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कॉन्फ्रेंस रूम वास्तु: बेहतर फ़ैसलों के लिए

मीटिंग रूम कहाँ बनाएँ, फ़ैसला लेने वाला कहाँ बैठे, टेबल का आकार और रंग कैसे चुनें, और बातचीत को साफ़ व काम की बनाए रखने के आसान तरीके।

लेखिका: , वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

कॉन्फ्रेंस रूम वास्तु: बेहतर फ़ैसलों के लिए

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कॉन्फ्रेंस रूम वास्तु क्यों मायने रखता है?

कॉन्फ्रेंस रूम वास्तु इसलिए मायने रखता है कि यहीं योजनाओं पर बहस होती है, सौदे पक्के होते हैं और टीम एक राय बनाती है। इसलिए कमरा ऐसा हो जहाँ साफ़ सोचने में मदद मिले और संतुलन महसूस हो। मीटिंग रूम तंग या अंधेरा हो, या बैठने की व्यवस्था ठीक न हो, तो अक्सर तनाव-सा महसूस होता है और बातचीत खिंच सकती है।

वास्तु अच्छी तैयारी या लीडरशिप की जगह नहीं लेता। वह बस जगह में ठहराव लाने में मदद करता है, ताकि वहाँ बैठे लोगों का ध्यान बेचैनी पर नहीं, फ़ैसले पर रहे।

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ऑफ़िस में कॉन्फ्रेंस रूम कहाँ होना चाहिए?

ऑफ़िस का उत्तर-पश्चिम या पश्चिम हिस्सा कॉन्फ्रेंस रूम के लिए परंपरागत रूप से पसंद किया जाता है। उत्तर-पश्चिम वायु, यानी हवा का ज़ोन है और गति, बातचीत और लेन-देन से जुड़ा माना जाता है। क्लाइंट और मेहमानों के साथ मीटिंग के लिए ये गुण काम के हैं। पश्चिम वरुण से जुड़ा है और नतीजे लाने व उन्हें पक्का करने में साथ देता है।

मुंबई के छोटे ऑफ़िसों में हो सकता है कि ज़ोन चुनने का विकल्प ही न हो। ऐसे में बैठने की व्यवस्था, रोशनी और कमरे की हालत पर ध्यान दें, जो कहीं भी सुधारी जा सकती है। ऑफ़िस के केंद्र, यानी ब्रह्मस्थान को जहाँ तक हो सके बंद मीटिंग रूम न बनाएँ, क्योंकि केंद्र खुला रहना चाहिए।

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मीटिंग रूम में चेयरपर्सन कहाँ बैठे?

चेयरपर्सन या सबसे सीनियर व्यक्ति कमरे के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में उत्तर या पूर्व की ओर मुँह करके बैठे। दक्षिण-पश्चिम पृथ्वी और स्थिरता का ज़ोन है, इसलिए यहाँ पीछे ठोस दीवार रखकर बैठने से रौब और ठहराव का एहसास मिलता है।

मुख्य कुर्सी की पीठ दरवाज़े या काँच के पार्टीशन की ओर न हो, और किसी को भी सीधे बीम के नीचे न बिठाएँ। विज़िटर और क्लाइंट टेबल के दूसरी तरफ़, दक्षिण या पश्चिम की ओर मुँह करके बैठ सकते हैं। इससे बातचीत में मर्यादा और संतुलन बना रहता है।

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कॉन्फ्रेंस रूम वास्तु के लिए टेबल का कैसा आकार और साइज़ ठीक है?

वास्तु में आम तौर पर आयताकार या अंडाकार टेबल पसंद की जाती है। आयताकार टेबल पर हर किसी की जगह साफ़ तय रहती है और बैठक में एक व्यवस्था बनी रहती है। अंडाकार टेबल से कमरे का माहौल नरम लगता है और यह मिल-जुलकर होने वाली चर्चा के लिए ठीक रहती है।

बेढंगी, तीखे कोनों वाली या तिकोनी टेबल से आम तौर पर बचा जाता है। टेबल का साइज़ ऐसा रखें कि हर कुर्सी के चारों ओर आराम से चलने की जगह बचे। छोटे कमरे में बहुत बड़ी टेबल हो तो लोगों को जकड़ा-जकड़ा-सा लगता है। लकड़ी ऐसी सामग्री है जो गर्माहट और ठहराव देती है। अगर काँच की टेबल हो, तो उसे एकदम साफ़ रखें और नरमी के लिए रनर या मैट बिछा दें।

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स्क्रीन, बोर्ड और उपकरण कहाँ रखें?

स्क्रीन, प्रोजेक्टर और बिजली के दूसरे उपकरण कमरे के दक्षिण-पूर्व में ठीक रहते हैं, जो अग्नि तत्व का ज़ोन है। अगर स्क्रीन कहीं और लगानी ही पड़े, तो केबल सलीके से रखें और मीटिंग खत्म होने पर उपकरण बंद कर दें।

बाकी व्यावहारिक बातें ये हैं:

  • 01

    व्हाइटबोर्ड

    उत्तर या पूर्व की दीवार पर, ताकि लिखते समय प्रेज़ेंटर का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर रहे।

  • 02

    स्टोरेज

    फ़ाइलों की भारी अलमारियाँ दक्षिण या पश्चिम की दीवारों के साथ।

  • 03

    उत्तर-पूर्व कोना

    इसे साफ़ और हल्का रखें। एक छोटा पौधा या साफ़ पानी का जग यहाँ ठीक लगता है।

  • 04

    तार

    उलझे केबल छिपा दें। इधर-उधर लटकते तारों से जगह और बिखरी-बिखरी लगती है।

06

कॉन्फ्रेंस रूम में कौन-से रंग और सजावट ठीक रहती है?

कॉन्फ्रेंस रूम में ऑफ-व्हाइट, क्रीम, नरम बेज, हल्का ग्रे या हल्का हरा जैसे शांत और हल्के रंग अच्छे लगते हैं। ये जगह को रोशन रखते हैं और चर्चा से ध्यान नहीं भटकाते।

दीवार के लिए ऐसी तस्वीरें चुनें जिनमें लगातार तरक्की, खुले लैंडस्केप या बहता पानी दिखे। युद्ध, झगड़े, तूफ़ान या किसी भी उदास चीज़ की तस्वीरें न लगाएँ। उत्तर या पूर्व की दीवार पर घड़ी, ताज़ी हवा, और ज़रूरी मीटिंग से पहले हल्की प्राकृतिक खुशबू भी कमरे को मीटिंग के लिए तैयार करने में मदद करती है।

  • 01

    रोशनी

    रोशनी हर तरफ़ बराबर और तेज़ हो, पर आँखों में चुभे नहीं। उत्तर या पूर्व से आने वाली प्राकृतिक रोशनी आदर्श मानी जाती है।

  • 02

    पौधे

    उत्तर या पूर्व में हरे-भरे पौधे रखें। सूखे या मुरझाते पौधे जल्दी हटा दें।

  • 03

    आवाज़

    नरम फ़र्निशिंग या एकॉस्टिक पैनल गूँज कम करते हैं, जिससे लंबी चर्चा कम थकाती है।

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क्या वास्तु के उपाय बने हुए मीटिंग रूम में मदद कर सकते हैं?

हाँ, ज़्यादातर कॉन्फ्रेंस रूम बिना तोड़-फोड़ वाले उपायों से बेहतर किए जा सकते हैं। यह किराये के ऑफ़िस और को-वर्किंग स्पेस के लिए भी ठीक है। आम तौर पर कुर्सियों की जगह बदली जाती है, स्क्रीन खिसकाई जाती है, रंग बदले जाते हैं और फ़ालतू सामान हटाया जाता है।

अगर कमरा किसी मुश्किल ज़ोन में पड़ता हो, तो डॉ. किमया कम्पास से जाँच के बाद एक्टिवेटेड पिरामिड, क्लियर क्वार्ट्ज़ या पाइराइट जैसे क्रिस्टल, मेटल स्ट्रिप या रंग में सुधार जैसे उपाय सुझा सकती हैं। जिस कमरे में तनाव भरी चर्चाएँ होती हैं, वहाँ जगह को नियमित रूप से शुद्ध करने से, यानी ताज़ी हवा, समुद्री नमक, ध्वनि या एक सरल रेकी वास्तु सेशन से, कमरा फिर हल्का लगने में मदद मिल सकती है।

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वास्तु विशेषज्ञ से कब परामर्श लें

नया ऑफ़िस बनाते समय, जगह बदलते समय, या जब किसी खास कमरे में मीटिंग बार-बार अटकी या तनाव भरी लगें, तब वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लें। पेशेवर जाँच में सिर्फ़ मीटिंग रूम नहीं, पूरा ऑफ़िस देखा जाता है।

डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अंधेरी ईस्ट से मुंबई भर के ऑफ़िसों में साइट विज़िट करती हैं, और फ़्लोर प्लान व फ़ोटो के ज़रिए दूर से भी परामर्श देती हैं। निजी लिखित रिपोर्ट में व्यावहारिक, बिना तोड़-फोड़ वाले बदलाव होते हैं, और बाद में फ़ॉलो-अप में भी मदद मिलती है। साइट विज़िट के लिए वे भारत के दूसरे शहरों और विदेश भी जाती हैं; यह मुफ़्त पहली कॉल पर तय होता है।

सवाल

आम सवाल

वास्तु के अनुसार मीटिंग में किस दिशा में मुँह करके बैठना चाहिए?

सबसे सीनियर व्यक्ति के लिए आदर्श यह है कि वे कमरे के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में बैठें और मुँह उत्तर या पूर्व की ओर रखें। बाकी लोगों को जगह के हिसाब से टेबल के आसपास बिठाया जा सकता है।

क्या वास्तु के अनुसार गोल कॉन्फ्रेंस टेबल अच्छी है?

गोल और अंडाकार टेबल चल सकती हैं और मिल-जुलकर होने वाली चर्चा के लिए ठीक रहती हैं, हालाँकि तय क्रम से चलने वाली मीटिंग के लिए वास्तु में आयताकार टेबल ज़्यादा आम है। बेढंगे या तीखे कोनों वाले आकार से बचें।

क्या कॉन्फ्रेंस रूम उत्तर-पूर्व में हो सकता है?

उत्तर-पूर्व में हल्की और खुली मीटिंग जगह चल सकती है, लेकिन वहाँ भारी फ़र्नीचर, स्टोरेज और फ़ालतू सामान न रखें। बंद कॉन्फ्रेंस रूम के लिए पारंपरिक पसंद उत्तर-पश्चिम या पश्चिम ही है।

वास्तु के अनुसार कॉन्फ्रेंस टेबल पर क्या रखना चाहिए?

टेबल पर सिर्फ़ वही रखें जो मीटिंग के लिए चाहिए। एक छोटा पौधा, या ताज़े पानी का जग और साफ़ गिलास रखना ठीक है। हर मीटिंग के बाद पुराने कागज़, खाली कप और उलझे केबल हटा दें।

क्या कॉन्फ्रेंस रूम वास्तु वर्चुअल मीटिंग वाले कोने पर भी लागू होता है?

हाँ, वीडियो कॉल वाले कोने पर भी यही बातें लागू होती हैं। उत्तर या पूर्व की ओर मुँह रखें, पीछे ठोस दीवार रखें, बैकग्राउंड साफ़-सुथरा रखें और ध्यान दें कि रोशनी आपके चेहरे पर पड़े।

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