Skip to content

त्योहार और अनुष्ठान · 21 अक्टूबर 2026 · 7 मिनट में पढ़ें

धनतेरस 2026 क्यों खास है: धन्वंतरि, लक्ष्मी और यम दीपक

धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। यह दिन सेहत और धन को एक साथ क्यों जोड़ता है, धन्वंतरि कौन हैं, और दक्षिण की ओर मुँह वाला यम दीपक अपने प्रवेश पर सुरक्षित तरीके से कैसे रखें।

लेखिका: , वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

धनतेरस 2026 क्यों खास है: धन्वंतरि, लक्ष्मी और यम दीपक

01

2026 में धनतेरस कब है?

ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है, यानी वसु बारस के अगले दिन और लक्ष्मी पूजा से दो दिन पहले। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को दोपहर से कुछ पहले शुरू होती है, इसलिए 6 तारीख की शाम, जब पूजा होती है और यम दीपक जलाया जाता है, इसी तिथि में आती है।

महाराष्ट्र में इस दिन को धनत्रयोदशी (धन की त्रयोदशी, यानी तेरहवीं तिथि) कहते हैं; दूसरी जगहों पर इसे धनतेरस या धन्वंतरि त्रयोदशी कहा जाता है। शाम का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए मुंबई का, या आप जहाँ भी हों वहाँ का, मुहूर्त स्थानीय पंचांग या अपने पारिवारिक पंडित जी से पक्का कर लें।

02

धनतेरस का महत्व क्या है?

धनतेरस का महत्व यह है कि दिवाली की शुरुआत में ही यह सेहत और धन को साथ-साथ रखता है। धन यानी संपत्ति और तेरस यानी तेरहवीं तिथि, लेकिन इस दिन जितनी पूजा लक्ष्मी और कुबेर की होती है, उतनी ही आरोग्य से जुड़े धन्वंतरि की भी।

एक जानी-पहचानी कहावत यह क्रम साफ़ बता देती है: पहला सुख निरोगी काया। धनतेरस पर समृद्धि का स्वागत होता है, पर उसका नंबर दूसरा है। जो घर यह क्रम याद रखता है, वह इस दिन को अक्सर शांति से मनाता है, खरीदारी की हड़बड़ी वाली आखिरी तारीख की तरह नहीं।

कई परिवारों के लिए यह दिन तैयारी पूरी होने का भी है। घर की सफ़ाई हो चुकी है, वसु बारस पर पूजा की जगह सज चुकी है, और अब घर में कोई टिकाऊ और काम की चीज़ लाई जाती है। क्या खरीदें और उसे कहाँ रखें, यह धनतेरस पर क्या खरीदें और कहाँ रखें में बताया गया है; यह लेख इस बारे में है कि यह दिन खास क्यों है।

03

धन्वंतरि कौन हैं, और धनतेरस पर उनकी पूजा क्यों होती है?

परंपरा के अनुसार धन्वंतरि इसी दिन समुद्र मंथन से अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए धनतेरस पर उनकी पूजा होती है। उन्हें देवताओं का वैद्य माना जाता है, और आयुर्वेद से उनका गहरा नाता है।

कई परिवार, और आयुर्वेद के कई वैद्य भी, धनतेरस की शाम घर की सेहत के लिए धन्वंतरि से एक सादी-सी प्रार्थना करते हैं। यह दिन कुछ व्यावहारिक कामों की याद दिलाने का भी अच्छा मौका है: जो चेक-अप टलता आ रहा है उसे बुक कर लें, खत्म होती दवाइयाँ फिर से ले आएँ, और बुज़ुर्ग रिश्तेदारों का हालचाल पूछ आएँ।

प्रार्थना और वास्तु घर में शांति और सही संकल्प ला सकते हैं, पर ये इलाज का विकल्प नहीं, उसके साथ सहायक हैं। अगर परिवार में कोई बीमार है, तो कृपया अपने डॉक्टर की सलाह मानें।

04

धनतेरस पर लक्ष्मी और कुबेर की पूजा कैसे होती है?

धनतेरस पर लक्ष्मी और कुबेर की शाम को छोटी-सी पूजा होती है, और अक्सर उनके सामने नया सिक्का, बर्तन या बही-खाता रखा जाता है। कई कथाओं में लक्ष्मी भी समुद्र मंथन से ही प्रकट हुई थीं, और यह भी एक कारण है कि दिवाली की शुरुआत में भी उनकी पूजा होती है और मुख्य रात को भी।

वास्तु में कुबेर उत्तर दिशा के रक्षक हैं, इसीलिए परंपरा से कीमती सामान वाला लॉकर या अलमारी उत्तर की ओर खुलती है। अगर आप इस हफ़्ते वह अलमारी सँभाल रहे हैं, तो घर में लॉकर और तिजोरी की दिशा में पूरी व्यवस्था समझाई गई है। बड़ी लक्ष्मी पूजा दो दिन बाद, 8 नवंबर को होती है।

05

यम दीपक क्या है, और इसका मुँह दक्षिण की ओर क्यों होता है?

यम दीपक वह अकेला दीया है जो धनतेरस की शाम मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर मुँह करके जलाया जाता है। यह परिवार की रक्षा और लंबी उम्र के लिए यम को अर्पण है, और इसे यम दीपदान (यम को दीये का दान) भी कहते हैं। कुछ परिवार इसे नरक चतुर्दशी को जलाते हैं; आप अपने परिवार की रीति के अनुसार चलें।

इस रीति के पीछे एक जानी-मानी कथा है। एक युवा राजकुमार के बारे में भविष्यवाणी थी कि शादी के कुछ ही समय बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी। उस रात उसकी पत्नी ने पूरे घर को जगाए रखा, दरवाज़े पर दीये और अपने गहने रख दिए और सुबह होने तक कहानियाँ सुनाती रही, और संकट टल गया। हर परिवार यह कथा अपने ढंग से सुनाता है, पर अर्थ एक ही है: दहलीज़ पर जलता दीया, घर के भीतर रहने वालों के लिए एक प्रार्थना है।

जो लोग जानते हैं कि वास्तु में आमतौर पर उत्तर और पूर्व को तरजीह दी जाती है, उन्हें दक्षिण की ओर मुँह वाला दीया थोड़ा अजीब लग सकता है। पर इसमें कोई विरोधाभास नहीं है। दक्षिण यम की दिशा है, जो धर्म और व्यवस्था के स्वामी हैं, और वास्तु में दक्षिण को मज़बूती और स्थिरता से जोड़ा जाता है। इस एक शाम दीये का मुँह बस उस देवता की दिशा में होता है जिन्हें वह अर्पित है। इसमें डरने जैसी कोई बात नहीं है, और दक्षिणमुखी घर के बारे में भी यह रीति कुछ नहीं बदलती।

06

फ़्लैट में यम दीपक सुरक्षित तरीके से कैसे रखें?

यम दीपक को मुख्य द्वार के ठीक बाहर धातु की थाली या ट्रे में रखें, लौ दक्षिण की ओर रहे, और जब तक वह जले, उस पर नज़र रखें। बिल्डिंग के कॉरिडोर में रीति से पहले सुरक्षा आती है।

  • 01

    स्थिर आधार चुनें

    स्टील या पीतल की थाली फ़र्श पर या किसी मज़बूत, सपाट जगह पर रखें; जूतों के रैक या रेलिंग पर टिकाकर नहीं।

  • 02

    आसपास जगह खाली रखें

    पायदान, पर्दे, जूतों के रैक, सूखे फूल, कागज़ की सजावट और किसी भी सिंथेटिक चीज़ से दूर रखें।

  • 03

    कॉरिडोर का ध्यान रखें

    साझा रास्ता या फ़ायर एग्ज़िट न रोकें, और खुली लौ को लेकर अपनी सोसाइटी के नियमों का पालन करें।

  • 04

    पास ही रहें

    खाली कॉरिडोर में, या परिवार के सो जाने के बाद, इसे कभी जलता न छोड़ें। अगर कोई नज़र रखने वाला न हो, तो शाम की प्रार्थना पूरी होते ही इसे बुझा दें।

  • 05

    बच्चे और पालतू जानवर

    दीया उनकी पहुँच से दूर रखें। बड़े बच्चे इसे जलाने में मदद कर सकते हैं, पर तभी जब कोई बड़ा उनके पास हो।

  • 06

    एक ठीक विकल्प

    अगर आपकी बिल्डिंग में खुली लौ की इजाज़त नहीं है, तो ढकी हुई लालटेन या बिजली वाला दीया दक्षिण की ओर मुँह करके रखने से भी इस रीति का भाव बना रहता है।

07

वास्तु के हिसाब से धनतेरस के लिए घर कैसे तैयार करें?

धनतेरस की तैयारी तीन जगहों पर करें: शाम की पूजा के लिए उत्तर-पूर्व, धन से जुड़ी हर चीज़ के लिए उत्तर, और रोशनी के लिए प्रवेश। बाकी घर पिछले दिनों में ही साफ़ हो चुका होना चाहिए।

  • 01

    उत्तर-पूर्व

    पूजा की जगह पर लक्ष्मी के पास धन्वंतरि की तस्वीर रखें, और प्रार्थना करते समय मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रखें।

  • 02

    उत्तर

    कैश ड्रॉअर या लॉकर के आसपास की जगह व्यवस्थित और अच्छी रोशनी वाली रखें, और उसके सामने कुछ भी जमा न करें।

  • 03

    प्रवेश

    वसु बारस से जल रही दीयों की जोड़ी जलती रहने दें, और शाम ढलते ही बाहर दक्षिण की ओर मुँह करके यम दीपक भी रखें।

  • 04

    रसोई

    आज खरीदा नया बर्तन डिब्बे में बंद पड़ा न रहे; उसे दक्षिण-पूर्व की रसोई में इस्तेमाल में लाएँ।

08

धनतेरस से पहले और बाद में क्या आता है?

धनतेरस से पहले वसु बारस आती है, जिस दिन गाय और बछड़े की पूजा होती है और पूजा की जगह व प्रवेश तैयार किए जाते हैं; अगर आप वहीं से शुरुआत कर रहे हैं, तो वसु बारस का महत्व पढ़ें।

अगला दिन नरक चतुर्दशी, यानी छोटी दिवाली है, जिसमें सुबह-सुबह अभ्यंग स्नान होता है और आखिरी बचे कोने साफ़ किए जाते हैं। पूरे क्रम के लिए हमारा दिवाली 2026 वास्तु कैलेंडर देखें।

09

वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें

अगर आपके लॉकर या कैश की अलमारी के लिए घर में कोई ठीक जगह नहीं बन पा रही, घर का उत्तर हिस्सा टॉयलेट या भारी सामान से घिरा है, या साल-दर-साल पैसों के मामले उलझे-उलझे लगते हैं, तो वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लें। परामर्श में पूरा लेआउट देखा जाता है, सिर्फ़ एक त्योहार नहीं।

VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अपने अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट विज़िट करके परामर्श देती हैं, और फ़्लोर प्लान और तस्वीरों के ज़रिए दूर बैठे परामर्श भी देती हैं। उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं, इसलिए किराए के घरों और ऑफ़िसों, दोनों में काम आते हैं।

सवाल

आम सवाल

धनतेरस का महत्व क्या है?

धनतेरस पर सेहत और आयुर्वेद से जुड़े धन्वंतरि की पूजा होती है, और साथ ही समृद्धि से जुड़े लक्ष्मी और कुबेर की भी। सेहत और धन को साथ-साथ रखकर यह दिन दिवाली के मुख्य दिनों की शुरुआत करता है।

2026 में धनतेरस कब है?

ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। अपने शहर का शाम का मुहूर्त स्थानीय पंचांग या पंडित जी से पक्का कर लें।

धनतेरस पर दक्षिण की ओर मुँह करके दीया क्यों जलाते हैं?

दक्षिण यम की दिशा है, और यम दीपक परिवार की रक्षा और लंबी उम्र की प्रार्थना के साथ उन्हें अर्पित किया जाता है। यह सिर्फ़ एक शाम की रीति है; वास्तु में पूजा के समय उत्तर या पूर्व की ओर मुँह रखने की जो आम सलाह है, वह इससे नहीं बदलती।

यम दीपक कहाँ रखना चाहिए?

मुख्य द्वार के बाहर, धातु की किसी स्थिर थाली में, लौ दक्षिण की ओर। इसे पायदान और सजावट से दूर रखें और बिना निगरानी के न छोड़ें।

धनतेरस पर धन्वंतरि की पूजा क्यों होती है?

परंपरा के अनुसार देवताओं के वैद्य धन्वंतरि इसी दिन समुद्र मंथन से अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए परिवार अच्छी सेहत के लिए उनसे प्रार्थना करते हैं।

क्या धनतेरस सिर्फ़ सोना खरीदने का दिन है?

नहीं। कोई टिकाऊ चीज़ खरीदना कई रीतियों में से बस एक है। सेहत के लिए प्रार्थना, यम दीपक और घर की तैयारी भी उतनी ही ज़रूरी हैं, और एक सादा बर्तन भी उतना ही पारंपरिक है जितना कोई गहना।

यही सब अपने घर या ऑफ़िस में करवाना चाहते हैं?

मुफ़्त पहली कॉल बुक करें

और पढ़ें

आकाश कंदील: वास्तु के अनुसार दिवाली का कंदील कहाँ टाँगेंत्योहार और अनुष्ठान

आकाश कंदील: वास्तु के अनुसार दिवाली का कंदील कहाँ टाँगें

महाराष्ट्र के घरों के बाहर टँगा तारे जैसा कंदील सबसे पहले बताता है कि दिवाली आ गई है। मुंबई के फ़्लैट में इसे कहाँ टाँगें, किस दिशा को तरजीह दें, और कागज़ के कंदील में मोमबत्ती की जगह LED ही क्यों लगाएँ।

भाई दूज 2026 (भाऊबीज): महत्व और घर पर तिलक की विधित्योहार और अनुष्ठान

भाई दूज 2026 (भाऊबीज): महत्व और घर पर तिलक की विधि

भाई दूज, या भाऊबीज, के साथ दिवाली पूरी होती है, और आपके पंचांग के अनुसार 2026 में यह 10 या 11 नवंबर को है। यम और यमुना की कथा, तिलक के लिए भाई-बहन कहाँ बैठें, आरती की थाली में क्या रखें, उपहार, और दूर रहते हुए यह दिन कैसे मनाएँ।

मुंबई में छठ पूजा 2026: घर पर और घाट पर कैसे करें तैयारीत्योहार और अनुष्ठान

मुंबई में छठ पूजा 2026: घर पर और घाट पर कैसे करें तैयारी

सूर्य देव की आराधना के चार दिन, जिन्हें मुंबई भर के परिवार समुद्र तटों, झीलों और छतों पर मनाते हैं। 2026 की तारीखें, हर दिन क्या होता है, फ़्लैट में पूजा की जगह कैसे तैयार करें, और घाट पर सुरक्षित कैसे रहें।

डॉ. किमया से पूछें

अपना नंबर दीजिए, डॉ. किमया की टीम आपको वापस कॉल करेगी। पहली कॉल मुफ़्त है।

कॉल अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी या गुजराती में हो सकती है।

Google पर 5.0 रेटिंग · 15 रिव्यू