वास्तु टिप्स · · 8 मिनट में पढ़ें
घर की रोज़मर्रा की परेशानियाँ और हर एक पर वास्तु क्या कहता है
अटकता दरवाज़ा, टपकता नल, बंद घड़ी, सीलन वाला कोना: घर की ऐसी छोटी परेशानियाँ जिन पर वास्तु की अपनी राय है, और हर एक के लिए एक आसान उपाय जो आप आज ही कर सकते हैं।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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क्या घर की छोटी परेशानियाँ वास्तु में सच में मायने रखती हैं?
हाँ, वास्तु में छोटी परेशानियाँ मायने रखती हैं, इसलिए नहीं कि वे बदक़िस्मती लाती हैं, बल्कि इसलिए कि वे चुपचाप आपका ध्यान खींचती रहती हैं और घर को उपेक्षित-सा महसूस कराती हैं। महीनों से अटका दरवाज़ा, टपकता नल जिसे आप अनदेखा करना सीख चुके हैं, एक कोना जिसे कोई साफ़ नहीं करता: हर एक छोटी बात है, पर सब मिलकर घर में रहना भारी बना देती हैं।
अगर आप इन्हें ठीक करने की सोचते रहे हैं पर कभी समय नहीं निकाल पाए, तो आप अकेले नहीं हैं, ज़्यादातर लोगों का यही हाल है। अच्छी बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर काम दिनों में नहीं, मिनटों में हो जाते हैं। वास्तु घर को एक जीवंत जगह मानता है जिसमें प्राण (जीवन-ऊर्जा) बहता है, और ये छोटे सुधार उसका रास्ता साफ़ करते हैं। नीचे उन्नीस आम परेशानियाँ हैं, हर एक पर वास्तु की राय, और कुछ ऐसा जो आप आज ही कर सकते हैं।
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प्रवेश द्वार की परेशानियों के बारे में वास्तु क्या कहता है?
वास्तु मुख्य द्वार को घर का मुख मानता है, इसलिए यहाँ की परेशानियाँ सबसे पहले ठीक करना अच्छा रहता है। साफ़, रोशन और आसानी से खुलने-बंद होने वाला प्रवेश द्वार घर के लिए सबसे आसान सहारों में से एक है। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: फ़्लैट के मुख्य द्वार का वास्तु।
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1. अटकता या चरमराता दरवाज़ा
वास्तु की नज़र में: जो दरवाज़ा आसानी से न खुले, उसे ऐसे अवसरों से जोड़ा जाता है जिनका घर में आना मुश्किल लगता है। आज ही करें: कब्ज़ों में तेल डालें, ज़रूरत हो तो दरवाज़े पर रंदा लगवाएँ या चौखट ठीक कराएँ, और देखें कि दरवाज़ा किसी फ़र्नीचर से टकराए बिना पूरा खुले।
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2. अँधेरा प्रवेश द्वार
वास्तु की नज़र में: कम रोशनी वाला प्रवेश द्वार स्वागत भरा नहीं, बंद-बंद-सा लगता है। आज ही करें: फ़्यूज़ बल्ब बदलें, एक वॉर्म रोशनी वाला लैंप लगाएँ जो शाम को जलता रहे, और वहाँ से डिब्बे हटा दें।
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3. दरवाज़े पर जूतों का ढेर
वास्तु की नज़र में: दरवाज़े के सामने पड़े जूतों का ढेर रास्ता रोकता है और बाहर की गंदगी अंदर लाता है। आज ही करें: उन्हें एक तरफ़ बंद रैक में रखें, आदर्श रूप से लॉबी के दक्षिण या पश्चिम में। पढ़ें: शू रैक और एंट्रेंस लॉबी का वास्तु।
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4. टूटी या ग़ायब नेमप्लेट
वास्तु की नज़र में: साफ़ नेमप्लेट घर को पहचान देती है और स्वागत का एहसास कराती है। आज ही करें: उसे साफ़ करें या बदलें, ताकि नाम आसानी से पढ़े जा सकें।
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5. मुख्य द्वार के पास कूड़ेदान
वास्तु की नज़र में: दहलीज़ पर रखा कचरा ही वह पहली चीज़ है जिससे घर में आती ऊर्जा का सामना होता है। आज ही करें: कूड़ेदान को प्रवेश द्वार से दूर, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में किसी ढकी हुई जगह पर रखें।
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लीकेज, सीलन और रुके हुए पानी के बारे में वास्तु क्या कहता है?
वास्तु पानी की परेशानियों को संसाधनों के हाथ से निकल जाने से जोड़ता है, क्योंकि जल तत्व साफ़ बहना चाहिए और उसका इस्तेमाल सोच-समझकर होना चाहिए। व्यावहारिक रूप से भी, लीकेज और सीलन दीवारों और सेहत दोनों को नुक़सान पहुँचाते हैं, इसलिए इन पर जल्दी ध्यान देना चाहिए।
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6. टपकता नल
वास्तु की नज़र में: लगातार टपकते नल को परंपरागत रूप से पैसे के बह जाने से जोड़ा जाता है। आज ही करें: वॉशर बदलें या प्लंबर को बुलाएँ; तब तक हर इस्तेमाल के बाद नल पूरा कसकर बंद करें।
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7. सीलन या रिसाव वाला कोना
वास्तु की नज़र में: सीलन से कोई ज़ोन भारी और बीमार-सा लगता है, ख़ासकर उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम में। आज ही करें: उसे पोंछें और हवा लगने दें, फ़र्नीचर दीवार से हटा दें, और सीलन की बात अपनी सोसाइटी या प्लंबर से उठाएँ।
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8. धीमी या रुकी हुई नाली
वास्तु की नज़र में: पानी का बाहर न निकल पाना ठहराव है। आज ही करें: गर्म पानी डालकर या प्लंबर की मदद से उसे खुलवाएँ, और जाली साफ़ रखें।
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9. बाल्टियों में भरा पड़ा पानी
वास्तु की नज़र में: कई दिन तक रुका पानी बासी हो जाता है। आज ही करें: बाल्टियाँ ख़ाली करके सुखाएँ, भरकर रखा पानी ढककर रखें, और फूलदान और कटोरियों का पानी नियमित बदलें।
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फ़ालतू सामान और टूटी चीज़ों के बारे में वास्तु क्या कहता है?
वास्तु फ़ालतू सामान और टूटी चीज़ों को अटकी हुई ऊर्जा मानता है: ऐसी चीज़ें जो अपराध-बोध या आदत की वजह से रखी हैं और अब घर के किसी काम की नहीं। आप जो भी बदलाव कर सकते हैं, उनमें अक्सर इन्हें हटाने का असर सबसे साफ़ दिखता है। दिशा के हिसाब से घर की सफ़ाई में इसका एक क्रम बताया गया है।
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10. सीढ़ियों पर सामान
वास्तु की नज़र में: सीढ़ियाँ एक मंज़िल को दूसरी से जोड़ती हैं, और सामान से भरी सीढ़ियाँ रुकी हुई तरक़्क़ी जैसी लगती हैं, ऊपर से उनसे चोट लगने का ख़तरा भी रहता है। आज ही करें: हर सीढ़ी ख़ाली करें और पास में सिर्फ़ एक हल्का, ठीक से जलने वाला लैंप रखें।
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11. 'कभी काम आएगी' सोचकर रखी टूटी चीज़ें
वास्तु की नज़र में: ख़राब उपकरण, चटके बर्तन और फटे बैग ठहरी हुई ऊर्जा को थामे रहते हैं। आज ही करें: इस हफ़्ते एक चीज़ की मरम्मत कराएँ, और बाक़ी किसी को दे दें या रीसायकल करा दें।
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12. चटका हुआ शीशा
वास्तु की नज़र में: चटके शीशे में अक्स टुकड़ों में बँटा दिखता है, इसलिए उसे रखे रहने से बेहतर है बदल देना। आज ही करें: उसे सुरक्षित तरीके से लपेटें और बदल दें, आदर्श रूप से उत्तर या पूर्व की दीवार पर, ऐसी जगह जहाँ उसमें बिस्तर न दिखे।
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13. बिस्तर के नीचे भरा सामान
वास्तु की नज़र में: बिस्तर के नीचे रखे भारी, पुराने सामान को बेचैन नींद से जोड़ा जाता है। आज ही करें: पुराने काग़ज़ और डिब्बे निकाल दें, और अगर कुछ रखना ही हो तो सिर्फ़ हल्की चादरें-तकिये जैसा सामान रखें।
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14. सामान से भरा घर का केंद्र
वास्तु की नज़र में: ब्रह्मस्थान, यानी घर का केंद्र, खुला और हल्का होना चाहिए। आज ही करें: भारी फ़र्नीचर, शू रैक और स्टोरेज को फ़्लैट के बीच वाले हिस्से से हटा दें।
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घड़ियों, रोशनी और हवा के बारे में वास्तु क्या कहता है?
वास्तु चलता समय, रोशनी और ताज़ी हवा को जीवंत, आगे बढ़ते घर की निशानी मानता है, इसलिए जो भी चीज़ रुकी हुई है, टिमटिमा रही है या पूरी तरह बंद है, उस पर ध्यान देना चाहिए।
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15. बंद घड़ी
वास्तु की नज़र में: बंद घड़ी को रुकी हुई तरक़्क़ी से जोड़ा जाता है। आज ही करें: बैटरी बदलें या घड़ी हटा दें, और चलती घड़ियाँ उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाएँ। पढ़ें: वॉल क्लॉक वास्तु।
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16. टिमटिमाती ट्यूबलाइट
वास्तु की नज़र में: डगमगाती रोशनी कमरे में बेचैनी-सी भर देती है। आज ही करें: ट्यूब या स्टार्टर बदलें, और जो कोना दिन में भी अँधेरा रहता है, वहाँ रोशनी बढ़ाएँ।
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17. कभी न खुलने वाली खिड़कियाँ
वास्तु की नज़र में: बासी हवा ऊर्जा को ठहराए रखती है। आज ही करें: हर सुबह कुछ देर उत्तर और पूर्व की खिड़कियाँ खोलें और रोशनी अंदर आने दें।
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पौधों के बारे में वास्तु क्या कहता है?
वास्तु में हरे-भरे पौधों को घर की जीवंत ऊर्जा माना जाता है, इसलिए सूखते पौधों पर, या जिन पौधों के काँटे दरवाज़े की ओर हों, उन पर दोबारा नज़र डालनी चाहिए।
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18. सूखे या सूखते पौधे
वास्तु की नज़र में: सूखे पौधे लापरवाही और ठहराव का संकेत देते हैं। आज ही करें: सूखे पौधे हटा दें, पीली पत्तियाँ काट दें, और उत्तर या पूर्व में कुछ आसानी से पलने वाले, हरे-भरे पौधे रखें।
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19. प्रवेश द्वार के पास काँटेदार पौधे
वास्तु की नज़र में: कैक्टस और काँटेदार पौधे परंपरागत रूप से प्रवेश द्वार और रहने वाली जगहों से दूर रखे जाते हैं। आज ही करें: उन्हें दक्षिण या पश्चिम की बालकनी के किसी कोने में, या घर के बाहर रख दें।
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इस स्थिति में कौन-सी सेवा ठीक रहेगी?
ऐसी रोज़मर्रा की परेशानियों के लिए आम तौर पर किसी सेवा की नहीं, व्यावहारिक सुधार की ज़रूरत होती है। पहले मरम्मत, सफ़ाई, सामान हटाना और रोशनी बढ़ाना; अक्सर बस इतना ही काफ़ी होता है।
अगर घर के एक ही हिस्से में एक ही परेशानी लौटती रहती है, या बुनियादी चीज़ें ठीक करने के बाद भी घर भारी लगता है, तो वास्तु परामर्श से उसके पीछे के ज़ोन का पता चल सकता है। यह तय करने में छोटी परेशानी या बड़ी परेशानी? वाला लेख मदद करेगा। अगर भारीपन कमरे से ज़्यादा आपकी अपनी थकान जैसा लगता है, तो रेकी शायद ज़्यादा ठीक रहे, और अगर आप घर से जुड़े किसी फ़ैसले पर अटके हैं, तो टैरो रीडिंग बात को सोच-समझकर देखने में मदद कर सकती है। साथ में क्रिस्टल रोज़ की एक छोटी याद का काम कर सकते हैं।
कुछ चीज़ों के लिए पहले विशेषज्ञ चाहिए: सीलन और दरारों के लिए आपकी सोसाइटी, प्लंबर या स्ट्रक्चरल इंजीनियर; बिजली की ख़राबी के लिए इलेक्ट्रीशियन; और सेहत पर असर डालने वाली किसी भी बात के लिए डॉक्टर। अगर चीज़ें बार-बार टूटती हैं, तो घर में चीज़ें बार-बार टूटती हैं में उस सिलसिले को और क़रीब से देखा गया है।
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डॉ. किमया से कब बात करें
डॉ. किमया से तब बात करें जब आप आसान सुधार कर चुके हों और फिर भी घर ठीक न लगे, या जब कोई ऐसा सिलसिला दिखे जिसे आप समझ न पा रहे हों। पहले से कुछ भी पता लगाने की ज़रूरत नहीं; जो आप देख रहे हैं, बस वह बता देना काफ़ी है।
मुफ़्त पहली कॉल से शुरुआत करें। अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर परामर्श होता है, और आपके फ़्लोर प्लान और फ़ोटो के आधार पर ऑनलाइन परामर्श भारत में कहीं भी या विदेश में उपलब्ध है। सभी उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं। साइट विज़िट के लिए वे भारत के दूसरे शहरों और विदेश भी जाती हैं; यह मुफ़्त पहली कॉल पर तय होता है।
सवाल
आम सवाल
क्या वास्तु के हिसाब से टपकता नल बुरा है?
टपकते नल को परंपरागत रूप से पैसे और संसाधनों के बह जाने से जोड़ा जाता है, इसलिए वास्तु इसे जल्दी ठीक कराने की सलाह देता है। यह कोई श्राप या भविष्यवाणी नहीं है। इसे ठीक कराने से पानी भी बचता है और घर से एक छोटी, पर लगातार बनी रहने वाली झुँझलाहट भी हट जाती है।
क्या घर में बंद घड़ी रखनी चाहिए?
बेहतर है न रखें। वास्तु बंद घड़ियों को रुकी हुई तरक़्क़ी से जोड़ता है, इसलिए बैटरी बदलें या घड़ी हटा दें। चलती घड़ियाँ उत्तर या पूर्व की दीवार पर, सही समय पर मिलाकर रखें।
क्या घर में टूटी चीज़ें रखना बुरा है?
वास्तु टूटी चीज़ों को लंबे समय तक न रखने की सलाह देता है, क्योंकि वे ठहरी हुई ऊर्जा थामे रहती हैं और अधूरे कामों की याद दिलाती रहती हैं। जो इस्तेमाल करेंगे उसकी मरम्मत कराएँ, और बाक़ी किसी को दे दें, रीसायकल कराएँ या फेंक दें।
वास्तु में सीलन वाली दीवार का क्या मतलब है?
वास्तु में सीलन वाली दीवार से कोई ज़ोन भारी और बीमार-सा लगता है, ख़ासकर उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम में। इसे पहले एक व्यावहारिक समस्या की तरह देखें: प्लंबर या अपनी सोसाइटी की मदद से पता करें कि पानी कहाँ से आ रहा है, फिर उस जगह को हवा लगने दें और सुखाएँ।
वास्तु के अनुसार सूखे पौधों का क्या करें?
सूखे या मुरझाए पौधे घर से हटा देने चाहिए, क्योंकि वास्तु उन्हें ठहराव का संकेत मानता है। हो सके तो उनकी खाद बना लें, और उनकी जगह उत्तर या पूर्व में कुछ हरे-भरे, आसानी से पलने वाले पौधे रखें।
घर की रोज़मर्रा की परेशानियों में वास्तु सलाहकार की ज़रूरत कब पड़ती है?
जब व्यावहारिक सुधार के बाद भी घर के एक ही हिस्से में एक ही परेशानी लौटती रहे, या अच्छी देखभाल के बावजूद घर भारी लगे, तब सलाहकार की ज़रूरत पड़ती है। तब सलाहकार उस सिलसिले के पीछे का ज़ोन या बनावट की बात खोज सकते हैं।
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