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रेकी · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें

रेकी और ध्यान: दोनों साथ कैसे काम करते हैं

रेकी और ध्यान अलग-अलग प्रैक्टिस हैं जो एक-दूसरे का बहुत अच्छा साथ देती हैं। दोनों में क्या फ़र्क है, घर पर इन्हें कैसे मिलाएँ और सेशन में कैसा लगता है।

लेखिका: , वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

रेकी और ध्यान: दोनों साथ कैसे काम करते हैं

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रेकी और ध्यान में क्या फ़र्क है?

रेकी एक जापानी प्रैक्टिस है जिसमें हाथ हल्के से शरीर पर रखकर या थोड़ा ऊपर रोककर सार्वभौमिक जीवन ऊर्जा प्रवाहित की जाती है, जबकि ध्यान मन को वर्तमान में शांति से टिकाने का अभ्यास है। रेकी ली या दी जाती है; ध्यान आप खुद अपने मन से करते हैं।

रेकी शब्द 'रेई' (सार्वभौमिक) और 'की' (जीवन ऊर्जा) से बना है। भारतीय परंपराओं में जीवन ऊर्जा के ऐसे ही विचार को प्राण कहा जाता है। ध्यान भारतीय, बौद्ध और कई दूसरी परंपराओं में मिलता है। दोनों प्रैक्टिस की जड़ें अलग हैं, पर एक गुण साझा है: दोनों शरीर और मन को धीमा पड़ने का मौक़ा देती हैं।

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रेकी और ध्यान साथ कैसे काम करते हैं?

रेकी और ध्यान साथ इसलिए अच्छे चलते हैं कि एक से दूसरा आसान हो जाता है। बहुत से लोगों को शांत बैठकर ध्यान करना मुश्किल लगता है; रेकी सेशन के बाद अक्सर वे इतने शांत हो जाते हैं कि स्थिर होकर बैठ पाते हैं। इसी तरह, रेकी से पहले कुछ मिनट ध्यान कर लेने से इंसान को पूरे मन से वहाँ मौजूद होने और सेशन ज़्यादा आराम से लेने में मदद मिल सकती है।

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    शरीर को ठहराना

    रेकी का कोमल स्पर्श, जिसमें शरीर के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होती, शरीर की बेचैनी को कम कर सकता है।

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    मन को शांत करना

    ध्यान मन को टिकने के लिए साँस जैसा एक सरल सहारा देता है।

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    संवेदनाओं पर ध्यान देना

    रेकी के दौरान कुछ लोगों को गर्माहट या भारीपन जैसे हल्के एहसास होते हैं; ध्यान से इन्हें पहचानने की समझ बढ़ती है।

  • 04

    शांति को आगे ले जाना

    रोज़ ध्यान करने की आदत से सेशन में मिला आराम ज़्यादा देर टिकने में मदद मिलती है।

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रेकी में गाशो मेडिटेशन क्या है?

गाशो मेडिटेशन रेकी की एक सरल प्रैक्टिस है, जिसमें आप हथेलियाँ छाती के सामने जोड़कर बैठते हैं और ध्यान को उस जगह टिकाते हैं जहाँ बीच की उँगलियाँ मिलती हैं। 'गाशो' जापानी शब्द है जिसका मतलब है हाथ जोड़ना, यानी भारतीय नमस्ते जैसी मुद्रा।

रेकी प्रैक्टिशनर अक्सर अपना दिन या सेशन गाशो से शुरू करते हैं। अगर ध्यान भटक जाए, तो उसे धीरे से उँगलियों के सिरों या साँस पर वापस ले आएँ। पाँच से दस मिनट भी मन को ठहराव देने के लिए काफ़ी हैं। इस मुद्रा को शांत बैठने के अभ्यास के रूप में आज़माने के लिए रेकी की ट्रेनिंग ज़रूरी नहीं है।

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रेकी के सिद्धांत क्या हैं और ध्यान में इनका उपयोग कैसे होता है?

रेकी के सिद्धांत रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए पाँच सरल सूत्र हैं, जिन्हें बहुत से प्रैक्टिशनर ध्यान की शुरुआत या अंत में दोहराते हैं या उन पर मनन करते हैं। आम तौर पर ये इस तरह बताए जाते हैं।

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    सिर्फ़ आज के लिए

    क्रोध न करें।

  • 02

    सिर्फ़ आज के लिए

    चिंता न करें।

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    सिर्फ़ आज के लिए

    आभारी रहें।

  • 04

    सिर्फ़ आज के लिए

    ईमानदारी से काम करें।

  • 05

    सिर्फ़ आज के लिए

    हर जीव के प्रति दयालु रहें।

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घर पर रेकी मेडिटेशन कैसे करें?

आप घर पर लगभग पंद्रह मिनट में रेकी से प्रेरित एक सरल ध्यान कर सकते हैं, चाहे आपने रेकी की दीक्षा (अट्यूनमेंट) ली हो या नहीं। किसी साफ़ और शांत कोने में आराम से बैठें, आदर्श रूप से पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके।

धीरे-धीरे साँस लेते हुए कुछ मिनट गाशो से शुरू करें। पाँचों सिद्धांतों को मन ही मन दोहराएँ। फिर हाथों को हल्के से दिल या पेट पर रखें और ध्यान अपनी हथेलियों की गर्माहट पर टिकाएँ। इसी तरह पाँच से दस मिनट रहें। आख़िर में आँखें खोलकर कुछ देर चुपचाप बैठें और एक गिलास पानी पिएँ। अगर आपने रेकी की ट्रेनिंग ली है, तो इसकी जगह आप खुद पर रेकी करने के लिए सीखी हुई हाथों की स्थितियाँ अपना सकते हैं।

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वास्तु के अनुसार घर में ध्यान कहाँ करें?

वास्तु के अनुसार ध्यान अपने घर के उत्तर-पूर्व में करें, जो ईश और जल तत्व का ज़ोन है और स्पष्टता व आध्यात्मिक अभ्यास से जुड़ा माना जाता है। अगर उत्तर-पूर्व उपलब्ध न हो, तो पूर्व या उत्तर अच्छे विकल्प हैं।

ध्यान के कोने में फ़ालतू सामान न रखें, वहाँ हवा आती-जाती रहे, और वह टॉयलेट व भारी फ़र्नीचर से दूर हो। एक चटाई या कुशन, एक दीया, पानी का छोटा कटोरा या एमेथिस्ट या क्लियर क्वार्ट्ज़ जैसा क्रिस्टल, इतना काफ़ी है। रोज़ एक ही जगह बैठने से आदत जमने में मदद मिलती है।

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क्या रेकी और ध्यान तनाव और चिंता में मदद कर सकते हैं?

बहुत से लोगों को तनाव भरे दौर में रेकी और ध्यान से आराम मिलता है, पर इनमें से कोई भी चिंता या किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का इलाज नहीं है। ये पूरक प्रैक्टिस हैं जो पेशेवर देखभाल के साथ चल सकती हैं।

कृपया अपने डॉक्टर की सलाह और बताया गया कोई भी इलाज जारी रखें। ट्रॉमा से गुज़रे कुछ लोगों को आँखें बंद करके ध्यान करना असहज लगता है; खुली आँखों के छोटे अभ्यास ठीक हैं, और रुक जाना हमेशा ठीक है। अगर आपको मुश्किल हो रही है, तो कृपया किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। भारत में आप मुफ़्त Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 (या 1-800-891-4416) पर कॉल कर सकते हैं, जो 24×7 उपलब्ध है।

बहुत बड़ी उम्मीदें न बाँधना भी अच्छा रहता है। किसी दिन अभ्यास में गहरी शांति मिलती है और किसी दिन मन भागता ही रहता है; दोनों सामान्य हैं। रेकी और ध्यान किसी खास अवस्था तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि खुद को नियमित रूप से, प्यार से समय देने के लिए हैं। समय के साथ बहुत से लोग महसूस करते हैं कि वे पहले से थोड़ी आसानी से शांत हो जाते हैं।

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रेकी सेशन कब बुक करें

रेकी सेशन तब बुक करें जब आप चाहें कि आराम करने और शांत होने में कोई आपका साथ दे और राह दिखाए, जब आप ध्यान का अभ्यास शुरू कर रहे हों और स्थिर रहना मुश्किल लगे, या जब आपका घर ही भारी लगे और आप निजी रेकी को स्पेस हीलिंग के साथ मिलाना चाहें।

डॉ. किमया पारिख-आंबेकर VastuKimaya के अंधेरी ईस्ट के ऑफ़िस में, पूरे मुंबई में साइट पर, और कहीं भी रहने वाले लोगों के लिए डिस्टेंस रेकी के रूप में रेकी हीलिंग देती हैं। हर सेशन एक छोटी बातचीत से शुरू होता है, और रेकी हमेशा चिकित्सा के साथ-साथ दी जाती है।

सवाल

आम सवाल

क्या रेकी मेडिटेशन के लिए रेकी की ट्रेनिंग चाहिए?

नहीं। कोई भी गाशो मेडिटेशन कर सकता है और रेकी के सिद्धांतों पर मनन कर सकता है। रेकी की हाथों की स्थितियों से खुद पर रेकी करना आम तौर पर रेकी की दीक्षा (अट्यूनमेंट) के बाद सिखाया जाता है।

रेकी सेशन से पहले ध्यान करना चाहिए या बाद में?

दोनों चलते हैं। सेशन से पहले कुछ मिनट शांति से साँस लेने से मन को ठहरने में मदद मिलती है, और बाद में चुपचाप बैठने से आराम के एहसास को भीतर उतरने में।

रेकी मेडिटेशन कितनी देर का होना चाहिए?

ज़्यादातर लोगों के लिए दस से बीस मिनट काफ़ी हैं। कभी-कभार देर तक बैठने से ज़्यादा फ़ायदा नियमित रूप से थोड़ी देर के अभ्यास से होता है।

ध्यान करते समय मेरा मुँह किस दिशा में होना चाहिए?

ध्यान करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करें, और आदर्श रूप से अपने घर के उत्तर-पूर्व में बैठें।

अगर रेकी या ध्यान के दौरान भावुक हो जाऊँ तो क्या करें?

भावुक हो जाना आम बात है, और आम तौर पर यह एहसास गुज़र जाता है। रुकें, साँस लें और पानी पिएँ। अगर तेज़ भावनाएँ बनी रहें, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें।

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