घर का वास्तु · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
पूर्वजों की तस्वीरें: वास्तु के अनुसार कहाँ लगाएँ
जो माता-पिता और दादा-दादी अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनकी तस्वीरें कहाँ लगाएँ? वास्तु के अनुसार पूर्वजों की फ़ोटो की दिशा, किन जगहों से बचें, और घर में परिवार की यादों को सम्मान देने के कोमल तरीके।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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वास्तु यह क्यों बताता है कि पूर्वजों की तस्वीरें कहाँ लगाएँ?
वास्तु पूर्वजों की तस्वीरों की जगह इसलिए सुझाता है कि परिवार की यादों को पूरा सम्मान मिले और साथ ही घर जीवित लोगों के लिए अपनेपन की जगह बना रहे। दिवंगत माता-पिता और दादा-दादी की तस्वीरों से गहरी भावनाएँ जुड़ी होती हैं, और वे कहाँ लगी हैं, इसी से तय होता है कि रोज़ उनके पास से गुज़रते हुए परिवार को कैसा लगता है।
कई भारतीय घरों में पितरों को याद करना परिवार के जीवन का हिस्सा है, खासकर पितृ पक्ष में। वास्तु इस याद को निभाने का एक शांत और सम्मान भरा तरीका देता है।
शोक मनाने या याद करने का कोई एक सही तरीका नहीं होता। नीचे दिए सुझाव बस रास्ता दिखाने के लिए हैं, और आपके परिवार की अपनी परंपराएँ हमेशा मायने रखती हैं।
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पूर्वजों की तस्वीरों के लिए कौन-सी दिशा ठीक है?
पूर्वजों की तस्वीरों के लिए आम तौर पर दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की दीवार ठीक मानी जाती है, और तस्वीरों का मुँह उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर रहे। दक्षिण यम की दिशा है और परंपरा से पूर्वजों से जुड़ी है, जबकि दक्षिण-पश्चिम का संबंध पृथ्वी, स्थिरता और परिवार की वंश-परंपरा से है।
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दक्षिण की दीवार
सबसे ज़्यादा सुझाई जाने वाली दीवार, लिविंग रूम में या घर के किसी शांत हिस्से में जहाँ परिवार बैठता हो।
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दक्षिण-पश्चिम की दीवार
यह भी ठीक है, और इसे स्थिरता और परिवार के मुखियाओं से जोड़ा जाता है।
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पश्चिम की दीवार
जब दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की दीवार न मिल सके, तब एक ठीक विकल्प।
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मुँह की दिशा
दक्षिण की दीवार पर लगाने से तस्वीरों का मुँह अपने आप उत्तर की ओर रहता है, जिसे सम्मानजनक माना जाता है।
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पूर्वजों की तस्वीरें कहाँ नहीं रखनी चाहिए?
पूर्वजों की तस्वीरें आम तौर पर पूजा के मंदिर में देवी-देवताओं के साथ, बेडरूम में, रसोई में या ठीक मुख्य प्रवेश की ओर मुँह करके नहीं रखी जातीं। इन बातों के पीछे पूर्वजों के लिए भी सम्मान है और हर कमरे के अपने काम के लिए भी।
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मंदिर में
परंपरा से देवी-देवताओं और पूर्वजों का सम्मान अलग-अलग किया जाता है। पूर्वजों की तस्वीरें मंदिर के पास रखें, उसके अंदर नहीं।
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बेडरूम में
बेडरूम आराम और निजता की जगह है, इसलिए दिवंगत परिजनों की तस्वीरें आम तौर पर कहीं और रखी जाती हैं।
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रसोई में
रसोई अग्नि ज़ोन है जहाँ रोज़ खाना पकता है, यह दिवंगत परिजनों की तस्वीरों की जगह नहीं।
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मुख्य द्वार की ओर मुँह करके
उन्हें ऐसी जगह न लगाएँ जहाँ अंदर आते ही सबसे पहले वही दिखें।
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उत्तर-पूर्व में
उत्तर-पूर्व आम तौर पर ईश्वर के लिए रखा जाता है, इसलिए पूर्वजों की तस्वीरें दूसरी दीवारों पर लगाई जाती हैं।
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जीवित परिवारजनों की तस्वीरों का क्या?
जीवित परिवारजनों की तस्वीरों के लिए बातें अलग हैं, और ज़्यादा खुशनुमा भी। परिवार की हँसती-खेलती तस्वीरें लिविंग रूम के दक्षिण-पश्चिम में ठीक रहती हैं, और दंपति की तस्वीरें मुख्य बेडरूम के दक्षिण-पश्चिम में लग सकती हैं।
दिवंगत पूर्वजों की तस्वीरें जीवित लोगों की तस्वीरों से अलग रखें। उन्हें एक ही दीवार या शेल्फ़ पर मिलाकर न रखें।
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पूर्वजों की तस्वीरों का फ़्रेम कैसा हो और उन्हें कैसे लगाएँ?
पूर्वजों की तस्वीरें सादे फ़्रेम में लगानी चाहिए, सम्मानजनक ऊँचाई पर टाँगनी चाहिए और साफ़ रखनी चाहिए। फ़्रेम का ख़याल रखना उस याद का ख़याल रखने जैसा है।
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सादे फ़्रेम
ऐसी तस्वीरों के लिए शांत रंगों के लकड़ी के या सादे फ़्रेम ठीक रहते हैं।
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सम्मानजनक ऊँचाई
आँखों की ऊँचाई पर या उससे थोड़ा ऊपर लगाएँ, फ़र्श के पास नहीं।
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छोटी शेल्फ़
तस्वीरों के नीचे एक साफ़ पट्टी पर दीया या ताज़े फूल रखे जा सकते हैं।
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मालाएँ
खास दिनों पर ताज़ी मालाएँ चढ़ाएँ और मुरझाने से पहले बदल दें। कई परिवार प्लास्टिक की मालाओं से बचते हैं।
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हालत
चटका हुआ काँच या फीका पड़ा प्रिंट बदल दें। पुरानी तस्वीरों को डिजिटल रिस्टोरेशन से फिर ताज़ा किया जा सकता है।
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परिवार घर में पूर्वजों को सम्मान कैसे दे सकते हैं?
परिवार घर में पूर्वजों को बड़े तामझाम से नहीं, छोटी और सच्चे मन से की गई रस्मों से और आपस में यादें बाँटकर सम्मान दे सकते हैं। याद करना तब सबसे ज़्यादा मायने रखता है जब वह परिवार को साथ ले आए।
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दीया जलाएँ
पुण्यतिथि पर, पितृ पक्ष में या पारिवारिक अवसरों पर।
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फूल चढ़ाएँ
खास दिनों पर ताज़े फूल या छोटी माला।
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किस्से सुनाएँ
बच्चों को दादा-दादी की ज़िंदगी, मूल्यों और हँसी-मज़ाक के बारे में बताएँ।
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भलाई के काम
उनके नाम पर दूसरों को खाना खिलाना या दान देना पूर्वजों को सम्मान देने का पारंपरिक तरीका है।
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शांति की प्रार्थना
अंत में शांति की कामना के साथ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः कहना एक कोमल समापन है।
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अगर घर में दुख भारी लगे तो?
अगर घर में दुख भारी लगे, तो खुद के साथ नरमी बरतें। शोक की कोई समय-सीमा नहीं होती। कुछ लोगों को रोज़ तस्वीरें देखकर सुकून मिलता है, जबकि कुछ को तस्वीरें देख पाने में समय लगता है। दोनों स्वाभाविक हैं।
वास्तु, रेकी और जगह की शुद्धि सुकून दे सकते हैं, पर भावनात्मक सहारे का विकल्प नहीं हैं। अगर आपके लिए यह दौर बहुत मुश्किल हो रहा है, तो कृपया किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। भारत में आप मुफ़्त Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 (या 1-800-891-4416) पर कॉल कर सकते हैं, जो 24×7 उपलब्ध है।
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वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श कब लें
वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श तब लें जब आपको समझ न आए कि छोटे फ़्लैट में दिवंगत परिजनों की तस्वीरें कहाँ लगाई जा सकती हैं, या किसी के जाने के बाद घर भारी-सा लग रहा हो। सलाहकार तस्वीरों के लिए सम्मानजनक जगहें सुझा सकता है, और जगह की हल्की शुद्धि भी।
VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर घर का परामर्श पूरी संवेदनशीलता के साथ देती हैं: अपने अंधेरी ईस्ट के ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट विज़िट करके, और फ़्लोर प्लान व फ़ोटो के आधार पर दूर से भी।
सवाल
आम सवाल
पूर्वजों की तस्वीरें किस दिशा में लगानी चाहिए?
पूर्वजों की तस्वीरें आम तौर पर दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर इस तरह लगाई जाती हैं कि उनका मुँह उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर रहे। पश्चिम की दीवार एक ठीक विकल्प है।
क्या पूर्वजों की तस्वीरें पूजा घर में रखी जा सकती हैं?
परंपरा से पूर्वजों की तस्वीरें मंदिर के अंदर देवी-देवताओं के साथ नहीं रखी जातीं। उन्हें पास की किसी अलग दीवार या शेल्फ़ पर रखें।
क्या अपने दिवंगत माता-पिता की तस्वीर बेडरूम में रखी जा सकती है?
वास्तु आम तौर पर सुझाता है कि दिवंगत परिजनों की तस्वीरें बेडरूम से बाहर रखी जाएँ, जो आराम की जगह है। लिविंग रूम की दक्षिण दीवार एक आम विकल्प है।
क्या पूर्वजों की तस्वीरों पर माला चढ़ानी चाहिए?
कई परिवार पुण्यतिथि और खास दिनों पर पूर्वजों की तस्वीरों पर माला चढ़ाते हैं। ताज़े फूलों का इस्तेमाल करें और मुरझाने से पहले बदल दें।
क्या पूर्वजों की तस्वीरें लिविंग रूम में लगाई जा सकती हैं?
जी हाँ, लिविंग रूम पूर्वजों की तस्वीरों के लिए एक आम और ठीक जगह है। आदर्श यह है कि वे दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर हों, मुख्य प्रवेश से दूर।
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