वास्तु शास्त्र · 27 सितंबर 2026 · 7 मिनट में पढ़ें
रिमोट वास्तु परामर्श: फ़्लोर प्लान से यह कैसे होता है
अगर साइट विज़िट संभव न हो, तो वास्तु विश्लेषण फ़्लोर प्लान और फ़ोटो से भी हो सकता है। जानिए ठीक-ठीक क्या भेजना है, दिशाएँ कैसे तय होती हैं, और बदले में आपको क्या मिलता है।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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रिमोट वास्तु परामर्श कैसे काम करता है?
यह चार चरणों में होता है: आप कम्पास रीडिंग और फ़ोटो के साथ फ़्लोर प्लान (नक्शा) भेजते हैं, नक्शे को दिशाओं के हिसाब से बैठाकर वास्तु पुरुष मंडल (घर का ग्रिड) के आधार पर परखा जाता है, कॉल पर आपसे निष्कर्षों की चर्चा होती है, और आपको उपायों की लिखित रिपोर्ट मिलती है।
इसे साइट विज़िट का हल्का रूप न समझें। यहाँ हर परामर्श का पहला चरण दूर से किया गया विश्लेषण ही होता है, उन परामर्शों में भी जिनमें आगे चलकर विज़िट होती है। घर में क़दम रखने से पहले नक्शा हमेशा पढ़ा जाता है।
विज़िट से दो चीज़ें और मिलती हैं: सलाहकार की ख़ुद ली हुई कम्पास रीडिंग, और वे बातें जो फ़ोटो में नहीं दिखतीं: सीलन की गंध, प्रवेश द्वार पर सीधी आकर लगती सड़क, पड़ोस की इमारत, और रोशनी असल में कैसे घूमती है। जहाँ यह मायने रखता है, वहाँ साफ़ बता दिया जाता है। रिमोट परामर्श कहीं से भी हो सकता है, और आमने-सामने की विज़िट पूरे मुंबई और ठाणे में होती है। भारत के दूसरे शहरों में विज़िट अनुरोध पर की जाती है।
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आपको क्या भेजना है?
यह चरण जितना सटीक होगा, आगे का सारा काम उतना ही अच्छा होगा। फ़ोन में जो पड़ा है वही न भेज दें, इस पर आराम से आधा घंटा लगाएँ।
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फ़्लोर प्लान (नक्शा)
बिल्डर या आर्किटेक्ट का नक्शा आदर्श है। कमरों के नाम और अंदाज़न नाप के साथ हाथ से बनाया साफ़ स्केच भी चलता है। उसे सुंदर होना ज़रूरी नहीं, सही होना ज़रूरी है।
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कम्पास रीडिंग
मुख्य द्वार के अंदर बाहर की ओर मुँह करके खड़े हों और डिग्री में दिशा नोट करें। इसे तीन जगहों पर लें और तीनों भेजें, क्योंकि फ़ोन धातु और इलेक्ट्रॉनिक चीज़ों के पास भटक जाते हैं।
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हर कमरे की फ़ोटो
हर कमरे के हर कोने से एक, ताकि बनावट समझ आए। बाहर से प्रवेश द्वार, किचन प्लेटफ़ॉर्म, पूजा की जगह, और हर बेडरूम की फ़ोटो रखें जिसमें बिस्तर दिखे।
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चीज़ें कहाँ रखी हैं
बिस्तर कहाँ हैं और सोते समय सिर किस दिशा में रहता है, खाना बनाने का प्लेटफ़ॉर्म कहाँ है और बनाते समय आपका मुँह किस ओर रहता है, पानी का स्रोत, टॉयलेट, लॉकर या तिजोरी, और मुख्य बिजली का पैनल।
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बाहर क्या है
सड़क, प्रवेश का रास्ता, कोई जलाशय, बड़े पेड़, आपके फ़्लैट से लगी लिफ़्ट या सीढ़ी, और बालकनी किस तरफ़ खुलती हैं।
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कौन रहता है और आपको क्या परेशान कर रहा है
साथ में सीधे शब्दों में लिखें कि क्या ठीक नहीं चल रहा: नींद, ध्यान, झगड़े, पैसा, सेहत, बिज़नेस।
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बिना विज़िट के दिशाएँ कैसे तय होती हैं?
आपकी कम्पास रीडिंग को नक्शे से मिलाकर और उन चीज़ों से परखकर जो झूठ नहीं बोल सकतीं। इनमें सूरज सबसे काम की चीज़ है: टाइमस्टैम्प (समय की छाप) वाली ऐसी फ़ोटो जिसमें दिखे कि सुबह की रोशनी कहाँ पड़ती है, सलाहकार को दिशा के बारे में बहुत कुछ बता देती है।
इमारत की सैटेलाइट इमेज प्लॉट की दिशा और सड़क की स्थिति पक्की करने में मदद करती है, और फ़्लैट के अंदर अलग-अलग जगहों पर बार-बार रीडिंग लेने से पता चल जाता है कि कौन सी रीडिंग चुंबकीय गड़बड़ी की वजह से साफ़ तौर पर ग़लत है, और उसे हटा दिया जाता है।
अगर रीडिंग आपस में मेल न खाएँ और बात सुलझ न पाए, तो आपको अंदाज़े पर बनी रिपोर्ट नहीं दी जाएगी। आपसे कहा जाएगा कि रीडिंग एक ख़ास तरीक़े से दोबारा लें। उत्तर-पूर्व (ईशान्य) ग़लत कोने में मान लिया गया, तो आगे की हर सिफ़ारिश ग़लत हो जाएगी।
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असल में क्या-क्या परखा जाता है?
नक्शे को ज़ोन में बाँटा जाता है और हर ज़ोन को इस हिसाब से परखा जाता है कि वह किस चीज़ से जुड़ा ज़ोन है। फिर पूरे घर को एक साथ पढ़ा जाता है, कमियों की सूची बनाकर नहीं।
मुख्य द्वार को कम्पास से निकाले गए पद के हिसाब से परखा जाता है, क्योंकि उसी से तय होता है कि ऊर्जा कैसे अंदर आती है। रसोई के लिए देखा जाता है कि वह दक्षिण-पूर्व (आग्नेय), यानी अग्नि के ज़ोन, में है या नहीं, वैसे उत्तर-पश्चिम (वायव्य) भी चल सकता है, और यह भी कि खाना बनाने वाले का मुँह किस ओर रहता है। बेडरूम में दो बातें देखी जाती हैं: स्थिरता के लिए दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य), और सोने की दिशा, यानी सिर दक्षिण या पूर्व की ओर। पूजा की जगह उत्तर-पूर्व (ईशान्य) में होनी चाहिए। टॉयलेट की जगह उत्तर-पूर्व और केंद्र को ध्यान में रखकर जाँची जाती है।
ब्रह्मस्थान (घर का केंद्र) में देखा जाता है कि वहाँ फ़ालतू सामान या भारीपन तो नहीं, क्योंकि उसे खुला और हल्का रहना चाहिए। यह भी देखा जाता है कि पानी और आग की जगहें आपस में टकरा तो नहीं रहीं, प्रवेश से कमरों तक आवाजाही कैसी है, और स्टोरेज, आईने और भारी फ़र्नीचर कहाँ हैं। हर दिशा की अपनी ताक़त भी होती है और चुनौतियाँ भी, और इनमें से कोई भी बात आपके घर पर सुनाया गया फ़ैसला नहीं है।
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अंत में आपको क्या मिलता है?
विश्लेषण और उपायों के साथ एक व्यक्तिगत लिखित रिपोर्ट, और कॉल पर आपसे उसकी चर्चा, ताकि आप सिर्फ़ 'क्या करना है' नहीं, 'क्यों करना है' भी पूछ सकें।
उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं। न कुछ तोड़ा जाता है, न कोई दीवार खिसकाई जाती है, न रसोई दोबारा बनती है। काम इन चीज़ों से होता है: सक्रिय किए गए पिरामिड, क्रिस्टल, रेकी, रंग, धातु, ध्वनि और सॉल्ट थेरेपी, और घर के आसान रीति-रिवाज़। ये सब आसानी से साथ ले जाए जा सकते हैं, इसीलिए किराये के फ़्लैट में और ऐसे फ़्लैट में भी ठीक बैठते हैं जिसे आप शायद दो साल में छोड़ दें।
उपाय आम तौर पर क्रम से दिए जाते हैं, सब एक साथ आप पर नहीं लादे जाते: पहले वे थोड़े-से उपाय जो सबसे ज़रूरी हैं, बाक़ी अगले कुछ हफ़्तों में। बाद की फ़ॉलो-अप बातचीत इस प्रक्रिया का हिस्सा है, क्योंकि अगर रिपोर्ट आधी ही लागू हो पाई है, तो उस पर ईमानदारी से बात कर लेना काम का होता है।
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साइट विज़िट फिर भी कब करवानी चाहिए?
जब प्रॉपर्टी जटिल हो, जब कोई गंभीर गड़बड़ी हो, या जब बड़ी रक़म ख़र्च होने वाली हो।
प्लॉट, बंगले, फ़ैक्टरी, रेस्तरां और बड़े ऑफ़िस के लिए आम तौर पर विज़िट करवाना ही ठीक रहता है, क्योंकि आसपास का माहौल, ढलान, पहुँच के रास्ते और पड़ोस की इमारतें यहाँ सचमुच मायने रखती हैं, और फ़ोटो में इनका सही अंदाज़ा नहीं लगता। प्लॉट ख़रीदना इसका सबसे साफ़ उदाहरण है।
आमने-सामने के परामर्श पूरे मुंबई और ठाणे में, और अनुरोध पर भारत के दूसरे शहरों में होते हैं। दुनिया में कहीं भी स्थित सामान्य फ़्लैट या अपार्टमेंट के लिए, अच्छे नक्शे और घर को जैसा है वैसा दिखाने वाली फ़ोटो से रिमोट परामर्श आम तौर पर काफ़ी होता है, और विदेश में रहने वाले कई लोगों के लिए यही एक व्यावहारिक रास्ता है।
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रिमोट परामर्श क्या नहीं करेगा
यह नतीजों का वादा नहीं करेगा। वास्तु जगह को इस तरह जमाने का तरीक़ा है कि रोशनी, हवा, दिशा और व्यवस्था वहाँ रहने वालों को सहारा दें। कोई भी ईमानदारी से यह नहीं कह सकता कि एक आईना लगाने से फ़लाँ तारीख़ तक आपकी आमदनी बदल जाएगी।
यह पेशेवर सलाह की जगह नहीं लेगा। सेहत के सवाल डॉक्टर के पास, क़ानूनी और प्रॉपर्टी के टाइटल के सवाल वकील के पास, और निवेश के फ़ैसले योग्य वित्तीय सलाहकार के पास जाने चाहिए। वास्तु का काम इनके साथ चलता है, इनकी जगह नहीं लेता।
और यह आपसे आपका घर तुड़वाने को नहीं कहेगा। अगर आपसे कभी कहा जाए कि आफ़त से बचने के लिए कोई दीवार गिरानी होगी या कोई महँगी चीज़ फ़ौरन ख़रीदनी होगी, तो समझ लें कि यह रुककर दूसरी राय लेने का समय है।
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कहीं से भी परामर्श तय करना
डॉ. किमया पारिख-आंबेकर VastuKimaya के ऑफ़िस, A-1304, नमन प्रीमियर, मरोल मिलिट्री रोड, अंधेरी ईस्ट, मुंबई 400059, से परामर्श करती हैं। आमने-सामने की विज़िट पूरे मुंबई और ठाणे में होती हैं, अनुरोध पर भारत के दूसरे शहरों में, और फ़्लोर प्लान व फ़ोटो से कहीं भी रिमोट परामर्श हो सकता है।
stayblessed@vastukimaya.com पर लिखें या +91 70391 07512 पर मैसेज करें। साथ में अपना शहर, विदेश में हों तो अपना टाइम ज़ोन, और एक पंक्ति में यह बताएँ कि आप क्या दिखवाना चाहते हैं। पहली परामर्श कॉल मुफ़्त है और उसी में प्रक्रिया समझाई जाती है।
संबंधित सेवाएँ, रेकी और क्रिस्टल थेरेपी, अक्सर उपायों की उसी योजना में शामिल रहती हैं, और उसी बातचीत में उन पर भी चर्चा हो सकती है। सेशन अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी या गुजराती में होते हैं।
सवाल
आम सवाल
क्या रिमोट वास्तु परामर्श साइट विज़िट जितना भरोसेमंद है?
सामान्य फ़्लैट के लिए, जिसका नक्शा अच्छा हो और फ़ोटो घर को जैसा है वैसा दिखाती हों, जी हाँ। विज़िट में सलाहकार की अपनी कम्पास रीडिंग और आसपास का परिवेश जुड़ता है, जो प्लॉट, बंगले और कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
अगर मेरे पास फ़्लोर प्लान न हो तो?
कमरों के नाम और अंदाज़न नाप के साथ सावधानी से हाथ से बनाया स्केच चलता है। स्केच कितना साफ़-सुथरा है, इससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी है कि वह सही हो। इसलिए जहाँ हो सके, अंदाज़ा न लगाएँ, नापकर लिखें।
कम्पास रीडिंग मैं ख़ुद कैसे लूँ?
मुख्य द्वार के अंदर बाहर की ओर मुँह करके खड़े हों और डिग्री में दिशा नोट करें। इसे धातु और इलेक्ट्रॉनिक चीज़ों से दूर तीन अलग जगहों पर लें और तीनों रीडिंग भेजें।
क्या मुझसे दीवारें तोड़ने या कुछ दोबारा बनाने को कहा जाएगा?
नहीं। यहाँ के उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले हैं: पिरामिड, क्रिस्टल, रंग, धातु, ध्वनि, नमक और आसान रीति-रिवाज़। इसलिए कुछ तोड़ा नहीं जाता और ज़्यादातर बदलाव वापस किए जा सकते हैं।
क्या यह भारत से बाहर की प्रॉपर्टी के लिए हो सकता है?
जी हाँ। रिमोट परामर्श कहीं भी होता है, और तरीक़ा वही है: नक्शा, कम्पास रीडिंग, फ़ोटो, एक कॉल और उपायों की लिखित रिपोर्ट।
क्या मुझे जन्म की तारीख़ें भेजनी होंगी?
नहीं। वास्तु विश्लेषण प्रॉपर्टी, उसकी दिशा और आपकी बताई परेशानी के आधार पर होता है।
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