त्योहार और अनुष्ठान · 21 अक्टूबर 2026 · 7 मिनट में पढ़ें
दिवाली 2026 वास्तु कैलेंडर: धनतेरस से भाई दूज तक, हर दिन क्या करें
दिवाली 2026 के लिए दिन-ब-दिन वास्तु योजना: त्योहार से पहले के दो हफ़्तों में क्या निपटा लें, और फिर 6 नवंबर की धनतेरस से 10 या 11 नवंबर की भाई दूज तक हर दिन किस एक बात पर ध्यान दें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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दिवाली 2026 कब है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार दिवाली 2026 के पाँच दिन शुक्रवार, 6 नवंबर से मंगलवार, 10 या बुधवार, 11 नवंबर तक हैं, और लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर की शाम को है।
इस साल आखिरी दो त्योहारों की तारीख में पंचांगों के बीच एक दिन का फ़र्क है: गोवर्धन पूजा सोमवार, 9 या मंगलवार, 10 नवंबर को है, और भाई दूज मंगलवार, 10 या बुधवार, 11 नवंबर को। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चंद्र तिथियाँ कैलेंडर के दिनों से हमेशा ठीक-ठीक मेल नहीं खातीं। मुहूर्त का समय भी हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर का सही समय स्थानीय पंचांग या अपने पारिवारिक पंडित जी से पक्का कर लें।
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शुक्रवार, 6 नवंबर
धनतेरस।
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शनिवार, 7 नवंबर
नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं। 2026 में कई पंचांग सुबह-सुबह का अभ्यंग स्नान इसकी जगह रविवार, 8 नवंबर को बता रहे हैं, इसलिए अपना पंचांग देख लें।
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रविवार, 8 नवंबर
लक्ष्मी पूजा और दिवाली। पूजा शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) में की जाती है।
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सोमवार, 9 या मंगलवार, 10 नवंबर
गोवर्धन पूजा और दिवाली पाडवा (पंचांगों में एक दिन का फ़र्क है)।
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मंगलवार, 10 या बुधवार, 11 नवंबर
भाई दूज, जिसे महाराष्ट्र में भाऊबीज कहते हैं (पंचांगों में एक दिन का फ़र्क है)।
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दिवाली से पहले के दो हफ़्तों में क्या-क्या निपटा लेना चाहिए?
पहले मरम्मत करवाएँ, फिर पूरी सफ़ाई करें, और कोशिश करें कि दोनों काम गुरुवार, 5 नवंबर तक हो जाएँ। मरम्मत में धूल उड़ती है, और प्लंबर या इलेक्ट्रीशियन के आने से पहले कमरा साफ़ कर लिया तो उसे दोबारा साफ़ करना पड़ेगा।
सफ़ाई किस क्रम में करें, यानी उत्तर-पूर्व से शुरू करके घड़ी की दिशा में घूमते हुए दक्षिण-पश्चिम तक, यह वास्तु के हिसाब से दिवाली की सफ़ाई में समझाया गया है। यहाँ उसके आगे-पीछे का कैलेंडर दिया गया है।
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शनिवार 24 से शुक्रवार 30 अक्टूबर: मरम्मत
टपकते नल, फ्यूज़ बल्ब, न बजने वाली डोरबेल, मुख्य द्वार के चरमराते कब्ज़े, बंद पड़ी घड़ियाँ और दहलीज़ पर चटकी हुई टाइलें। वास्तु की नज़र में घर में पड़ी टूटी चीज़ें चुपचाप घर की ऊर्जा खींचती रहती हैं।
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शनिवार 31 अक्टूबर से मंगलवार 3 नवंबर: पूरी सफ़ाई
एक-एक ज़ोन करके सफ़ाई करें। उत्तर-पूर्व और घर का केंद्र पहले खाली करें, और दक्षिण-पश्चिम की भारी अलमारियाँ सबसे आखिर के लिए छोड़ दें।
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बुधवार, 4 नवंबर: पूजा की जगह और प्रवेश
पूजा की शेल्फ़ धोएँ, टूटी मूर्तियाँ और सूखे फूल सम्मान के साथ हटा दें, और मुख्य द्वार, उसकी चौखट और दहलीज़ धोएँ।
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गुरुवार, 5 नवंबर: लाइटें और सामान
फ़ेयरी लाइट्स जाँच लें, सारी झालरें एक ही एक्सटेंशन बोर्ड में न लगाएँ, और दीये, बाती, तेल या घी और रंगोली के रंग खरीद लें।
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धनतेरस (शुक्रवार, 6 नवंबर) पर क्या करें?
धनतेरस वह दिन है जब घर में कोई टिकाऊ चीज़ लाई जाती है और उसे उसकी पक्की जगह पर रखा जाता है। परंपरा के अनुसार यह धातु की कोई चीज़ होती है, जैसे बर्तन, सिक्का या गहना, जिसे दक्षिण-पश्चिम की ऐसी अलमारी में रखा जाता है जो उत्तर की ओर खुले; इसके पीछे का कारण हमारे लेख धनतेरस पर क्या खरीदें और उसे कहाँ रखें में बताया गया है।
वास्तु में आमतौर पर उत्तर और पूर्व को तरजीह दी जाती है, पर इस शाम एक खास अपवाद होता है। कई घरों में मुख्य द्वार के बाहर एक दीया दक्षिण की ओर मुँह करके रखा जाता है। यह दक्षिण दिशा के देवता यम को अर्पण है, और इसे यम दीपदान (यम के नाम का दीया) कहते हैं। कुछ परिवार यह नरक चतुर्दशी को करते हैं; आप अपने परिवार की रीति के अनुसार चलें।
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सुबह
दक्षिण-पश्चिम की अलमारी ठीक कर लें, ताकि जो भी घर लाएँ उसके लिए साफ़ जगह तैयार रहे।
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शाम
प्रवेश पर दीयों की पहली जोड़ी जलाएँ। आमतौर पर ये पाँचों दिन जलाए जाते हैं।
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सोने से पहले
ऐसी हर लौ बुझा दें जिस पर किसी की नज़र न हो।
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नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली (शनिवार, 7 नवंबर) पर क्या किया जाता है?
छोटी दिवाली अपनी शुद्धि और आखिरी तैयारियों का दिन है। महाराष्ट्र और कई दूसरे इलाकों में दिन की शुरुआत सूर्योदय से पहले तेल और उबटन लगाकर अभ्यंग स्नान (तेल लगाकर किया जाने वाला पारंपरिक स्नान) से होती है, और इस दिन श्रीकृष्ण की नरकासुर राक्षस पर जीत को याद किया जाता है। इस साल रविवार, 8 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि चल रही होगी, इसलिए द्रिक पंचांग समेत कई पंचांग यह तेल-स्नान लक्ष्मी पूजा वाले दिन की सुबह बता रहे हैं; आप अपने परिवार के पंचांग के अनुसार चलें।
घर के लिहाज़ से यह दिन लक्ष्मी पूजा की सारी तैयारी पूरी करने का है। उत्तर-पूर्व में चौकी लगाएँ, तोरण टाँगें और प्रवेश पर रंगोली बनाएँ; प्रवेश पर रंगोली वाले हमारे लेख में बताया गया है कि रंगोली कहाँ बनाएँ, कौन-से रंग लें और साझा लॉबी वाले फ़्लैट में क्या करें। बाथरूम को खास तौर पर साफ़-सुथरा और ताज़ा रखें।
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लक्ष्मी पूजा का दिन (रविवार, 8 नवंबर) कैसे प्लान करें?
लक्ष्मी पूजा के दिन की योजना ऐसी बनाएँ कि दिन शांति से बीते और शाम सिर्फ़ पूजा के लिए खाली रहे। पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होती है। अपने शहर का मुहूर्त स्थानीय पंचांग या पंडित जी से पक्का कर लें।
चौकी कहाँ लगाएँ, किस ओर मुँह करें और दीये परंपरा के अनुसार कहाँ रखे जाते हैं, यह सब विस्तार से लक्ष्मी पूजा की दिशा और दीये कहाँ रखें में बताया गया है। संक्षेप में: चौकी उत्तर-पूर्व में, और परिवार का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर।
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सुबह
प्रवेश और घर के केंद्र, यानी ब्रह्मस्थान, में आखिरी बार झाड़ू लगा दें, और केंद्र में शॉपिंग बैग और डिब्बे पड़े न रहने दें।
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दोपहर
पूजा की सारी सामग्री एक ही जगह निकालकर रख लें, ताकि पूजा शुरू होने के बाद किसी को अलमारियाँ न टटोलनी पड़ें।
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शाम
पहले प्रवेश के दीये जलाएँ, फिर पूजा की जगह के, फिर बाकी घर के।
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रात
प्रवेश पर दीया तभी जलता रहने दें जब कोई जागकर उस पर नज़र रख सके।
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गोवर्धन पूजा और दिवाली पाडवा (9 या 10 नवंबर) पर क्या किया जाता है?
चौथा दिन रसोई के नाम होता है, और महाराष्ट्र में पति-पत्नी के नाम भी। कई घरों में गोवर्धन पूजा अन्नकूट से मनाई जाती है, जिसमें कई तरह के पकवानों का भोग लगता है। दिवाली पाडवा, जिसे बलि प्रतिपदा भी कहते हैं, वह दिन है जब परंपरा से पत्नियाँ पति की आरती उतारती हैं और उपहारों का लेन-देन होता है। कई गुजराती परिवार अपना नया साल, यानी बेस्तु वरस, इसी दिन या इसके आसपास मनाते हैं।
वास्तु के हिसाब से यह दक्षिण-पूर्व की रसोई, यानी अग्नि ज़ोन, पर ध्यान देने का अच्छा मौका है: किचन प्लेटफ़ॉर्म खाली करें, चूल्हा साफ़ करें और शाम को वहाँ एक दीया रखें, गैस पाइप से काफ़ी दूर। अगर यह दिन पति-पत्नी का है, तो दक्षिण-पश्चिम का मुख्य बेडरूम वह कमरा है जिसे सुकून भरा और फ़ालतू सामान से खाली रखना चाहिए।
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भाई दूज (10 या 11 नवंबर) पर भाई का मुँह किस दिशा में हो?
तिलक और आरती के समय भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बिठाएँ; वास्तु में किसी भी पूजा-विधि के लिए आमतौर पर यही दिशाएँ ठीक मानी जाती हैं। पूजा की जगह के पास या लिविंग रूम में कोई साफ़, अच्छी रोशनी वाली जगह ठीक रहती है; दरवाज़े के बीचों-बीच या आने-जाने के रास्ते में बिठाना ठीक नहीं।
भाई दूज त्योहार को समेटने का भी सही समय है। जल चुके दीये हटा दें, पैरों से बिगड़ चुकी रंगोली को पड़ी न रहने दें, झाड़कर हटा दें, और सूखा तोरण बदल दें। अगर आप कार्तिक के पूरे महीने घर में कुछ रोशनी बनाए रखना चाहें, तो घर में रोशनी कहाँ होनी चाहिए में बताया गया है कि किन जगहों को रोशनी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, और घर पर देव दीपावली में 24 नवंबर की उस दीयों भरी पूर्णिमा की बात है जिसके साथ यह त्योहारों का मौसम पूरा होता है।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें?
अगर दिवाली की तैयारी में हर बार एक ही समस्या सामने आती है, तो वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लें: पूजा की ऐसी जगह जो कभी ठीक से जमी हुई न लगे, ऐसी अलमारी जो कितनी भी सँभालें फिर बिखर जाए, या ऐसा प्रवेश जो कुछ भी कर लें, अँधेरा ही रहे। ये अक्सर सफ़ाई के नहीं, घर के लेआउट के सवाल होते हैं।
VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अपने अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट विज़िट करके सलाह देती हैं, और फ़्लोर प्लान और तस्वीरों के ज़रिए दूर बैठे परामर्श भी देती हैं। उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं, इसलिए किराए के फ़्लैट में भी काम आते हैं, और दिवाली के बाद के शांत हफ़्ते घर को ठीक से देखने-समझने का अच्छा समय होते हैं।
सवाल
आम सवाल
2026 में दिवाली कब है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 की शाम को है, और पाँच दिन का त्योहार 6 नवंबर की धनतेरस से 10 या 11 नवंबर की भाई दूज तक चलेगा। अपने शहर का मुहूर्त स्थानीय पंचांग या पंडित जी से पक्का कर लें।
दिवाली की सफ़ाई कब शुरू करनी चाहिए?
धनतेरस से लगभग दो हफ़्ते पहले: 24 अक्टूबर 2026 के आसपास मरम्मत शुरू करें, फिर पूरी सफ़ाई करें और गुरुवार, 5 नवंबर तक सब निपटा लें। पहले मरम्मत करवाने से उसकी धूल आपकी की हुई सफ़ाई पर पानी नहीं फेरती।
धनतेरस पर दक्षिण की ओर मुँह करके दीया क्यों जलाते हैं?
यह दक्षिण दिशा के देवता यम को अर्पण है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। यह शाम की एक खास रीति है; वास्तु में पूजा के समय उत्तर या पूर्व की ओर मुँह रखने की जो आम सलाह है, वह इससे नहीं बदलती।
2026 में भाई दूज किस तारीख को है?
कुछ पंचांग मंगलवार, 10 नवंबर बताते हैं और कुछ बुधवार, 11 नवंबर, क्योंकि द्वितीया तिथि एक दिन दोपहर से शुरू होकर अगले दिन दोपहर तक चलती है। अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग देखें या अपने पारिवारिक पंडित जी से पूछें।
भाई दूज पर तिलक के समय भाई का मुँह किस दिशा में होना चाहिए?
पूर्व या उत्तर की ओर; वास्तु में पूजा-विधि के लिए आमतौर पर यही दिशाएँ ठीक मानी जाती हैं। कोई साफ़, अच्छी रोशनी वाली जगह चुनें; दरवाज़े के बीचों-बीच या आने-जाने के रास्ते में न बिठाएँ।
यही सब अपने घर या ऑफ़िस में करवाना चाहते हैं?
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