून भरा लगे।
02
डाइनिंग टेबल कहाँ रखनी चाहिए?
घर का पश्चिम ज़ोन परंपरा से खाने की जगह के लिए आदर्श माना जाता है, क्योंकि उसे संतुष्टि और मेहनत के फल से जोड़ा जाता है। डाइनिंग टेबल रसोई के पास, दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में भी रखी जा सकती है, ताकि खाना चूल्हे से टेबल तक आसानी से पहुँचे।
जहाँ हो सके, डाइनिंग टेबल को घर के केंद्र यानी ब्रह्मस्थान में न रखें, क्योंकि केंद्र खुला रहना चाहिए। छोटे फ़्लैट में अगर केंद्र के पास ही जगह मिले, तो हल्की टेबल रखें और ध्यान दें कि उसके चारों ओर आराम से चला जा सके।
03
वास्तु के अनुसार डाइनिंग टेबल का कौन-सा आकार अच्छा है?
वास्तु में चौकोर या आयताकार डाइनिंग टेबल को पसंद किया जाता है, क्योंकि ये आकार स्थिर और संतुलित होते हैं और हर किसी को एक तय जगह देते हैं। मुंबई के घरों की लंबी, संकरी डाइनिंग जगह में भी आयताकार टेबल सबसे अच्छी तरह बैठती है।
परिवार की मुख्य डाइनिंग टेबल के लिए गोल, अंडाकार या बेढंगे आकार आमतौर पर पसंद नहीं किए जाते, हालाँकि चाय या नाश्ते के लिए छोटी गोल टेबल ठीक है। नुकीले, बाहर निकले कोनों या अजीब कटाव वाली टेबल से बचें, और टूटी या हिलने वाली टेबल कभी इस्तेमाल न करें। उसे ठीक करवाएँ या बदल दें।
04
डाइनिंग टेबल के लिए कौन-सा मटीरियल ठीक है?
वास्तु में डाइनिंग टेबल के लिए लकड़ी सबसे ठीक मटीरियल है, क्योंकि लकड़ी में अपनापन होता है, वह प्राकृतिक है और ठहराव का एहसास देती है। शीशम, सागौन या दूसरी ठोस लकड़ियाँ, या अच्छी क्वालिटी की इंजीनियर्ड वुड, सब अच्छी रहती हैं।
आधुनिक फ़्लैटों में शीशे के टॉप और संगमरमर की टेबल लोकप्रिय हैं। इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है, पर माना जाता है कि शीशे की सतह में उतना ठहराव नहीं होता; इसलिए उस पर टेबल रनर या प्लेसमैट बिछाएँ, उसे बिल्कुल साफ़ रखें और ध्यान रखें कि किनारे कहीं से टूटे न हों। मेटल की टेबल बाहर या हल्के-फुल्के इस्तेमाल के लिए ही रखना बेहतर है।
05
खाते समय किस दिशा में मुँह रखना चाहिए?
जहाँ हो सके, खाते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुँह रखें। पूर्व को अच्छी सेहत और ऊर्जा से जोड़ा जाता है, और उत्तर को समृद्धि से। पश्चिम की ओर मुँह करके खाना भी चल सकता है; खाते समय दक्षिण की ओर मुँह करने से आमतौर पर बचा जाता है।
परंपरा से घर के मुखिया पूर्व की ओर मुँह करके बैठते हैं। आयताकार टेबल के साथ कुर्सियाँ ऐसे लगाएँ कि ज़्यादातर सीटें पूर्व या उत्तर की ओर हों, और मेहमानों को जहाँ आराम लगे वहाँ बैठने दें। मेहमाननवाज़ी किसी सख़्त नियम से ज़्यादा मायने रखती है।
06
डाइनिंग टेबल के आसपास किन चीज़ों से बचें?
ऐसी हर चीज़ से बचें जो खाने के समय को जल्दबाज़ी वाला, तंग या भारी बना दे। आम तौर पर इन बातों का ध्यान रखें:
01
सिर के ऊपर बीम
टेबल को सीधे बीम के नीचे न रखें; अगर और कोई जगह न हो, तो फ़ॉल्स सीलिंग या हल्के कपड़े से इसका असर कम किया जा सकता है।
02
मुख्य द्वार की सीध में
मुख्य द्वार की सीध में रखी टेबल पर बैठकर सुकून नहीं मिलता; बीच में स्क्रीन या पौधा रखने से मदद मिल सकती है।
03
शौचालय का दरवाज़ा
टेबल को शौचालय के दरवाज़े से दूर रखें, और वह दरवाज़ा बंद रखें।
04
बिखराव
डाइनिंग टेबल को बिल, बैग और लैपटॉप रखने की जगह न बनाएँ।
05
टेलीविज़न
कोशिश करें कि खाते समय टेबल के ठीक सामने टीवी न हो, ताकि लोग आपस में बात करें।
07
खाने की जगह के लिए कौन-सी सजावट और रंग ठीक हैं?
खाने की जगह के लिए पीच, हल्का नारंगी, नरम पीला और क्रीम जैसे वॉर्म, भूख जगाने वाले रंग ठीक रहते हैं, और इनके साथ हल्के हरे रंग भी। टेबल के आसपास की दीवारों पर गहरे और बुझे-बुझे रंगों से बचें।
सजावट के कुछ सुझाव, जो घर में बरकत का एहसास बढ़ाने में मदद करते हैं:
01
फलों की कटोरी
टेबल के बीच में ताज़े फलों की कटोरी, जिसे खराब होने से पहले बदल दिया जाए।
02
कलाकृति
फलों, फसल, बहते पानी या प्रकृति की तस्वीरें; उदास या हिंसक तस्वीरों से बचें।
03
आईना
उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगा ऐसा आईना जिसमें डाइनिंग टेबल दिखे, परंपरा से बरकत से जोड़ा जाता है।
04
रोशनी
टेबल के ऊपर वॉर्म, एक-सी रोशनी हो; कोई बल्ब टिमटिमाता या फ्यूज़ न हो।
08
वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श कब करें
वास्तु विशेषज्ञ से तब मिलें जब आप इंटीरियर की योजना बना रहे हों या नया फ़र्नीचर खरीद रहे हों, या जब आपकी खाने की जगह किसी मुश्किल जगह में फँसी हो, जैसे घर के केंद्र में या शौचालय के पास। फ़्लोर प्लान देखकर की गई जाँच से खरीदने से पहले ही टेबल का सही साइज़ और सही जगह चुनने में मदद मिलती है।
डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अपने अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से मुंबई भर में घर आकर वास्तु परामर्श देती हैं, और फ़्लोर प्लान व तस्वीरों के आधार पर दूर से भी। उनके सुझाव व्यावहारिक और बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं; साथ में लिखित रिपोर्ट और फ़ॉलो-अप मिलता है।
सवाल
आम सवाल
क्या वास्तु के अनुसार गोल डाइनिंग टेबल अच्छी है?
वास्तु में परिवार की मुख्य डाइनिंग टेबल के लिए चौकोर या आयताकार टेबल पसंद की जाती है। चाय या नाश्ते के लिए छोटी गोल टेबल ठीक है, पर बेढंगे आकार से बचें।
डाइनिंग टेबल पर किस दिशा में मुँह करके बैठना चाहिए?
डाइनिंग टेबल इस तरह लगाएँ कि ज़्यादातर लोग, ख़ासकर घर के मुखिया, खाते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठें। खाते समय दक्षिण की ओर मुँह करने से आमतौर पर बचा जाता है।
क्या डाइनिंग टेबल लिविंग रूम में हो सकती है?
हाँ, डाइनिंग टेबल लिविंग रूम में हो सकती है; उसे कमरे के पश्चिम वाले हिस्से में रखना आदर्श है। ध्यान रहे कि वह मुख्य द्वार की सीध में न आए और केंद्र से दूर रहे।
क्या वास्तु के अनुसार शीशे की डाइनिंग टेबल ठीक है?
शीशे की डाइनिंग टेबल इस्तेमाल की जा सकती है, पर लकड़ी को पसंद किया जाता है। प्लेसमैट या रनर इस्तेमाल करें, शीशा साफ़ रखें और टूटा या चटका टॉप जल्दी बदल दें।
डाइनिंग टेबल पर कितनी कुर्सियाँ होनी चाहिए?
वास्तु में आमतौर पर कुर्सियों की सम संख्या पसंद की जाती है, जैसे चार, छह या आठ। ऐसी संख्या चुनें जो आपके परिवार और जगह के लिए आराम से ठीक बैठे।
यही सब अपने घर या ऑफ़िस में करवाना चाहते हैं?
मुफ़्त परामर्श बुक करें
