वास्तु शास्त्र · 19 सितंबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
नैऋत्य कोण वास्तु: दक्षिण-पश्चिम का स्थिरता ज़ोन
दक्षिण-पश्चिम, यानी नैऋत्य कोण, वास्तु का पृथ्वी ज़ोन है, जो स्थिरता, रिश्तों और अधिकार का आधार है। जानिए यहाँ क्या होना चाहिए, किससे बचें और फ़्लैट में इसे कैसे संतुलित करें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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वास्तु में नैऋत्य कोण क्या है?
नैऋत्य कोण घर या प्लॉट का दक्षिण-पश्चिम कोना है, और वास्तु में यह स्थिरता, ठहराव और अधिकार का ज़ोन है। नैऋत्य शब्द इस दिशा के रक्षक की ओर इशारा करता है, और कोण का सीधा मतलब कोना है।
वास्तु पुरुष मंडल में, यानी उस ग्रिड में जो किसी जगह की ऊर्जा का नक्शा बनाता है, दक्षिण-पश्चिम वह जगह है जहाँ घर का वज़न टिकना माना गया है। परंपरा से इसे ऐसा ज़ोन बताया जाता है जो सब कुछ स्थिर रखता है, बिल्कुल पेड़ की जड़ों की तरह।
जब यह कोना मज़बूत हो और ठीक से इस्तेमाल हो, तो माना जाता है कि घर टिका हुआ लगता है: फ़ैसले ज़्यादा आत्मविश्वास से होते हैं, रिश्ते सुरक्षित लगते हैं और घर के मुखिया को सहारा महसूस होता है।
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दक्षिण-पश्चिम का तत्व और गुण क्या हैं?
दक्षिण-पश्चिम पृथ्वी तत्व का है, जो पंचतत्व (पाँच तत्वों) में से एक है, और इसके गुण हैं स्थिरता, धैर्य, सहनशक्ति और भरोसा। पृथ्वी भारी, शांत और भरोसेमंद होती है, और इस ज़ोन में भी यही गुण झलकने चाहिए।
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स्थिरता
घर में ठहराव का एहसास, और पैसों के मामलों तथा योजनाओं में स्थिरता।
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रिश्ते
साथ निभाने की भावना और आपसी भरोसा, ख़ासकर पति-पत्नी के बीच।
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अधिकार
परिवार या कारोबार के मुखिया के लिए आत्मविश्वास और स्पष्ट नेतृत्व।
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संरक्षण
जो कुछ बना है उसे सँभालकर रखना: बचत, प्रतिष्ठा और पारिवारिक बंधन।
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वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम में क्या रखना चाहिए?
दक्षिण-पश्चिम में मुख्य बेडरूम, भारी फ़र्नीचर और स्टोरेज होना चाहिए, क्योंकि वज़न और ठहराव पृथ्वी तत्व को मज़बूत करते हैं। इसीलिए परंपरा से घर का मुखिया यहाँ सोता है।
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मुख्य बेडरूम
दक्षिण-पश्चिम के लिए आदर्श कमरा। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व की ओर रखें।
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भारी अलमारियाँ
उन्हें इस ज़ोन की दक्षिण और पश्चिम की दीवारों के साथ रखें।
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लॉकर या तिजोरी
दक्षिण की दीवार से लगाकर रखी जा सकती है, इस तरह कि वह उत्तर की ओर खुले, जो कुबेर की दिशा है।
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पारिवारिक तस्वीरें
परिवार या दंपति की ख़ुशनुमा तस्वीरें रिश्तों से जुड़े इस ज़ोन में अच्छी लगती हैं।
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ऑफ़िस में बैठने की जगह
ऑफ़िस में मालिक या वरिष्ठ मैनेजर का केबिन दक्षिण-पश्चिम में ठीक रहता है, और वे उत्तर या पूर्व की ओर मुँह करके बैठें।
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नैऋत्य कोण में किन चीज़ों से बचना चाहिए?
दक्षिण-पश्चिम में टॉयलेट, पानी की सजावट, गहरे कटाव, खुली खाली जगह और, जहाँ संभव हो, मुख्य द्वार से बचें। माना जाता है कि ये इस ज़ोन को हल्का, नम या अस्थिर बनाकर पृथ्वी तत्व को कमज़ोर करते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि जिस घर में ये चीज़ें हों, उसका कुछ नहीं हो सकता। मुंबई के कई फ़्लैटों में इमारत की बनावट के कारण दक्षिण-पश्चिम में टॉयलेट या बालकनी होती है। हर दिशा की अपनी ताक़त होती है, और हर असंतुलन के व्यावहारिक उपाय होते हैं।
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टॉयलेट या बाथरूम
उसे बेदाग़ साफ़ रखें, दरवाज़ा बंद और ढक्कन नीचे; ख़ास उपायों के लिए सलाह लें।
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एक्वेरियम, फ़व्वारा या पानी की टंकी
पानी की चीज़ों को उत्तर या उत्तर-पूर्व में ले जाएँ।
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फ़ालतू सामान और टूटी चीज़ें
भारी होना अच्छा है, बिखरा होना नहीं। स्टोरेज को ऐसे सजाएँ कि वह ठोस लगे, अस्त-व्यस्त नहीं।
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बच्चों का बेडरूम
परंपरा से बच्चों के लिए पश्चिम या उत्तर-पश्चिम बेहतर माना जाता है; दक्षिण-पश्चिम बड़ों के लिए ठीक है।
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दक्षिण-पश्चिम का रिश्तों और स्थिरता पर क्या असर पड़ता है?
दक्षिण-पश्चिम को परंपरा से साथ निभाने और भरोसे से जोड़ा जाता है, इसलिए माना जाता है कि संतुलित दक्षिण-पश्चिम से रिश्ते ज़्यादा स्थिर और घर ज़्यादा शांत रहने में मदद मिलती है। जब दंपति या परिवार बार-बार खटपट की बात करते हैं, तो अक्सर सबसे पहले यही ज़ोन देखा जाता है।
सीधे-सादे कदम मदद करते हैं: मुख्य बेडरूम में फ़ालतू सामान न रखें, बिस्तर के सामने आईना न रखें, गर्म मिट्टी के रंग इस्तेमाल करें और बिस्तर के बगल की मेज़ पर रोज़ क्वार्ट्ज़ के दो पत्थर रखें। वास्तु शांत माहौल में सहायक हो सकता है, पर वह खुलकर, सच्चाई से की गई बातचीत और, ज़रूरत हो तो, पेशेवर काउंसलिंग के साथ सहायक है, उनका विकल्प नहीं।
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फ़्लैट में बिगड़े हुए दक्षिण-पश्चिम को कैसे संतुलित करें?
बिगड़े हुए दक्षिण-पश्चिम को बिना तोड़-फोड़ वाले उपायों से संतुलित किया जाता है; इनसे ज़ोन में वज़न, पृथ्वी की ऊर्जा और ठहराव बढ़ता है, और कोई दीवार नहीं तोड़नी पड़ती। इसलिए ये किराये के फ़्लैटों और सोसाइटी की इमारतों के लिए ठीक हैं।
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मिट्टी के रंग
दीवारों पर या सॉफ़्ट फ़र्निशिंग में बेज, रेत जैसा, टेराकोटा, हल्का भूरा या फीका पीला रंग।
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भारी चीज़ें
दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर ठोस लकड़ी की अलमारी, पत्थर की सजावट या भारी किताबों की अलमारी।
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पीतल और ताँबा
इस ज़ोन को मज़बूत करने के लिए एक्टिवेटेड पीतल या ताँबे के पिरामिड और पट्टियाँ आमतौर पर इस्तेमाल की जाती हैं।
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क्रिस्टल
रिश्तों के लिए रोज़ क्वार्ट्ज़ और ठहराव के लिए ब्लैक टूरमलीन।
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धीमी रोशनी
रोशनी वॉर्म और नरम रखें; तेज़ रोशनी वाला खुला-खुला लुक यहाँ नहीं।
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क्या वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम का मुख्य द्वार ख़राब होता है?
दक्षिण-पश्चिम का मुख्य द्वार अपने आप ख़राब नहीं होता; उसका असर कम्पास से नापे गए सटीक पद (प्रवेश की स्थिति) पर निर्भर करता है। वास्तु घर की हर तरफ़ को हिस्सों में बाँटता है, और दक्षिण व पश्चिम की दीवारों पर कुछ जगहें काम चलाने लायक मानी गई हैं।
जहाँ प्रवेश को सचमुच सहारे की ज़रूरत हो, वहाँ ये उपाय किए जाते हैं: ऊँची दहलीज़, पीतल या ताँबे की पट्टियाँ, दरवाज़े पर अच्छी रोशनी, ठोस लकड़ी का दरवाज़ा और प्रवेश पर सही चिह्न। तोड़-फोड़ की कोई ज़रूरत नहीं पड़ती।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें
वास्तु विशेषज्ञ से तब मिलें जब आपके दक्षिण-पश्चिम में टॉयलेट, प्रवेश, कटाव या पानी की चीज़ हो, या जब आप फ़्लैट खरीद रहे हों या किराये पर ले रहे हों और फ़ैसले से पहले इस ज़ोन को समझना चाहते हों। कम्पास से सटीक माप ज़रूरी है, क्योंकि कुछ डिग्री का फ़र्क़ किसी कमरे को दूसरे ज़ोन में पहुँचा सकता है।
VastuKimaya, अंधेरी ईस्ट की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर पूरे मुंबई में साइट पर आकर कम्पास से हर ज़ोन तय करती हैं, और दूर से परामर्श हो तो आपके फ़्लोर प्लान और तस्वीरों से काम करती हैं। आपको ख़ास आपके घर के लिए बनी लिखित रिपोर्ट मिलती है, जिसमें बिना तोड़-फोड़ वाले उपाय होते हैं, और बाद में भी मदद मिलती रहती है।
सवाल
आम सवाल
नैऋत्य कोण क्या है?
नैऋत्य कोण घर या प्लॉट का दक्षिण-पश्चिम कोना है। वास्तु में यह पृथ्वी तत्व का कोना है और स्थिरता, रिश्तों और अधिकार से जुड़ा है।
दक्षिण-पश्चिम कोने में कौन-सा कमरा आदर्श है?
दक्षिण-पश्चिम कोने के लिए मुख्य बेडरूम आदर्श कमरा है। भारी स्टोरेज, अलमारियाँ और ऑफ़िस में मालिक के बैठने की जगह भी इस ज़ोन में ठीक रहती है।
क्या रसोई दक्षिण-पश्चिम में हो सकती है?
रसोई का दक्षिण-पश्चिम में होना आदर्श नहीं है; रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व बेहतर माना जाता है और उत्तर-पश्चिम भी चल जाता है। अगर रसोई हटाई न जा सके, तो रंग बदलने और चूल्हे की जगह सोच-समझकर तय करने जैसे उपाय मदद कर सकते हैं।
वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम के लिए कौन-सा रंग अच्छा है?
बेज, रेत जैसा, हल्का भूरा, टेराकोटा और फीका पीला जैसे मिट्टी के रंग दक्षिण-पश्चिम के लिए ठीक रहते हैं। ये रंग पृथ्वी तत्व के हैं, और यही इस ज़ोन का तत्व है।
क्या दक्षिण-पश्चिम का टॉयलेट वास्तु का गंभीर दोष है?
दक्षिण-पश्चिम के टॉयलेट को दोष माना जाता है, लेकिन उसे बिना तोड़-फोड़ वाले उपायों से सँभाला जा सकता है। उसे साफ़ और सूखा रखें, दरवाज़ा बंद रखें, और ख़ास सुधारों के लिए वास्तु विश्लेषण करवाएँ।
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