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रेकी · 8 अक्टूबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें

सेल्फ़ रेकी: रोज़ की एक सरल दिनचर्या

घर पर की जा सकने वाली 10–15 मिनट की शांत सेल्फ़ रेकी दिनचर्या: कौन इसे कर सकता है, हाथ रखने की सात जगहें, दिन में इसे कब करें, लोग आमतौर पर क्या महसूस करते हैं, और इसकी सीमाएँ कहाँ हैं।

लेखिका: , वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

सेल्फ़ रेकी: रोज़ की एक सरल दिनचर्या

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सेल्फ़ रेकी क्या है?

सेल्फ़ रेकी वह अभ्यास है जिसमें आप चुपचाप बैठे या लेटे हुए अपने शरीर की कुछ जगहों पर अपने हाथ टिकाकर रखते हैं। परंपरा के अनुसार रेकी सीखने वाला सबसे पहले यही सीखता है।

रेकी एक जापानी अभ्यास है, और इस शब्द को आमतौर पर 'सार्वभौमिक जीवन ऊर्जा' कहकर समझाया जाता है। भारतीय पाठकों को यह बात प्राण की धारणा से मिलती-जुलती लग सकती है। इसमें न मालिश है, न दबाव और न कोई उपकरण। बस हाथ टिके रहते हैं, और आप साँस लेते हैं।

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सेल्फ़ रेकी कौन कर सकता है?

परंपरा के अनुसार सेल्फ़ रेकी वही करता है जिसे किसी रेकी शिक्षक से लेवल 1 दीक्षा (अट्यूनमेंट) मिली हो। लेवल 1 वह चरण है जिसमें खुद पर काम करना सिखाया जाता है।

अब ईमानदारी से यह भी बता दें कि बाकी सबके लिए इसका क्या मतलब है। नीचे बताया गया हाथ टिकाने का क्रम कोई भी आराम के अभ्यास की तरह कर सकता है। चुपचाप बैठना, गर्म हाथ शरीर पर रखना और धीरे-धीरे साँस लेना, इसके लिए किसी प्रशिक्षण की ज़रूरत नहीं है। लेकिन रेकी की परंपरा में इसे सेल्फ़ रेकी तभी कहा जाता है जब दीक्षा हो चुकी हो।

इसलिए अगर आपकी दीक्षा नहीं हुई है, तो इसे रेकी से लिया गया, मन शांत करने वाला एक अभ्यास समझें। अगर हुई है, तो यह आपका रोज़ का अभ्यास है।

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10–15 मिनट में हाथ रखने का सरल क्रम क्या है?

एक सरल क्रम में सिर से लेकर पेट के निचले हिस्से तक सात जगहें होती हैं, हर जगह लगभग दो मिनट तक हाथ रखा जाता है। आराम से बैठें या लेटें, उंगलियाँ आपस में जुड़ी रखें और हाथों को हल्के से टिकने दें।

साँस सामान्य रखें। अगर किसी जगह हाथ रखने से कंधों पर ज़ोर पड़े, तो हाथों को उस हिस्से से बस थोड़ा ऊपर रखें या उसे छोड़ दें।

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    1. आँखें

    बंद आँखों पर हथेलियाँ हल्के से कटोरी की तरह रखें, उंगलियाँ माथे पर टिकी हों।

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    2. कनपटियाँ

    सिर के दोनों ओर, कानों के ऊपर, एक-एक हथेली।

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    3. सिर का पिछला हिस्सा

    दोनों हाथों से सिर के पिछले निचले हिस्से को सहारा दें।

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    4. गला

    हाथ हल्के से कॉलरबोन पर टिके हों। गर्दन पर दबाव न डालें।

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    5. हृदय

    दोनों हाथ सीने के बीच में सपाट रखें।

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    6. पेट का ऊपरी हिस्सा

    पसलियों के ठीक नीचे, पेट वाले हिस्से पर हाथ।

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    7. पेट का निचला हिस्सा

    नाभि के नीचे हाथ। उठने से पहले यहाँ थोड़ी देर और आराम करें।

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सेल्फ़ रेकी कब करनी चाहिए?

इसे रोज़ एक ही समय पर करें; समय कौन-सा है, इससे ज़्यादा मायने यह रखता है कि वह रोज़ वही रहे। ज़्यादातर लोग दो ही समय निभा पाते हैं: सुबह और सोते समय।

सुबह फ़ोन उठाने से पहले इसे आज़माएँ। रात को बत्ती बंद करके बिस्तर में लेटे हुए करें। भागदौड़ वाले दिन सिर्फ़ दो जगहों पर पाँच मिनट हाथ रख लें, तो भी आदत बनी रहेगी।

ऐसा समय चुनें जब कोई आपको परेशान न करे। गाड़ी चलाते समय या ऐसे किसी भी काम के दौरान, जिसमें आपका ध्यान चाहिए, इसे कभी न करें।

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लोग आमतौर पर कैसा अनुभव बताते हैं?

कई लोग बताते हैं कि उन्हें हाथों में गर्माहट, धीमी होती साँस और शरीर में एक अच्छा-सा भारीपन महसूस होता है। बीच में ही सो जाना बहुत आम है, खासकर रात को।

कुछ लोगों को झनझनाहट या पेट में गुड़गुड़ाहट महसूस होती है, या कुछ आँसू आ जाते हैं। कुछ को कुछ भी महसूस नहीं होता, और यह भी सामान्य है। अगर सेशन साधारण लगे तो इसका मतलब यह नहीं कि कुछ गलत हो गया।

ये आराम के निजी अनुभव हैं। ये इस बात के संकेत नहीं हैं कि बीमारी में कोई बदलाव आ रहा है, और इन्हें ऐसा समझना भी नहीं चाहिए।

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सेल्फ़ रेकी की सीमाएँ क्या हैं?

सेल्फ़ रेकी चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के साथ सहायक है, उसका विकल्प कभी नहीं। यह आराम में सहायक है। यह किसी बीमारी, चोट या मानसिक स्वास्थ्य की किसी समस्या का इलाज नहीं है।

कृपया डॉक्टर की बताई कोई भी दवा लेते रहें, डॉक्टर के अपॉइंटमेंट पर जाते रहें, और कोई भी नया या लंबे समय तक रहने वाला लक्षण हो तो डॉक्टर को दिखाएँ। किसी भी रेकी प्रैक्टिशनर को आपसे दवा कम करने या बंद करने के लिए नहीं कहना चाहिए।

मन की तकलीफ़ पर भी यही बात लागू होती है। अगर आपको मुश्किल हो रही है, तो कृपया किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। भारत में आप सरकार की मुफ़्त हेल्पलाइन Tele-MANAS 14416 पर कॉल कर सकते हैं, जो 24×7 उपलब्ध है।

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रेकी सेशन कब बुक करें

सेशन तब बुक करें जब आप किसी के मार्गदर्शन में करना चाहें, जब रेकी ठीक से सीखने के बारे में पूछना चाहें, या जब अपने-आप आराम कर पाना मुश्किल लगे।

डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अंधेरी ईस्ट, मुंबई स्थित VastuKimaya में वास्तु और दूसरी हीलिंग थेरेपी के साथ रेकी देती हैं। अपॉइंटमेंट बुक करने से पहले आप पूछ सकते हैं कि सेशन कैसे होता है। घर की दिनचर्या और प्रैक्टिशनर के साथ सेशन, दोनों साथ-साथ अच्छे चलते हैं।

सवाल

आम सवाल

क्या बिना दीक्षा (अट्यूनमेंट) के सेल्फ़ रेकी कर सकते हैं?

परंपरा के अनुसार सेल्फ़ रेकी रेकी शिक्षक से लेवल 1 दीक्षा के बाद की जाती है। दीक्षा के बिना भी आप हाथ रखने की इन्हीं जगहों को आराम के एक शांत अभ्यास की तरह अपना सकते हैं। ईमानदारी से कहें तो उसे रेकी नहीं, हाथ टिकाने का अभ्यास कहना ज़्यादा ठीक है; पर चुपचाप बैठना और धीरे-धीरे साँस लेना तो कोई भी कर सकता है।

सेल्फ़ रेकी का सेशन कितना लंबा होना चाहिए?

रोज़ की दिनचर्या के लिए दस से पंद्रह मिनट काफ़ी हैं। इसमें सात जगहों पर लगभग दो-दो मिनट आते हैं। व्यस्त दिन में दो या तीन जगहों पर पाँच मिनट भी फ़ायदेमंद हैं। नियमित रूप से किया गया छोटा सेशन महीने में एक बार किए गए लंबे सेशन से ज़्यादा काम का होता है।

क्या बिस्तर में लेटे हुए सेल्फ़ रेकी कर सकते हैं?

हाँ। बिस्तर में लेटकर करना सबसे आसान तरीकों में से एक है, और कई लोग रात को शांत होने के लिए यह दिनचर्या अपनाते हैं। अगर पूरा करने से पहले नींद आ जाए तो कोई नुकसान नहीं। अगर सीधे लेटने पर कमर के निचले हिस्से पर खिंचाव लगे, तो घुटनों के नीचे तकिया रख लें।

क्या सेल्फ़ रेकी में कुछ भी महसूस न होना सामान्य है?

हाँ, यह पूरी तरह सामान्य है। कुछ लोगों को गर्माहट, झनझनाहट या भारीपन महसूस होता है, और कुछ को कुछ खास महसूस नहीं होता। शांत, साधारण सेशन भी दस मिनट का आराम है। किसी एहसास के पीछे न भागें, क्योंकि उसकी उम्मीद रखने से आराम करना आमतौर पर और मुश्किल हो जाता है।

क्या सेल्फ़ रेकी मेरी दवा या थेरेपी की जगह ले सकती है?

नहीं। सेल्फ़ रेकी आराम का एक सहायक अभ्यास है और चिकित्सा या मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल का विकल्प कभी नहीं है। जो भी दवा या थेरेपी आपको बताई गई है उसे जारी रखें, और कुछ भी बदलने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें। अगर आप मानसिक तकलीफ़ में हैं, तो Tele-MANAS 14416 पर कॉल करें, जो भारत में एक मुफ़्त सरकारी हेल्पलाइन है।

क्या रोज़ सेल्फ़ रेकी कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की छोटी दिनचर्या इसे करने का परंपरागत तरीका है, और कई लोगों को लगता है कि सुबह जल्दी या सोने के समय जैसा तय समय रखने से इसे निभाना आसान हो जाता है। अगर कोई दिन छूट जाए, तो मन में कोई मलाल रखे बिना अगले दिन फिर शुरू कर दें।

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