वास्तु शास्त्र · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
मयमतम् और मानसार: वास्तु के शास्त्रीय ग्रंथ
मयमतम्, मानसार और विश्वकर्मा प्रकाश वास्तु शास्त्र की उन शास्त्रीय किताबों में हैं जिन्होंने भारतीय वास्तुकला को आकार दिया। इनमें क्या है, आज इन्हें कैसे पढ़ें, और इनके विचार मुंबई के आधुनिक फ़्लैट तक कैसे पहुँचते हैं।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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वास्तु शास्त्र की शास्त्रीय किताबें कौन-सी हैं?
वास्तु शास्त्र की शास्त्रीय किताबें संस्कृत के परंपरागत ग्रंथ हैं जिनमें घर, मंदिर, महल और बस्तियाँ बनाने के सिद्धांत दिए गए हैं। जिन नामों का ज़िक्र सबसे ज़्यादा सुनने को मिलता है, उनमें मयमतम्, मानसार और विश्वकर्मा प्रकाश शामिल हैं।
ये ग्रंथ शिल्प शास्त्र (हस्तकला और वास्तुकला का ज्ञान) की एक बड़ी भारतीय परंपरा का हिस्सा हैं। ये बनाने वालों, कारीगरों और बनवाने वालों के लिए लिखे गए थे, इसलिए ये घर-गृहस्थी के नियमों की किताब कम और तकनीकी मैनुअल ज़्यादा लगते हैं।
ये कब लिखे गए, किसने लिखे और अलग-अलग इलाकों में इनके कौन-से रूप मिलते हैं, इस पर विद्वान विस्तार से चर्चा करते हैं। घर के मालिकों के लिए काम की चीज़ इतिहास नहीं, बल्कि विचार हैं: जगह का चुनाव कैसे होता है, इमारत की दिशा कैसे तय होती है, और अनुपात तथा संतुलन क्यों मायने रखते हैं।
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मयमतम् क्या है?
मयमतम् वास्तुकला का शास्त्रीय ग्रंथ है, जिसे परंपरागत रूप से मय नाम के एक पौराणिक महान शिल्पी की रचना माना जाता है। इसका खास जुड़ाव दक्षिण भारत की वास्तु परंपराओं से है।
मोटे तौर पर इसमें ज़मीन की जाँच और तैयारी, नाप की पद्धतियाँ, गाँवों और नगरों का लेआउट, अलग-अलग आकार के घर और मंदिरों की बनावट की चर्चा है। जो वास्तुकार और इतिहासकार जानना चाहते हैं कि भारतीय इमारतों की योजना कैसे बनती थी, वे अक्सर इसे पढ़ते हैं।
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मानसार क्या है?
मानसार वास्तुकला और मूर्तिकला पर संस्कृत की एक शास्त्रीय रचना है, जिसका पारंपरिक भारतीय निर्माण के अध्ययनों में खूब हवाला दिया जाता है। इसके नाम का मतलब अक्सर 'नाप का सार' बताया जाता है, और इससे पता चलता है कि इसमें अनुपात पर कितनी बारीकी से ध्यान दिया गया है।
मोटे तौर पर इसमें जगह का चुनाव, दिशा, नाप की पद्धतियाँ, घरों, मंदिरों और नगरों की बनावट, और मूर्तियों का निर्माण आता है। यह उन ग्रंथों में से है जिनसे कई लोगों का पहली बार इस विचार से परिचय होता है कि भारत की वास्तुकला का अपना एक सुव्यवस्थित विज्ञान है।
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विश्वकर्मा प्रकाश क्या है?
विश्वकर्मा प्रकाश एक वास्तु ग्रंथ है जो विश्वकर्मा से जुड़ा है, जिन्हें भारतीय परंपरा में दिव्य शिल्पी के रूप में पूजा जाता है। घरों और रिहायशी इमारतों के मार्गदर्शन के लिए इसे अक्सर देखा जाता है।
दूसरे ग्रंथों की तरह इसमें भी ज़मीन के चुनाव, दिशाओं, कमरों की जगह और निर्माण शुरू करने के शुभ समय जैसे विषय हैं। अलग-अलग संस्करण और अनुवाद मौजूद हैं, इसलिए पढ़ने वालों को शब्दों में, और किस बात पर कितना ज़ोर है इसमें, फ़र्क मिल सकता है।
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इन ग्रंथों में कौन-से विचार एक जैसे हैं?
इन ग्रंथों में कुछ बुनियादी विचार एक जैसे हैं, और वे आज भी वास्तु के काम को दिशा देते हैं। ब्योरे अलग-अलग हैं, पर बुनियादी नज़रिया इतना एक-सा है कि हैरानी होती है।
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ज़मीन का ध्यान से चुनाव
निर्माण से पहले ज़मीन का आकार, ढलान, मिट्टी और आसपास का माहौल परखना, जिसे भूमि परीक्षा (ज़मीन की जाँच) कहते हैं।
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दिशाओं के अनुसार रुख़
इमारतों को मुख्य दिशाओं की सीध में रखना और हर ज़ोन के गुण का सम्मान करना।
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वास्तु पुरुष मंडल
जगह की ऊर्जा को दिखाने वाला ग्रिड, जिसकी मदद से तय होता है कि कौन-सी जगह किस ज़ोन में ठीक रहेगी।
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अनुपात और नाप
लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई के बीच तालमेल वाले अनुपात, जिनके बारे में माना जाता है कि उनसे संतुलन बनता है।
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खुला केंद्र
ब्रह्मस्थान (केंद्र) का सम्मान, जो पारंपरिक घरों में अक्सर आँगन के रूप में दिखता है।
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अनुष्ठान और संकल्प
निर्माण के अहम पड़ावों पर होने वाली रस्में, जिनमें वहाँ रहने वाले लोगों की फ़िक्र झलकती है।
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आज इन ग्रंथों को कैसे पढ़ना चाहिए?
इन ग्रंथों को सिद्धांत समझने के लिए पढ़ें, ऐसी चेकलिस्ट मानकर नहीं जिसे अक्षर-अक्षर लागू करना हो। ये बड़े प्लॉटों, आँगन वाले घरों और मंदिरों के लिए लिखे गए थे, ऊँची इमारतों, लिफ़्टों और साझा दीवारों के आने से बहुत पहले।
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भरोसेमंद अनुवाद चुनें
विद्वानों के तैयार किए ऐसे संस्करण देखें जिनकी भूमिका में संदर्भ और शब्दावली समझाई गई हो।
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धीरे-धीरे पढ़ें
कई अंश तकनीकी हैं; नाप याद करने की कोशिश के बजाय विचारों के नोट्स बनाएँ।
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सारांशों से सावधान रहें
इंटरनेट के सारांश कभी-कभी इन किताबों के हवाले से ऐसे नियम बताते हैं जो उनमें साफ़ तौर पर मौजूद नहीं हैं।
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पढ़ाई को अभ्यास से जोड़ें
सिद्धांत तब सबसे ज़्यादा समझ आते हैं जब उन्हें असली फ़्लोर प्लान पर लागू होते देखा जाए।
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शास्त्रीय सिद्धांत मुंबई के फ़्लैट पर कैसे लागू होते हैं?
शास्त्रीय सिद्धांत मुंबई के फ़्लैट पर ढालकर लागू होते हैं: दिशा, संतुलन और खुली जगह के वही विचार उस रूप में अपनाए जाते हैं जितना एक छोटे घर में हो सकता है। बीसवीं मंज़िल के अपार्टमेंट में आप ज़मीन की ढलान नहीं चुन सकते, पर उसके भीतर के ज़ोन का ध्यान ज़रूर रख सकते हैं।
दक्षिण-पूर्व में रसोई, दक्षिण-पश्चिम में मुख्य बेडरूम, उत्तर-पूर्व में पूजा का कोना और खुला, साफ़ केंद्र, ये सब उसी पुरानी समझ को आज के घर में उतारने के तरीके हैं। जहाँ दीवारें हटाई नहीं जा सकतीं, वहाँ पिरामिड, क्रिस्टल, रंग और रोशनी जैसे बिना तोड़-फोड़ वाले उपायों से इन सिद्धांतों को निभाया जाता है।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें
वास्तु विशेषज्ञ से तब मिलें जब आप चाहते हों कि शास्त्रीय सिद्धांत आपके अपने घर, ऑफ़िस या प्लॉट पर सही ढंग से लागू हों। पुराने ग्रंथों को आधुनिक इमारतों के लिए समझने में अध्ययन और असली फ़्लोर प्लान पर काम का अनुभव, दोनों चाहिए।
VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर वास्तु का काम सिलसिलेवार ढंग से और पूरी जाँच-परख के साथ करती हैं, और हर सुझाव के पीछे की वजह समझाती हैं। परामर्श अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर लिया जा सकता है, या फ़्लोर प्लान और फ़ोटो के आधार पर डिस्टेंस परामर्श के तौर पर।
सवाल
आम सवाल
वास्तु शास्त्र की मूल किताब कौन-सी है?
वास्तु शास्त्र की कोई एक मूल किताब नहीं है; यह एक परंपरा है जो कई शास्त्रीय ग्रंथों में सँजोई गई है। मयमतम्, मानसार और विश्वकर्मा प्रकाश उन ग्रंथों में हैं जिनका हवाला सबसे ज़्यादा दिया जाता है।
क्या मयमतम् अंग्रेज़ी में मिलती है?
हाँ, मयमतम् के अंग्रेज़ी अनुवाद उपलब्ध हैं, जिनमें विद्वानों के तैयार किए संस्करण भी हैं। ऐसा अनुवाद चुनें जिसमें भूमिका और टिप्पणियाँ हों, क्योंकि मूल ग्रंथ तकनीकी है और संदर्भ मायने रखता है।
क्या सिर्फ़ किताबें पढ़कर अपने घर का वास्तु किया जा सकता है?
किताबों से आप काम के सिद्धांत सीख सकते हैं, पर उन्हें घर पर सही ढंग से लागू करने के लिए कम्पास नाप और अनुभव चाहिए। साथ ही, शास्त्रीय ग्रंथ ऐसी इमारतों के लिए लिखे गए थे जो आधुनिक फ़्लैटों से बहुत अलग थीं।
क्या शास्त्रीय वास्तु ग्रंथों में फ़्लैटों का ज़िक्र है?
नहीं, शास्त्रीय वास्तु ग्रंथ अपार्टमेंट इमारतों के बहुत पहले लिखे गए थे। आधुनिक सलाहकार दिशा, संतुलन और खुली जगह के उनके सिद्धांतों को फ़्लैटों और ऊँची इमारतों के हिसाब से ढालते हैं।
शिल्प शास्त्र क्या है?
शिल्प शास्त्र कला, हस्तकला और वास्तुकला का पारंपरिक भारतीय ज्ञान है। वास्तु शास्त्र इससे करीब से जुड़ा है, और उसका ध्यान इस पर है कि इमारतों और जगहों की योजना कैसे बने और उनका रुख़ किस दिशा में हो।
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