त्योहार और अनुष्ठान · 21 अक्टूबर 2026 · 7 मिनट में पढ़ें
मुंबई में छठ पूजा 2026: घर पर और घाट पर कैसे करें तैयारी
सूर्य देव की आराधना के चार दिन, जिन्हें मुंबई भर के परिवार समुद्र तटों, झीलों और छतों पर मनाते हैं। 2026 की तारीखें, हर दिन क्या होता है, फ़्लैट में पूजा की जगह कैसे तैयार करें, और घाट पर सुरक्षित कैसे रहें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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छठ पूजा 2026 कब है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार छठ पूजा 2026 शुक्रवार, 13 नवंबर को नहाय-खाय से शुरू होगी और सोमवार, 16 नवंबर को सूर्योदय के समय उषा अर्घ्य के साथ पूरी होगी। हमने जो स्रोत देखे, उनमें से एक में दोनों अर्घ्य एक दिन बाद बताए गए हैं, इसलिए अपने शहर का पंचांग देख लें या अपने पारिवारिक पंडित जी से पक्का कर लें।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है, और अर्घ्य ठीक उसी समय दिया जाता है। इसलिए पटना या दिल्ली के लिए छपे समय के हिसाब से न चलें, मुंबई का स्थानीय समय देखें।
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पहला दिन · शुक्रवार, 13 नवंबर
नहाय-खाय
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दूसरा दिन · शनिवार, 14 नवंबर
खरना
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तीसरा दिन · रविवार, 15 नवंबर
संध्या अर्घ्य, यानी शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य
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चौथा दिन · सोमवार, 16 नवंबर
उषा अर्घ्य, यानी भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य
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छठ के चार दिनों में हर दिन क्या होता है?
हर दिन के साथ पर्व उन दो अर्घ्यों की ओर बढ़ता है जो सूर्य को दिए जाते हैं। रीति-रिवाज़ हर परिवार और हर इलाके में थोड़े अलग होते हैं, इसलिए इसे नियमों की किताब नहीं, बस एक मोटी रूपरेखा समझें।
नहाय-खाय के दिन व्रती, यानी व्रत रखने वाले, स्नान करते हैं, घर की सफ़ाई होती है, और सादा, शुद्ध खाना बनाकर खाया जाता है। खरना के दिन व्रती दिन भर उपवास रखते हैं और शाम को प्रसाद से व्रत खोलते हैं, जो आमतौर पर गुड़ की खीर और रोटी होता है; लंबा उपवास इसके बाद शुरू होता है।
तीसरे दिन शाम को परिवार फल, ठेकुआ और दूसरे प्रसाद से भरी बाँस की टोकरियाँ लेकर घाट पर जाता है, और व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य, यानी जल अर्पित करते हैं। चौथे दिन भोर से पहले सब फिर घाट पर पहुँचते हैं और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, जिसके बाद व्रत पूरा होता है।
यह व्रत कठिन होता है। जिनकी सेहत को देखते हुए ज़रूरी हो, उनके लिए परिवार अक्सर व्रत के नियमों में बदलाव कर लेते हैं। जिन्हें कोई बीमारी हो, जो गर्भवती हों या जो बुज़ुर्ग हों, उन्हें अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।
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छठ में सूर्य और पूर्व दिशा का इतना महत्व क्यों है?
छठ सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, और इसके दो सबसे बड़े पल हैं सूर्यास्त और सूर्योदय। इसी से इसका वास्तु से एक सहज रिश्ता बनता है, क्योंकि वास्तु में पूर्व दिशा सूर्य और इंद्र की है, और इसे रोशनी, सेहत और नई शुरुआत की दिशा माना जाता है।
छठ की खास बात यह है कि इसमें सूर्य को दोनों दिशाओं में पूजा जाता है: तीसरी शाम डूबते सूर्य को पश्चिम की ओर मुँह करके, और चौथी सुबह उगते सूर्य को पूर्व की ओर मुँह करके। अर्घ्य पानी में खड़े होकर दिया जाता है, और जल वह तत्व है जिसे वास्तु उत्तर-पूर्व से जोड़ता है, और पश्चिम में वरुण देव से। बहुत कम अनुष्ठान ऐसे हैं जिनमें रोशनी, जल और दिशा इतने साफ़ तौर पर एक साथ आते हों। सूर्य के ही एक और पर्व की बात हमारे लेख मकर संक्रांति में है।
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फ़्लैट में छठ की पूजा की जगह कैसे तैयार करें?
पूजा की जगह घर के पूर्व या उत्तर-पूर्व में, एक साफ़, नीची चौकी पर बनाएँ, और प्रार्थना करते समय व्रती का मुँह पूर्व की ओर रहे। किसी भी घर में पूजा के लिए परंपरागत जगह उत्तर-पूर्व ही है। अगर वह कोना पहले से किसी और काम में है, तो छोटे घरों में पूजा घर पर हमारी गाइड में दूसरे विकल्प बताए गए हैं।
सूप और दउरा, यानी बाँस के वे सूप और टोकरियाँ जिनमें अर्घ्य का सामान घाट तक जाता है, तैयार हो जाने के बाद पूजा की जगह पर ही रखें। नहाय-खाय से पहले रसोई अच्छी तरह साफ़ कर लें, क्योंकि प्रसाद खास सावधानी से बनाया जाता है; कई परिवार इसके लिए अलग बर्तन रखते हैं। वास्तु में रसोई की आग की जगह दक्षिण-पूर्व मानी जाती है, पर छठ में सबसे ज़रूरी बात यह है कि जगह साफ़ हो।
पूजा की जगह के आसपास फ़ालतू सामान न रहने दें, हर शाम वहाँ एक दीया जलाएँ, और लौ को उन सूखे पत्तों और कपड़े से दूर रखें जिनसे अक्सर टोकरियाँ सजाई जाती हैं।
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क्या मुंबई में घाट पर गए बिना घर पर छठ पूजा की जा सकती है?
हाँ। जो परिवार समुद्र तट या झील तक नहीं पहुँच पाते, उनमें से कई घर पर ही अर्घ्य देते हैं। इसके लिए वे सोसाइटी की अनुमति लेकर छत पर या सोसाइटी के कंपाउंड में साफ़ पानी का टब या छोटा टैंक रखते हैं।
भोर के अर्घ्य के लिए पूर्व की ओर खुलने वाली बालकनी ठीक रहती है, और शाम के अर्घ्य के लिए पश्चिम की ओर खुलने वाली छत। अगर सामने की इमारत से क्षितिज छिप जाता हो, तब भी मुँह सूर्य की दिशा की ओर ही करें; अर्घ्य भावना से पहुँचता है, नज़ारे से नहीं। पिछले कुछ सालों में कुछ सोसाइटियों और स्थानीय समूहों ने साझा पानी के टैंक का इंतज़ाम किया है, ताकि पड़ोसी एक साथ इकट्ठा हो सकें। अगर आपका फ़्लैट पूर्वमुखी है, तो छठ जिस सुबह की रोशनी का उत्सव है, वह आपके घर में पहले से आती है।
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मुंबई में परिवार छठ के लिए कहाँ इकट्ठा होते हैं?
परिवार शहर के समुद्र तटों पर, जैसे जुहू, उपनगरों की झीलों और तालाबों पर, और उन कृत्रिम तालाबों पर इकट्ठा होते हैं जिन्हें कुछ इलाकों में नगर निगम और स्थानीय समूह बनवाते हैं। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आकर जो परिवार इस शहर में बस गए, उन्हीं के साथ मुंबई में छठ का पर्व भी बढ़ता गया है, और शाम के अर्घ्य पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुटती है।
इंतज़ाम हर साल बदलते रहते हैं, इसलिए अपने स्थानीय समूह या नगर निगम के वार्ड ऑफ़िस से पता कर लें कि 2026 में किन जगहों पर व्यवस्था की गई है, और समय से काफ़ी पहले पहुँचें।
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घाट पर और भीड़ में सुरक्षित कैसे रहें?
पूजा के लिए तय की गई जगह के भीतर ही रहें, जितना ज़रूरी हो उससे ज़्यादा गहरे पानी में न जाएँ, और पुलिस, लाइफ़गार्ड और स्वयंसेवकों के निर्देश मानें। समुद्र पर ज्वार-भाटे के साथ पानी का किनारा जल्दी बदल जाता है; जाने से पहले उस दिन के ज्वार का समय देख लें।
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बच्चे
पानी के पास उनका हाथ पकड़े रहें, उनकी जेब में एक कार्ड पर अपना फ़ोन नंबर लिखकर रखें, और बिछड़ जाएँ तो कहाँ मिलना है, यह पहले से तय कर लें।
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व्रती
लंबे उपवास के बाद अर्घ्य देने वाले व्रती को कमज़ोरी महसूस हो सकती है। पानी में और फिसलन भरी सीढ़ियों पर कोई न कोई उनके साथ बना रहे।
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बुज़ुर्ग
उन्हें धक्का-मुक्की से दूर बैठने की जगह दिलाएँ, और भीड़ के निकलने से पहले ही निकल जाएँ।
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दीये
दीयों को साड़ी, दुपट्टे और टोकरियों से दूर रखें, और बच्चों की पहुँच से भी दूर।
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जगह साफ़ छोड़ें
प्लास्टिक और बचा हुआ सामान वापस घर ले जाएँ, और चढ़ावे को वैसे ही निपटाएँ जैसा स्थानीय आयोजक बताएँ।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें
अगर छठ की पूजा की जगह तैयार करते समय आपको लगा कि घर में पूजा के लिए उत्तर-पूर्व या पूर्व में कोई साफ़, रोशन कोना है ही नहीं, तो त्योहार के बाद इस पर ध्यान देना ठीक रहेगा, ताकि साल भर की हर पूजा के लिए सही जगह हो।
डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अंधेरी ईस्ट के ऑफ़िस में वास्तु परामर्श देती हैं, पूरे मुंबई में साइट विज़िट करती हैं, और आपके फ़्लोर प्लान से दूर बैठे परामर्श भी देती हैं। उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं, इसलिए किराए के फ़्लैट के लिए भी ठीक रहते हैं।
सवाल
आम सवाल
छठ पूजा 2026 की तारीखें क्या हैं?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार: 13 नवंबर को नहाय-खाय, 14 नवंबर को खरना, रविवार, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और सोमवार, 16 नवंबर को उषा अर्घ्य। अपने शहर का पंचांग देख लें।
छठ में अर्घ्य देते समय मुँह किस दिशा में होना चाहिए?
सूर्य की ओर: शाम के संध्या अर्घ्य में डूबते सूर्य की ओर, यानी पश्चिम में, और भोर के उषा अर्घ्य में उगते सूर्य की ओर, यानी पूर्व में।
क्या फ़्लैट में रहकर घर पर ही छठ पूजा की जा सकती है?
हाँ। कई परिवार सोसाइटी की अनुमति लेकर छत पर या सोसाइटी के कंपाउंड में रखे साफ़ पानी के टब या छोटे टैंक से अर्घ्य देते हैं।
घर में छठ पूजा की जगह कहाँ होनी चाहिए?
घर के पूर्व या उत्तर-पूर्व में, साफ़ चौकी पर, और प्रार्थना करते समय व्रती का मुँह पूर्व की ओर हो।
संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य में क्या फ़र्क है?
संध्या अर्घ्य तीसरे दिन शाम को डूबते सूर्य को दिया जाता है। उषा अर्घ्य चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को दिया जाता है, और उसके बाद व्रत पूरा होता है।
छठ घाट पर किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?
तय की गई जगह के भीतर रहें, समुद्र पर ज्वार का समय देख लें, बच्चों का हाथ पकड़े रहें, उपवास कर रहे व्रती के साथ पानी में बने रहें, और पुलिस व लाइफ़गार्ड के निर्देश मानें।
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