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मार्गशीर्ष गुरुवार 2026: घर में महालक्ष्मी का घट कैसे बिठाएँ
महाराष्ट्र में चलने वाले पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष गुरुवार का व्रत 10 दिसंबर 2026 से 7 जनवरी 2027 तक, पाँच गुरुवार को पड़ता है। फ़्लैट में महालक्ष्मी का घट कहाँ बिठाएँ, कलश में क्या रखें, और उद्यापन कब होता है।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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मार्गशीर्ष गुरुवार 2026 कब है?
महाराष्ट्र में चलने वाले पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष गुरुवार का व्रत पाँच गुरुवार को पड़ता है: 10, 17, 24 और 31 दिसंबर 2026 तथा 7 जनवरी 2027। यह अमांत गणना है, जिसमें महीना एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक चलता है। इस हिसाब से मार्गशीर्ष बुधवार, 9 दिसंबर 2026 को शुरू होकर गुरुवार, 7 जनवरी 2027 को खत्म होता है।
उत्तर भारत के पंचांग पूर्णिमांत गणना मानते हैं, जिसमें महीना पूर्णिमा के बाद शुरू होता है। इसलिए उनमें मार्गशीर्ष के गुरुवार लगभग दो हफ़्ते पहले, नवंबर के आखिर से ही शुरू हो जाते हैं। अगर आपने ऑनलाइन अलग तारीखें देखी हैं, तो आमतौर पर वजह यही होती है।
तारीखें, और घट बिठाने का कोई मुहूर्त हो तो वह भी, कालनिर्णय या किसी दूसरे मराठी पंचांग से, या अपने पारिवारिक पंडित जी से ज़रूर पक्का कर लें। इस लेख में समय नहीं दिए गए हैं।
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मार्गशीर्ष गुरुवार का व्रत क्या है?
मार्गशीर्ष गुरुवार का व्रत महालक्ष्मी को समर्पित है। मराठी घरों में इसे मुख्य रूप से महिलाएँ मार्गशीर्ष महीने के हर गुरुवार को रखती हैं। हर गुरुवार घर में घट बिठाया जाता है, यानी सजाया हुआ कलश जो देवी का प्रतीक होता है; फिर व्रत कथा पढ़ी जाती है और परिवार सादा नैवेद्य चढ़ाता है।
मार्गशीर्ष महीने को खास आदर से देखा जाता है; भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। कई परिवारों के लिए यह व्रत महीने भर चलने वाला एक शांत नियम है, जिसमें प्रार्थना होती है, आभार होता है और घर की साज-सँभाल भी। इन दिनों घर को खास तौर पर साफ़ और उजला रखा जाता है।
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महालक्ष्मी का घट किस दिशा में बिठाएँ?
घट घर के या पूजा की जगह के उत्तर-पूर्व में बिठाएँ; उत्तर-पूर्व खाली न हो, तो उत्तर या पूर्व में। पूजा करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठें। ईशान्य (उत्तर-पूर्व) पूजा और मन की स्पष्टता का ज़ोन है, और उत्तर धन के रक्षक कुबेर की दिशा है; इसीलिए लक्ष्मी पूजा का इंतज़ाम अक्सर इसी दिशा की ओर किया जाता है। देखें कुबेर और उत्तर दिशा।
ज़्यादातर फ़्लैटों में सबसे आसान तरीका यह है कि घट पूर्व की दीवार से लगाकर रखें, ताकि महालक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर पश्चिम की ओर मुँह करके रहे और आपका मुँह पूर्व की ओर हो। घट ज़मीन पर नहीं, चौकी या पाट पर ऊँचा रखें, और उसे जूते-चप्पल, कूड़ेदान और टॉयलेट की दीवार से दूर रखें।
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मार्गशीर्ष गुरुवार के कलश में क्या रखा जाता है?
कलश में आमतौर पर साफ़ पानी और कुछ शुभ चीज़ें रखी जाती हैं। उसके मुँह के चारों ओर पत्ते लगाए जाते हैं, और ऊपर नारियल या महालक्ष्मी का सजा हुआ मुख या तस्वीर रखी जाती है। हर परिवार की रीत थोड़ी अलग होती है, इसलिए जहाँ फ़र्क हो, वहाँ अपने घर का तरीका ही अपनाएँ। कलश का अर्थ और उसे कहाँ रखें, यह घर में कलश स्थापना में समझाया गया है।
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आधार
चौकी या पाट पर साफ़ लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ, और उस पर चावल या गेहूँ की छोटी-सी ढेरी बनाएँ, जिस पर कलश रखा जाता है।
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कलश के अंदर
पानी, और अक्सर उसके साथ एक सिक्का, सुपारी, थोड़े चावल, हल्दी-कुमकुम और दूर्वा की कुछ पत्तियाँ या एक फूल।
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पत्ते
कलश के मुँह पर आम के पत्ते; कुछ परिवार अलग-अलग पेड़ों के पत्ते मिलाकर लगाते हैं।
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देवी
कपड़े में लपेटा नारियल, या महालक्ष्मी का सजा हुआ मुख या तस्वीर, जो पत्तों के ऊपर रखी जाती है।
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घट के आसपास
सामने रंगोली, जिसमें अक्सर घर के अंदर आते हुए लक्ष्मी के पदचिह्न बनाए जाते हैं; साथ में फूल, एक दीया और व्रत कथा की किताब।
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घर में गुरुवार की पूजा कैसे करें?
एक शाम पहले कोना साफ़ कर लें, गुरुवार सुबह घट बिठाएँ, पूजा करके कथा पढ़ें, और शाम की आरती से दिन पूरा करें। ज़्यादातर परिवार इसे सादा ही रखते हैं और हर हफ़्ते यही तैयारी दोहराते हैं।
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बुधवार शाम
उत्तर-पूर्व का कोना पोंछ लें, वहाँ से फ़ालतू सामान हटा दें, और कलश व थाली धो लें।
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गुरुवार सुबह
नहाने के बाद रंगोली बनाएँ, घट बिठाएँ, दीया जलाएँ और फूल व हल्दी-कुमकुम चढ़ाएँ।
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कथा
महालक्ष्मी व्रत कथा बोलकर पढ़ें, अकेले या घर की महिलाओं के साथ मिलकर।
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नैवेद्य और भोजन
कई लोग दिन भर सादा उपवास रखते हैं और शाम की पूजा के बाद भोजन करते हैं; अपने परिवार की रीत के अनुसार करें। जो बीमार हों, गर्भवती हों या नियमित दवा ले रहे हों, वे सिर्फ़ प्रार्थना से व्रत रख सकते हैं, या उपवास से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें।
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शुक्रवार सुबह
कई परिवार अगली सुबह घट आदर के साथ उठा लेते हैं और कलश का पानी तुलसी या दूसरे पौधों में डाल देते हैं; कुछ परिवार इसे पूरे महीने रखे रहते हैं।
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मार्गशीर्ष गुरुवार का उद्यापन कब होता है?
उद्यापन, यानी व्रत का विधिवत समापन, परंपरा के अनुसार महीने के आखिरी गुरुवार को होता है। महाराष्ट्र में चलने वाले पंचांग के अनुसार 2026 के व्रत में यह दिन 7 जनवरी 2027 को पड़ता है। कुछ परिवार चौथे गुरुवार, 31 दिसंबर को उद्यापन करते हैं।
उद्यापन के दिन कई घरों में सुहागिन महिलाओं को हल्दी-कुमकुम के लिए बुलाया जाता है और उन्हें छोटा-सा वाण (भेंट) दिया जाता है, जिसमें अक्सर व्रत कथा की एक प्रति भी होती है। आपके घर में व्रत कैसे पूरा किया जाता है, यह परिवार के बड़ों या पंडित जी से पूछ लें, और तारीख कालनिर्णय में देख लें।
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क्या बिना पूजा घर वाले छोटे फ़्लैट में यह व्रत रखा जा सकता है?
हाँ। व्रत के लिए बस किसी उजले कोने में एक साफ़, ऊँची सतह चाहिए। अगर फ़्लैट में पूजा घर नहीं है, तो लिविंग रूम का उत्तर-पूर्व ठीक रहता है। वास्तु को हर कमरे में अलग से भी लागू किया जा सकता है, जैसा छोटे घरों के लिए पूजा घर वास्तु में समझाया गया है।
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छोटी साइड टेबल लें
उसे खाली करके कपड़ा बिछा दें, तो वह उस दिन के लिए चौकी का काम कर देती है।
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रास्ता खाली रखें
छोटे हॉल में घट ऐसी जगह न रखें जहाँ से लोग बार-बार गुज़रते हों।
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बेडरूम और बालकनी से बचें
बेडरूम बहुत निजी जगह है और बालकनी पर हवा और धूल बहुत आती है; आमतौर पर हॉल ही ज़्यादा शांत जगह रहती है।
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दीये का ध्यान रखें
दीया धातु की थाली में रखें, पर्दों और कलश के कपड़े से दूर।
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दत्त जयंती इस महीने से कैसे जुड़ी है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार दत्त जयंती मार्गशीर्ष के भीतर ही, बुधवार, 23 दिसंबर 2026 को मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन पड़ती है, यानी तीसरे गुरुवार से ठीक एक दिन पहले। गुरुवार को परंपरा से गुरु का दिन भी माना जाता है, इसलिए महाराष्ट्र के कई परिवारों में ये दोनों पर्व सहज रूप से साथ-साथ चलते हैं; देखें दत्त जयंती 2026: घर में दत्तात्रेय पूजा।
इसी पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती भी मनाई जाती है, जो रसोई और अनाज के भंडार को सम्मान देने का दिन है। घर की देखभाल में बीतने वाले इस महीने से यह दिन अच्छी तरह मेल खाता है।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें
अगर आपके फ़्लैट के उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व में घट के लिए कोई साफ़, उजली जगह नहीं है, या वह कोना टॉयलेट, रसोई के सिंक या भारी सामान ने घेर रखा है, तो वास्तु विशेषज्ञ से मिलें। मुंबई के छोटे घरों में यह आम बात है, और बिना तोड़-फोड़ वाले बदलावों से अक्सर इसमें राहत मिल सकती है।
VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अपने अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट पर आकर परामर्श देती हैं, और फ़्लोर प्लान व तस्वीरों के आधार पर दूर बैठे परामर्श भी करती हैं।
सवाल
आम सवाल
मार्गशीर्ष गुरुवार 2026 कब है?
महाराष्ट्र में चलने वाले पंचांग के अनुसार व्रत के गुरुवार 10, 17, 24 और 31 दिसंबर 2026 तथा 7 जनवरी 2027 को हैं। उत्तर भारत के पंचांगों में तारीखें अलग होती हैं, इसलिए कालनिर्णय से या अपने पारिवारिक पंडित जी से पक्का कर लें।
महालक्ष्मी का घट किस दिशा में बिठाएँ?
घट घर के उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व में बिठाएँ। आदर्श यह है कि उसे पूर्व की दीवार से लगाकर रखें, ताकि मूर्ति या तस्वीर पश्चिम की ओर मुँह करके रहे और पूजा करते समय आपका मुँह पूर्व की ओर हो। घट को चौकी पर ऊँचा रखें।
मार्गशीर्ष गुरुवार के कलश में क्या रखा जाता है?
आमतौर पर साफ़ पानी, साथ में एक सिक्का, सुपारी, थोड़े चावल, हल्दी-कुमकुम और दूर्वा या एक फूल। मुँह के चारों ओर आम के पत्ते लगाए जाते हैं और ऊपर नारियल या महालक्ष्मी की तस्वीर रखी जाती है। परिवारों की रीत अलग-अलग होती है।
मार्गशीर्ष गुरुवार का उद्यापन कब होता है?
परंपरा के अनुसार महीने के आखिरी गुरुवार को, जो महाराष्ट्र में चलने वाले पंचांग के अनुसार 7 जनवरी 2027 है। कुछ परिवार 31 दिसंबर को उद्यापन करते हैं। अपने बड़ों या पंडित जी से पक्का कर लें।
क्या बिना पूजा घर वाले छोटे फ़्लैट में यह व्रत रखा जा सकता है?
हाँ। लिविंग रूम के उत्तर-पूर्व में एक साफ़ साइड टेबल या चौकी काफ़ी है। उसे आने-जाने के रास्ते से हटकर, बेडरूम और बालकनी से दूर रखें, और दीया धातु की थाली में रखें।
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