कमर्शियल वास्तु · 21 अक्टूबर 2026 · 7 मिनट में पढ़ें
चोपड़ा पूजन और नए बही-खाते: बिज़नेस के नए साल के लिए वास्तु
चोपड़ा पूजन दिवाली पर, रविवार 8 नवंबर 2026 को है। ऑफ़िस या दुकान में पूजा कहाँ करें, नए बही-खाते या अकाउंट्स वाला लैपटॉप कैसे रखें, शुभ लाभ और स्वस्तिक के चिह्न, और साल की पहली एंट्री कैसे करें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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चोपड़ा पूजन क्या है और 2026 में कब है?
चोपड़ा पूजन दिवाली पर, लक्ष्मी पूजा के दौरान या उसके बाद, बिज़नेस के नए बही-खातों की पूजा है, और ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार 2026 में यह रविवार, 8 नवंबर को है। इसे शारदा पूजन भी कहते हैं, यानी देवी शारदा की पूजा, जो सरस्वती का ही एक रूप हैं, क्योंकि इसमें ज्ञान और धन दोनों का सम्मान साथ-साथ होता है।
इस रीति का नाम चोपड़ा से पड़ा है, यानी लाल कपड़े की जिल्द वाला पारंपरिक बही-खाता। कई गुजराती और मारवाड़ी व्यापारी परिवारों के लिए, और मुंबई के बाज़ारों के बहुत-से कारोबारों के लिए, दिवाली से बिज़नेस का नया साल शुरू होता है: पुराने खाते बंद किए जाते हैं और ईमानदार, स्थिर साल की प्रार्थना के साथ नए खाते खोले जाते हैं। उस शाम स्टॉक एक्सचेंजों पर मुहूर्त ट्रेडिंग भी होती है।
रीति-रिवाज हर समुदाय और परिवार में अलग होते हैं। आगे जो लिखा है, वह जगह को लेकर वास्तु की सलाह है; पूजा-विधि के लिए अपनी परंपरा और अपने पंडित जी की बात मानें।
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चोपड़ा पूजन का मुहूर्त कौन तय करता है?
मुहूर्त आपके पारिवारिक पंडित जी या कोई भरोसेमंद पंचांग तय करता है। ऑनलाइन घूम रहे समय पर भरोसा न करें, उन्हीं से पक्का कर लें। मुहूर्त का समय शहर के साथ बदलता है, और अलग-अलग परंपराएँ अलग-अलग गणना मानती हैं।
कई कारोबार यह पूजा शाम को लक्ष्मी पूजा के साथ करते हैं। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय हर साल स्टॉक एक्सचेंज घोषित करते हैं, इसलिए उनकी आधिकारिक सूचना देखें। यह लेख किसी भी तरह की आर्थिक या ट्रेडिंग सलाह नहीं देता।
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ऑफ़िस या दुकान में चोपड़ा पूजन कहाँ करें?
चोपड़ा पूजन ऑफ़िस या दुकान के उत्तर-पूर्व या उत्तर में करें, और पूजा करने वाले का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर रहे। ईशान्य, यानी उत्तर-पूर्व, पूजा का पारंपरिक ज़ोन है, और उत्तर कुबेर (धन के रक्षक) की दिशा है, इसलिए हिसाब-किताब से जुड़ी पूजा के लिए यह खास तौर पर उपयुक्त है।
मुंबई की छोटी दुकान या छोटे ऑफ़िस में उत्तर-पूर्व का कोना अक्सर काउंटर या रैक से घिरा होता है। ऐसे में उत्तर या पूर्व में कोई साफ़, खाली जगह भी पूरी तरह ठीक विकल्प है। ज़्यादा ज़रूरी यह है कि चौकी के पीछे ठोस दीवार हो, उसके बगल में टॉयलेट का दरवाज़ा न हो, और परिवार या स्टाफ़ के बैठने की इतनी जगह हो कि किसी को कोई चीज़ लाँघनी न पड़े।
किस ओर मुँह करें और दीये कहाँ रखें, यह लक्ष्मी पूजा की दिशा और दीये कहाँ रखें में देखें। दुकान में भी यही बातें लागू होती हैं।
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नए बही-खाते या लैपटॉप कैसे रखें?
नए बही-खाते चौकी पर साफ़ लाल या पीले कपड़े पर, लक्ष्मी जी और गणेश जी की तस्वीरों या मूर्तियों के बगल में या ठीक सामने रखें, ताकि वे भी पूजा का हिस्सा बनें। बीते साल के पुराने खाते बंद करके करीने से एक तरफ़ रखे जाते हैं।
आजकल कई ऑफ़िस हिसाब चोपड़े में नहीं, सॉफ़्टवेयर में रखते हैं। ऐसे में परिवार अक्सर चौकी पर अकाउंट्स वाला लैपटॉप, छपा हुआ लेजर, नई नोटबुक या नई चेकबुक रखते हैं। बाकी सारे टैब बंद कर दें, स्क्रीन साफ़ रखें, और लैपटॉप को दीयों और धूपबत्ती से दूर किसी स्थिर सतह पर रखें।
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ऊँचाई पर, फ़र्श पर कभी नहीं
बही-खाते या लैपटॉप चौकी या साफ़ टेबल पर रखें, फ़र्श पर नहीं।
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कलम और दवात
पहली एंट्री के लिए खातों के पास नया पेन रखा जाता है, और कुछ घरों में नई दवात या पारंपरिक कलम भी।
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आग से सुरक्षा
कागज़, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक सामान को खुली लौ से अच्छी दूरी पर रखें, और काउंटर के पास दीया कभी बिना निगरानी के जलता न छोड़ें।
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बही-खाते पर शुभ लाभ और स्वस्तिक का क्या अर्थ है?
नए खाते के पहले पन्ने पर शुभता और कल्याण का प्रतीक स्वस्तिक बनाया जाता है और 'शुभ लाभ' यानी शुभ कमाई लिखा जाता है, ताकि सौभाग्य और ईमानदारी की कमाई का स्वागत हो। आमतौर पर इन्हें कुमकुम, सिंदूर या हल्दी के लेप से बनाया जाता है।
परंपरा में शुभ और लाभ को गणेश जी के पुत्रों से जोड़ा जाता है, इसीलिए ये उनके चिह्न के साथ लिखे जाते हैं। कई परिवार पन्ने के सबसे ऊपर 'श्री' भी लिखते हैं, और कुछ अपने कुलदेवता या बिज़नेस का नाम लिखते हैं। कौन-से चिह्न बनें, किस क्रम में बनें और उन्हें कौन बनाए, यह हर समुदाय में अलग है, इसलिए अपने बड़ों या पंडित जी की बात मानें।
यही चिह्न अक्सर दुकान के प्रवेश पर और कैश बॉक्स पर भी बनाए जाते हैं। अगर आप कैश लॉकर पर चिह्न बनाते हैं, तो लॉकर खुद दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में ऐसे रखें कि वह उत्तर की ओर खुले — देखें कैश काउंटर और लॉकर का वास्तु।
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पूजा से पहले कैश काउंटर कैसे साफ़ करें?
पूजा से पहले कैश काउंटर पूरी तरह साफ़ करें: दराज़ खाली करें, अंदर से पोंछें, पुरानी रसीदें और टूटी चीज़ें निकाल दें, और सिर्फ़ वही वापस रखें जिसकी जगह वहाँ है। त्योहार की भागदौड़ में फ़ालतू सामान से भरा काउंटर आसानी से नज़र से छूट जाता है।
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दराज़ खाली करें
फटे नोट, एक्सपायर हो चुके कूपन, न चलने वाले पेन, बिखरी स्टेपलर पिनें और पुराने विज़िटिंग कार्ड निकाल दें।
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जो टूटा है, ठीक करवाएँ
अटकती दराज़, खराब कार्ड मशीन स्टैंड या काउंटर के ऊपर टिमटिमाती लाइट ठीक करवाएँ।
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उत्तर को खुला रखें
कार्टन और पुराना स्टॉक उत्तर की दीवार से हटाकर कहीं और रख दें; यह कुबेर का ज़ोन है।
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नए साल की पहली एंट्री कैसे करें?
पहली एंट्री पूजा के बाद, उस समय करें जो आपके पंडित जी या बड़े बताएँ; नए पेन से, धीरे-धीरे और साफ़ लिखें। कई परिवार पहले भगवान का नाम या 'श्री' लिखते हैं, फिर कोई छोटी प्रतीकात्मक रकम या साल का पहला असली लेन-देन।
सॉफ़्टवेयर में यह मालिक की ओर से की गई कोई असली बिक्री या रसीद हो सकती है। भावना वही है: शुरुआत साफ़, ईमानदार और सही-सही दर्ज की गई एंट्री से हो।
त्योहार के बाद भी खाते और अकाउंट्स की डेस्क व्यवस्थित रखें। अकाउंट्स डिपार्टमेंट का वास्तु में बताया गया है कि फ़ाइनेंस टीम और रिकॉर्ड कहाँ ठीक रहते हैं, और कुबेर और उत्तर दिशा में बताया गया है कि धन के ज़ोन को साल भर हल्का और खुला कैसे रखें।
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अपने बिज़नेस के लिए वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें?
जब आप नई दुकान या ऑफ़िस खोल रहे हों, काउंटर और अकाउंट्स की जगह फिर से व्यवस्थित कर रहे हों, या जब अच्छे सिस्टम होने के बावजूद काम की जगह बार-बार अस्त-व्यस्त और अटकी हुई लगे, तब वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लें।
डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अंधेरी ईस्ट के VastuKimaya ऑफ़िस से और पूरे मुंबई में साइट विज़िट करके कमर्शियल वास्तु परामर्श देती हैं, और आपके फ़्लोर प्लान और तस्वीरों के ज़रिए दूर बैठे परामर्श भी। उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं, इसलिए किराए की दुकानों और ऑफ़िसों में भी काम आते हैं। वास्तु काम की जगह को ज़्यादा शांत और व्यवस्थित बनाने में मदद करता है; यह सोच-समझकर लिए गए बिज़नेस फ़ैसलों या पेशेवर अकाउंटिंग और आर्थिक सलाह का विकल्प नहीं है।
सवाल
आम सवाल
2026 में चोपड़ा पूजन किस तारीख को है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार चोपड़ा पूजन दिवाली पर, रविवार 8 नवंबर 2026 को है। अपने शहर का सही मुहूर्त अपने पंडित जी या किसी भरोसेमंद पंचांग से पक्का कर लें।
चोपड़ा पूजन के समय किस दिशा में मुँह करना चाहिए?
चोपड़ा पूजन के समय मुँह उत्तर या पूर्व की ओर रखें, और चौकी ऑफ़िस या दुकान के उत्तर-पूर्व या उत्तर में लगाएँ। जहाँ तक हो सके, दक्षिण की ओर मुँह करने से बचें।
दिवाली पर नए बही-खाते में क्या लिखा जाता है?
ज़्यादातर परिवार पहले पन्ने पर स्वस्तिक बनाते हैं और शुभ लाभ लिखते हैं, अक्सर ऊपर 'श्री' के साथ; इसके लिए कुमकुम, सिंदूर या हल्दी इस्तेमाल होती है। रीति हर समुदाय में अलग है।
क्या बही-खातों की जगह लैपटॉप से चोपड़ा पूजन हो सकता है?
हाँ। कई कारोबार पारंपरिक चोपड़े की जगह चौकी पर अकाउंट्स वाला लैपटॉप, छपा हुआ लेजर या नई नोटबुक रखते हैं, और उसे ऊँचाई पर और लौ से दूर रखते हैं।
चोपड़ा पूजन और शारदा पूजन में क्या फ़र्क है?
आमतौर पर ये एक ही पूजा के दो नाम हैं। चोपड़ा बही-खाते को कहते हैं, और शारदा पूजन देवी शारदा की पूजा है, जिसमें धन के साथ ज्ञान का भी सम्मान होता है।
चोपड़ा पूजन के बाद कैश बॉक्स कहाँ रखना चाहिए?
कैश बॉक्स या लॉकर दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की दीवार से लगाकर ऐसे रखें कि वह उत्तर की ओर खुले, जो कुबेर की दिशा है। उसे अंदर से साफ़ और फ़ालतू सामान से खाली रखें।
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