वास्तु टिप्स · 8 अक्टूबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
वास्तु के अनुसार कैलेंडर की दिशा: कौन सी दीवार चुनें
नया कैलेंडर लगाने जा रहे हैं? जानिए वास्तु की पारंपरिक सलाह: कौन सी दीवार चुनें, कहाँ न लगाएं, पुराने कैलेंडर का क्या करें और ऑफ़िस में डेस्क कैलेंडर कैसे रखें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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क्या वास्तु में कैलेंडर की दिशा मायने रखती है?
वास्तु की परंपरा में कैलेंडर की दिशा मायने रखती है, क्योंकि कैलेंडर घड़ी की तरह समय के बहाव का प्रतीक है। कहा जाता है कि कैलेंडर जहाँ टँगा हो, उसी से झलकता है कि आने वाले दिन कितनी आसानी से गुज़रेंगे।
सच यह है कि दीवार पर टाँगने वाले छपे कैलेंडर नए ज़माने की चीज़ हैं और पुराने वास्तु ग्रंथों में इनका ज़िक्र नहीं मिलता। भारतीय घरों में पंचांग बहुत पहले से रखा जाता रहा है, और कैलेंडर को लेकर आज जो सलाह दी जाती है, वह बाद में बनी परंपरा है जिसकी जड़ में समय के प्रति वही आदर है। यह एक छोटी-सी आदत है, जिससे कोई नुकसान नहीं और जिसे अपनाने में कोई खर्च भी नहीं।
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कैलेंडर किस दीवार पर लगाना चाहिए?
कैलेंडर कमरे की उत्तर, पूर्व या पश्चिम की दीवार पर लगाना चाहिए। परंपरा में यही तीन दीवारें सुझाई जाती हैं।
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उत्तर की दीवार
कुबेर की दिशा, जो धन और अवसर से जुड़ी है। लिविंग रूम, दुकान या ऑफ़िस के लिए आम पसंद।
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पूर्व की दीवार
उगते सूरज की दिशा, जो नई शुरुआत से जुड़ी है। नए साल के लिए यह दीवार अच्छी रहती है।
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पश्चिम की दीवार
परंपरा में टिकाऊ लाभ और काम पूरा होने से जुड़ी है। जब उत्तर और पूर्व की दीवारों में खिड़कियाँ ही खिड़कियाँ हों, तब अच्छा विकल्प।
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कैलेंडर कहाँ नहीं लगाना चाहिए?
पारंपरिक सलाह के अनुसार कैलेंडर दक्षिण की दीवार पर, या दरवाज़े पर और दरवाज़े के पीछे नहीं लगाना चाहिए। कहा जाता है कि इन जगहों पर कैलेंडर लगाने से तरक्की धीमी पड़ती है, या हर अंदर आने वाले के साथ समय 'डोलता' रहता है।
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दक्षिण की दीवार
दक्षिण यम की दिशा है और अंत से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए कैलेंडर और घड़ी आमतौर पर दूसरी दीवारों पर रखे जाते हैं।
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दरवाज़े पर
जो कैलेंडर दरवाज़ा खुलते ही हिलता है, वह न टिककर रहता है, न ठीक से पढ़ा जाता है।
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दरवाज़े के पीछे
जो कैलेंडर दिखता नहीं, वह याद भी नहीं रहता। नज़र से दूर रहने पर वह जल्दी ही गलत महीना दिखाने लगता है।
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मुख्य द्वार के ऊपर
बहुत से परिवार मुख्य द्वार के ऊपर की जगह भी खाली रखते हैं।
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पुराने कैलेंडर का क्या करें?
साल खत्म होते ही पुराने कैलेंडर उतार दें। वास्तु में पुराना कैलेंडर बंद पड़ी घड़ी जैसा माना जाता है, यानी समय के रुक जाने का एक छोटा सा संकेत।
यही बात साल के बीच में भी लागू होती है। महीना बदलते ही पन्ना पलट दें, क्योंकि तीन महीने पीछे अटका कैलेंडर अपने काम का ठीक उल्टा करता है। अगर आपको तस्वीरें पसंद हैं, तो उन्हें काटकर फ़्रेम करवा लें। बाकी कागज़ रीसायकल कर दें। अगर पुराने कैलेंडर पर किसी देवी-देवता की तस्वीर है, तो बहुत से परिवार वह पन्ना आदर से अलग रख देते हैं और उसे आम कचरे में नहीं डालते।
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कैलेंडर पर कैसी तस्वीरें ठीक रहती हैं?
कैलेंडर पर सुखद और उम्मीद जगाने वाली तस्वीरें ठीक रहती हैं: सूर्योदय, हरियाली, फूल, बहता पानी, पक्षी, पहाड़ या आपके परिवार के इष्टदेव। आप यह तस्वीर महीने भर रोज़ देखेंगे, इसलिए इसे देखकर अच्छा लगना चाहिए।
आमतौर पर इनसे बचा जाता है: युद्ध के दृश्य, हमला करते जंगली जानवर, तूफ़ान, डूबती नाव, सूखे या जले हुए नज़ारे और रोते हुए चेहरे। इसके पीछे कुछ तो वास्तु की परंपरा है, और कुछ यह सीधी-सी समझ कि तस्वीरों का मूड पर असर पड़ता है। बड़ी और साफ़ तारीख़ों वाला, बिना किसी तस्वीर का सादा कैलेंडर भी बिल्कुल ठीक है, और अक्सर ज़्यादा काम का भी।
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ऑफ़िस में डेस्क कैलेंडर कैसे रखें?
डेस्क कैलेंडर अपनी डेस्क के उत्तर या पूर्व की ओर रखें, जहाँ से आप बिना मुड़े उसे पढ़ सकें। उस पर चालू महीना दिखता रहे और उसके आसपास बिखराव न हो।
ध्यान रखें कि उसकी वजह से दरवाज़ा या आने वाले लोग आपकी नज़र से ओझल न हों। अगर ऑफ़िस की दीवार पर जगह हो, तो आपकी कुर्सी के पीछे वाली दीवार से बेहतर वह दीवार है जिसके सामने आप बैठते हैं। दुकान, क्लिनिक और ऑफ़िस के लिए हमारा कमर्शियल वास्तु पेज पर बताया गया है कि काम की पूरी जगह की व्यवस्था कैसे की जाती है।
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अगर फ़्लैट में दीवारें बहुत कम खाली हों तो?
अगर आपके फ़्लैट में खाली दीवारें बहुत कम हैं, तो उत्तर, पूर्व या पश्चिम की जो भी जगह मिले उसे चुन लें; कमरा कौन-सा है, इसकी चिंता न करें। मुंबई के छोटे घरों में दीवारें खिड़कियों, अलमारियों और टीवी में ही निकल जाती हैं।
अलमारी का वह किनारा जो सही दिशा में है, पैसेज में लगा पिन-बोर्ड, या रसोई की पूर्व की दीवार जो चूल्हे से दूर हो, ये सब चल जाते हैं। कौन सी दीवार किस दिशा में है, यह न पता हो तो फ़ोन का कम्पास या हमारा दिशा खोजक इस्तेमाल करें। अगर दक्षिण की दीवार ही एकमात्र जगह है, तो वहीं लगाएं और कैलेंडर को चालू महीने पर रखें। कैलेंडर एकदम सही जगह लगा हो, इससे ज़्यादा ज़रूरी यह है कि उसकी ठीक से देखभाल हो।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें
वास्तु विशेषज्ञ से तब मिलें जब आप सिर्फ़ एक चीज़ नहीं, बल्कि पूरे घर या ऑफ़िस की जाँच करवाना चाहते हों। कैलेंडर एक छोटी-सी चीज़ है; जो जगह पहले से संतुलित हो, वहाँ वह साथ देता है। वह किसी बड़ी समस्या को ठीक नहीं कर सकता।
अंधेरी ईस्ट, मुंबई की VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर हर कमरे की कम्पास रीडिंग लेती हैं और लिखित रिपोर्ट में बिना तोड़-फोड़ वाले उपाय देती हैं। ऐसी जाँच के लिए साल की शुरुआत अच्छा मौक़ा है। आप ऑन-साइट या दूर से परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।
सवाल
आम सवाल
वास्तु के अनुसार कैलेंडर किस दिशा में रखना चाहिए?
वास्तु की परंपरा के अनुसार कैलेंडर उत्तर, पूर्व या पश्चिम की दीवार पर रखना चाहिए। उत्तर अवसर से, पूर्व नई शुरुआत से और पश्चिम टिकाऊ लाभ से जुड़ी है। दक्षिण की दीवार और दरवाज़ों से परंपरा में बचा जाता है। कैलेंडर साफ़, सीधा और चालू महीने पर रखें।
क्या कैलेंडर दक्षिण की दीवार पर लगाया जा सकता है?
परंपरा में कैलेंडर और घड़ी के लिए दक्षिण की दीवार से बचा जाता है, क्योंकि दक्षिण अंत से जुड़ी है। अगर आपके फ़्लैट में वही अकेली खाली दीवार है, तो आप उसे इस्तेमाल कर सकते हैं। बस कैलेंडर चालू महीने पर रखें और कोई खुशनुमा तस्वीर चुनें। डरने की कोई ज़रूरत नहीं।
क्या घर में पुराने कैलेंडर रखना गलत है?
वास्तु की परंपरा पुराने कैलेंडर को टाँगे रखने से मना करती है, क्योंकि वे बीता हुआ समय दिखाते हैं और ठहराव से जुड़े माने जाते हैं। साल खत्म होने पर उन्हें उतार दें। पसंद की तस्वीरें फ़्रेम करके रख सकते हैं और बाकी कागज़ रीसायकल कर दें। रिकॉर्ड के तौर पर दराज़ में रखी डायरी या प्लानर अलग बात है।
क्या बेडरूम में कैलेंडर लगाया जा सकता है?
हाँ, बेडरूम में कैलेंडर उत्तर, पूर्व या पश्चिम की दीवार पर लगाया जा सकता है। उसे बेड के सिरहाने के ठीक ऊपर न लगाएं। शांत तस्वीर चुनें, और अगर बेडरूम को आराम की जगह बनाए रखना चाहते हैं, तो काम की डेडलाइनों से भरा कैलेंडर न रखें।
क्या पूजा घर में कैलेंडर रखा जा सकता है?
बहुत से परिवार पूजा की जगह के पास पंचांग या धार्मिक कैलेंडर रखते हैं, और यह आम चलन है। उसे बगल की दीवार पर लगाएं, देवी-देवताओं के ऊपर नहीं। उसे साफ़ और चालू रखें, और नया आने पर पिछले साल वाला हटा दें।
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