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घर का वास्तु · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें

वास्तु के अनुसार घर में आईना कहाँ लगाएँ

सही जगह लगा आईना छोटे फ़्लैट को खिला-खिला बना सकता है; गलत जगह लगा आईना नींद बिगाड़ सकता है या ऊर्जा को दरवाज़े से बाहर धकेल सकता है। घर के हर कमरे में आईने का वास्तु और आसान उपाय।

लेखिका: , वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

वास्तु के अनुसार घर में आईना कहाँ लगाएँ

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वास्तु में आईने क्यों मायने रखते हैं?

वास्तु में आईने इसलिए मायने रखते हैं क्योंकि माना जाता है कि आईने के सामने जो भी चीज़ हो, वह उसकी ऊर्जा को लौटाता है और कई गुना बढ़ा देता है। आईने को जल तत्व से जोड़ा जाता है, इसलिए वह किसी ज़ोन में खुलापन और रोशनी ला सकता है, या लापरवाही से लगाया जाए तो उसे बिगाड़ भी सकता है।

मुंबई के छोटे फ़्लैटों में आईने डिज़ाइन के लिहाज़ से भी बड़े काम की चीज़ हैं। वे तंग कमरों को चौड़ा दिखाते हैं और दिन की रोशनी को अँधेरे कोनों तक पहुँचाते हैं। आईने की जगह बदलना उन सबसे आसान बदलावों में से है जिनमें कोई तोड़-फोड़ नहीं होती, और यह किराये के घरों के लिए बिल्कुल ठीक है।

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आईने के लिए कौन-सी दीवारें शुभ मानी जाती हैं?

घर में आईने के लिए उत्तर और पूर्व की दीवारें आमतौर पर सबसे शुभ मानी जाती हैं। इन दिशाओं को अवसर, विकास और सुबह की ताज़ा ऊर्जा से जोड़ा जाता है, और माना जाता है कि आईना इन्हें और बढ़ा देता है।

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    उत्तर की दीवार

    कुबेर की दिशा; यहाँ लगे आईने को नए अवसर आते रहने से जोड़ा जाता है।

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    पूर्व की दीवार

    सूर्य और जीवन-शक्ति से जुड़ी; आईना यहाँ रोशनी और ताज़गी को लौटाता है।

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    उत्तर-पूर्व

    ईशान्य (उत्तर-पूर्व) जल तत्व से जुड़ा है; यहाँ साफ़ आईना ख़ास तौर पर हल्का और खुला लग सकता है।

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    दक्षिण और पश्चिम की दीवारें

    इन पर आमतौर पर बड़े आईने नहीं लगाए जाते, जब तक सलाहकार किसी ख़ास वजह से ऐसा करने को न कहे।

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बेडरूम में आईना कहाँ लगाना चाहिए?

बेडरूम में आईने ऐसे लगाए जाते हैं कि उनमें बिस्तर न दिखे। बिस्तर के सामने लगे आईने को उचटी नींद और बेचैनी से जोड़ा जाता है, और जिन फ़्लैटों में अलमारियों पर आईने जड़े होते हैं, वहाँ वास्तु की यह सबसे आम परेशानियों में से एक है।

ड्रेसिंग मिरर उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाएँ, या अलमारी के ऐसे दरवाज़े के अंदर, जो रात में बंद रहता हो।

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    आईने वाली अलमारी

    अगर स्लाइडिंग अलमारी के आईने बिस्तर के सामने पड़ते हैं, तो रात में उन पर पर्दा डाल दें या हल्का कपड़ा ढक दें।

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    ड्रेसिंग टेबल

    उसे थोड़ा तिरछा करके ऐसे रखें कि लेटे हुए आपको शीशे में बिस्तर न दिखे।

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    टेलीविज़न स्क्रीन

    बंद टीवी की स्क्रीन भी आईने की तरह चीज़ें दिखाती है; उसे ढक दें या ऐसी जगह रखें जहाँ वह बिस्तर के सामने न पड़े।

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मुख्य द्वार के पास आईना कहाँ लगाएँ?

मुख्य द्वार के पास आईना बग़ल की दीवार पर लगाएँ, मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं। परंपरागत रूप से माना जाता है कि दरवाज़े के सामने का आईना अंदर आती ऊर्जा को सीधे बाहर लौटा देता है।

प्रवेश वाली लॉबी की उत्तर या पूर्व की बग़ल की दीवार पर लगा छोटा आईना तंग रास्ते में भी अपनापन ला सकता है। उसे साफ़ और रोशन रखें, और ध्यान रहे कि उसमें जूतों का रैक नहीं, बल्कि कोई अच्छी चीज़ दिखे, जैसे पौधा या कोई कलाकृति।

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बाथरूम और लिविंग रूम में आईने कैसे लगाएँ?

बाथरूम और लिविंग रूम में आईने उत्तर या पूर्व की दीवार पर ठीक रहते हैं और उनमें रोशनी, हरियाली या खुली जगह दिखनी चाहिए, बिखरा हुआ सामान नहीं।

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    बाथरूम

    आईना उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाएँ; ऐसा आईना न लगाएँ जिसमें टॉयलेट सीट दिखे या जो बाथरूम के दरवाज़े के सामने हो।

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    लिविंग रूम

    उत्तर या पूर्व की दीवार पर ऐसा आईना जिसमें खिड़की या पौधा दिखे, रोशनी और खुलेपन का एहसास बढ़ाता है।

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    डाइनिंग एरिया

    जिस आईने में डाइनिंग टेबल दिखे, उसे परंपरागत रूप से समृद्धि से जोड़ा जाता है, बशर्ते वह उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगा हो।

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    लॉकर के पास

    कभी-कभी ऐसा आईना लगाया जाता है जिसमें उत्तर मुखी बंद लॉकर दिखे; पर खुला या बिखरा हुआ लॉकर आईने में न दिखने दें।

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    रसोई

    ऐसे आईनों से बचें जिनमें चूल्हा दिखता हो, क्योंकि अग्नि और जल को आपस में टकराने वाला माना जाता है।

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आईने के कौन-से आकार और साइज़ ठीक रहते हैं?

सादे फ़्रेम वाले चौकोर और आयताकार आईने घरों के लिए आमतौर पर सबसे ठीक रहते हैं। वे स्थिर और संतुलित लगते हैं और ज़्यादातर दीवारों पर जँचते हैं।

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    आकार

    चौकोर और आयताकार बेहतर हैं; गोल और अंडाकार आईने पश्चिम में या सजावट के तौर पर चल सकते हैं।

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    ऊँचाई

    आईना इतनी ऊँचाई पर लगाएँ कि घर के सबसे लंबे सदस्य का सिर कटा हुआ न दिखे।

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    हालत

    चटके, किनारे से टूटे, धुँधले या टेढ़ी-मेढ़ी शक्ल दिखाने वाले आईने तुरंत बदल दें।

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    आमने-सामने के आईने

    दो आईने सीधे आमने-सामने न रखें, क्योंकि इससे प्रतिबिंबों का कभी न ख़त्म होने वाला सिलसिला बन जाता है।

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अगर आईना हटा न सकें तो क्या करें?

अगर आईना हटा न सकें, तो उसे ढक सकते हैं, उसका कोण बदल सकते हैं या उसमें दिखने वाली चीज़ बदल सकते हैं। ये उपाय किराये के फ़्लैट और बनी-बनाई फ़िटिंग के लिए आदर्श हैं।

रात में उस पर कपड़े का कवर या पर्दा डाल दें, आईने में जो जगह दिखती है वहाँ कोई पौधा या अच्छी कलाकृति रख दें, या बड़े आईने के एक हिस्से पर फ़्रॉस्टेड फ़िल्म लगा दें। उसे बेदाग़ साफ़ रखें, क्योंकि साफ़ आईना हमेशा धूल भरे आईने से हल्का लगता है।

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वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें

वास्तु विशेषज्ञ से तब मिलें जब आपके घर में पूरी-पूरी दीवार पर आईने लगे हों, बिस्तर के सामने आईने वाली अलमारियाँ हों, या आप बहुत सारे शीशे वाला इंटीरियर डिज़ाइन करवा रहे हों। मिरर और लाइट थेरेपी तब सबसे असरदार रहती है जब उसे पूरे लेआउट को ध्यान में रखकर तय किया जाए।

VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर घरों के वास्तु परामर्श में ही मिरर और लाइट थेरेपी भी देती हैं। परामर्श उनके अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर आकर होता है, या फ़्लोर प्लान और तस्वीरें देखकर दूर से।

सवाल

आम सवाल

वास्तु के अनुसार आईने के लिए कौन-सी दिशा अच्छी है?

वास्तु के अनुसार आईने के लिए उत्तर और पूर्व की दीवारें आमतौर पर अच्छी मानी जाती हैं। दक्षिण और पश्चिम की दीवारों पर बड़े आईने न लगाएँ, जब तक किसी ख़ास वजह से ऐसा करने की सलाह न मिली हो।

क्या बिस्तर के सामने आईना ख़राब होता है?

वास्तु में बिस्तर के सामने लगे आईने को उचटी नींद से जोड़ा जाता है। उसे हटा दें, बिस्तर से दूसरी ओर मोड़ दें, या न हटा सकें तो रात में कपड़े से ढक दें।

क्या आईना मुख्य द्वार के सामने हो सकता है?

आईना मुख्य द्वार के सीधे सामने नहीं होना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि वह अंदर आती ऊर्जा को बाहर लौटा देता है। उसे प्रवेश की बग़ल की दीवार पर लगाएँ।

बाथरूम का आईना कहाँ लगाना चाहिए?

बाथरूम के आईने के लिए उत्तर या पूर्व की दीवार आदर्श है। उसे ऐसे न लगाएँ कि उसमें टॉयलेट सीट दिखे या वह सीधे बाथरूम के दरवाज़े के सामने हो।

टूटे हुए आईने का क्या करना चाहिए?

टूटा या चटका हुआ आईना तुरंत बदलें और उसे सुरक्षित तरीके से फेंकें। वास्तु में टूटे आईनों को बिखरी हुई ऊर्जा से जोड़ा जाता है, और वे सुरक्षा के लिहाज़ से भी ख़तरनाक होते हैं।

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