त्योहार और अनुष्ठान · 21 अक्टूबर 2026 · 7 मिनट में पढ़ें
घर पर तुलसी विवाह: तुलसी कहाँ रखें और पूजा की तैयारी कैसे करें
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार तुलसी विवाह 21 नवंबर 2026 को है। मुंबई के फ़्लैट की बालकनी में या खिड़की के पास पूजा की तैयारी कैसे करें, और सर्दियों में तुलसी को हरा-भरा कैसे रखें।
लेखिका: डॉ. किमया पारिख-आंबेकर, वास्तु सलाहकार, अंधेरी ईस्ट, मुंबई

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2026 में तुलसी विवाह कब है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है, हालाँकि कुछ लोग इसे शुक्रवार, 20 नवंबर को मनाते हैं। यह प्रबोधिनी एकादशी (भगवान के जागने की एकादशी) के बाद आता है, जिसे देवउठनी एकादशी भी कहते हैं और जो 19 से 20 नवंबर के आसपास पड़ती है।
सही दिन को लेकर परिवारों में फ़र्क है। कुछ लोग विवाह एकादशी के दिन ही करते हैं, बहुत-से लोग उसके बाद वाली द्वादशी को, और कुछ लोग कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी सुविधाजनक शाम को। अपने शहर की तारीख और मुहूर्त स्थानीय पंचांग या अपने पारिवारिक पंडित जी से पक्का कर लें।
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तुलसी विवाह क्यों मनाया जाता है?
तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे का भगवान विष्णु से विधि-विधान से विवाह कराया जाता है; विष्णु के रूप में आमतौर पर शालिग्राम या श्रीकृष्ण की तस्वीर रखी जाती है। इसके साथ चातुर्मास (चार पवित्र महीने) पूरा होता है, जिसमें माना जाता है कि भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, और कई परिवारों में परंपरा से शादियों का मौसम इसके बाद ही शुरू होता है।
घर में तुलसी रखी ही क्यों जाती है, और साल भर उसकी सही जगह कहाँ है, यह तुलसी का वास्तु: जगह और देखभाल में बताया गया है। यह लेख उस एक शाम के बारे में है जब यह पौधा पूजा का केंद्र बनता है, और उसके आसपास के ठंडे हफ़्तों के बारे में।
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तुलसी विवाह के लिए तुलसी कहाँ रखनी चाहिए?
अगर तुलसी पहले से घर के उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तर में लगी है, तो उसे वहीं रहने दें। पौधे को उठाकर पूजा की जगह न ले जाएँ, पूजा ही पौधे के पास करें। धूप वाली जगह पर फल-फूल रही तुलसी को एक शाम के लिए अँधेरे कमरे में ले जाने से अच्छा है कि वह वहीं रहे।
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बालकनी में
विवाह बालकनी में ही करें, और पूजा करते समय आपका मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे।
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खिड़की की लेज या ग्रिल पर
शाम के लिए गमले को खिड़की के ठीक अंदर किसी स्टैंड पर रख लें, और अगली सुबह उसे फिर धूप में रख दें।
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अगर धूप सिर्फ़ किसी और जगह आती हो
विवाह वहीं करें जहाँ पौधा है। पश्चिम में लगी हरी-भरी तुलसी, उत्तर-पूर्व के अँधेरे कोने में मुरझाती तुलसी से इस दिन की भावना के कहीं ज़्यादा करीब है।
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ऊँचाई पर, फ़र्श पर नहीं
गमले को छोटे स्टैंड, छोटे पीढ़े या तुलसी वृंदावन (तुलसी का ऊँचा चौरा) पर रखें।
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घर के अंदर मंदिर के पास
अगर आप पूजा अंदर करना चाहें, तो छोटे घरों के लिए पूजा घर का वास्तु में बताई गई उत्तर-पूर्व वाली व्यवस्था उस शाम के लिए ठीक रहती है।
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फ़्लैट में घर पर तुलसी विवाह कैसे करें?
पहले जगह खाली करें, फिर पौधे के आसपास छोटी पर पूरी तैयारी करें: साफ़ फ़र्श, चौकी, मंडप, दीया और रंगोली। मुंबई की संकरी बालकनी में ठसाठस सामान भरने से अच्छा है कि कुछ ही चीज़ें करीने से की जाएँ; बालकनी वास्तु में बताया गया है कि साल भर इस जगह को खुला और काम का कैसे रखें।
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खाली करें और धोएँ
सूखते कपड़े अंदर ले लें, फ़ालतू सामान एक तरफ़ कर दें, और बालकनी का फ़र्श और गमले का बाहरी हिस्सा धो लें।
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चौकी
तुलसी के बगल में साफ़ कपड़ा बिछाकर एक छोटी चौकी रखें, और उस पर अपने परिवार की रीति के अनुसार शालिग्राम या श्रीकृष्ण की तस्वीर रखें।
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मंडप
कई महाराष्ट्रीय घरों में गमले के ऊपर गन्ने बाँधकर मंडप बनाया जाता है। संकरी बालकनी में मेहराब की तरह बँधे दो गन्ने, या गेंदे की कुछ लड़ियाँ भी वही काम करती हैं।
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तुलसी का शृंगार
लाल या पीली चुनरी और चूड़ियाँ; थोड़ी हल्दी और कुमकुम गमले पर लगाएँ, पत्तियों पर न पोतें।
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रंगोली
गमले के सामने चावल के आटे या पंखुड़ियों से छोटा-सा डिज़ाइन; प्राकृतिक सामग्री के बारे में प्रवेश पर रंगोली देखें।
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दीया
दीया धातु की प्लेट पर रखें, बालकनी में तेज़ हवा हो तो काँच की चिमनी में, और पत्तियों व चुनरी से एक बित्ता दूर।
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तुलसी विवाह में क्या चढ़ाया जाता है?
चढ़ावा हर इलाके में अलग होता है, पर मौसमी फल, गन्ना, फूल, दीया और मिठाई लगभग हर जगह चढ़ाए जाते हैं। कई महाराष्ट्रीय घरों में गन्ने के साथ आँवला और बेर चढ़ाए जाते हैं, मंगलाष्टक गाए जाते हैं, और विवाह के क्षण पर अक्षत (चावल के दाने) बरसाए जाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे घर की किसी शादी में।
इसमें से कुछ भी बहुत धूमधाम से करने की ज़रूरत नहीं। साफ़ जगह, जलता दीया, छोटी-सी प्रार्थना और पौधे के आसपास इकट्ठा परिवार, बस इतने में तुलसी विवाह पूरा है। अपने परिवार के तरीके से करें, और जहाँ कोई शंका हो, किसी बड़े-बुज़ुर्ग या पंडित जी से पूछ लें।
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सर्दियों में तुलसी की देखभाल कैसे करें?
पानी कम दें, पौधे को सुबह की पूरी धूप में रखें और मंजरी तोड़ते रहें। मुंबई की हल्की सर्दी तुलसी के लिए आरामदायक मौसम है; असली खतरा ठंड से नहीं, ज़रूरत से ज़्यादा पानी और पूजा के बाद के असर से होता है।
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पानी कम दें
रातें ठंडी होने से मिट्टी देर तक नम रहती है। पानी तभी दें जब ऊपर की परत सूखी लगे, और पूजा के बाद गमले के नीचे की तश्तरी खाली कर दें।
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एक दिन के भीतर शृंगार उतारें
अगले दिन तक चुनरी, मालाएँ और भारी सजावट उतार दें। पत्तियों पर पड़ा कपड़ा रोशनी रोकता है और नमी को रोके रखता है।
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पत्तियाँ धोएँ
कुमकुम, हल्दी और दीयों व धूपबत्ती का धुआँ पत्तियों पर जम जाता है। अगली सुबह हल्के से धो दें, और सर्दियों की धूल भरी हवा में हर एक-दो हफ़्ते में धोते रहें, ताकि पत्तियाँ साफ़ रहें।
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मंजरी तोड़ें
सर्दियों में अक्सर खूब मंजरी आती है। पौधा पत्तों से भरा रहे, इसके लिए मंजरी नियमित रूप से तोड़ते रहें; इन्हें पूजा में चढ़ाया जा सकता है।
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खाद हल्की दें
नवंबर के आखिर में कम्पोस्ट की पतली परत काफ़ी है। तेज़ खाद से बचें।
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आँच से दूर रखें
पूजा के बाद अक्सर यही नुकसान दिखता है: बहुत पास रखे दीये या धूपबत्ती से झुलसी पत्तियाँ।
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अगर तुलसी कमज़ोर हो, या अभी घर में तुलसी न हो तो?
विवाह से लगभग एक हफ़्ता पहले छोटा, स्वस्थ पौधा घर ले आएँ ताकि वह जम जाए, और उसके आकार की चिंता न करें। नए गमले में लगी छोटी तुलसी इस पूजा के लिए पूरी तरह ठीक है।
अगर आपका पुराना पौधा सूख रहा है, तो पहले धूप, पानी और पानी की निकासी देखें, और अगर वह फिर से हरा न हो सके, तो उसे सम्मान के साथ मिट्टी में मिला दें। मुरझाती तुलसी पौधे की देखभाल का मामला है, घर के लिए कोई बुरा संकेत नहीं।
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वास्तु विशेषज्ञ से कब सलाह लें?
अगर आपके घर के उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तर में तुलसी और मंदिर के लिए कोई रोशनी वाली जगह नहीं है, या जिस बालकनी में आप पूजा करना चाहते हैं उसमें यूटिलिटी एरिया या वॉशिंग मशीन है, तो वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लें। ये लेआउट के सवाल हैं, जिन्हें बिना तोड़-फोड़ वाले कुछ बदलावों से अक्सर आसान बनाया जा सकता है।
VastuKimaya की डॉ. किमया पारिख-आंबेकर अपने अंधेरी ईस्ट ऑफ़िस से पूरे मुंबई में साइट विज़िट करके, और फ़्लोर प्लान व तस्वीरों के ज़रिए दूर बैठे परामर्श से, घरों को सलाह देती हैं, और ऐसे उपाय सुझाती हैं जो फ़्लैट और किराए के घरों में भी हो सकें।
सवाल
आम सवाल
2026 में तुलसी विवाह कब है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है, और कुछ लोग इसे शुक्रवार, 20 नवंबर को मनाते हैं। अपने शहर की तारीख और मुहूर्त स्थानीय पंचांग या पंडित जी से पक्का कर लें।
फ़्लैट में घर पर तुलसी विवाह कैसे करें?
बालकनी में या रोशनी वाली उस खिड़की के पास करें जहाँ तुलसी पहले से लगी है; साथ में छोटी चौकी, गन्ने या गेंदे का मंडप, प्लेट पर दीया और रंगोली रखें। तैयारी सादी रखें, ताकि बालकनी में आना-जाना सुरक्षित रहे।
तुलसी विवाह के लिए तुलसी किस दिशा में रखनी चाहिए?
उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तर में, और आदर्श रूप से वहीं जहाँ पौधा पहले से लगा है। अगर धूप सिर्फ़ किसी और जगह आती है, तो विवाह वहीं करें; पौधे को हिलाने से ज़्यादा उसकी सेहत मायने रखती है।
क्या शालिग्राम के बिना तुलसी विवाह हो सकता है?
हाँ। कई परिवार शालिग्राम की जगह श्रीकृष्ण की छोटी मूर्ति या तस्वीर रखते हैं। अपने परिवार की रीति मानें या पंडित जी से पूछें।
तुलसी विवाह के बाद तुलसी की चुनरी का क्या करें?
एक दिन के भीतर उसे पौधे से उतार दें। कपड़ा रोशनी रोकता है और नमी रोके रखता है, इसलिए चुनरी सम्मान के साथ तह करके रख दें या अपने परिवार की रीति के अनुसार अर्पित कर दें, और पौधे को फिर से धूप मिलने दें।
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