वास्तु टिप्स · 8 अक्टूबर 2026 · 5 मिनट में पढ़ें
वास्तु के अनुसार झाड़ू और कूड़ेदान कहां रखें
घर में झाड़ू, पोछा और कूड़ेदान कहां रहें? घर के काम-काज वाले हिस्से के लिए एक सहज वास्तु गाइड, झाड़ू लगाने से जुड़ी मान्यताएं, और उनके पीछे छिपा साफ-सफाई का सीधा-सा तर्क।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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वास्तु के अनुसार झाड़ू कहां रखनी चाहिए?
झाड़ू को घर के दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम या उत्तर-पश्चिम हिस्से में नज़र से दूर रखना चाहिए, किसी काम-काज वाले कोने में, सूखी बालकनी में या दरवाज़े के पीछे। ये ज़ोन स्टोरेज और सर्विस वाली जगहों के लिए इस्तेमाल होते हैं, इसलिए सफाई का सामान वहां सहज ही फिट हो जाता है।
झाड़ू धूल और कचरा हटाने का औज़ार है। वास्तु बस इतना कहता है कि वह ऐसी खुली जगह न पड़ी हो जहां मेहमान बैठते हैं, खाना रहता है या पूजा होती है।
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झाड़ू और पोछे के लिए किन जगहों से बचना चाहिए?
झाड़ू और पोछे को उत्तर-पूर्व में, पूजा की जगह में या उसके बगल में, किचन प्लेटफॉर्म पर और ठीक मुख्य द्वार पर रखने से बचें। ये घर के साफ और हल्के ज़ोन हैं, और सफाई के सामान के साथ धूल और सीलन आती है।
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उत्तर-पूर्व
ईशान्य (उत्तर-पूर्व) जल और प्रार्थना का ज़ोन है, इसलिए इसे हल्का और सलीके से रखा जाता है।
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पूजा की जगह
झाड़ू को मंदिर की शेल्फ के नीचे या पीछे न रखें।
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किचन प्लेटफॉर्म
खाने के पास झाड़ू या गीला पोछा वास्तु की बात बाद में है, पहले सफाई की समस्या है।
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मुख्य द्वार
दरवाज़े से दिखती झाड़ू पर मेहमान की नज़र सबसे पहले पड़ती है। उसे हटाकर रखें।
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वास्तु के अनुसार कूड़ेदान कहां रखना चाहिए?
कूड़ेदान परंपरागत रूप से घर या कमरे के दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम या उत्तर-पश्चिम हिस्से में रखा जाता है, और उत्तर-पूर्व तथा केंद्र से दूर। कचरा घर से बाहर जाने वाली चीज़ है, इसलिए वह सर्विस वाली तरफ रहता है, पूजा या प्रवेश के ज़ोन में नहीं।
रसोई में सिंक के नीचे या प्लेटफॉर्म के पश्चिम वाले सिरे पर रखा छोटा, ढका हुआ कूड़ेदान अच्छा रहता है। घर के केंद्र, ब्रह्मस्थान, को कूड़ेदानों से खाली रखें। अगर आपको पक्का न पता हो कि आपके फ़्लैट की कौन-सी तरफ कौन-सी दिशा है, तो मुफ़्त दिशा खोजक आपको कम्पास की झटपट रीडिंग दे देता है।
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भारतीय घरों में झाड़ू का सम्मान क्यों किया जाता है?
झाड़ू का सम्मान इसलिए किया जाता है कि कई परिवार उसे देवी लक्ष्मी से जोड़ते हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे साफ घर में टिकती हैं। यह पीढ़ियों से चली आ रही घर की रीति है, शास्त्रीय वास्तु ग्रंथों का नियम नहीं।
इसी मान्यता से कई जानी-पहचानी आदतें निकली हैं। लोग झाड़ू पर पैर रखने या उसे ठोकर मारने से बचते हैं। कई उसे तिनकों पर खड़ा करने के बजाय लिटाकर या डंडी के सहारे टिकाकर रखते हैं। जो आपका परिवार करता आया है, वही करें। आपकी आदतें अलग हों तो डरने की कोई बात नहीं है।
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क्या सूरज ढलने के बाद घर में झाड़ू लगाना गलत है?
सूरज ढलने के बाद झाड़ू न लगाना एक क्षेत्रीय मान्यता है, कड़ा वास्तु नियम नहीं। कहावत है कि शाम को झाड़ू लगाने से लक्ष्मी घर से बुहर जाती हैं।
इसकी व्यावहारिक वजह आसानी से समझ आती है। जब बिजली नहीं थी, तब तेल के दीये की मद्धिम रोशनी में कोई छोटी बाली, सिक्का या अनाज का दाना कचरे के साथ बुहर सकता था। अगर आप मुंबई में देर से काम से लौटते हैं और सफाई का वही एक समय है, तो सफाई कर लें। साफ-सुथरा घर ही इस रीति का असली मकसद है।
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इन वास्तु मान्यताओं के पीछे साफ-सफाई का क्या तर्क है?
साफ-सफाई का तर्क सीधा है: कचरा और गंदे औज़ार खाने, पानी, पूजा और सोने की जगह से दूर रहें, और घर से जल्दी निकल जाएं। ज़्यादातर रीतियां असल में घर को ठीक से संभालने की ही बातें हैं, बस परंपरा की भाषा में कही गई हैं।
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कूड़ेदान ढककर रखें
उमस वाले मौसम में ढक्कन बदबू, मक्खियों और कॉकरोच को दूर रखता है।
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रोज़ खाली करें
हो सके तो रसोई का गीला कचरा रात भर फ़्लैट में न रहने दें।
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पोछा सुखाएं
बाल्टी में पड़ा गीला पोछा बदबू मारता है और उसमें कीटाणु पनपते हैं। उसे हवा और धूप में टांगें।
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छोटे फ़्लैट में काम-काज की अलग जगह न हो तो क्या करें?
छोटे फ़्लैट में झाड़ू और पोछा बाथरूम या बालकनी के दरवाज़े के पीछे हुक पर टांग दें, हो सके तो पश्चिम या दक्षिण की तरफ। जगह तंग हो तो मुख्य मकसद यही है कि वे नज़र से दूर और सूखे रहें।
पतली अलमारी, वॉश बेसिन के नीचे पर्दा या सूखी बालकनी में बंद डिब्बा, इनमें से कुछ भी चलेगा। ये छोटे-छोटे बदलाव हैं जिनमें कोई खर्च नहीं, और ये किराए के घरों में भी हो सकते हैं।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब मिलें
वास्तु विशेषज्ञ से तब मिलें जब टॉयलेट, स्टोर या कपड़े धोने की जगह खुद उत्तर-पूर्व या केंद्र में पड़ती हो, या जब घर साफ-सुथरा और संभला हुआ होने पर भी भारी लगे। झाड़ू और कूड़ेदान की जगह तो पूरे घर के वास्तु का एक छोटा-सा हिस्सा है।
अंधेरी ईस्ट, मुंबई में बैठने वाली VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर पूरे फ़्लोर प्लान का अध्ययन करती हैं और लिखित रिपोर्ट में बिना तोड़-फोड़ वाले उपाय सुझाती हैं। आप रेज़िडेंशियल वास्तु के बारे में और पढ़ सकते हैं, या साइट विज़िट वाले अथवा दूर से होने वाले परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।
सवाल
आम सवाल
घर में झाड़ू रखने के लिए कौन-सी दिशा अच्छी है?
झाड़ू रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम परंपरागत रूप से ठीक माने जाते हैं। वास्तु में ये ज़ोन स्टोरेज और काम-काज के लिए इस्तेमाल होते हैं। वहां कोई सूखी, छिपी जगह चुनें, जैसे दरवाज़े के पीछे या बालकनी की अलमारी में, और झाड़ू को उत्तर-पूर्व, पूजा की जगह और किचन प्लेटफॉर्म से दूर रखें।
क्या वास्तु के हिसाब से रसोई में कूड़ेदान रख सकते हैं?
हां, रसोई में छोटा ढका हुआ कूड़ेदान रखना सुविधाजनक भी है और ठीक भी। उसे सिंक के नीचे या रसोई के पश्चिम अथवा दक्षिण-पश्चिम तरफ रखें, चूल्हे और पीने के पानी से दूर। उसे रोज़ खाली करें और कूड़ेदान को अक्सर धोएं, क्योंकि मुंबई की उमस में गीला कचरा जल्दी खराब होता है।
झाड़ू खड़ी रखनी चाहिए या लिटाकर?
कई परिवार झाड़ू को लिटाकर या डंडी के सहारे टिकाकर रखते हैं, तिनकों पर खड़ा करके नहीं। यह घर की रीति है, और इसका एक व्यावहारिक पहलू भी है: तिनकों का आकार बना रहता है और झाड़ू ज़्यादा चलती है। वास्तु की मुख्य बात यह है कि झाड़ू साफ, सूखी और नज़र से दूर हो।
क्या झाड़ू पर पैर रखना अशुभ है?
झाड़ू पर पैर न रखना सम्मान की रीति है, क्योंकि कई घरों में झाड़ू को लक्ष्मी और सफाई से जोड़ा जाता है। यह शास्त्रीय वास्तु नियम नहीं है और डरने की कोई ज़रूरत नहीं। अगर गलती से ऐसा हो जाए, तो बस झाड़ू को उसकी जगह रख दें और बात वहीं छोड़ दें।
क्या झाड़ू और पोछा बाथरूम में रखे जा सकते हैं?
हां, छोटे फ़्लैटों में बाथरूम या सूखी बालकनी आम और समझदारी भरी जगह है। झाड़ू और पोछे को हुक पर टांगें ताकि वे पूरी तरह सूखें और पानी में न पड़े रहें। बाथरूम का दरवाज़ा बंद रखें, और झाड़ू-पोछा घिस जाए या बदबू मारने लगे तो बदल दें।
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