त्योहार और अनुष्ठान · 19 सितंबर 2026 · 6 मिनट में पढ़ें
दिवाली वास्तु: सफ़ाई, रोशनी और लक्ष्मी पूजा की दिशा
घर को वास्तु के अनुसार दिवाली के लिए तैयार करें: ज़ोन के हिसाब से सफ़ाई, दीये कहाँ रखें, मुख्य द्वार पर रंगोली और तोरण, और लक्ष्मी पूजा की सही दिशा।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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दिवाली पर वास्तु क्यों मायने रखता है?
दिवाली पर वास्तु इसलिए मायने रखता है कि यह त्योहार साफ़, रोशन और सुव्यवस्थित घर में लक्ष्मी (समृद्धि की देवी) का स्वागत करने का है, और वास्तु भी साल भर यही सिखाता है। परंपरा के अनुसार लक्ष्मी उन्हीं घरों में आती हैं जो साफ़-सुथरे और रोशन हों और जहाँ स्वागत का भाव हो।
दिवाली से पहले के हफ़्ते घर की ऊर्जा को नए सिरे से सँवारने का अच्छा समय हैं। सफ़ाई, मरम्मत, सजावट और रोशनी, ये सब प्राण (जीवन ऊर्जा) को ताज़ा करने और नए मौसम की शुरुआत सोच-समझकर करने के तरीके हैं।
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वास्तु के अनुसार दिवाली पर घर की सफ़ाई कैसे करें?
दिवाली पर घर की सफ़ाई ज़ोन-दर-ज़ोन करें और सबसे अहम जगहों से शुरुआत करें: उत्तर-पूर्व, उत्तर और घर का केंद्र। सिर्फ़ झाड़-पोंछ पर न रुकें; यह पुराना छोड़ने का मौसम है।
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पहले फ़ालतू सामान हटाएँ
टूटी चीज़ें, पुराने अख़बार, बेकार पड़े गैजेट, सूखे पौधे और जो कपड़े कोई नहीं पहनता, ये सब हटा दें। जो चीज़ें काम की हैं, उन्हें दान कर दें।
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उत्तर-पूर्व को पवित्र रखें
उत्तर-पूर्व (ईशान्य) से भारी सामान और कबाड़ हटाएँ, उसे पानी और थोड़े समुद्री नमक से पोंछें, और वहाँ रोशनी बनाए रखें।
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उत्तर: कुबेर का ज़ोन
उत्तर की दीवार के साथ वाली अलमारियाँ और शेल्फ़ साफ़ करें, ताकि अवसरों का यह ज़ोन खुला-खुला लगे।
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घर का केंद्र
ब्रह्मस्थान घर का हृदय है; यहाँ से जूते, बैग और एक के ऊपर एक रखा फ़र्नीचर हटाएँ।
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मरम्मत करें और बदलें
टपकते नल, बंद घड़ियाँ, फ़्यूज़ बल्ब और चरमराते दरवाज़े ठीक करवाएँ। ऐसी छोटी-छोटी मरम्मत से घर में रवानी लौट आती है।
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जाले और कोने
छत के कोने, पंखे और फ़र्नीचर के पीछे की जगह साफ़ करें, जहाँ रुकी हुई ऊर्जा जमा होने लगती है।
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दिवाली पर मुख्य द्वार कैसे सजाएँ?
मुख्य द्वार को ऐसे सजाएँ कि वह साफ़ और रोशन दिखे और आने वाले का स्वागत करता लगे, क्योंकि वास्तु में इसे घर का मुख माना जाता है, जहाँ से ऊर्जा और समृद्धि भीतर आती है।
दरवाज़ा और दहलीज़ धो लें, नेमप्लेट चमका लें और घिसा हुआ डोरमैट बदल दें। दरवाज़े की चौखट के ऊपर आम के पत्तों या गेंदे का ताज़ा तोरण लगाएँ। दहलीज़ पर चटक रंगों या फूलों की पंखुड़ियों से रंगोली बनाएँ। हर शाम दरवाज़े के दोनों ओर एक-एक दीया रखें, और त्योहार के दिनों में अपने फ़्लैट की लॉबी में जूते-चप्पल के रैक और कबाड़ न रखें। सोसाइटी की बिल्डिंग में, जहाँ गलियारा साझा होता है, दरवाज़े के ठीक भीतर एक छोटी रंगोली या दो दीये रखना ठीक रहता है।
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दीये और रोशनी कहाँ रखें?
परंपरा के अनुसार दीये और रोशनी मुख्य द्वार पर, पूजा की जगह, उत्तर-पूर्व में और घर के हर कोने में रखे जाते हैं, ताकि दिवाली की रात घर का कोई हिस्सा अँधेरा न रहे।
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मुख्य द्वार
लक्ष्मी के स्वागत के लिए दरवाज़े के दोनों ओर एक-एक दीया।
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पूजा घर
लक्ष्मी पूजा के समय देवता के सामने घी या तेल का दीया। उसे वेदी के दक्षिण-पूर्व हिस्से में रखना अच्छा माना जाता है, जो अग्नि का ज़ोन है।
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बालकनी और खिड़कियाँ
घर का बाहरी हिस्सा रोशन करने के लिए दीयों की कतारें या वॉर्म रोशनी वाली लाइटें।
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अँधेरे कोने
जिन कमरों और कोनों में अक्सर उदासी-सी रहती है, वहाँ एक दीया या छोटी लाइट।
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सुरक्षा पहले
दीये परदों से दूर रखें, उन्हें धातु या मिट्टी की थाली में रखें, और बच्चों या पालतू जानवरों के पास उन्हें कभी बिना निगरानी के न छोड़ें।
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लक्ष्मी पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?
लक्ष्मी पूजा आदर्श रूप से घर के उत्तर-पूर्व में, या उत्तर में की जाती है। मूर्ति का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर रखें, ताकि पूजा करते समय परिवार का मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे। उत्तर-पूर्व ईश और आध्यात्मिक स्पष्टता का ज़ोन है, और उत्तर कुबेर का, यानी धन का ज़ोन है। इसलिए दोनों में से जो भी जगह चुनें, उसका अपना महत्व है।
लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियाँ या तस्वीरें किसी साफ़, ऊँचे चबूतरे पर लाल या पीले कपड़े के ऊपर रखें, गणेश जी को लक्ष्मी जी की बाईं ओर रखें। उनके सामने पानी से भरा कलश, ताज़े फूल, मिठाई और एक दीया रखें। अगर छोटे फ़्लैट में आपका मंदिर कहीं और है, तो बस उसे जितना हो सके साफ़ और रोशन बना लें; श्रद्धा नाप-जोख से ज़्यादा मायने रखती है।
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दिवाली के दौरान पैसे और क़ीमती सामान कहाँ रखें?
पैसे और क़ीमती सामान ऐसे लॉकर या अलमारी में रखें जो दक्षिण या पश्चिम की दीवार से सटी हो और जिसका दरवाज़ा उत्तर की ओर, यानी कुबेर की दिशा में खुले। कई परिवार पूजा के समय नए बही-खाते, कुछ सिक्के या गहने भी प्रतीक रूप में लक्ष्मी की मूर्ति के पास चढ़ाते हैं, और बाद में उन्हें लॉकर में वापस रख देते हैं।
दिवाली से पहले लॉकर साफ़ करें, गैर-ज़रूरी काग़ज़ हटाएँ, और चाहें तो समृद्धि के पारंपरिक प्रतीक के तौर पर उसमें लाल कपड़ा या सिट्रीन का एक छोटा टुकड़ा रख सकते हैं।
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त्योहार के बाद दिवाली की ऊर्जा कैसे बनाए रखें?
लाइटें उतर जाने के बाद भी अगर कुछ आसान आदतें चलती रहें, तो दिवाली की ऊर्जा घर में बनी रह सकती है। रोज़ शाम को एक दीया जलाएँ। उत्तर-पूर्व और मुख्य द्वार को साफ़ रखें। शाम की प्रार्थना में घंटी बजाएँ या कोई सरल मंत्र बोलें, जैसे ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः (महालक्ष्मी को नमन)। और जो कबाड़ आपने हटाया है, उसे धीरे-धीरे फिर से जमा न होने दें।
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दिवाली वास्तु के लिए कौन-से रंग और सजावट ठीक रहते हैं?
दिवाली वास्तु के लिए चटक, गर्म और प्राकृतिक सजावट ठीक रहती है: गेंदा, आम के पत्ते, मिट्टी के दीये, रंगोली के रंग और हल्की सुनहरी लाइटें। इनमें एक ख़ुशनुमा, शुभ ऊर्जा होती है और ये आँखों को चुभती भी नहीं।
गर्माहट के लिए लिविंग रूम और मुख्य द्वार पर पीला, नारंगी, लाल और सुनहरा रंग इस्तेमाल करें। उत्तर-पूर्व में सजावट हल्की और कम रखें, सफ़ेद या हल्के पीले फूलों के साथ। जहाँ तक हो सके प्लास्टिक के फूल और नक़ली पत्तों से बचें, और ताज़े फूल मुरझाते ही बदल दें। रंगोली ऐसी चुनें जिसकी रेखाएँ लहरदार हों और डिज़ाइन दोनों तरफ़ बराबर हो, और अगर वह बिगड़ जाए तो फिर से बना लें। हर कोना भर देने से बेहतर है कि सही जगहों पर थोड़ी-सी सोच-समझकर की गई सजावट हो; त्योहार की रौनक उसी से ज़्यादा आती है।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब परामर्श करें
अगर आप नए घर में जा रहे हैं, रेनोवेशन की सोच रहे हैं, या पूरी सफ़ाई के बाद भी घर भारी-सा लगता है, तो त्योहारों का मौसम वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लेने का अच्छा समय है। डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अपने अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर परामर्श देती हैं, और फ़्लोर प्लान व तस्वीरों के साथ दूर से भी परामर्श देती हैं।
वे रेकी, ध्वनि और सॉल्ट थेरेपी से जगह की शुद्धि भी कर सकती हैं, ताकि घर आने वाले साल के लिए ताज़ा और तैयार लगे।
सवाल
आम सवाल
दिवाली पूजा में लक्ष्मी की मूर्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिए?
लक्ष्मी की मूर्ति आमतौर पर इस तरह रखी जाती है कि उसका मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर हो, ताकि परिवार पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके पूजा कर सके। पूजा की जगह आदर्श रूप से घर के उत्तर-पूर्व या उत्तर में बनाई जाती है।
लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी को कहाँ रखें?
दिवाली पूजा में गणेश जी को परंपरा से लक्ष्मी जी की बाईं ओर रखा जाता है। दोनों मूर्तियाँ कपड़े से ढके किसी साफ़, ऊँचे चबूतरे पर रखी जाती हैं।
वास्तु के अनुसार दिवाली पर कितने दीये जलाने चाहिए?
वास्तु में दीयों की कोई तय संख्या नहीं है; मक़सद यह है कि घर का कोई हिस्सा अँधेरा न रहे। मुख्य द्वार पर दो, वेदी पर एक और हर कमरे में एक दीया रखना एक आसान तरीका है।
दिवाली से पहले क्या-क्या घर से निकाल देना चाहिए?
दिवाली से पहले टूटी चीज़ें, बंद घड़ियाँ, चटके शीशे, सूखे पौधे, पुराने अख़बार और बेकार पड़ा कबाड़ हटाने की परंपरा है। काम की चीज़ें दान की जा सकती हैं।
क्या किराये के फ़्लैट में दिवाली वास्तु किया जा सकता है?
जी हाँ, दिवाली के सभी वास्तु टिप्स, यानी सफ़ाई, रोशनी, मुख्य द्वार की सजावट और पूजा की दिशा, बिना तोड़-फोड़ के हो जाते हैं और किराये के फ़्लैट में भी अच्छी तरह अपनाए जा सकते हैं।
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