त्योहार और अनुष्ठान · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
वास्तु के अनुसार तोरण और मुख्य द्वार की सजावट
वास्तु के अनुसार तोरण कैसे चुनें और लगाएँ, कौन-सी सामग्री इस्तेमाल करें, उसे कब बदलें, और मुंबई के फ़्लैट और त्योहारों के लिए मुख्य द्वार सजाने के आसान आइडिया।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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तोरण क्या है और मुख्य द्वार पर क्यों लगाया जाता है?
तोरण वह सजावटी बंदनवार है जो मुख्य द्वार के ऊपर इसलिए लगाई जाती है कि घर में मेहमानों, आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत हो। यह शब्द संस्कृत के तोरण से आया है, यानी सजा हुआ प्रवेश-द्वार: वे नक्काशीदार मेहराब जो कभी मंदिरों और महलों के दरवाज़ों पर दिखते थे।
वास्तु में मुख्य द्वार को घर का मुख कहा जाता है, क्योंकि ऊर्जा, अवसर और लोग उसी से भीतर आते हैं। उस पर तोरण लगाना इस दहलीज़ को मान देने का सीधा-सा तरीका है, ख़ासकर त्योहारों, शादियों और गृह प्रवेश पर।
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वास्तु में सबसे शुभ तोरण कौन-सा माना जाता है?
परंपरा से आम के ताज़े पत्तों का तोरण सबसे शुभ माना जाता है, जिसमें अक्सर गेंदे के फूल भी पिरोए जाते हैं। आम के पत्तों को समृद्धि, धरती के उपजाऊपन और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है, और गेंदे से चटक, खुशनुमा रंग आ जाता है।
अशोक के पत्ते भी परंपरा से लगाए जाते हैं। कई परिवार गिनती में विषम पत्ते पिरोते हैं, जैसे ग्यारह या इक्कीस, पर हर इलाक़े और समुदाय के रिवाज अलग होते हैं, इसलिए वही करें जो आपके परिवार में मायने रखता हो।
तोरण यह भी याद दिलाता है कि दरवाज़े की खुद भी देखभाल करनी है। हर त्योहार पर ताज़े पत्ते लगाने के बहाने घर के लोग दहलीज़ बुहार देते हैं, दरवाज़ा पोंछ देते हैं और छोटी-मोटी मरम्मत भी करा लेते हैं। प्रवेश पर इसी तरह बराबर ध्यान देते रहना वास्तु की बुनियादी बात है। बच्चों को अक्सर पत्ते और फूल पिरोने में हाथ बँटाना अच्छा लगता है, और इस तरह यह परिवार की एक छोटी-सी रस्म बन जाती है।
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क्या नकली फूल-पत्तों या कपड़े के तोरण चलते हैं?
हाँ, रोज़ के लिए नकली फूल-पत्तों या कपड़े के तोरण चलते हैं, बस वे साफ़ हों, उनका रंग खिला हुआ हो और वे अच्छी हालत में हों। मुंबई की भीड़-भाड़ वाली इमारतों में ताज़े पत्ते जल्दी सूख जाते हैं, इसलिए कई परिवार एक सजावटी तोरण हमेशा लगाए रखते हैं और त्योहारों पर उसके साथ ताज़ा तोरण भी लगा लेते हैं।
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सामग्री
सूती कढ़ाई, मोतियों का काम, पीतल की घंटियाँ, लकड़ी के मनके और रेशम या ब्रोकेड सब अच्छे रहते हैं।
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रंग
पीला, नारंगी, लाल, हरा और सुनहरा पारंपरिक और खिले-खिले रंग हैं।
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डिज़ाइन
पत्ते, फूल, कलश, घंटियाँ, मोर और ॐ या शुभ-लाभ आम तौर पर बनाए जाते हैं।
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इनसे बचें
फीके, फटे या धूल भरे तोरण, और ऐसे डिज़ाइन जिनमें उदासी या गुस्से-लड़ाई वाले चित्र हों।
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तोरण कब बदलना चाहिए?
पत्तों और फूलों का प्राकृतिक तोरण सूखने से पहले बदल दें, आम तौर पर कुछ ही दिनों में। माना जाता है कि प्रवेश पर सूखे पत्तों और मुरझाए फूलों में रुकी हुई ऊर्जा बनी रहती है।
नकली फूल-पत्तों या कपड़े के तोरण की हर हफ़्ते धूल झाड़ें, और जब उनका रंग फीका पड़ जाए या वे उधड़ने लगें तो बदल दें। दिवाली, गुड़ी पड़वा, दशहरा, गणेश चतुर्थी या परिवार की किसी भी खुशी के मौक़े पर ताज़ा तोरण लगाना उस दिन को ख़ास बनाने का सुंदर तरीका है।
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खुद मुख्य द्वार को कैसे सजाएँ?
मुख्य द्वार को ऐसे सजाएँ कि वह साफ़ और रोशन लगे और आने वाले को अपनापन महसूस हो। ढेर सारी चीज़ें न लगाएँ, कुछ ही चिह्न लगाएँ जो आपके लिए मायने रखते हों। दरवाज़ा पूरा और आराम से खुलना चाहिए, न चरमराए, न कहीं अटके।
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नेमप्लेट
नेमप्लेट साफ़ पढ़ी जाए और उस पर ठीक रोशनी पड़े, तो अवसरों और मेहमानों को आप तक पहुँचने में आसानी होती है।
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शुभ चिह्न
ॐ, स्वस्तिक (जो हिंदू परंपरा में मंगल का चिह्न है), शुभ-लाभ या लक्ष्मी जी के छोटे चरण आम तौर पर लगाए जाते हैं।
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रंगोली
दहलीज़ पर छोटी-सी रंगोली, ख़ासकर त्योहारों पर, परंपरा से स्वागत की निशानी मानी जाती है।
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रोशनी
दरवाज़े के बाहर ऐसी लाइट जो चालू हालत में हो, और त्योहार की शाम को एक दीया।
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दहलीज़
लकड़ी या संगमरमर की दहलीज़ की पट्टी, जो साफ़ रहे और कहीं से टूटी न हो।
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मुख्य द्वार के पास किन चीज़ों से बचना चाहिए?
दरवाज़े पर जूतों के रैक की भीड़, कूड़ेदान, टूटी-फूटी चीज़ें, सूखे पौधे और प्रवेश पर जमा पानी, इन सबसे बचें। इनसे लगता है कि घर की सबसे अहम दहलीज़ की ही कोई परवाह नहीं कर रहा।
मुख्य द्वार के ठीक सामने आईना न रखें, क्योंकि परंपरा से माना जाता है कि वह ऊर्जा को वापस बाहर धकेल देता है। ध्यान रखें कि दरवाज़े का पेंट उखड़ा न हो और उसके कुंडे-कब्ज़े ढीले न हों। अगर आपका प्रवेश ऐसी दिशा में है जिसके लिए उपाय चाहिए, तो कम्पास से जाँच के बाद धातु की पट्टी या पिरामिड जैसा कोई ख़ास उपाय सुझाया जा सकता है।
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साझा कॉरिडोर में फ़्लैट का प्रवेश कैसे सजाएँ?
साझा कॉरिडोर में फ़्लैट के प्रवेश की सजावट अपने दरवाज़े की चौखट और दहलीज़ के भीतर ही रखें, और सबके आने-जाने का रास्ता खाली रहने दें। मुंबई की ज़्यादातर सोसाइटियों में कॉरिडोर के इस्तेमाल के नियम होते हैं, और पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते भी घर की शांति का हिस्सा हैं।
पतला तोरण, साफ़-सुथरी नेमप्लेट, रंगोली का छोटा स्टिकर या पौधों का ऐसा छोटा स्टैंड जो रास्ता न रोके, आम तौर पर इतना काफ़ी होता है। जूतों के लिए बंद कैबिनेट फ़्लैट के भीतर रखें, या ऐसी पतली कैबिनेट लें जो कॉरिडोर में जगह न घेरे।
प्रवेश पर त्योहार की रोशनी सरल और सुरक्षित रखें। अच्छी क्वालिटी की फ़ेयरी लाइट्स लगाएँ जिनमें ठीक-ठाक स्विच हो, दरवाज़े के रास्ते में ढीले तार न लटकने दें, और घर से निकलते समय उन्हें बंद कर दें। रोज़ शाम को जलने वाली वॉर्म रोशनी की एक लाइट अक्सर उस भारी-भरकम सजावट से ज़्यादा अपनापन देती है जो साल में एक ही बार लगती है।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें
वास्तु विशेषज्ञ से तब मिलें जब आप नए घर में जा रहे हों, गृह प्रवेश की योजना बना रहे हों, या जब आपका प्रवेश किसी ऐसी दिशा या पद में हो जिसे लेकर आपके मन में शंका हो। सजावट से अपनापन आता है, पर प्रवेश खुद कहाँ पड़ता है, इसकी जाँच कम्पास से होनी चाहिए।
डॉ. किमया पारिख-आंबेकर मुख्य प्रवेश की जाँच पूरे मुंबई में साइट विज़िट पर करती हैं, और अंधेरी ईस्ट के VastuKimaya ऑफ़िस से दूर से परामर्श के ज़रिए भी। प्रवेश के लिए उनके उपाय बिना तोड़-फोड़ के होते हैं, और फ़्लैट और किराए के घरों में आसानी से अपनाए जा सकते हैं।
सवाल
आम सवाल
वास्तु के अनुसार तोरण के लिए कौन-से पत्ते इस्तेमाल होते हैं?
परंपरा में सबसे ज़्यादा आम के ताज़े पत्ते लगाए जाते हैं, अक्सर गेंदे के फूलों के साथ। अशोक के पत्ते भी लगाए जाते हैं।
आम के पत्तों का तोरण दरवाज़े पर कितने दिन रह सकता है?
आम के पत्तों का तोरण तभी तक रखें जब तक वह ताज़ा रहे, यानी आम तौर पर कुछ दिन, और पत्ते सूखने से पहले उसे बदल दें।
क्या दक्षिण-मुखी दरवाज़े पर तोरण लगा सकते हैं?
हाँ, तोरण किसी भी दिशा के दरवाज़े पर लगाया जा सकता है। दक्षिण-मुखी प्रवेश हो, तो कम्पास से जाँच के बाद बताया गया कोई ख़ास उपाय भी फ़ायदेमंद हो सकता है।
क्या वास्तु के अनुसार प्लास्टिक का तोरण बुरा है?
साफ़ हो और उसका रंग खिला हुआ हो, तो प्लास्टिक का तोरण बुरा नहीं है, लेकिन ताज़े पत्ते, सूती कपड़ा, लकड़ी या पीतल जैसी प्राकृतिक चीज़ें ज़्यादा अच्छी मानी जाती हैं।
तोरण दरवाज़े के अंदर लगाना चाहिए या बाहर?
तोरण परंपरा से बाहर की ओर, मुख्य द्वार की चौखट के ऊपर लगाया जाता है, ताकि जो भी भीतर आए, उसका स्वागत हो।
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