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त्योहार और अनुष्ठान · · 6 मिनट में पढ़ें

मुंबई में लोहड़ी 2027: अलाव कहाँ जलाएँ और उसे सुरक्षित कैसे रखें

लोहड़ी 2027 बुधवार, 13 जनवरी को है। वास्तु के अनुसार अलाव की सही जगह कौन-सी है, सोसाइटी के कंपाउंड में उसे सुरक्षित कैसे रखें, और जिन फ़्लैटों में खुली आग जलाना मुमकिन नहीं, वहाँ दीयों से लोहड़ी कैसे मनाएँ।

लेखिका: , वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

मुंबई में लोहड़ी 2027: अलाव कहाँ जलाएँ और उसे सुरक्षित कैसे रखें

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लोहड़ी 2027 कब है?

लोहड़ी 2027 बुधवार, 13 जनवरी को है, यानी मकर संक्रांति से पहले की शाम। संक्रांति कई कैलेंडरों में गुरुवार, 14 जनवरी को दी गई है और कुछ पंचांगों में शुक्रवार, 15 जनवरी को। आपका परिवार कौन-सा दिन मानता है, इसके लिए कालनिर्णय जैसा कोई कैलेंडर देख लें।

लोहड़ी सर्दियों की फ़सल का पंजाबी त्योहार है, और मौसम की आखिरी लंबी, ठंडी रातों का भी। सूरज ढलने के बाद परिवार आग के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, लपटों में तिल, गुड़ और पॉपकॉर्न अर्पित करते हैं, गाते-नाचते हैं और मिल-बाँटकर खाते हैं। बच्चे की पहली लोहड़ी हो या नए-नए शादीशुदा दंपति की पहली लोहड़ी, उसे खास गर्मजोशी से मनाया जाता है।

मुंबई में लोहड़ी आमतौर पर सोसाइटी के कंपाउंड में, छत पर, गुरुद्वारे या किसी सामुदायिक मैदान में मनाई जाती है, या फिर घर पर सादगी से। इस लेख में कोई मुहूर्त नहीं दिया गया है; अगर आपका परिवार कोई खास समय मानता है, तो घर के बड़े या पंचांग आपको बताएँगे।

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वास्तु के अनुसार लोहड़ी का अलाव किस दिशा में जलाना चाहिए?

लोहड़ी के अलाव के लिए खुले कंपाउंड या बगीचे का दक्षिण-पूर्व ठीक रहता है, क्योंकि वास्तु में अग्नि की जगह दक्षिण-पूर्व है। इस ज़ोन को आग्नेय कोण कहते हैं, यानी अग्नि का कोना, और इसके स्वामी अग्नि देव हैं। रसोई, दीये और बिजली के उपकरण भी इसी ज़ोन में क्यों रखे जाते हैं, यह हमारे लेख आग्नेय: दक्षिण-पूर्व का अग्नि ज़ोन में बताया गया है।

दो ज़ोन में आग न जलाना ही बेहतर है। उत्तर-पूर्व, यानी ईशान्य, जल और प्रार्थना का ज़ोन है, जिसे हल्का और शांत रखा जाता है। प्लॉट या कंपाउंड के केंद्र, यानी ब्रह्मस्थान, को परंपरागत रूप से खुला और खाली रखा जाता है।

दिशा से पहले हमेशा सुरक्षा आती है। अगर आपके कंपाउंड के दक्षिण-पूर्व में कार पार्किंग है, वह हिस्सा किसी पेड़ के नीचे है या मीटर रूम के पास है, तो वह खुली जगह चुनें जो इमारतों, गाड़ियों और तारों से सबसे दूर हो। दक्षिण-पूर्व में खतरे वाली आग से कहीं बेहतर है किसी कम आदर्श कोने में सुरक्षित ढंग से जलती आग।

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क्या सोसाइटी के कंपाउंड में अलाव जलाया जा सकता है?

सोसाइटी के कंपाउंड में अलाव तभी जलाया जा सकता है जब मैनेजिंग कमेटी इसकी इजाज़त दे, और यह सोसाइटी के नियमों और खुले में आग जलाने पर लगी स्थानीय पाबंदियों के दायरे में हो। ये नियम हर इमारत में अलग होते हैं और बदल भी सकते हैं, खासकर सर्दियों में, जब मुंबई की हवा अक्सर खराब रहती है। इसलिए अपने मन से कुछ मान न लें; योजना बनाने से पहले पूछ लें।

दिसंबर और जनवरी में शहर में धुआँ देर तक क्यों टिका रहता है, यह हमारे लेख मुंबई की सर्दियों में हवा की क्वालिटी में बताया गया है। जिन दिनों हवा में धुंध साफ़ दिखे, उन दिनों पड़ोसियों, बच्चों और बुज़ुर्गों का ख्याल रखते हुए छोटी आग जलाना, या नीचे बताया गया दीयों वाला तरीका अपनाना ही समझदारी है।

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    कहाँ

    कमेटी के साथ मिलकर जगह पक्की करें: खुली ज़मीन, जो इमारत, पार्किंग, पेड़ों और ऊपर से गुज़रते किसी भी तार से दूर हो।

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    कितनी बड़ी

    लकड़ियों के बड़े ढेर के मुकाबले धातु के फ़ायर पिट में जलती छोटी, घिरी हुई आग को सँभालना आसान होता है।

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    ज़िम्मेदारी किसकी

    एक या दो बड़ों को तय कर दें, जो आग जलाने से लेकर उसे बुझाने तक उसके पास रहेंगे।

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    पास में क्या रहे

    आग जलाने से पहले ही पानी और रेत की बाल्टियाँ, और अगर सोसाइटी में फ़ायर एक्सटिंग्विशर हो तो वह भी, पास में रख लें।

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लोहड़ी के अलाव को सुरक्षित कैसे रखें?

लोहड़ी का अलाव सुरक्षित रखने के लिए आग छोटी रखें, उसे घेरे में रखें, उस पर हर समय किसी की नज़र रहे, और आग पकड़ सकने वाली हर चीज़ से वह अच्छी दूरी पर हो। कोई भी रीत या दिशा बाद में आती है, आग से सुरक्षा सबसे पहले।

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    आग को घेरे में रखें

    धातु का फ़ायर पिट या कोई चौड़ा धातु का पात्र इस्तेमाल करें, जिसे ईंटों पर ऊँचा करके रेत की परत के ऊपर रखा गया हो। पेवर टाइल्स, पोडियम स्लैब या ऐसी छत पर, जिसके नीचे वॉटरप्रूफ़िंग हो, सीधे आग कभी न जलाएँ।

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    साफ़ ईंधन ही जलाएँ

    सिर्फ़ सूखी लकड़ी या गोबर के उपले। आग जलाने या उसे बढ़ाने के लिए पेट्रोल, केरोसिन (मिट्टी का तेल), प्लास्टिक, टायर, कचरा या पेंट की हुई लकड़ी कभी इस्तेमाल न करें।

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    कपड़ों का ध्यान रखें

    दुपट्टे, ढीली आस्तीनें, साड़ी के पल्लू और सिंथेटिक कपड़े आसानी से आग पकड़ लेते हैं। लपटों के पास जाते समय इन्हें पिन से समेट लें।

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    बच्चों पर नज़र रखें

    बच्चे किसी बड़े का हाथ पकड़कर आग की परिक्रमा करें और अपना अर्पण एक हाथ की दूरी से डालें।

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    धुएँ का ध्यान रखें

    जिन्हें अस्थमा या साँस लेने में तकलीफ़ है, वे उस तरफ़ खड़े हो सकते हैं जिधर से हवा आ रही हो, ताकि धुआँ उनकी ओर न आए, या घर के अंदर रह सकते हैं; अगर धुएँ से उन्हें परेशानी हो, तो उन्हें अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

  • 06

    आग पूरी तरह बुझाएँ

    अंगारों पर खूब पानी डालें, राख को उलट-पलट दें और किसी के जाने से पहले एक बार फिर जाँच लें। आग को रात भर सुलगता हुआ कभी न छोड़ें।

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फ़्लैट में अलाव के बिना लोहड़ी कैसे मनाएँ?

फ़्लैट में खुली आग की जगह लिविंग रूम या रसोई के दक्षिण-पूर्व में कुछ दीये एक साथ जलाकर उनके चारों ओर लोहड़ी मनाई जा सकती है। पीतल या स्टील की एक बड़ी थाली में पाँच, सात या उससे ज़्यादा दीये रखें, पास में अर्पण की कटोरी रखें, और गाने और मिल-बाँटकर खाने के लिए परिवार को उसके चारों ओर इकट्ठा करें। दीयों को सुरक्षित तरीके से कहाँ रखें, यह हमारे लेख दीये और लैंप की दिशा में बताया गया है।

थाली को किसी स्थिर, नीची जगह पर रखें, पर्दों, कागज़ की सजावट और लोगों के आने-जाने के रास्ते से दूर। कई परिवार अलाव की जगह दीयों की धीरे-धीरे परिक्रमा करते हैं और लौ में चुटकी भर तिल और गुड़ अर्पित करते हैं।

कभी-कभी अलाव की जगह छोटी सिगड़ी या अँगीठी जलाई जाती है। इसे सिर्फ़ पूरी तरह खुले बगीचे या छत पर ही जलाएँ। कोयला या लकड़ी घर के अंदर, बंद बालकनी में या किसी भी बंद जगह में कभी न जलाएँ, क्योंकि इनसे निकलने वाली गैसें, जिनमें कार्बन मोनोऑक्साइड भी होती है, खतरनाक हो सकती हैं और इनका आसानी से पता भी नहीं चलता।

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लोहड़ी की आग में क्या अर्पित किया जाता है?

लोहड़ी की आग में आमतौर पर तिल, गुड़, रेवड़ी, गजक, मूँगफली और पॉपकॉर्न अर्पित किए जाते हैं। गाने चलते रहते हैं, परिवार के लोग आग के चारों ओर घूमते हुए इनकी छोटी-छोटी मुट्ठियाँ उसमें डालते हैं, और बाकी सबमें प्रसाद की तरह बाँट दिया जाता है।

कुछ परिवार गन्ने के टुकड़े, मुरमुरे या भुने मखाने भी चढ़ाते हैं, और हर परिवार की रीत अलग होती है। बहुत सारा एक साथ न डालें, छोटी-छोटी मुट्ठियाँ ही अर्पित करें, और किसी बर्तन से लपटों पर तेल या घी न उँड़ेलें। कितना चढ़ाया, इससे ज़्यादा मायने रखती है साथ बैठने की गर्मजोशी।

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लोहड़ी से मकर संक्रांति तक: घर में दोनों त्योहार कैसे जुड़ते हैं?

लोहड़ी कड़ाके की सर्दी की रातों के खत्म होने का संकेत है, और अगले दिन मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का स्वागत करती है, इसलिए दोनों त्योहार अपने आप एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। वास्तु की भाषा में कहें तो लोहड़ी दक्षिण-पूर्व में अग्नि का सम्मान करती है, और संक्रांति पूर्व से आती सुबह की रोशनी का स्वागत।

लोहड़ी से पहले घर का दक्षिण-पूर्व ठीक-ठाक कर लें: गैस का चूल्हा साफ़ करें, कोई बल्ब टिमटिमा रहा हो तो उसे बदल दें, और कोने में पड़े पुराने गत्ते के डिब्बे हटा दें। अगली सुबह पूर्व की खिड़कियाँ खोलकर रोशनी अंदर आने दें, जैसा मकर संक्रांति और वास्तु में बताया गया है।

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वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें?

जब आपको पक्का न हो कि आपके घर में आग, पानी और भारी सामान की सही जगह कहाँ है, तब वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लें। जैसे, जब आपके फ़्लैट के दक्षिण-पूर्व में टॉयलेट या पानी की टंकी हो, या बंगले के बगीचे में लोगों के इकट्ठा होने के लिए कोई साफ़ खुला कोना न दिखे।

VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अंधेरी ईस्ट, मुंबई में हैं। वे पूरे मुंबई में साइट पर आकर, और फ़्लोर प्लान और तस्वीरों के आधार पर दूर बैठे भी, घरों, फ़्लैटों और बंगलों के लिए परामर्श देती हैं। उपाय बिना तोड़-फोड़ वाले होते हैं और लिखित रिपोर्ट में समझाए जाते हैं। आप अपनी सुविधा के समय अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।

सवाल

आम सवाल

लोहड़ी 2027 कब है?

लोहड़ी 2027 बुधवार, 13 जनवरी को है, यानी मकर संक्रांति से पहले की शाम। परिवार सूरज ढलने के बाद आग के चारों ओर इकट्ठा होते हैं; अगर आपका परिवार कोई खास समय मानता है, तो घर के बड़ों से पूछ लें या पंचांग देख लें।

वास्तु के अनुसार लोहड़ी का अलाव किस दिशा में जलाना चाहिए?

लोहड़ी के अलाव के लिए खुले कंपाउंड या बगीचे का दक्षिण-पूर्व ठीक रहता है, क्योंकि वास्तु में अग्नि की जगह दक्षिण-पूर्व है, जो अग्नि देव का ज़ोन है। उत्तर-पूर्व और केंद्र से बचें। अगर दक्षिण-पूर्व सुरक्षित न हो, तो वह खुली जगह चुनें जो इमारतों, गाड़ियों और तारों से सबसे दूर हो।

फ़्लैट में अलाव के बिना लोहड़ी कैसे मनाएँ?

लिविंग रूम या रसोई के दक्षिण-पूर्व में पीतल या स्टील की बड़ी थाली में कुछ दीये एक साथ जलाएँ और उनके चारों ओर इकट्ठा हों। कोयला या लकड़ी घर के अंदर या बंद बालकनी में कभी न जलाएँ।

लोहड़ी की आग में क्या अर्पित किया जाता है?

आमतौर पर तिल, गुड़, रेवड़ी, गजक, मूँगफली और पॉपकॉर्न, जिन्हें परिवार आग के चारों ओर घूमते हुए छोटी-छोटी मुट्ठियों में डालता है। बाकी प्रसाद की तरह बाँट दिया जाता है। हर परिवार की रीत अलग होती है।

क्या सोसाइटी के कंपाउंड में अलाव जलाया जा सकता है?

सिर्फ़ मैनेजिंग कमेटी की इजाज़त से, और सोसाइटी के नियमों और खुले में आग जलाने पर लगी स्थानीय पाबंदियों के दायरे में, जो हर जगह अलग होती हैं और बदल भी सकती हैं। पहले कमेटी से पूछें, और पानी, रेत और फ़ायर एक्सटिंग्विशर तैयार रखें।

क्या लोहड़ी और मकर संक्रांति एक ही दिन होती हैं?

नहीं। लोहड़ी मकर संक्रांति से पहले की शाम मनाई जाती है। 2027 में लोहड़ी 13 जनवरी को है, और कैलेंडर के हिसाब से संक्रांति 14 या 15 जनवरी को दी गई है, इसलिए कालनिर्णय या अपने परिवार का पंचांग देख लें।

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